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भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र में राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार और कार्यालयीन कामकाज में इसके अधिकाधिक उपयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 7 अक्टूबर 2026 को ‘वार्षिक पुरस्कार वितरण एवं राजभाषा पखवाड़ा समापन समारोह’ का आयोजन किया गया। मानव संसाधन विकास केंद्र के प्रथम तल स्थित सभागार में आयोजित समारोह में हिंदी में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों, कार्मिकों और कार्यालयों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कार्यपालक निदेशक (सामग्री प्रबंधन) अजय कुमार चक्रबर्ती रहे। समारोह में संयंत्र के कार्यपालक निदेशकगण, विभाग प्रमुख, वरिष्ठ अधिकारी, हिंदी समन्वय अधिकारी, प्रतियोगिताओं के निर्णायक एवं विजेता तथा बड़ी संख्या में हिंदीप्रेमी कार्मिक उपस्थित रहे।
कार्यालयीन कामकाज में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग का आह्वान
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन से हुआ। इसके बाद महाप्रबंधक प्रभारी (संपर्क, प्रशासन एवं जनसंपर्क) अमूल्य प्रियदर्शी ने मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों का पुस्तक भेंट कर स्वागत किया। उप महाप्रबंधक (संपर्क व प्रशासन एवं प्रभारी राजभाषा) राघवेन्द्र कुमार गर्ग ने स्वागत उद्बोधन में संयंत्र में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए वरिष्ठ अधिकारियों से मिल रहे मार्गदर्शन एवं सहयोग के प्रति आभार जताया। उन्होंने प्रतियोगिताओं के विजेताओं को बधाई देते हुए हिंदी के प्रचार और प्रोत्साहन में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि अजय कुमार चक्रबर्ती ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी भाषी क्षेत्र में रहते हुए हमें सूचनाओं और संदेशों के साथ-साथ कार्यालयीन संवाद एवं पत्राचार में भी हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने भिलाई बिरादरी से हिंदी को कार्यालयीन कामकाज की भाषा के रूप में अपनाने की अपील करते हुए कहा कि राजभाषा नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन और अनुपालन सुनिश्चित करना हमारा राष्ट्रीय दायित्व है। उन्होंने इस दिशा में निरंतर अग्रणी बने रहने पर जोर दिया।
सात वरिष्ठ अधिकारियों को ‘राजभाषा उन्नायक सम्मान’
समारोह के दौरान विभिन्न विभागों एवं अंचलों में हिंदी में कामकाज को प्रोत्साहित करने के लिए ‘राजभाषा उन्नायक सम्मान’ प्रदान किए गए। सम्मानित अधिकारियों में कार्यपालक निदेशक (वित्त एवं लेखा) प्रवीन निगम, कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) पवन कुमार, मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (एम एंड यू) बिजय कुमार बेहेरा, मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (सेवाएँ) प्रवीन राय भल्ला, मुख्य महाप्रबंधक (प्रबंधन सेवाएँ) रविशंकर, मुख्य महाप्रबंधक (एसएमएस-3) त्रिभुवन बैठा तथा मुख्य महाप्रबंधक (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएँ) डॉ. उदय कुमार धाबर्डे शामिल रहे।
हिंदी में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए संयंत्र के 20 कार्मिकों को ‘विशिष्ट सेवा सम्मान’ से सम्मानित किया गया। वहीं, हिंदी के प्रयोग और राजभाषा संबंधी गतिविधियों में उल्लेखनीय योगदान के लिए 10 कार्यालयों को ‘राजभाषा समूह/कार्यालय पुरस्कार’ प्रदान किए गए।
तीन विभागों ने जीती ‘राजभाषा वैजयंती’
‘निदेशक प्रभारी, राजभाषा वैजयंती’ के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विभागों को विजेता घोषित किया गया। खदान क्षेत्र में ‘राजहरा लौह अयस्क समूह’, संकार्य क्षेत्र में ‘यूनिवर्सल रेल मिल’ तथा गैर-संकार्य क्षेत्र में ‘नगर सेवाएँ’ विभाग ने यह उपलब्धि हासिल की।
