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सरगुजा-सूरजपुर के अधिकारियों की संयुक्त बैठक में विकास कार्यों की समीक्षा, गुणवत्ता और समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर
रायपुर, 8 अक्टूबर 2026। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने अंबिकापुर में सरगुजा और सूरजपुर जिले के अधिकारियों की संयुक्त बैठक लेकर लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नगरीय प्रशासन एवं विकास तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने स्वीकृत विकास कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने, योजनाओं की नियमित निगरानी और जनहित के कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी अपनी जिम्मेदारी समझें और गंभीरता व सक्रियता से दायित्वों का निर्वहन करें।
अक्टूबर तक पूरे हों निर्माणाधीन पीएम आवास
उप मुख्यमंत्री ने नगरीय निकायों में संचालित योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग, स्वच्छता और शहरों की व्यवस्था सुधारने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्य तत्काल शुरू हों तथा प्रगतिरत कार्यों को गुणवत्ता के साथ शीघ्र पूरा किया जाए। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने सभी मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को अक्टूबर तक निर्माणाधीन आवासों का काम पूरा करने को कहा। साथ ही राजस्व संग्रहण की हर माह समीक्षा करने और मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना, स्वच्छ भारत मिशन (शहरी), 15वें वित्त आयोग, अधोसंरचना तथा रेन वॉटर हार्वेस्टिंग से जुड़े कार्यों की प्रगति पर ध्यान देने के निर्देश दिए।
त्योहारों से पहले सड़कों की मरम्मत में तेजी लाएं
लोक निर्माण विभाग की समीक्षा के दौरान श्री साव ने बरसात के बाद सड़कों की मरम्मत में तेजी लाने और त्योहारों से पहले व्यवस्था दुरुस्त करने को कहा। उन्होंने सड़क, पुल-पुलिया, भवन और अन्य निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी तथा गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में अनावश्यक देरी और लापरवाही नहीं होनी चाहिए, ताकि त्योहारों के दौरान आम लोगों को आवागमन में परेशानी न हो।
पेयजल व्यवस्था सुचारू रखने के निर्देश
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा में उप मुख्यमंत्री ने जल जीवन मिशन सहित पेयजल योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने जलापूर्ति सुचारू बनाए रखने, जल स्रोतों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, पेयजल संबंधी समस्याओं का त्वरित निराकरण करने और लंबित कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए। पेयजल अधोसंरचनाओं के रखरखाव और योजनाओं की नियमित निगरानी पर भी जोर दिया।
प्राथमिक शालाओं में बढ़ें खेल गतिविधियां
खेल एवं युवा कल्याण विभाग की समीक्षा करते हुए श्री साव ने ग्रामीण क्षेत्रों की प्राथमिक शालाओं में खेल गतिविधियां बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने खेल विभाग, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों और शिक्षा विभाग को संयुक्त कार्ययोजना बनाने तथा स्कूल संकुलवार एक-एक पीटीआई को खेल गतिविधियों के संचालन के लिए चिन्हांकित करने को कहा।
उन्होंने सरगुजा ओलंपिक के पंजीयन का व्यापक प्रचार-प्रसार करने, खेल संघों और खेल से जुड़े लोगों को अभियान में शामिल करने तथा अधिकाधिक प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खेल स्वास्थ्य, अनुशासन, आत्मविश्वास और सहयोग की भावना विकसित करते हैं, इसलिए स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
