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पीडब्ल्यूडी सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने सड़कों, पुलों और भवनों का किया निरीक्षण, अधिकारियों और ठेकेदारों को समय-सीमा में काम पूरा करने के निर्देश
निर्माण कार्यों की होगी कड़ी मॉनिटरिंग, फील्ड पर प्रगति जांचने होंगे औचक निरीक्षण
रायपुर / बरसात के बाद सड़कों, पुल-पुलियों और भवनों के निर्माण को रफ्तार देने की पूरी तैयारी है। लोक निर्माण विभाग ने निर्माण कार्यों की गति बढ़ाने के साथ गुणवत्ता और समय-सीमा पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। काम की प्रगति अब केवल दफ्तरों की रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वरिष्ठ अधिकारी खुद मैदान में उतरकर निर्माण की वास्तविक स्थिति परखेंगे। कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग के साथ औचक निरीक्षण से भी गुणवत्ता और प्रगति पर नजर रखी जाएगी। इसी कड़ी में लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने गरियाबंद जिले का दौरा कर सड़कों, पुलों और भवनों के निर्माण स्थलों का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता का जायजा लिया। अधिकारियों और ठेकेदारों के साथ समीक्षा बैठक कर निर्माण में आ रही बाधाओं की जानकारी ली और कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए।
सचिव श्री बंसल ने गरियाबंद जिले के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर निर्माणाधीन परियोजनाओं की जमीनी स्थिति देखी। उन्होंने फिंगेश्वर विकासखंड में कोपरा-पोखरा मार्ग के 26.20 किलोमीटर लंबे मजबूतीकरण एवं चौड़ीकरण कार्य का निरीक्षण किया। इस परियोजना में पुल-पुलियों के निर्माण कार्य भी शामिल हैं। उन्होंने राजिम में नवीन मेला स्थल चौबेबांधा से लक्ष्मण झूला तक 3.50 किलोमीटर लंबे फोरलेन मार्ग के निर्माण की प्रगति भी देखी। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों से कार्यों की स्थिति की जानकारी ली और निर्माण में गुणवत्ता तथा समयबद्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
सड़क परियोजनाओं के साथ सचिव श्री बंसल ने गरियाबंद में निर्माणाधीन शासकीय भवनों का भी जायजा लिया। उन्होंने व्यवहार न्यायालय में न्यायिक अधिकारियों के लिए बनाए जा रहे दो डी-टाइप आवासगृहों, जिला परिवहन कार्यालय भवन तथा 40 जीएडी आवासगृहों के निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने इन परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को निर्माण कार्यों में तेजी लाने और निर्धारित समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
सचिव श्री बंसल गरियाबंद जिले के बिंद्रानवागढ़ क्षेत्र के दुर्गम इलाकों में भी पहुंचे। उन्होंने कसाबाय-पतोरा दादर मार्ग के आरडी 135 में चचंगी नाला पर निर्मित पुल एवं पहुंच मार्ग का निरीक्षण किया। यह कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके साथ ही उन्होंने कसाबाय-सातधार मार्ग में हलफली नाला पर उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग के निर्माण कार्य का भी जायजा लिया। जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में संचालित इन परियोजनाओं के निरीक्षण के दौरान उन्होंने विभागीय अधिकारियों से कार्यों की स्थिति की जानकारी ली।
मैदानी निरीक्षण के बाद सचिव श्री बंसल ने गरियाबंद सर्किट हाउस में विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की बैठक ली। उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए काम में आ रही समस्याओं और बाधाओं की जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यों को गति देने के साथ गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखा जाए। बरसात के बाद निर्माण कार्यों में तेजी लाने विभागीय अमले को सक्रियता से काम करना होगा। कार्यों की सतत निगरानी और वरिष्ठ अधिकारियों के मैदानी निरीक्षण से निर्माण की वास्तविक प्रगति पर नजर रखी जाएगी।
सचिव श्री बंसल ने लोक निर्माण विभाग के संभागीय कार्यालय और कार्यालय परिसर का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यालय में स्वच्छता और रखरखाव पर विशेष ध्यान देने तथा व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री व्ही. के. भतपहरी, मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता, कार्यपालन अभियंता, अनुविभागीय अधिकारी एवं उप अभियंतागण उपस्थित थे।
₹8.50 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव, 20.65 लाख ग्रामीण आवास और 26.57 लाख किसानों को सम्मान निधि का लाभ; पूर्व अग्निवीरों के लिए 36 आरक्षक पदों पर भर्ती मंजूर, आदिम जाति विकास विभाग अब कहलाएगा जनजातीय कार्य विभाग
रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकार प्रमुख के रूप में लगातार 25 वर्ष पूर्ण होने पर छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद ने अभिनंदन प्रस्ताव पारित किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे राष्ट्र प्रथम, जनसेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और अंत्योदय की भावना से जुड़ी ऐतिहासिक कर्मयात्रा बताया। मंत्रिपरिषद ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में लिए गए प्रमुख राष्ट्रीय निर्णयों का अभिनंदन करते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घ राष्ट्रसेवा की कामना की। साथ ही केंद्र सरकार से छत्तीसगढ़ को मिले सहयोग के लिए आभार जताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात में नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के दौरान शुरू हुए तकनीक आधारित प्रशासन और सुशासन के प्रयोगों से देश के अन्य राज्यों को भी प्रेरणा मिली। छत्तीसगढ़ में पीएम गतिशक्ति के तहत लगभग 20 हजार गांवों में से 14 हजार गांवों का जियो-रेफरेंसिंग कार्य पूरा हुआ है। राज्य में 450 से अधिक प्रशासनिक सुधार किए गए हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026 और सिंगल विंडो व्यवस्था से औद्योगिक अनुमतियां सरल हुई हैं। सरकार के अनुसार, प्रदेश को ₹8.50 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनसे 1.60 लाख से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है।
गरीब कल्याण और किसानों को आर्थिक संबल
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में 20.65 लाख और शहरी क्षेत्रों में 2.25 लाख आवास पूर्ण होने की जानकारी दी गई। स्वच्छ भारत मिशन में 36 लाख घरेलू शौचालय बने हैं, जबकि उज्ज्वला योजना के तहत 39.73 लाख महिलाओं को गैस कनेक्शन मिले हैं। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत 51.17 लाख हितग्राहियों को लगभग ₹11,877 करोड़ का निःशुल्क उपचार मिलने की जानकारी दी गई।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना से प्रदेश के 73 लाख परिवारों यानी करीब 1.99 करोड़ लोगों को निःशुल्क राशन मिल रहा है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ 26.57 लाख किसानों तक पहुंचा है। सरकार के अनुसार, धान उपार्जन 59 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 141 लाख मीट्रिक टन हुआ है। किसानों को समर्थन मूल्य के माध्यम से ₹33,431 करोड़ और बोनस के रूप में ₹10,292 करोड़ का भुगतान किया गया है।
महिलाओं, युवाओं और जनजातीय समाज पर जोर
महतारी वंदन योजना के तहत लगभग 68 लाख महिलाओं को प्रतिमाह ₹1,000 की सहायता दी जा रही है। ‘लखपति दीदी’ पहल में 14 लाख महिलाओं की उपलब्धि का उल्लेख किया गया। बिहान योजना से 32.39 लाख ग्रामीण परिवार स्व-सहायता समूहों से जुड़े हैं। खेलो इंडिया के तहत आठ जिलों के लिए ₹48 करोड़ की सहायता और 33 मिनी सेंटर स्वीकृत हुए हैं।
जनजातीय क्षेत्रों में धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत 6,000 से अधिक गांवों में विकास कार्य किए जा रहे हैं। पीएम जनमन योजना से विशेष पिछड़ी जनजातियों के 56 हजार से अधिक परिवारों तक आवास, सड़क और पेयजल सुविधाएं पहुंचाने की जानकारी दी गई। प्रदेश के 26 जिलों में 75 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय संचालित हैं।
बस्तर में शांति और अधोसंरचना विकास का दावा
मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के विरुद्ध केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों को महत्वपूर्ण बताते हुए 31 मार्च 2026 को नक्सल समस्या से निर्णायक मुक्ति की उपलब्धि का उल्लेख किया। नक्सल उन्मूलन के लिए केंद्र से ₹2,080 करोड़ की विशेष सहायता और नक्सल पीड़ित परिवारों तथा आत्मसमर्पित कैडरों के लिए 15 हजार आवास स्वीकृत होने की जानकारी दी गई।
सरकार के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में 267 सड़कें और आठ पुल पूरे किए गए हैं। हिंसा के कारण वर्षों से बंद 421 स्कूल फिर से खोले गए हैं। ‘नियद नेल्ला नार’ योजना से दुर्गम गांवों में स्वास्थ्य, शिक्षा और राशन जैसी सुविधाएं पहुंचाने के प्रयास जारी हैं।
सड़क, रेल, बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी को गति
राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए ₹35,766 करोड़ स्वीकृत होने और ₹18,215 करोड़ की 37 परियोजनाओं पर काम जारी रहने की जानकारी दी गई। रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेसवे, बिलासपुर-उरगा-पत्थलगांव मार्ग और रायपुर-दुर्ग बायपास प्रमुख परियोजनाओं में शामिल हैं। रेल क्षेत्र में करीब ₹54 हजार करोड़ की परियोजनाओं पर काम चल रहा है। पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत 1.16 लाख से अधिक घरों में सौर संयंत्र स्थापित किए जाने का भी उल्लेख किया गया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में छत्तीसगढ़ को केंद्रीय करों के हिस्से के रूप में ₹3,46,806 करोड़ मिले, जबकि 2004 से 2014 के दशक में यह राशि ₹47,100 करोड़ थी। जिला खनिज न्यास के माध्यम से ₹17,887 करोड़ मिलने और 81 हजार से अधिक विकास कार्य किए जाने की जानकारी भी दी गई।
राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख
मंत्रिपरिषद ने अनुच्छेद 370 की समाप्ति, सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक, ऑपरेशन सिंदूर, वन रैंक वन पेंशन और नए आपराधिक कानूनों जैसे निर्णयों का उल्लेख किया। अयोध्या में श्रीराम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम तथा छत्तीसगढ़ में धार्मिक और जनजातीय पर्यटन स्थलों के विकास को सांस्कृतिक विरासत के सम्मान से जोड़ा गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में योगदान देने के लिए ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047’ का रोडमैप तैयार किया है। सरकार का संकल्प विकसित छत्तीसगढ़ के माध्यम से समृद्ध, सुरक्षित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में भागीदारी करना है।