वहीं, ‘सर्वश्रेष्ठ हिंदी समन्वय अधिकारी’ का सम्मान एम एंड यू विभाग के सहायक महाप्रबंधक एवं विभागीय राजभाषा समन्वय अधिकारी उदय भानु तिवारी को प्रदान किया गया।
प्रतियोगिताओं के विजेताओं का भी सम्मान
राजभाषा पखवाड़ा के दौरान आयोजित ऑनलाइन क्विज, तात्कालिक निबंध लेखन, तात्कालिक काव्य लेखन, ‘चित्र देखें–कहानी लिखें’ और तात्कालिक भाषण प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी पुरस्कृत किया गया। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से कार्मिकों की भाषाई प्रतिभा, रचनात्मकता और हिंदी के प्रति रुचि को प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन उप प्रबंधक (संपर्क व प्रशासन–राजभाषा) जितेन्द्र दास मानिकपुरी ने किया। अंत में सहायक महाप्रबंधक एवं विभागीय राजभाषा समन्वय अधिकारी उदय भानु तिवारी ने आभार प्रदर्शन किया। राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ।
भिलाई इस्पात संयंत्र का यह आयोजन कार्यस्थल पर हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने, उत्कृष्ट योगदान को सम्मानित करने और राजभाषा के प्रति कार्मिकों की सहभागिता मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा।
भिलाई। भिलाई नगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक देवेंद्र यादव के निर्वाचन को चुनौती देने वाली भाजपा के पराजित प्रत्याशी प्रेम प्रकाश पांडेय की चुनाव याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले में अगली सुनवाई के लिए 16 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की गई है। इस चुनाव याचिका के जरिए देवेंद्र यादव के निर्वाचन की वैधानिकता को चुनौती दी गई है।
आज हुई सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की सहमति के बाद हाईकोर्ट ने सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के तहत दायर आवेदन को विचार के लिए रखने का निर्देश दिया। जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ में हुई सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के अधिवक्ता उपस्थित रहे। अब मामले में अगली सुनवाई पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।
भाजपा प्रत्याशी रहे प्रेम प्रकाश पांडेय ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत चुनाव याचिका दायर कर देवेंद्र यादव के निर्वाचन को चुनौती दी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि देवेंद्र यादव का नामांकन पत्र नियमों के विपरीत स्वीकार किया गया। याचिकाकर्ता ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान आवश्यक वैधानिक जानकारी नहीं दिए जाने तथा कथित बयान और आचरण को लेकर भी सवाल उठाए हैं। याचिका में इन आरोपों को चुनावी भ्रष्ट आचरण की श्रेणी से जोड़ते हुए कानूनी चुनौती दी गई है। इन आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाना है।
इस मामले में हाईकोर्ट ने 21 अगस्त 2024 को सुनवाई के लिए पांच प्रमुख मुद्दे निर्धारित किए थे। इनमें नामांकन पत्र की स्वीकृति की वैधता, प्रत्याशी की ओर से आवश्यक जानकारी दिए जाने का प्रश्न, चुनाव में कथित भ्रष्ट आचरण, चुनाव याचिका में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 83 की अनिवार्य शर्तों का पालन तथा याचिकाकर्ता को मांगी गई राहत दिए जाने का अधिकार शामिल है।
इन मुद्दों के आधार पर चुनाव याचिका में उठाए गए सवालों की न्यायिक पड़ताल होनी है। ऐसे में 16 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई मामले की आगे की प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगी।
धान खरीदी 2026-27 के लिए साय सरकार का किसान हितैषी फैसला, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक अध्यक्ष प्रीतपाल बेलचंदन ने जताया मुख्यमंत्री का आभार