बैठक में सरगुजा कलेक्टर श्री अजीत वसंत, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री राजेश अग्रवाल, सूरजपुर कलेक्टर श्रीमती रेना जमील, सरगुजा जिला पंचायत सीईओ सुश्री रोमा श्रीवास्तव, सूरजपुर जिला पंचायत सीईओ श्री विजेंद्र सिंह पाटले तथा अंबिकापुर नगर निगम आयुक्त श्री विनय कुमार अग्रवाल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
भैरमगढ़ में आर्यन ओयाम की मौत से क्षेत्र में शोक; बीएमओ ने जापानी इंसेफेलाइटिस की आशंका से भी नहीं किया इनकार, जांच रिपोर्ट का इंतजार
बीजापुर/भैरमगढ़। बस्तर संभाग के बीजापुर जिले के तालनार निवासी 11 वर्षीय छात्र आर्यन ओयाम की उपचार के दौरान मौत के बाद मामले ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भैरमगढ़ के निर्मल विद्यालय में पढ़ने वाले आर्यन की तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भैरमगढ़ में पदस्थ फार्मासिस्ट धर्मेंद्र सिंह चंदेल के घर उपचार के लिए ले गए थे। वहां उपचार के दौरान हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल लाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर स्थिति में उसे रेफर किया गया, लेकिन बाद में उसकी मौत हो गई।
बच्चे की मौत के बाद उपचार के दौरान दी गई दवाओं, उनकी मात्रा और समय पर समुचित चिकित्सा सुविधा मिलने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, दवा की अधिक मात्रा दिए जाने या किसी चिकित्सकीय लापरवाही के कारण मौत होने की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मौत के वास्तविक कारण का पता चिकित्सकीय जांच और रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा।
गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था बच्चा
भैरमगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) डॉ. रमेश तिग्गा के अनुसार, 26 सितंबर की रात करीब 9:25 बजे बच्चे को अस्पताल लाया गया था। उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उसे रेफर किया गया।
बीएमओ ने बताया कि प्रथम दृष्टया संदिग्ध जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौत का वास्तविक कारण चिकित्सकीय जांच और रिपोर्ट मिलने के बाद ही निर्धारित हो पाएगा।
दवा की मात्रा और उपचार प्रक्रिया की जांच जरूरी
आर्यन की मौत के बाद क्षेत्र में चर्चा है कि उपचार के दौरान उसे दवा की अधिक मात्रा दी गई हो सकती है। हालांकि, इस आशंका की पुष्टि करने वाला कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में उपचार में इस्तेमाल की गई दवाओं, उनकी निर्धारित मात्रा, बच्चे की चिकित्सकीय स्थिति और अस्पताल में किए गए उपचार से संबंधित रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मृतक के बड़े पिता के अनुसार, आर्यन को धर्मेंद्र सिंह चंदेल के घर उपचार के लिए ले जाया गया था। परिजनों का मानना है कि यदि बच्चे को समय रहते बड़े अस्पताल में उपचार मिल जाता, तो शायद उसकी जान बच सकती थी। हालांकि, समय पर रेफरल और उपचार से बच्चे की जान बच सकती थी या नहीं, इसका निर्धारण चिकित्सकीय तथ्यों के आधार पर ही किया जा सकेगा।
फार्मासिस्ट के निजी आवास पर उपचार को लेकर उठे सवाल
धर्मेंद्र सिंह चंदेल भैरमगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ड्रग डिस्पेंसर (फार्मासिस्ट) के पद पर कार्यरत हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, वे ड्यूटी के बाद अपने निवास पर भी मरीजों का उपचार करते हैं। इस घटना के बाद यह सवाल उठ रहा है कि शासकीय स्वास्थ्य संस्थान में पदस्थ फार्मासिस्ट द्वारा निजी आवास पर किस प्रकार की चिकित्सा सेवाएं दी जा रही थीं और क्या यह निर्धारित नियमों के अनुरूप था।