कैबिनेट के दो अहम फैसले
पूर्व अग्निवीरों के लिए 36 आरक्षक पदों पर भर्ती: मंत्रिपरिषद ने गृह विभाग में उपलब्ध रिक्तियों के विरुद्ध पूर्व अग्निवीरों के लिए 36 आरक्षक पदों पर भर्ती की अनुमति दी। इन पदों पर पूर्व अग्निवीरों के लिए पहले ही 10 प्रतिशत श्रेणीवार आरक्षण का प्रावधान किया जा चुका है।
विभाग का नाम बदलेगा: मंत्रिपरिषद ने शासन कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत ‘आदिम जाति विकास विभाग’ का नाम बदलकर ‘जनजातीय कार्य विभाग’ किया जाएगा।
कोरबा जिले की ग्राम पंचायत नोनबिर्री और दादरकला में बने आकर्षक बालिका शौचालय, ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान को मिल रही नई पहचान
बेटियों के सम्मान और आत्मविश्वास का प्रतीक बने गुलाबी रंग से सजे शौचालय, बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक दिया स्वच्छता का संदेश
रायपुर / शौर्यपथ / शारदीय नवरात्र में जहां एक ओर पूरे प्रदेश में मातृशक्ति की आराधना की जा रही है, वहीं छत्तीसगढ़ सरकार बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और स्वच्छता के संकल्प को धरातल पर साकार कर रही है। नवरात्र के प्रथम दिन कोरबा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बालिकाओं के लिए निर्मित शौचालय बेटियों के सम्मान की एक सुंदर तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं। विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन–ग्रामीण (वीबी-जी रामजी) के अंतर्गत कोरबा जिले के पाली विकासखंड की ग्राम पंचायत नोनबिर्री और करतला विकासखंड की ग्राम पंचायत दादरकला में बालिका शौचालयों का निर्माण पूर्ण किया गया है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में संचालित ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान के अंतर्गत ग्रामीण विद्यालयों में बालिकाओं को स्वच्छ, सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। कोरबा जिले में पूर्ण हुए ये निर्माण कार्य इसी संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हैं।
‘मेरी बेटी–मेरा स्वाभिमान’ के संदेश से सजे बालिका शौचालय
ग्राम पंचायत नोनबिर्री एवं दादरकला में निर्मित बालिका शौचालय को आकर्षक गुलाबी रंग और सुंदर चित्रकारी से सजाया गया है। भवन की दीवार पर बड़े अक्षरों में ‘मेरी बेटी–मेरा स्वाभिमान’ का संदेश अंकित है। इसके साथ ही ‘स्वच्छ रहें, सुरक्षित रहें’ का संदेश भी दिया गया है। शौचालय के सामने खड़ी स्कूली बालिकाओं ने वीबी-जी रामजी के अक्षरों और स्वच्छता के प्रतीकों के माध्यम से योजना के प्रति अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। बालिकाओं की यह सहभागिता दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और बेटियों के आत्मसम्मान के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार हो रहा है।
नवरात्र में मातृशक्ति के सम्मान का साकार रूप
नवरात्र का पर्व नारी शक्ति के सम्मान और आराधना का प्रतीक है। ऐसे अवसर पर बालिकाओं के लिए शौचालयों का निर्माण पूर्ण होना विशेष महत्व रखता है। विद्यालयों में अलग बालिका शौचालय की उपलब्धता छात्राओं की निजता, स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। विशेष रूप से किशोरावस्था में बालिकाओं के लिए ऐसी सुविधाएं उनकी गरिमा और आत्मविश्वास को बनाए रखने में सहायक होती हैं। इससे विद्यालय में उनकी नियमित उपस्थिति और पढ़ाई के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में भी मदद मिलेगी।
प्रदेश में 6,671 बालिका शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने 6 अगस्त 2026 को वीबी-जीरामजी योजना के अंतर्गत राज्यव्यापी ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान का शुभारंभ किया था। यह विशेष अभियान 15 अगस्त 2026 से 26 जनवरी 2027 तक संचालित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रदेश के ग्रामीण शासकीय विद्यालयों में लगभग 286.85 करोड़ रुपए की लागत से 6,671 बालिका शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इस अभियान का उद्देश्य केवल शौचालयों का निर्माण करना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों को ऐसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जिससे वे बिना किसी असुविधा के शिक्षा प्राप्त कर सकें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।
रायपुर । छत्तीसगढ़ के जीएसटी प्रशासन में किए जा रहे तकनीकी नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। राज्य को जीएसटी परिषद की स्टैंडिंग कमेटी फॉर ऑफिसर्स (लॉ कमेटी) में महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व भी मिला है। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी की पहल से मिली इस जिम्मेदारी के जरिए प्रदेश के व्यापारियों, उद्यमियों और उद्योगों से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का अवसर मिलेगा।
नई दिल्ली में आयोजित जीएसटी परिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने किया। बैठक के दौरान राज्य में कर प्रशासन को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए अपनाए जा रहे नवाचारों को साझा किया गया। राजस्व सचिव ने इन पहलों पर तैयार प्रस्तुतीकरण केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के समक्ष रखा। इसे देश के अन्य राज्यों के साथ भी साझा किया गया, ताकि वे छत्तीसगढ़ के अनुभवों से सीख लेकर अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकी सुधार अपना सकें।
मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स से मजबूत होगा कर प्रशासन
छत्तीसगढ़ में जीएसटी प्रशासन की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने के लिए मशीन लर्निंग, ऑटोमेशन और डेटा एनालिटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इनका उद्देश्य कर संबंधी आंकड़ों का बेहतर विश्लेषण, कर अनुपालन में सुधार और संभावित अनियमितताओं की समय पर पहचान करना है।
तकनीक आधारित प्रक्रियाओं से विभागीय कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के साथ करदाताओं को अधिक सरल एवं सुविधाजनक सेवाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है। राज्य के इन नवाचारों को इससे पहले राष्ट्रीय समन्वय समिति की छठी बैठक में भी प्रस्तुत किया जा चुका है।
12 प्रमुख राज्यों में छत्तीसगढ़ को प्रतिनिधित्व
जीएसटी परिषद की स्टैंडिंग कमेटी फॉर ऑफिसर्स (लॉ कमेटी) में छत्तीसगढ़ को शामिल किया जाना राज्य के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। देश के 12 प्रमुख राज्यों में स्थान मिलने से जीएसटी कानूनों, नियमों और उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन से जुड़े विषयों पर राष्ट्रीय स्तर के विचार-विमर्श में राज्य की भागीदारी मजबूत होगी।
यह समिति कर कानूनों की व्याख्या, नियमों के क्रियान्वयन में आने वाली कठिनाइयों और व्यापार-उद्योग से जुड़े व्यावहारिक मुद्दों पर चर्चा करने का महत्वपूर्ण मंच है। यहां विभिन्न राज्यों के अधिकारी अपने अनुभवों और सुझावों को साझा करते हैं।
व्यापारियों और उद्योगों की समस्याएं पहुंचेंगी राष्ट्रीय मंच तक
लॉ कमेटी में प्रतिनिधित्व मिलने से छत्तीसगढ़ के व्यापारियों, औद्योगिक संगठनों, कर सलाहकारों और व्यापारिक संस्थाओं की समस्याओं एवं सुझावों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
प्रदेश में जीएसटी के क्रियान्वयन के दौरान सामने आने वाली प्रक्रियागत जटिलताओं और व्यावहारिक कठिनाइयों को समिति के समक्ष रखा जा सकेगा। इन विषयों पर विचार-विमर्श के बाद आवश्यक सुझाव जीएसटी परिषद तक पहुंचाए जा सकेंगे। इससे कर व्यवस्था को अधिक सरल, स्पष्ट और व्यापार अनुकूल बनाने के प्रयासों में छत्तीसगढ़ की भूमिका बढ़ेगी।
तकनीक और व्यापार सुगमता पर सरकार का जोर
वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार कर प्रशासन के आधुनिकीकरण, तकनीकी नवाचारों और व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। डेटा विश्लेषण, विभागीय निगरानी और कर अनुपालन की व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
जीएसटी प्रशासन में तकनीकी नवाचारों की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना और लॉ कमेटी में प्रतिनिधित्व, छत्तीसगढ़ के लिए दो महत्वपूर्ण अवसर हैं। इनके माध्यम से राज्य अपने अनुभवों को दूसरे राज्यों तक पहुंचाने के साथ व्यापारियों और उद्योगों की समस्याओं को राष्ट्रीय मंच पर उठाकर जीएसटी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और सुविधाजनक बनाने में योगदान दे सकेगा।
मुख्य भवन के रिनोवेशन का प्रस्ताव उच्च शिक्षा संचालनालय को भेजा गया; जल्द लगेंगी 3 नई सेनेटरी वेंडिंग एवं डिस्पोजल मशीनें
रायपुर । राजधानी के शासकीय दूधाधारी बजरंग महिला स्नातकोत्तर (स्वशासी) महाविद्यालय (DB गर्ल्स कॉलेज) में छात्राओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और परिसर के कायाकल्प की दिशा में पहल की जा रही है। कॉलेज के करीब 60 साल पुराने मुख्य भवन के पुनरुद्धार के लिए विस्तृत प्रस्ताव उच्च शिक्षा संचालनालय को भेजा गया है। वहीं, छात्राओं की स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तीन नई सेनेटरी वेंडिंग एवं डिस्पोजल मशीनें स्थापित करने की तैयारी है।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. जया तिवारी ने उच्च शिक्षा संचालनालय के अपर संचालक को भेजे गए प्रतिवेदन में कॉलेज की वर्तमान व्यवस्थाओं और प्रस्तावित सुधार कार्यों की जानकारी दी है। प्रतिवेदन के अनुसार, मुख्य भवन की उम्र लगभग 60 वर्ष हो चुकी है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने भवन को डिस्मेंटल करने का प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा, पूरे महाविद्यालय के विस्तृत रिनोवेशन के लिए भी संचालनालय को प्रस्ताव भेजा गया है।
पेयजल के लिए 7 वाटर कूलर, खराब मशीन की मरम्मत जारी
छात्राओं को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए परिसर में सात वाटर कूलर लगाए गए हैं। इनमें से एक खराब वाटर कूलर की मरम्मत कराई जा रही है। स्वच्छता और हाइजीन को ध्यान में रखते हुए वाटर कूलर के पास गिलास नहीं रखे गए हैं।
पुरानी सेनेटरी वेंडिंग मशीन अनुपयोगी होने के बाद कॉलेज प्रशासन महिला एवं बाल विकास विभाग, रायपुर के समन्वय से तीन नई वेंडिंग एवं डिस्पोजल मशीनें जल्द स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है। इससे छात्राओं को जरूरी स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
कक्षाओं से लेकर शौचालयों तक व्यवस्था दुरुस्त रखने का दावा