दुर्ग। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान खरीदी को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार ने संयुक्त खातेदार किसानों को बड़ी राहत दी है। अब संयुक्त खाते से धान बेचने के लिए प्रत्येक सह-खातेदार को अलग-अलग एग्रीस्टेक पंजीयन कराने की अनिवार्यता नहीं होगी। राज्य सरकार के इस फैसले को किसान हित में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित दुर्ग के अध्यक्ष प्रीतपाल बेलचंदन ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।
बेलचंदन ने कहा कि संयुक्त खाते में जमीन होने के कारण अलग-अलग पंजीयन कराने की प्रक्रिया कई किसानों के लिए परेशानी का कारण बन सकती थी। सरकार के इस निर्णय से किसानों को अनावश्यक औपचारिकताओं से राहत मिलेगी और धान विक्रय की प्रक्रिया अधिक सरल होगी।
केवल लम्बरदार का एग्रीस्टेक पंजीयन होगा आवश्यक
छत्तीसगढ़ शासन ने 5 अक्टूबर 2026 को अधिसूचना जारी कर खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में संयुक्त खाते से धान विक्रय के लिए केवल लम्बरदार का एग्रीस्टेक पंजीयन आवश्यक रखने का निर्णय लिया है। इसके तहत संयुक्त खाते में शामिल अन्य सह-खातेदारों को पृथक एग्रीस्टेक पंजीयन कराने की बाध्यता से छूट मिलेगी।
सरकार के इस कदम से उन किसानों को विशेष राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी कृषि भूमि संयुक्त खाते में दर्ज है। अलग-अलग पंजीयन की अनिवार्यता समाप्त होने से पंजीयन संबंधी प्रक्रियाओं में लगने वाला समय और किसानों की भागदौड़ कम होगी।
किसानों की सुविधा को प्राथमिकता
प्रीतपाल बेलचंदन ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे किसानों की व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखकर लिया गया कदम बताया। उन्होंने कहा कि धान खरीदी व्यवस्था में किसानों को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए प्रक्रियाओं का सरलीकरण जरूरी है। संयुक्त खातेदार किसानों को दी गई यह राहत इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
राज्य सरकार के इस फैसले से खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में संयुक्त खातों से धान बेचने वाले किसानों को पंजीयन संबंधी अनावश्यक परेशानी से राहत मिलेगी।
निर्माण श्रमिक की बेटी को शिक्षा के लिए मिली 20 हजार रुपये की सहायता, पढ़ाई का खर्च उठाने में परिवार को मिली राहत
रायपुर, 07 अक्टूबर 2026 / शौर्यपथ। आर्थिक परिस्थितियां भले ही चुनौतीपूर्ण हों, लेकिन आगे बढ़ने का जज्बा और समय पर मिलने वाला सहयोग किसी भी सपने को नई दिशा दे सकता है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के नगर पालिका परिषद गौरेला के वार्ड क्रमांक 15 की निवासी कुमारी अंकिता रोहणी की कहानी इसी विश्वास को मजबूत करती है। निर्माण श्रमिक परिवार से ताल्लुक रखने वाली अंकिता अपनी पढ़ाई पूरी कर आत्मनिर्भर बनने का सपना देख रही हैं। मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना के तहत मिली 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता ने उनके इस सपने को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहारा दिया है।
अंकिता के पिता श्री रवि रोहणी निर्माण श्रमिक हैं और श्रम विभाग में पंजीकृत हैं। परिवार की आय सीमित होने के कारण रोजमर्रा की जरूरतों के साथ बेटी की शिक्षा का खर्च उठाना आसान नहीं था। इसके बावजूद परिवार ने आर्थिक कठिनाइयों को अंकिता की पढ़ाई के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया और अपनी क्षमता के अनुसार उनकी शिक्षा जारी रखी।
इसी दौरान परिवार को श्रमिकों की बेटियों के सशक्तिकरण के लिए संचालित नोनी सशक्तिकरण योजना की जानकारी मिली। पात्रता और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंकिता को योजना का लाभ मिला और उन्हें 20 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई। आर्थिक सहयोग मिलने से परिवार को पढ़ाई से जुड़े खर्चों को पूरा करने में राहत मिली।
शिक्षा की जरूरतों में उपयोग हो रही सहायता राशि