इस संबंध में संबंधित विभाग की ओर से जांच की स्थिति या किसी आधिकारिक निष्कर्ष की जानकारी सामने आना बाकी है। यदि विभागीय जांच होती है, तो निजी आवास पर किए गए उपचार की प्रकृति, दी गई दवाओं और संबंधित नियमों के पालन की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
तालनार में शोक, निष्पक्ष जांच की मांग
आर्यन की मौत के बाद तालनार के स्कूलपारा में शोक का माहौल है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर बच्चे की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में उपचार के दौरान लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
फिलहाल इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि 11 वर्षीय आर्यन की मौत किन परिस्थितियों में हुई। जापानी इंसेफेलाइटिस की आशंका, उपचार के दौरान दी गई दवाओं और चिकित्सा प्रक्रिया से जुड़े सभी पहलुओं की जांच के बाद ही तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
टीबी उन्मूलन के लिए ‘जोश टीम’ का शुभारंभ, NCC-NSS और माय भारत वॉलंटियर्स गांव-गांव फैलाएंगे जागरूकता
कोण्डागांव। टीबी मुक्त भारत के संकल्प को जनभागीदारी से साकार करने की दिशा में कोण्डागांव जिले ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2025 में जिले की कुल 384 ग्राम पंचायतों में से 244 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया। इस उपलब्धि के लिए संबंधित पंचायतों के सरपंचों एवं जनप्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया। साथ ही, जिले में टीबी रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने और शेष पंचायतों को भी टीबी मुक्त बनाने के उद्देश्य से ‘टीबी मुक्त भारत टीम’ यानी ‘जोश टीम’ का शुभारंभ किया गया।
8 अक्टूबर 2026 को जिला कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित उन्मुखीकरण एवं जनजागरूकता कार्यक्रम में पंचायत स्तर तक टीबी उन्मूलन अभियान को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में नगरपालिका परिषद कोण्डागांव के अध्यक्ष नरपति राम पटेल, उपाध्यक्ष जसकेतु उसेण्डी, जनपद पंचायत कोण्डागांव के उपाध्यक्ष टोमेंद्र सिंह ठाकुर और मनोज जैन प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
244 पंचायतों की उपलब्धि, जनप्रतिनिधियों का सम्मान
कार्यक्रम में वर्ष 2025 में टीबी मुक्त घोषित ग्राम पंचायतों के सरपंचों एवं जनप्रतिनिधियों को श्रीफल, गांधीजी का मोमेंटो और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। जिले की 384 ग्राम पंचायतों में से 244 का टीबी मुक्त घोषित होना स्वास्थ्य जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आया है।
कार्यक्रम के दौरान वर्ष 2026 में शेष पंचायतों सहित अधिक से अधिक ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग, पंचायत प्रतिनिधियों और सामुदायिक संगठनों के बीच समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
‘जोश टीम’ गांव-गांव पहुंचाएगी जागरूकता का संदेश
टीबी रोग की समय पर पहचान, जांच, उपचार और बचाव के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए गठित ‘जोश टीम’ में एनसीसी, एनएसएस और माय भारत वॉलंटियर्स का सहयोग लिया जाएगा। ये टीमें जिले के सभी विकासखंडों में जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों को टीबी के लक्षणों की पहचान करने और समय पर जांच कराने के लिए प्रेरित करेंगी।