कॉलेज प्रशासन के अनुसार, कक्षाओं में पर्याप्त पंखे और ट्यूब लाइट उपलब्ध हैं। तकनीकी खराबी आने पर तत्काल सुधार कराया जाता है। शौचालयों और कक्षाओं की नियमित साफ-सफाई के लिए सफाई कर्मचारियों की तैनाती भी की गई है।
60 हजार से अधिक पुस्तकों से समृद्ध ग्रंथालय
महाविद्यालय का ग्रंथालय 60 हजार से अधिक पुस्तकों से सुसज्जित है। यहां आधुनिक SOVL 2.0 सॉफ्टवेयर और OPEC सुविधा उपलब्ध है। छात्राओं के अध्ययन के लिए बैठने की समुचित व्यवस्था भी की गई है।
कॉलेज प्रशासन का कहना है कि छात्राओं को बेहतर शैक्षणिक वातावरण देने के साथ परिसर की मूलभूत सुविधाओं में सुधार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। अब मुख्य भवन के पुनरुद्धार और नई मशीनों की स्थापना से जुड़े प्रस्तावों पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
औद्योगिक जल आबंटन की समीक्षा, 9 पेयजल योजनाओं को मंजूरी; उद्योगों को जल संरक्षण और रीसाइक्लिंग पर जोर
रायपुर । छत्तीसगढ़ में पेयजल, कृषि सिंचाई और औद्योगिक जरूरतों के बीच जल के संतुलित बंटवारे को लेकर राज्य सरकार ने प्राथमिकताएं स्पष्ट की हैं। मुख्य सचिव श्री विकासशील ने पेयजल आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए किसानों के खेतों तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचाने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आगामी शुष्क मौसम में पेयजल और कृषि सिंचाई पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में शुक्रवार को मंत्रालय महानदी भवन में जल संसाधन विभाग के अंतर्गत गठित राज्य जल संसाधन उपयोग समिति की बैठक हुई। इसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित औद्योगिक इकाइयों को वार्षिक जल आबंटन की समीक्षा की गई। स्पंज आयरन, पावर प्लांट, सीमेंट और अन्य विनिर्माण इकाइयों को जलाशयों एवं नदियों से किए जाने वाले जल प्रदाय के साथ नए आबंटन प्रस्तावों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
उद्योगों को तय सीमा में जल उपयोग के निर्देश
बैठक में औद्योगिक संस्थानों को स्वीकृत सीमा के भीतर ही पानी का उपयोग करने और जल शुल्क का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए उद्योगों में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) तकनीक अपनाने, वाटर रीसाइक्लिंग प्लांट स्थापित करने तथा वर्षा जल संचयन प्रणालियों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया गया।
भू-जल प्रबंधन प्राधिकरण के गठन पर चर्चा
राज्य में भू-जल के बेहतर प्रबंधन और नियमन के लिए राज्य भू-जल प्रबंधन एवं नियमन प्राधिकरण के गठन के संबंध में भी चर्चा की गई। इसका उद्देश्य भू-जल के उपयोग को व्यवस्थित करने और जल संसाधनों के संरक्षण की दिशा में प्रभावी कदम उठाना है।
मिशन अमृत 2.0 के तहत 9 पेयजल योजनाओं को मंजूरी
बैठक में मिशन अमृत 2.0 तथा अन्य योजनाओं के अंतर्गत कुल 9 पेयजल प्रदाय योजनाओं के लिए स्वीकृत जल आबंटन की पुष्टि एवं अनुमोदन किया गया। इससे प्रदेश के नगरीय निकायों में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
मुख्य सचिव ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को पेयजल, कृषि और उद्योगों की जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए जल संग्रहण एवं प्रदाय की समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए। बैठक में जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव श्री मोहम्मद कैसर अब्दुल हक, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारी, भू-जल वैज्ञानिक तथा समिति के अन्य सदस्य उपस्थित थे।
राज्यपाल रमेन डेका ने 26वीं राज्य स्तरीय सब-जूनियर एवं कैडेट जूडो चैंपियनशिप का किया शुभारंभ, 16 जिलों के 240 खिलाड़ी और प्रशिक्षक ले रहे हिस्सा
बिलासपुर/रायपुर । जूडो सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि साहस, आत्मसंयम, अनुशासन और आत्मविश्वास विकसित करने का माध्यम है। यह विपरीत परिस्थितियों में धैर्य और संतुलन के साथ चुनौतियों का सामना करना सिखाता है। विशेषकर बालिकाओं के लिए जूडो आत्मरक्षा और मानसिक मजबूती का महत्वपूर्ण आधार है। यह बात राज्यपाल रमेन डेका ने सरकंडा स्थित खेल परिसर में 26वीं राज्य स्तरीय सब-जूनियर एवं कैडेट जूडो चैंपियनशिप-2026 का शुभारंभ करते हुए कही।
छत्तीसगढ़ प्रदेश जूडो संघ के तत्वावधान में बिलासपुर जिला जूडो संघ द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में प्रदेश के 16 जिलों से 240 खिलाड़ी और प्रशिक्षक भाग ले रहे हैं। राज्यपाल ने विभिन्न जिलों से पहुंचे बालक-बालिका खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें खेल भावना और अनुशासन के साथ बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया।
जीत में विनम्रता, हार से सीखना ही सच्चे खिलाड़ी की पहचान
राज्यपाल डेका ने कहा कि खेल हमें प्रतिद्वंद्वी का सम्मान करना, जीत में विनम्र रहना और हार से सीख लेकर आगे बढ़ना सिखाते हैं। खिलाड़ियों को बड़े लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर मेहनत करनी चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने वाले खिलाड़ी भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के साथ एशियाई खेलों तथा ओलंपिक में भी देश का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि असफलता से निराश होने के बजाय उससे सीखकर आगे बढ़ना ही सच्चे खिलाड़ी की पहचान है।
कोंडागांव की बेटियों ने बढ़ाया प्रदेश का गौरव
