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June 18, 2026
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पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के मुख्य केंद्रीय प्रभारी स्वामी परमार्थ देव की रहेगी विशेष उपस्थिति

विभिन्न एकीकृत चिकित्सा पद्धतियों की जानकारी के साथ मिलेगा उपचार का अवसर भी

भिलाई। इस्पात नगरी भिलाई में तीन दिवसीय विशाल एकीकृत योग शिविर का आयोजन 30 मई से मनसा कॉलेज कुरूद रोड कोहका में किया जा रहा है। शिविर में तीनों दिन पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के मुख्य केंद्रीय प्रभारी स्वामी परमार्थ देव की विशेष उपस्थिति रहेगी। पतंजलि योग समिति, भारत स्वाभिमान न्यास, पतंजलि युवा भारत और किसान सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस तीन दिवसीय विशाल शिविर में सुबह 5:15 बजे से 7:30 बजे तक योग के माध्यम से निरोग रहने विविध योगासनों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इस संदर्भ में भारत स्वाभिमान न्यास छत्तीसगढ़ प्रमुख अनूप बंसल और युवा भारत के प्रभारी जयंत भारती ने बताया कि शिविर में समूचे छत्तीसगढ़ से बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति रहेगी वहीं एकीकृत चिकित्सा पद्धतियों में योग के साथ-साथ यज्ञ चिकित्सा, वॉटर थेरेपी और एक्यूप्रेशर के माध्यम से उपचार के संबंध में जानकारी दी जाएगी। इस दौरान चयनित लोगों का आयोजन स्थल पर उपचार भी किया जाएगा। यहां कार्यकर्ताओं को इन एकीकृत चिकित्सा पद्धतियों के बारे में विशेषज्ञों द्वारा विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, जिसमें कार्यशाला में विभिन्न सत्र होंगे।
शिविर में स्वामी परमार्थ देव की उपस्थिति को विशेष उपलब्धि माना जा रहा है। आयोजकों ने बताया कि स्वामी परमार्थ देव 30 व 31 मई और एक जून को तीनों दिन योग शिविर की निगरानी करेंगे तथा शिविर में उपस्थित लोगों का मार्गदर्शन करेंगे। योग शिविर  के अलावा स्वामी परमार्थ देव के अन्य कार्यक्रम भी रखे गए हैं। जिसमें 30 मई को राजनांदगांव में कार्यकर्ता सम्मेलन में भाग लेंगे। वहीं राजनांदगांव,बालोद, खैरागढ़ व मानपुर मोहला जिले के योग शिक्षकों एवं पदाधिकारियों के साथ विशेष बैठक करेंगे। इसी तरह 31 मई को भिलाई के योग शिविर में भाग लेने के साथ स्वामी परमार्थ देव आयोजन स्थल पर ही सुबह 8:00 बजे से 10:00 बजे तक कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करेंगे।  
उल्लेखनीय है कि स्वामी परमार्थ देव, हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ और भारत स्वाभिमान (न्यास) के मुख्य केंद्रीय प्रभारी हैं। वह योग ऋषि स्वामी रामदेव के प्रमुख शिष्यों में से एक हैं और भारत भर में योग, आयुर्वेद और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार तथा योग शिविरों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे पतंजलि परिवार (महिला पतंजलि, युवा भारत आदि) के माध्यम से आमजन और ग्रामीण क्षेत्रों तक योग विद्या को पहुँचाने के लिए निरंतर देशव्यापी शिविरों का नेतृत्व कर रहे हैं। आयोजकों ने बताया कि शिविर की सारी तैयारियां अंतिम चरण में है। उन्होंने ज्यादा से ज्यादा लोगों से इस नि:शुल्क योग शिविर का लाभ उठाने की अपील की है। आयोजन की तैयारियों में नरेंद्र पटेल, शंभू प्रसाद कुशवाहा, पिंकी चौधरी, प्रतिभा, उर्वशी शर्मा, प्रीति त्रिपाठी, मुरलीधर साहू, संदीप, दिनेश शर्मा, देवेश सिंह साहू, भावेश साहू, राजेश तिवारी, तिजाऊ राम साहू  और बलवंत सिंह सहित अन्य लोग जुटे हैं।