अभियान के तहत टीबी के संभावित लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने, उपचार नियमित रूप से पूरा करने, पौष्टिक भोजन लेने और बचाव संबंधी सावधानियां अपनाने की जानकारी दी जाएगी। ग्रामीण एवं सामुदायिक स्तर पर जागरूकता बढ़ाकर टीबी से जुड़े भ्रम और झिझक को दूर करने का भी प्रयास किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम का आयोजन मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अविनाश भोई के निर्देश और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.के. चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में किया गया। इस अवसर पर सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. प्रेमलाल मंडावी, जिला क्षय उन्मूलन अधिकारी डॉ. हरेन्द्र बघेल, जिला कार्यक्रम प्रबंधक भावना महलवार, जिला कार्यक्रम समन्वयक (टीबी) कांतेश देवांगन सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
जिले में टीबी मुक्त पंचायतों की संख्या बढ़ाने के लिए जनप्रतिनिधियों, स्वास्थ्य कर्मियों और स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ‘जोश टीम’ के माध्यम से अभियान को पंचायत स्तर तक पहुंचाने और टीबी की पहचान से लेकर उपचार तक लोगों को जागरूक करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
भिलाई। भिलाई के औद्योगिक क्षेत्र में गुरुवार को श्री श्याम केमिकल फैक्ट्री में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और परिसर में रखे केमिकल से भरे 50 से अधिक ड्रम तथा दो टैंकर इसकी चपेट में आ गए। आग के बीच ड्रमों में लगातार हो रहे धमाकों से आसपास के इलाके में दहशत फैल गई। कई किलोमीटर दूर तक आसमान में काले धुएं का गुबार दिखाई देने की जानकारी सामने आई है।
वेल्डिंग के दौरान निकली चिंगारी से आग भड़कने की आशंका
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, फैक्ट्री में वेल्डिंग का काम चल रहा था। इसी दौरान निकली चिंगारी से आग भड़कने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, आग लगने के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। आग तेजी से फैली और परिसर में रखे ज्वलनशील रसायनों के कारण स्थिति गंभीर हो गई।
केमिकल से भरे ड्रमों में आग लगने के बाद एक के बाद एक धमाकों की आवाजें सुनाई देने लगीं। इससे फैक्ट्री के आसपास अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आग की तीव्रता और रसायनों की मौजूदगी के कारण बचाव कार्य में भी चुनौती का सामना करना पड़ा।
14 दमकल वाहनों और CISF की टीम ने संभाला मोर्चा
आग पर काबू पाने के लिए मौके पर 14 दमकल वाहनों के साथ केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की टीम भी जुटी। रसायनों के कारण पानी से आग बुझाने में कठिनाई आने की सूचना के बीच फोम का इस्तेमाल कर आग को नियंत्रित करने के प्रयास किए गए।
धमाकों के खतरे को देखते हुए सुरक्षित ड्रमों को जेसीबी की मदद से बाहर निकालने की कार्रवाई भी की गई। बचाव दल ने आग पर नियंत्रण पाने और स्थिति को संभालने के लिए प्रयास जारी रखे।
मजदूरों के घायल होने की आशंका, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
घटना के दौरान फैक्ट्री के भीतर कुछ मजदूरों के घायल होने की आशंका जताई गई है। हालांकि, इस संबंध में फिलहाल आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। घायलों की संख्या और उनकी स्थिति को लेकर भी स्पष्ट जानकारी सामने आना बाकी है।
घटना के बाद प्रशासन और बचाव दल हालात पर नजर बनाए हुए हैं। आग लगने के कारणों, संभावित नुकसान और किसी के हताहत या घायल होने की वास्तविक स्थिति की पुष्टि संबंधित अधिकारियों की जानकारी के बाद ही हो सकेगी। औद्योगिक क्षेत्र में ज्वलनशील रसायनों के भंडारण और सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी यह घटना गंभीर सवाल खड़े करती है।
झाड़ उमरगांव और बेड़ा उमरगांव के पारंपरिक कारीगर दिन-रात जुटे, माड़िया समुदाय के युवा निभाएंगे रथ परिक्रमा की जिम्मेदारी