अंकिता प्राप्त सहायता राशि का उपयोग अपनी शिक्षा से संबंधित आवश्यकताओं को पूरा करने में कर रही हैं। पढ़ाई के खर्च के लिए आर्थिक सहयोग मिलने से परिवार पर पड़ने वाला वित्तीय दबाव कम हुआ है। वहीं, इस सहायता ने अंकिता के आत्मविश्वास को भी बढ़ाया है और वह अधिक एकाग्रता के साथ अपने अध्ययन को आगे बढ़ा रही हैं।
अंकिता का कहना है कि शासन से मिली यह सहायता उनके लिए केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि अपने भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर है। उनका लक्ष्य शिक्षा पूरी कर अपने पैरों पर खड़ा होना और आत्मनिर्भर बनकर परिवार का सहारा बनना है।
श्रमिक परिवारों की बेटियों के लिए आर्थिक संबल
नोनी सशक्तिकरण योजना के माध्यम से श्रमिक परिवारों की बेटियों को शिक्षा और भविष्य की आवश्यकताओं के लिए आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए इस प्रकार की सहायता बेटियों की पढ़ाई जारी रखने में सहायक बन रही है। इससे परिवारों पर शिक्षा का वित्तीय बोझ कम करने के साथ ही बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी सहयोग मिल रहा है।
अंकिता की कहानी यह दर्शाती है कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जब पात्र हितग्राही तक समय पर पहुंचता है, तो आर्थिक कठिनाइयों के बीच भी शिक्षा और आत्मनिर्भरता के सपनों को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।
योजना से मिली सहायता के लिए अंकिता ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शासन की इस मदद से उनकी पढ़ाई के सपने को मजबूती मिली है। अब वह पूरी लगन और मेहनत के साथ अध्ययन कर अपने लक्ष्य को हासिल करना चाहती हैं तथा भविष्य में आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार का सहारा बनने का संकल्प रखती हैं।
लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीयन से लेकर पैतृक संपत्ति में बराबरी और भरण-पोषण के लिए एक समान कानून पर महिलाओं ने दिए सुझाव
रायपुर, 07 अक्टूबर 2026 / शौर्यपथ। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर छत्तीसगढ़ महिला मंच और महाराष्ट्र मंडल महिला समिति की पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने विवाह, विवाह-विच्छेद, भरण-पोषण, उत्तराधिकार तथा लिव-इन रिलेशनशिप जैसे संवेदनशील और व्यावहारिक विषयों पर खुलकर अपनी राय रखी। समान नागरिक संहिता समिति के समक्ष आयोजित संवाद में महिलाओं ने कानूनी समानता के साथ-साथ समाज के कमजोर वर्गों, बच्चों और आदिवासी समुदायों के अधिकारों को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
बैठक में यूसीसी समिति के सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एम.के. राऊत और वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार ने महिलाओं के सुझावों को गंभीरता से सुना। समिति की ओर से आश्वस्त किया गया कि बैठक में सामने आए व्यावहारिक और कानूनी सुझावों पर विचार किया जाएगा तथा उन्हें आयोग के समक्ष प्रमुखता से रखा जाएगा।
पैतृक संपत्ति और भरण-पोषण में समानता पर जोर
शताब्दी पाण्डेय ने धर्म आधारित व्यक्तिगत कानूनों में आवश्यक बदलाव की वकालत करते हुए पैतृक एवं व्यक्तिगत संपत्ति में महिला और पुरुष को समान अधिकार देने की मांग की। उन्होंने भरण-पोषण के नियमों में एकरूपता लाने तथा आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया को सरल बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जनजातीय बहुल प्रदेश है, इसलिए यूसीसी तैयार करते समय आदिवासी समाज की परंपराओं, रीति-रिवाजों, नीतियों और सांस्कृतिक विशिष्टताओं को ध्यान में रखते हुए व्यापक विमर्श आवश्यक है। पंचायत स्तर पर कानूनी सलाह उपलब्ध कराने के लिए विशेष डेस्क स्थापित करने का सुझाव भी दिया गया।