राज्यपाल ने कोंडागांव जिले के जूडो खिलाड़ियों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सफलता प्रदेश की युवा प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा है। योगिता मंडावी को उत्कृष्ट खेल प्रदर्शन के लिए राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। हेमवती नाग ने खेलो इंडिया नेशनल गेम्स और ओपन नेशनल प्रतियोगिता में पदक हासिल किए हैं। वहीं, रंजीता कोरेटी ने ताइवान में आयोजित एशियन कैडेट जूडो चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है।
उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों का सम्मान
समारोह में राज्यपाल ने जूडो में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले हेमवती नाग, अभिषेक जायसवाल, कुमारी शारदा गोस्वामी और योगिता मंडावी को सम्मानित किया। उन्होंने खिलाड़ियों की मेहनत और उपलब्धियों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
दूरस्थ अंचलों की प्रतिभाओं को मिले बेहतर अवसर
राज्यपाल ने कहा कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में मौजूद खेल प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने छत्तीसगढ़ प्रदेश जूडो संघ से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के प्रयास लगातार जारी रखने की अपेक्षा की।
कार्यक्रम में बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल, छत्तीसगढ़ प्रदेश जूडो संघ के अध्यक्ष अरुण द्विवेदी, महासचिव शम्भू सोनी, बिलासपुर जिला जूडो संघ के अध्यक्ष शैलेन्द्र शुक्ला सहित खेल संघ के पदाधिकारी, प्रशिक्षक और बड़ी संख्या में खिलाड़ी उपस्थित थे।
रायपुर । विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी, नए विचारों और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता से होगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप के द्वितीय बैच के 36 युवा प्रतिभागियों से संवाद करते हुए उन्हें निष्ठा, ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ काम करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी शिक्षा, कौशल और नवीन सोच का उपयोग जनकल्याण तथा प्रदेश के विकास में करना चाहिए।
राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने अपने छात्र जीवन, पारिवारिक संघर्ष, खेती-किसानी से लेकर सरपंच, विधायक, सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में सार्वजनिक जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है। जब युवाओं की ऊर्जा और प्रतिभा समाज की बेहतरी से जुड़ती है, तब बड़े बदलावों का रास्ता खुलता है।
योजनाओं को समझेंगे, समस्याओं के व्यावहारिक समाधान सुझाएंगे
मुख्यमंत्री ने युवा फेलो से कहा कि फेलोशिप को केवल प्रशिक्षण या प्रशासनिक प्रक्रियाओं को समझने तक सीमित न रखें। जिलों में काम करते समय स्थानीय परिस्थितियों, आम लोगों की जरूरतों और योजनाओं के वास्तविक प्रभाव को समझें। आंकड़ों, प्रमाणों और मैदानी अनुभवों के आधार पर ऐसे सुझाव दें, जिनसे सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर हो और जनसेवाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ भी विकसित प्रदेश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी।
संघर्षों ने सिखाई जिम्मेदारी और जनसेवा
अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि लगभग दस वर्ष की उम्र में पिता के आकस्मिक निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। चार भाइयों में सबसे बड़े होने के कारण उन्हें मां, दादी और छोटे भाइयों की देखभाल के साथ खेती-बाड़ी की जिम्मेदारी भी संभालनी पड़ी। उन्होंने स्वयं बैलों से हल चलाया और खेती के विभिन्न कार्य किए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि वे गांव के सरपंच बनेंगे। निर्विरोध सरपंच चुने जाने के बाद उन्हें विधायक, सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में जनसेवा का अवसर मिला। उन्होंने स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव के धैर्य, सहजता और आत्मीय व्यवहार को भी अपने लिए प्रेरणादायक बताया।
मुख्यमंत्री ने युवाओं से कहा कि जो भी जिम्मेदारी मिले, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाएं तथा जनकल्याण को अपने कार्य का उद्देश्य बनाएं।
शिक्षा और कौशल से रोजगार तक सरकार की पहल
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा विकास का मूल आधार है। उन्होंने अपने छात्र जीवन के ग्रामीण परिवेश का उल्लेख करते हुए बताया कि उस समय स्कूलों में सुविधाएं सीमित थीं। उन्हें अपने गांव बगिया से लगभग छह किलोमीटर दूर दूसरे गांव में पांचवीं की बोर्ड परीक्षा देने जाना पड़ा था। आज छत्तीसगढ़ में आईआईएम, आईआईटी, ट्रिपल आईटी, एम्स और विधि विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान उपलब्ध हैं।
उन्होंने प्रयास आवासीय विद्यालयों, विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तक एवं गणवेश उपलब्ध कराने, मध्यान्ह भोजन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दिल्ली स्थित ट्राइबल यूथ हॉस्टल जैसी सुविधाओं का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के साथ रोजगारपरक कौशल भी जरूरी है। प्रदेश में लाइवलीहुड कॉलेजों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जा रहा है और 30 आईटीआई का उन्नयन कर उन्हें उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक बनाया जा रहा है।