जगदलपुर। आस्था, परंपरा और जनजातीय संस्कृति की अनूठी पहचान बस्तर दशहरा को लेकर बस्तर अंचल में उत्साह चरम पर है। विश्व प्रसिद्ध इस ऐतिहासिक पर्व के मुख्य आकर्षण आठ पहियों वाले विशाल विजय रथ के निर्माण का कार्य तेजी से जारी है। रथ को निर्धारित समय पर तैयार करने के लिए झाड़ उमरगांव और बेड़ा उमरगांव के पारंपरिक कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। पीढ़ियों से चली आ रही शिल्पकला, अनुभव और गहरी आस्था के सहारे ये कारीगर भारी-भरकम लकड़ी के लट्ठों को तराशकर भव्य रथ का स्वरूप दे रहे हैं।
मशीनों के बिना परंपरागत हुनर से तैयार हो रहा विशाल रथ
बस्तर दशहरा की विशेषता केवल इसकी भव्यता ही नहीं, बल्कि इससे जुड़ी सदियों पुरानी परंपराएं भी हैं। विजय रथ का निर्माण पारंपरिक तरीके से किया जा रहा है। कारीगर आधुनिक मशीनों और तकनीकी माप-जोख के बजाय अपने अनुभव, पारंपरिक औजारों और पीढ़ियों से सीखे कौशल के आधार पर लकड़ी को तराश रहे हैं।
रथ निर्माण में जुटे ग्रामीण कारीगरों के लिए यह केवल शिल्पकला का काम नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने का दायित्व भी है। उनकी मेहनत और समर्पण से बस्तर दशहरा की विशिष्ट परंपरा आगे बढ़ रही है।
माड़िया समुदाय के युवाओं के जिम्मे होगी रथ परिक्रमा
बस्तर दशहरा की अनूठी परंपरा के अनुसार आठ पहियों वाले विशाल विजय रथ की परिक्रमा की जिम्मेदारी किलेपाल क्षेत्र के माड़िया समुदाय के युवाओं को सौंपी जाती है। यह परंपरा पर्व की सामुदायिक सहभागिता और जनजातीय संस्कृति से जुड़े गहरे संबंध को दर्शाती है।
विजय रथ का निर्माण पूरा होने के साथ ही पर्व से जुड़ी पारंपरिक गतिविधियों को अंतिम रूप दिया जाएगा। इस आयोजन में स्थानीय समुदायों की भूमिका बस्तर दशहरा को देश के अन्य पर्वों से अलग और विशिष्ट पहचान प्रदान करती है।
प्रशासन और आयोजन समिति भी तैयारियों में जुटे
ऐतिहासिक बस्तर दशहरा के सफल आयोजन के लिए प्रशासन और आयोजन समिति तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। रथ निर्माण से लेकर पारंपरिक अनुष्ठानों और आयोजन की व्यवस्थाओं तक विभिन्न स्तरों पर काम किया जा रहा है।
बस्तर दशहरा केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि क्षेत्र की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सामूहिक आस्था का जीवंत प्रतीक है। आठ पहियों वाले विशाल विजय रथ का निर्माण इसी सांस्कृतिक विरासत की भव्य झलक प्रस्तुत कर रहा है, जिसे देखने के लिए स्थानीय लोगों के साथ देश-दुनिया के श्रद्धालुओं और पर्यटकों में भी विशेष आकर्षण रहता है।
गेबियन संरचना से मिट्टी के कटाव पर लगा अंकुश, बारिश के पानी के ठहराव और भू-जल संवर्धन को मिली मदद; ग्रामीणों को गांव में ही मिला रोजगार
जगदलपुर। जल संरक्षण, मिट्टी के कटाव पर नियंत्रण और ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में बस्तर जिले की ग्राम पंचायत सिलकझोड़ी ने उल्लेखनीय पहल की है। जनपद पंचायत बास्तानार के अंतर्गत कुरमंडी नाला पार्ट-4 पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत गेबियन संरचना का निर्माण पूरा कर लिया गया है। इस कार्य से नाले में पानी के तेज बहाव को नियंत्रित करने, उपजाऊ मिट्टी को बहने से बचाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा देने की उम्मीद मजबूत हुई है।
1.428 लाख रुपये की लागत से तैयार हुई संरचना
कुरमंडी नाला पार्ट-4 में गेबियन संरचना के निर्माण कार्य की शुरुआत 4 फरवरी 2026 को हुई थी। कुल 1.428 लाख रुपये की लागत से यह कार्य 20 मई 2026 को पूरा किया गया। परियोजना में निर्माण सामग्री और स्थानीय श्रमिकों के पारिश्रमिक पर व्यय किया गया।