श्वेता पड्डा ने महिलाओं के संभावित शोषण को रोकने के लिए लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीयन को अनिवार्य किए जाने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि लिव-इन संबंध से जन्म लेने वाले बच्चों के पालन-पोषण और उत्तराधिकार के अधिकार स्पष्ट एवं सुरक्षित होने चाहिए। साथ ही बच्चों की जैविक पहचान सुनिश्चित करने के लिए भी प्रभावी कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता बताई गई।
कानूनी स्पष्टता और कमजोर महिलाओं तक पहुंच की मांग
अधिवक्ता सुचित्रा वर्धन ने कहा कि केवल आपसी सहमति अथवा एग्रीमेंट के आधार पर महिला-पुरुष का साथ रहना भारतीय कानून में स्वतः वैवाहिक संबंध का दर्जा नहीं देता। ऐसे मामलों में अधिकारों और दायित्वों को लेकर स्पष्ट कानूनी प्रावधान आवश्यक हैं। अधिवक्ता हेमलता सिंह ने यूसीसी का मूल उद्देश्य कानूनी भेदभाव समाप्त कर व्यवस्था को सरल और समान बनाना बताया।
गीता श्याम दलाल ने ‘एक राष्ट्र, एक कानून’ की अवधारणा का समर्थन करते हुए कहा कि अपराधी को धर्म के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए, वहीं प्रत्येक व्यक्ति को अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक मान्यताओं का पालन करने की स्वतंत्रता भी मिलनी चाहिए। आस्था अभय काले ने कहा कि यूसीसी का लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़ी कमजोर महिलाओं तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए महिलाओं में कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना जरूरी है।
बैठक में आकांक्षा तिवारी, डॉ. भारती यादव, डॉ. रत्ना पाण्डेय, श्रीमती पुरोहित, प्रसन्ना राजेश अवस्थी, अर्चना वोरा, शेफाली पुरोहित, शीला शर्मा, नमिता शेष और मालती मिश्रा सहित अन्य सदस्यों ने बच्चों के हितों की सुरक्षा, आदिवासी समाज की सहभागिता तथा विवाह से जुड़ी पारंपरिक व्यवस्थाओं और रीति-रिवाजों को लेकर अपने विचार समिति के समक्ष रखे।
समिति ने महिलाओं की इस संवादात्मक पहल की सराहना करते हुए कहा कि यूसीसी जैसी व्यापक कानूनी व्यवस्था तैयार करने में समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषकर महिलाओं की व्यावहारिक राय महत्वपूर्ण है। समिति ने बैठक में प्राप्त सुझावों को गंभीरता से लेते हुए उन्हें आगे की प्रक्रिया में शामिल करने का भरोसा दिलाया।
ग्रामीण पर्यटन में उत्कृष्ट योगदान पर मिलेगा एक लाख रुपये का पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र; एथनिक, ईको, धार्मिक, हेरिटेज, एडवेंचर तथा मेडिकल एंड वेलनेस टूरिज्म में कार्यों का होगा मूल्यांकन
रायपुर / शौर्यपथ। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ावा देने और सतत ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार-2026’ के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। पुरस्कार के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 15 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। चयनित व्यक्ति अथवा संस्था को एक लाख रुपये की नकद पुरस्कार राशि एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा।
यह पुरस्कार ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में दीर्घकालीन, समर्पित और उल्लेखनीय योगदान को राज्य स्तर पर पहचान देने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन को स्थानीय रोजगार एवं आजीविका से जोड़ने, होमस्टे को बढ़ावा देने, स्थानीय संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण तथा समुदाय आधारित पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जाएगा।
राज्योत्सव एवं स्थापना दिवस समारोह में होगा सम्मान
‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ प्रतिवर्ष राज्योत्सव एवं राज्य स्थापना दिवस अलंकरण समारोह में प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार का उद्देश्य ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में लंबे समय से किए जा रहे उल्लेखनीय प्रयासों और योगदान को सम्मानित करना है। यह पुरस्कार किसी व्यक्ति अथवा संस्था को उसके जीवनकाल में केवल एक बार प्रदान किया जाएगा।