उनके अनुसार, पिछले लगभग ढाई वर्षों में 700 से अधिक रोजगार मेलों के माध्यम से करीब 24 हजार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। रायपुर में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय रोजगार मेले में 95 से अधिक नियोक्ताओं ने भाग लिया और लगभग पांच हजार युवाओं को रोजगार के अवसर मिले।
निवेश प्रस्तावों को रोजगार में बदलना लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल निवेश प्रस्ताव प्राप्त करना नहीं, बल्कि उन्हें वास्तविक परियोजनाओं और रोजगार के अवसरों में बदलना है। नई औद्योगिक नीति के तहत स्थानीय युवाओं की रोजगार क्षमता और उद्यमिता को प्रोत्साहित किया जा रहा है। महिला उद्यमियों तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के उद्यमियों के लिए भी विशेष प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।
अपने हालिया सिंगापुर प्रवास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के सामने छत्तीसगढ़ की निवेश संभावनाओं को प्रस्तुत किया गया। सेमीकंडक्टर और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में निवेश से रोजगार के नए अवसर विकसित हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने नवा रायपुर में लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित मेडिसिटी और पांच हजार बिस्तरों की अस्पताल सुविधाओं की परिकल्पना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसी परियोजनाएं स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ आर्थिक गतिविधियों और रोजगार को भी बढ़ावा दे सकती हैं।
एआई मिशन से छह लाख विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा का लक्ष्य
भविष्य की तकनीकी जरूरतों पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने एआई मिशन के लिए बजट में 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके तहत छह लाख विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शिक्षा देने और लगभग डेढ़ हजार अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवाओं को आधुनिक तकनीक के बदलावों के अनुरूप तैयार करना जरूरी है, ताकि वे केवल तकनीक के उपयोगकर्ता न रहें, बल्कि नवाचार और विकास में नेतृत्वकारी भूमिका भी निभा सकें।
पांच माह प्रशिक्षण, 19 माह जिलों में मैदानी अनुभव
सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव तथा मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत ने फेलोशिप कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि द्वितीय बैच में इंजीनियरिंग, विज्ञान, प्रबंधन, गणित, वाणिज्य और अर्थशास्त्र सहित विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमियों से 36 युवाओं का चयन किया गया है। इनमें कुछ प्रतिभागी अपने स्टार्टअप भी संचालित कर रहे हैं।
दो वर्षीय कार्यक्रम में कुल पांच माह अध्ययन एवं प्रशिक्षण तथा 19 माह का मैदानी अनुभव शामिल है। प्रारंभिक तीन माह आईआईएम रायपुर में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद प्रतिभागी जिला प्रशासन के साथ काम करते हुए सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और जनसेवाओं की वास्तविक स्थिति को समझेंगे।
राहुल भगत ने प्रतिभागियों को राज्य के विजन डॉक्यूमेंट ‘अंजोर छत्तीसगढ़ 2047’ का अध्ययन करने और अपने सपनों के छत्तीसगढ़ को लेकर विचार प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया।
14 जिलों के युवा फेलोशिप में शामिल
फेलोशिप के द्वितीय बैच के लिए कॉमन एडमिशन टेस्ट (कैट) स्कोर और आईआईएम की चयन प्रक्रिया के माध्यम से 36 युवाओं का चयन किया गया है। इनमें दंतेवाड़ा, बस्तर और जशपुर सहित प्रदेश के 14 जिलों के युवा शामिल हैं।
सुशासन एवं अभिसरण विभाग, आईआईएम रायपुर और ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया के सहयोग से संचालित इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों को राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, लोक सेवा गारंटी, हितधारकों की पहचान, सुशासन और मैदानी कार्यप्रणाली से संबंधित प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
संवाद के दौरान रायपुर की नीलिमा भारद्वाज, खुशी और जशपुर के अंशुल सहित प्रतिभागियों ने मुख्यमंत्री से सवाल किए और अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने उनकी जिज्ञासाओं का जवाब देते हुए युवाओं को अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग जनसेवा में करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में आईआईएम रायपुर के निदेशक प्रोफेसर संजीव पराशर, सुशासन एवं अभिसरण विभाग के उप सचिव सूरज साहू सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
DMEO की महानिदेशक निधि छिब्बर ने दिया सहयोग का भरोसा, अंजोर विजन-2047 के लक्ष्यों की निगरानी के लिए डेटा आधारित व्यवस्था पर जोर
रायपुर । छत्तीसगढ़ में सरकारी योजनाओं की निगरानी, मूल्यांकन और उनके वास्तविक परिणामों को परखने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। नीति आयोग, भारत सरकार के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) की महानिदेशक निधि छिब्बर ने छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग के कार्यों की प्रशंसा करते हुए राज्य में निगरानी एवं मूल्यांकन का मजबूत और स्थायी तंत्र विकसित करने के लिए हरसंभव तकनीकी एवं संस्थागत सहयोग देने का आश्वासन दिया।
राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में स्टेट सपोर्ट मिशन के तहत चल रही गतिविधियों और प्रस्तावित कार्ययोजनाओं की समीक्षा की गई। बैठक में सरकारी योजनाओं के प्रभाव का आकलन, डेटा आधारित नीति निर्माण और अंजोर विजन-2047 के लक्ष्यों की प्रगति की निगरानी पर विशेष जोर दिया गया। इस अवसर पर सचिव, योजना भुवनेश यादव सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
अंजोर विजन-2047 के लिए परिणामों पर होगी नजर
राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को वर्ष 2047 तक विकसित राज्य बनाने के लक्ष्य की प्राप्ति में आयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल उनके क्रियान्वयन से नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक उनका लाभ पहुंचने और वास्तविक परिणाम सामने आने से तय होनी चाहिए।
उन्होंने नीति निर्माण, योजनाओं के मूल्यांकन और विभागीय समन्वय में ठोस आंकड़ों तथा वैज्ञानिक पद्धतियों के उपयोग को जरूरी बताया। आयोग एक परामर्शदात्री और ज्ञान आधारित संस्था के रूप में प्रदेश के समग्र विकास के लिए काम कर रहा है।
IIM रायपुर और IIT भिलाई की विशेषज्ञता का होगा उपयोग
सचिव, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी भुवनेश यादव ने बताया कि योजनाओं के मूल्यांकन की व्यवस्था मजबूत करने के लिए भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM) रायपुर और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) भिलाई जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की विशेषज्ञता का सहयोग लिया जा रहा है। इससे शोध आधारित अध्ययन, आधुनिक तकनीक और शैक्षणिक विशेषज्ञता के माध्यम से योजनाओं के प्रभाव का बेहतर आकलन किया जा सकेगा।
बैठक में राज्य नीति आयोग की मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन इकाई तथा परियोजना क्रियान्वयन इकाई की गतिविधियों की समीक्षा भी की गई। अधिकारियों ने बताया कि विभिन्न शासकीय योजनाओं के पायलट मूल्यांकन के लिए DMEO के निर्धारित मूल्यांकन ढांचे के आधार पर अध्ययन किए जा रहे हैं।
नौ प्राथमिक क्षेत्रों में अध्ययन, अंजोर विजन पोर्टल पर काम
राज्य में नीति आयोग के आउटपुट-आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क (OOMF) और डेटा गवर्नेंस क्वालिटी इंडेक्स (DGQI) को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अपनाया गया है। इसके अतिरिक्त नौ प्राथमिक क्षेत्रों में त्वरित अध्ययन किए जा रहे हैं।
अंजोर विजन-2047 के लक्ष्यों की प्रगति को नियमित रूप से परखने के लिए अंजोर विजन पोर्टल विकसित करने की दिशा में भी काम जारी है। इसका उद्देश्य विकास लक्ष्यों की निगरानी और समीक्षा को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
बच्चों के कल्याण का आकलन करेगा नया सूचकांक
राज्य नीति आयोग यूनिसेफ के सहयोग से बाल कल्याण सूचकांक विकसित कर रहा है। इसके माध्यम से बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और समग्र कल्याण से जुड़ी सेवाओं की उपलब्धता के साथ उनके वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जाएगा।
यह सूचकांक उन जिलों और क्षेत्रों की पहचान करने में भी मदद करेगा, जहां बच्चों के विकास के लिए अधिक ध्यान और निवेश की आवश्यकता है। इससे बाल कल्याण से संबंधित योजनाओं को जरूरतों के अनुरूप अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी।
SDG डैशबोर्ड से विकास की प्रगति पर नजर
बैठक में सतत विकास लक्ष्यों (SDG) की निगरानी के लिए राज्य और जिला स्तरीय व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई। अधिकारियों के अनुसार, इन लक्ष्यों की प्रगति पर आधारित वार्षिक प्रतिवेदन जारी किए जा रहे हैं और जिलों में नियमित निगरानी के लिए विशेष डैशबोर्ड भी विकसित किया गया है।
इसके साथ ही SDG आधारित बजट विश्लेषण पर काम किया जा रहा है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि सरकारी खर्च विभिन्न सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में कितना योगदान दे रहा है। भविष्य में बजट निर्माण में इन लक्ष्यों को चरणबद्ध तरीके से शामिल कर परिणाम आधारित बजट व्यवस्था को बढ़ावा देने की योजना है।
योजनाओं की कमियां समय पर पहचानने पर जोर
DMEO की महानिदेशक निधि छिब्बर ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने कम समय में निगरानी एवं मूल्यांकन के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहल की है। उन्होंने जोर दिया कि योजनाओं की सफलता का आकलन केवल खर्च या कार्य पूरा होने के आधार पर नहीं, बल्कि लक्षित हितग्राहियों को मिले वास्तविक लाभ और प्राप्त परिणामों के आधार पर किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मजबूत संस्थागत निगरानी व्यवस्था से योजनाओं की कमियों की समय पर पहचान, सुधारात्मक कदम उठाने और संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद मिलेगी। छिब्बर ने इस दिशा में DMEO, नीति आयोग की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया।
बैठक में संचालक, आर्थिक एवं सांख्यिकी तीर्थराज अग्रवाल सहित राज्य नीति आयोग के अधिकारी उपस्थित रहे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