गेबियन संरचना पत्थरों को तार की जाली में भरकर तैयार की जाती है। इसका उपयोग पानी के तेज बहाव को नियंत्रित करने और मिट्टी के कटाव को कम करने के लिए किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी संरचनाएं जल एवं मृदा संरक्षण के प्रभावी उपायों में शामिल हैं।
तेज बहाव से उपजाऊ जमीन को हो रहा था नुकसान
कुरमंडी नाला क्षेत्र में बारिश के दौरान पानी का तेज प्रवाह आसपास की कृषि भूमि की मिट्टी बहा ले जाता था। इससे उपजाऊ जमीन प्रभावित होने के साथ वर्षा जल के बेहतर संचयन की चुनौती भी बनी हुई थी। दुर्गम ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण निर्माण स्थल तक सामग्री पहुंचाना और नाले के प्राकृतिक स्वरूप को ध्यान में रखते हुए मजबूत संरचना तैयार करना आसान नहीं था।
इस चुनौती से निपटने के लिए ग्राम पंचायत सिलकझोड़ी, तकनीकी अमले, ग्राम रोजगार सहायक और स्थानीय ग्रामीणों ने समन्वय के साथ काम किया। पत्थरों और तार की जाली से गेबियन संरचना तैयार कर पानी के बहाव को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया।
जल संरक्षण के साथ ग्रामीणों को रोजगार
गेबियन संरचना बनने से नाले के पानी के वेग को नियंत्रित करने और मिट्टी के कटाव को कम करने में मदद मिल रही है। पानी के बहाव में कमी आने से वर्षा जल के ठहराव और भू-जल संवर्धन की संभावनाएं भी बढ़ी हैं। इससे क्षेत्र की कृषि भूमि और प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षण देने में सहायता मिल सकती है।
इस निर्माण कार्य का एक महत्वपूर्ण पहलू स्थानीय ग्रामीणों को गांव में ही रोजगार मिलना भी है। मनरेगा के तहत हुए कार्य से ग्रामीण श्रमिकों को पारिश्रमिक प्राप्त हुआ, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा मिला।
ग्रामीणों के अनुसार, पहले बारिश के दौरान तेज बहाव के साथ मिट्टी बह जाती थी। गेबियन संरचना बनने से पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने और मिट्टी के संरक्षण में मदद मिल रही है।
कुरमंडी नाला पार्ट-4 पर तैयार यह संरचना ग्रामीण सहभागिता, मनरेगा के माध्यम से रोजगार सृजन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के समन्वय का उदाहरण है। ऐसी पहलें स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अपनाई जाएं, तो ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण, कृषि भूमि की सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
35 मांग और 17 शिकायतें प्राप्त, आवास से पेंशन और स्वास्थ्य परीक्षण तक की सुविधाओं के लिए नागरिकों को किया गया मार्गदर्शन
भिलाई। शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ आम नागरिकों तक पहुंचाने और उनकी समस्याओं के निराकरण की दिशा में नगर पालिक निगम भिलाई द्वारा सेवा संकल्प अभियान के तहत निगम मुख्य कार्यालय परिसर में शिविर आयोजित किया गया। शिविर में विभिन्न योजनाओं से संबंधित काउंटर लगाकर नागरिकों को जानकारी और आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया। इस दौरान नागरिकों की ओर से कुल 52 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 35 मांग संबंधी और 17 शिकायतों से जुड़े आवेदन शामिल हैं।
आवास, पेंशन और स्वनिधि योजना की मिली जानकारी
शिविर में नागरिकों की सुविधा के लिए आवास योजना, स्वास्थ्य परीक्षण, पेंशन, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, कृषि कल्याण सहित अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के काउंटर लगाए गए। इन काउंटरों के माध्यम से नागरिकों को संबंधित योजनाओं की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और मिलने वाले लाभों की जानकारी दी गई।