छह प्रमुख थीम पर होगा मूल्यांकन
पुरस्कार के लिए प्राप्त प्रविष्टियों में ग्रामीण पर्यटन से संबंधित कार्यों का मूल्यांकन छह प्रमुख श्रेणियों में किया जाएगा। इनमें एथनिक टूरिज्म, ईको टूरिज्म, धार्मिक पर्यटन, हेरिटेज टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म तथा मेडिकल एंड वेलनेस टूरिज्म शामिल हैं।
मूल्यांकन में ग्रामीण पर्यटन गतिविधियों के विकास, होमस्टे को बढ़ावा देने, स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आजीविका के अवसर तैयार करने, पर्यटकों को उपलब्ध कराए जा रहे विशिष्ट अनुभव, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण तथा स्थानीय समुदाय की भागीदारी को विशेष महत्व दिया जाएगा। संबंधित क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या में हुए बदलाव के साथ आवेदक द्वारा अतीत और वर्तमान में किए गए कार्यों तथा उनके प्रभाव का भी आकलन किया जाएगा।
व्यक्ति और संस्थाएं दोनों कर सकेंगे आवेदन
छत्तीसगढ़ में ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में कार्यरत पात्र व्यक्ति अथवा संस्था इस पुरस्कार के लिए आवेदन कर सकते हैं। चयन प्रक्रिया में दीर्घकालीन सेवा, उल्लेखनीय उपलब्धियों और ग्रामीण पर्यटन के विकास के लिए किए गए समर्पित प्रयासों को प्राथमिकता दी जाएगी।
आवेदकों को निर्धारित प्रारूप में अपना परिचय, पता एवं फोटोग्राफ के साथ छत्तीसगढ़ के स्थानीय निवास का प्रमाण-पत्र तथा आधार कार्ड की सत्यापित छायाप्रति प्रस्तुत करनी होगी। इसके अलावा ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में किए गए कार्यों का विस्तृत विवरण, प्राप्त अन्य सम्मानों की जानकारी तथा उपलब्ध होने पर प्रकाशित सामग्री एवं समाचार पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित समाचारों की सत्यापित प्रतियां भी संलग्न की जा सकती हैं। आवेदक को पुरस्कार स्वीकार करने संबंधी लिखित सहमति भी देनी होगी।
छह सदस्यीय जूरी करेगी प्रविष्टियों का परीक्षण
प्राप्त प्रविष्टियों का परीक्षण निर्धारित छह सदस्यीय जूरी द्वारा किया जाएगा। जूरी की कार्यवाही गोपनीय रहेगी और चयन संबंधी निर्णय के विरुद्ध अपील मान्य नहीं होगी। शासकीय सेवकों के आवेदन के मामले में सामान्य प्रशासन विभाग की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी।
15 अक्टूबर तक पहुंचाना होगा आवेदन
पुरस्कार के लिए निर्धारित प्रारूप में पूर्ण आवेदन पंजीकृत डाक के माध्यम से प्रबंध संचालक, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड, द्वितीय तल, उद्योग भवन, रिंग रोड नंबर-1, रायपुर (छत्तीसगढ़)-492001 के पते पर भेजना होगा। आवेदन 15 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित पते पर पहुंचना अनिवार्य है। अंतिम तिथि के बाद प्राप्त प्रविष्टियों को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
पुरस्कार एवं आवेदन प्रक्रिया से संबंधित अधिक जानकारी के लिए मोबाइल नंबर 73545-80006 अथवा ई-मेल This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it. पर संपर्क किया जा सकता है।
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहे व्यक्तियों एवं संस्थाओं से निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपनी प्रविष्टियां प्रस्तुत करने का आह्वान किया है। ‘चेन्दरू’ पुरस्कार के माध्यम से ऐसे प्रयासों को राज्य स्तर पर पहचान और प्रोत्साहन मिलेगा, जो ग्रामीण संस्कृति, प्रकृति और परंपराओं को संरक्षित करते हुए पर्यटन को रोजगार, आजीविका और सतत विकास से जोड़ने में योगदान दे रहे हैं।
फोरलेन चौड़ीकरण, सड़क उन्नयन और नई सड़क निर्माण के काम होंगे; उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कार्यादेश जारी कर तत्काल काम शुरू कराने के दिए निर्देश