आवास योजना के तहत जरूरतमंद परिवारों को आवास संबंधी प्रावधानों से अवगत कराया गया। पेंशन योजनाओं के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी दी गई, वहीं प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के अंतर्गत पात्र पथ विक्रेताओं को उपलब्ध सहायता और सुविधाओं के बारे में बताया गया। स्वास्थ्य परीक्षण की सुविधा के जरिए नागरिकों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने का प्रयास भी किया गया।
अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देने की पहल
शिविर का उद्देश्य नागरिकों को विभिन्न योजनाओं की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना और जरूरतमंद हितग्राहियों को सरकारी योजनाओं से जोड़ना रहा। नागरिकों ने संबंधित काउंटरों पर पहुंचकर अपनी आवश्यकताओं के अनुसार जानकारी प्राप्त की तथा पात्रता और आवेदन प्रक्रिया को समझते हुए अपने काम आगे बढ़ाए।
नगर निगम की इस पहल से लोगों को अलग-अलग कार्यालयों में जाकर योजनाओं की जानकारी जुटाने की परेशानी कम करने का प्रयास किया गया। शिविर में प्राप्त 52 आवेदनों में शामिल मांग और शिकायत संबंधी प्रकरणों के निराकरण की दिशा में आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण रहेगी।
सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित यह शिविर जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी नागरिकों तक पहुंचाने और उनकी जरूरतों को प्रशासन के समक्ष रखने का माध्यम बना।
बीएलओ और पर्यवेक्षकों को 9 अक्टूबर को प्रशिक्षण, दुर्ग के साइंस कॉलेज में दोपहर 12 बजे से होगा कार्यक्रम
भिलाईनगर। मतदाता सूची को अद्यतन करने और पंजीयन से वंचित पात्र नागरिकों को मताधिकार की प्रक्रिया से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली से प्राप्त निर्देशों के तहत 1 अक्टूबर 2026 की स्थिति में मतदाता सूची को अद्यतन करने के साथ पहली बार मतदान करने के योग्य युवाओं का नाम सूची में शामिल करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए निर्वाचन कार्य में नियुक्त बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) और बीएलओ पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
9 अक्टूबर को प्रशिक्षण, उपस्थिति अनिवार्य
प्रशिक्षण कार्यक्रम 9 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजे से दुर्ग स्थित साइंस कॉलेज के नए भवन के डॉ. राधाकृष्ण सर्वपल्ली सभागार में आयोजित किया गया है। इसमें मतदाता सूची में नए मतदाताओं के पंजीयन, सूची में शामिल होने से छूटे पात्र नागरिकों के नाम जोड़ने तथा निर्वाचन संबंधी प्रक्रिया और दायित्वों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
नगर पालिक निगम भिलाई क्षेत्र में निर्वाचन कार्य के लिए जिन अधिकारी-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, उनके लिए निर्धारित तिथि, समय और स्थान पर उपस्थित होकर प्रशिक्षण प्राप्त करना अनिवार्य किया गया है। प्रशिक्षण के दौरान बीएलओ और पर्यवेक्षकों को विशेष अभियान के अंतर्गत किए जाने वाले कार्यों, निर्धारित प्रक्रियाओं और जिम्मेदारियों से अवगत कराया जाएगा।
युवा मतदाताओं के पंजीयन पर विशेष जोर
विशेष अभियान का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने से वंचित न रहे। इसके साथ ही पहली बार मतदान के योग्य युवाओं को मतदाता सूची में शामिल कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
निर्वाचन संबंधी जिम्मेदारियों के प्रभावी निर्वहन के लिए बीएलओ और पर्यवेक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें अभियान के संचालन के लिए आवश्यक जानकारी दी जाएगी, ताकि पात्र नागरिकों का पंजीयन सुनिश्चित करने और मतदाता सूची को अद्यतन बनाने का कार्य व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जा सके।