रायपुर / शौर्यपथ। बरसात के बाद प्रदेश में सड़क निर्माण और उन्नयन के कार्यों को गति देने की तैयारी शुरू हो गई है। लोक निर्माण विभाग ने रायगढ़ जिले में सड़क विकास से जुड़े चार महत्वपूर्ण कार्यों के लिए कुल 145 करोड़ 27 लाख 56 हजार रुपए की निविदाओं को मंजूरी प्रदान की है। इनमें सड़कों के मजबूतीकरण एवं चौड़ीकरण, फोरलेन में उन्नयन, विद्युतीकरण तथा नई सड़क निर्माण के कार्य शामिल हैं।
उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद विभाग ने निविदाओं को स्वीकृति देते हुए रायगढ़ संभाग के कार्यपालन अभियंता को चयनित ठेकेदारों एवं निर्माण एजेंसियों को कार्यादेश जारी कर तत्काल निर्माण कार्य प्रारंभ कराने के निर्देश दिए हैं। इससे जिले में सड़क अधोसंरचना को बेहतर बनाने और आवागमन सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में काम तेज होने की उम्मीद है।
चार प्रमुख सड़क परियोजनाओं को मिली मंजूरी
लोक निर्माण विभाग के अनुसार रायगढ़-लोइंग-महापल्ली मुख्य जिला मार्ग के 5 किलोमीटर हिस्से के फोरलेन चौड़ीकरण एवं विद्युतीकरण के लिए 59 करोड़ 49 लाख 4 हजार रुपए की निविदा स्वीकृत की गई है।
इसी प्रकार रायगढ़-कोतरा-नंदेली राज्य मार्ग के 5 किलोमीटर हिस्से को फोरलेन में चौड़ा करने और विद्युतीकरण के लिए 47 करोड़ 77 लाख 76 हजार रुपए की निविदा मंजूर की गई है।
विभाग ने उर्दना-कृष्णापुर-खैरपुर मार्ग के 3.40 किलोमीटर हिस्से के निर्माण के लिए 13 करोड़ 74 लाख 29 हजार रुपए की निविदा को भी स्वीकृति दी है। वहीं कोड़ातराई-पुसौर-सूरजगढ़ सड़क के 12.30 किलोमीटर हिस्से के फोरलेन में उन्नयन के लिए 24 करोड़ 26 लाख 47 हजार रुपए की निविदा स्वीकृत की गई है। इस परियोजना के तहत सड़क के 8.30 किलोमीटर और 4 किलोमीटर के दो हिस्सों को फोरलेन में उन्नत किया जाएगा।
गुणवत्ता और समय-सीमा पर विशेष जोर
उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने रायगढ़ संभाग के कार्यपालन अभियंता को निर्देश दिए हैं कि सभी अनुबंधित कार्यों का संपादन और पर्यवेक्षण विभागीय मापदंडों के अनुरूप सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निर्धारित समय-सीमा पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं।
श्री साव ने स्पष्ट किया कि स्वीकृत कार्यों को किसी अन्य एजेंसी या व्यक्ति को सबलेट नहीं किया जाए और कार्य संपादन के लिए पॉवर ऑफ अटॉर्नी को मान्य न किया जाए। उन्होंने सभी कार्यों को अनुबंध में निर्धारित अवधि के भीतर पूरा करने तथा कार्यों का निष्पादन प्रशासकीय स्वीकृति और उपलब्ध बजट आवंटन की सीमा में ही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
विभाग ने इन निविदाओं को स्वीकृति देते समय यह शर्त भी रखी है कि अनुबंध निष्पादित होने से पहले संबंधित ठेकेदारों से संपूर्ण कार्यावधि के लिए प्रभावशील एपीएस (Additional Performance Security) की बैंक गारंटी प्राप्त की जाएगी।
सड़क निर्माण एवं उन्नयन के इन कार्यों के पूर्ण होने से रायगढ़ जिले में प्रमुख मार्गों की क्षमता बढ़ने के साथ आवागमन को बेहतर बनाने, यातायात सुविधा मजबूत करने और क्षेत्रीय विकास को गति मिलने की संभावना है।
जशपुर / शौर्यपथ। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के जनसेवा से राष्ट्रसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जशपुर के रणजीता स्टेडियम में ‘विकसित भारत संकल्प सभा’ का आयोजन किया गया। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम में वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को साकार करने के लिए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और सामूहिक प्रयास का संकल्प लिया गया।