तीन छायाकारों की कलाकृतियों में दिखी प्रकृति की अनूठी सुंदरता, कक्षा 9 के छात्र पीयूष सिन्हा की बांसुरी की मधुर धुन भी बनी आकर्षण
भिलाई। प्रकृति की मनमोहक छटा, पक्षियों की खूबसूरती और वन्यजीवों के दुर्लभ पलों को करीब से देखने का अवसर अब इस्पात नगरी के कला प्रेमियों को मिल रहा है। सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के जनसंपर्क विभाग द्वारा संचालित नेहरू आर्ट गैलरी में 8 अक्टूबर 2026 को प्रकृति एवं वन्यजीवन पर आधारित समूह छायाचित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया। इंदिरा प्लेस, सिविक सेंटर स्थित आर्ट गैलरी में मुख्य महाप्रबंधक (सीबीडी) सी. श्रीनिवास सेशु ने दीप प्रज्ज्वलित कर प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर महाप्रबंधक प्रभारी (संपर्क, प्रशासन एवं जनसंपर्क) अमूल्य प्रियदर्शी, जनसंपर्क विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, आर्ट्स क्लब के सदस्य, स्थानीय कलाकार, छायाचित्र प्रेमी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
दुर्लभ पलों में दिखी प्रकृति की जीवंत तस्वीर
प्रदर्शनी में छायाकार ईश्वर कुमार पटेल, राहुल वेलायुधन पी.वी. और शरित शेखर बर्मन द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों में खींचे गए पक्षियों, वन्यजीवों और प्राकृतिक परिवेश के आकर्षक छायाचित्र प्रदर्शित किए गए हैं। इन तस्वीरों में प्रकृति के विविध रंगों, वन्यजीवों के व्यवहार और उनके प्राकृतिक आवासों की खूबसूरती को कलात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया गया है।
तीनों छायाकारों की रुचि पक्षी एवं वन्यजीव फोटोग्राफी के साथ पर्यावरण संरक्षण, यात्रा और ट्रेकिंग में भी है। उनके कैमरों में कैद दृश्य दर्शकों को प्रकृति के करीब ले जाने के साथ जैव विविधता के महत्व को समझने का अवसर भी प्रदान करते हैं।
प्रदर्शनी का अवलोकन करने के बाद मुख्य अतिथि सी. श्रीनिवास सेशु ने छायाचित्रों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रकृति और वन्यजीवन के मनोहारी क्षणों को कैमरे में सहेजना केवल रचनात्मक कला नहीं, बल्कि लोगों में जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने का प्रभावी माध्यम भी है। उन्होंने तीनों छायाकारों को उनकी रचनात्मक पहल के लिए शुभकामनाएं दीं।
वन्यजीवन की तस्वीरों के साथ बांसुरी की मधुर धुन
नेहरू आर्ट गैलरी में कला और संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए जनसंपर्क विभाग की ओर से एक नई पहल भी की गई है। इसके तहत प्रदर्शनियों के दौरान युवा वाद्य संगीतकारों को अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने का अवसर दिया जा रहा है।
इसी क्रम में इस प्रदर्शनी के दौरान कक्षा 9 के छात्र मास्टर पीयूष सिन्हा द्वारा मधुर बांसुरी वादन प्रस्तुत किया जा रहा है। प्रकृति के मनमोहक छायाचित्रों के बीच बांसुरी की धुन दर्शकों के अनुभव को और खास बना रही है।
10 अक्टूबर तक देख सकेंगे प्रदर्शनी
यह प्रदर्शनी 8 से 10 अक्टूबर 2026 तक आम नागरिकों के लिए खुली रहेगी। दर्शक प्रतिदिन शाम 5:30 बजे से रात 8:30 बजे तक नेहरू आर्ट गैलरी पहुंचकर छायाचित्रों का अवलोकन कर सकते हैं।
प्रदर्शनी में प्रस्तुत तस्वीरें प्रकृति की सुंदरता को सामने लाने के साथ यह संदेश भी देती हैं कि वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवासों का संरक्षण भविष्य के लिए कितना आवश्यक है। कला, प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जागरूकता को जोड़ने वाली यह पहल इस्पात नगरी के कला प्रेमियों के लिए एक विशेष अवसर है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