संकल्प सभा के पश्चात पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में ‘सेवा ज्योति यात्रा’ निकाली गई। रणजीता स्टेडियम से प्रारंभ हुई यात्रा जयस्तंभ चौक होते हुए संगम चौक पहुंची, जहां इसका समापन हुआ। यात्रा में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, युवाओं और नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इस दौरान राष्ट्रसेवा, कर्तव्यबोध और विकसित भारत के निर्माण में जनभागीदारी का संदेश प्रमुखता से सामने आया।
जनभागीदारी से ही साकार होगा विकसित भारत का लक्ष्य
मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के जनसेवा एवं राष्ट्रसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होना देश के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। इन वर्षों में राष्ट्रहित, विकास और जनकल्याण को केंद्र में रखते हुए निरंतर कार्य किया गया है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य केवल सरकार के प्रयासों से पूरा नहीं हो सकता। इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग और प्रत्येक नागरिक की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है। युवा शक्ति, सामूहिक प्रयास और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध विकसित भारत की मजबूत नींव हैं।
मंत्री ने नागरिकों से आह्वान किया कि वे अपने-अपने क्षेत्र में पूरी ऊर्जा, क्षमता और प्रतिबद्धता के साथ योगदान दें। गांव, शहर, समाज और प्रदेश के विकास में प्रत्येक व्यक्ति की सकारात्मक भागीदारी ही देश को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक बनेगी।
प्रधानमंत्री के संबोधन का हुआ वर्चुअल प्रसारण
रणजीता स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का वर्चुअल प्रसारण किया गया। पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल सहित उपस्थित जनप्रतिनिधियों, युवाओं और नागरिकों ने प्रधानमंत्री का संबोधन सुना।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के साथ शुरू हुई अपनी जनसेवा यात्रा के 25 वर्ष पूर्ण होने का उल्लेख किया। उन्होंने देशवासियों के विश्वास और आशीर्वाद को अपनी शक्ति बताते हुए जनता के प्रति आभार व्यक्त किया।
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि जीवन की प्रत्येक घटना सीख देती है और चुनौतियां व्यक्ति के संकल्प को मजबूत करती हैं। उन्होंने नागरिकों से कर्तव्यबोध और निरंतर कर्म के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का संदेश दिया।
युवा शक्ति और सामूहिक प्रयास से आगे बढ़ेगा देश
प्रधानमंत्री ने देश के विकास में युवा शक्ति और नागरिक सहभागिता को महत्वपूर्ण बताते हुए आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया की बढ़ती क्षमता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रतिभा, सामर्थ्य और क्षमता की पहचान वैश्विक स्तर पर मजबूत हुई है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 140 करोड़ देशवासियों की सामूहिक शक्ति और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में देश निरंतर आगे बढ़ेगा। उन्होंने नागरिकों से राष्ट्र निर्माण में अपनी ऊर्जा, क्षमता और सामर्थ्य का उपयोग करने का आह्वान किया।
रणजीता स्टेडियम से संगम चौक तक गूंजा सेवा का संदेश
‘सेवा ज्योति यात्रा’ के दौरान विकसित भारत, राष्ट्रसेवा और जनभागीदारी से जुड़े संदेश प्रमुखता से सामने आए। यात्रा में विधायक श्रीमती रायमुनी भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरविंद भगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, श्री कृष्ण कुमार राय सहित जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, युवा और आम नागरिक शामिल हुए।
कार्यक्रम के माध्यम से नागरिकों को यह संदेश दिया गया कि विकसित भारत का निर्माण केवल योजनाओं और सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की जिम्मेदार एवं सक्रिय भागीदारी से संभव है। जशपुर में आयोजित संकल्प सभा और सेवा ज्योति यात्रा ने इसी सामूहिक सहभागिता की भावना को केंद्र में रखा।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