 भिलाई। छत्तीसगढ़ शासन के महिला एवं बाल विकास के संयुक्त निदेशक नंदलाल चौधरी इसी माह सेवानिवृत्त हो रहे हैं। वे छत्तीसगढ़ ज्ञान विज्ञान ज्योतिष संस्थान से भी जुड़े हैं। संस्थान के पदाधिकारियों व सदस्यों ने उनके सम्मान में एक गरिमामय समारोह का आयोजन भिलाई निवास कॉफी हाउस के सभागार में किया।
ज्ञात हो कि सेक्टर-2 निवासी नंदलाल चौधरी पवार क्षत्रिय समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। समारोह में उपस्थित लोगों ने श्री चौधरी के व्यक्तित्व की सराहना की। वहीं श्री चौधरी ने अपने सम्मान के लिए सभी का आभार जताया। उनकी सेवानिवृत्ति पर आयोजित सम्मान समारोह में गीतांजलि चौधरी, गौरव चौधरी, पल्लव चौधरी, भुनिशा चौधरी, उमेश चितलांगिया एनआईटी एलुमनी संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष व छत्तीसगढ़ ज्ञान विज्ञान ज्योतिष संस्थान के संरक्षक, एक्सपर्ट पैरेंटिंग कोच चिरंजीव जैन, एस्ट्रोलॉजर पीडी स्वर्णकार, एस्ट्रोलॉजर राकेश शर्मा, एस्ट्रोलॉजर बीपी पटेल, एस्ट्रोलॉजर राजेंद्र केसर, बैडमिंटन की राष्ट्रीय खिलाड़ी संगीता राजगोपालन, संतोष सोनी, प्रवीण आहूजा, प्रवीण सिंह, राजेंद्र सोनबोइर और देवेश सिंह सहित अन्य उपस्थित थे।

बालोद शौर्यपथ
संवाददाता लोकेश कुमार साहू

  बालोद - डौंडीलोहारा विकासखंड के भंवरमरा, कंमकापार, अरजपूरी, रेंगाडबरी, देवरी के आस-पास भरनाभाट, रीवागहन, आलीवारा, सुरसुरी, फरदफोड, घीना, सुरेगाँव, भीमकंहार में पंचायत के द्वारा भी पेड़ों को लकड़ी ठेकेदारों को बेचा जा रहा है क्षेत्र में पर्यावरण की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं और जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं। खुले मैदान में प्रतिबंधित अर्जुन वृक्ष की लकड़ी का जखीरा पड़ा है, मानो तस्करों ने वन विभाग और राजस्व विभाग को खुली चुनौती दे दी हो।
कैमरे में कैद तस्वीरें चीख-चीख कर गवाही दे रही हैं - भरानाभाट और रीवागहन के इलाके में दर्जनों की संख्या में कटे हुए कीमती अर्जुन के लट्ठे बेखौफ डंप किए गए हैं। हैरानी की बात ये है कि भंवरमरा, कंमकापार, अरजपूरी से लेकर देवरी तक के जगहों से लकड़ी तस्कर दिनदहाड़े ट्रैक्टर-ट्रॉली में लादकर इस प्रतिबंधित लकड़ी का परिवहन कर रहे हैं। ना कोई रोकने वाला, ना कोई टोकने वाला।

ये वही अर्जुन वृक्ष है जिसे छत्तीसगढ़ वन अधिनियम में 'प्रतिबंधित' श्रेणी में रखा गया है। इसकी एक टहनी काटना भी गैर-कानूनी है, यहाँ तो रेंगाडबरी-देवरी बेल्ट में पूरा जंगल साफ कर दिया गया और अब ट्रैक्टर भर-भर कर माल पार किया जा रहा है।

दोनों विभाग कटघरे में जबकि रेंगाडबरी और माटरी मोड दोनों स्थानों पर वन विभाग का बेरियल होने के बाद भी आराम से लकड़ी से लदा हुआ ट्रैक्टर पार हो जाता है।
सवाल सीधा है - डौंडीलोहारा ब्लॉक में इतनी बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित और बिना अनुमति के लकड़ी खुले आम रोजाना निकल जाते हैं, और खुले आसमान के नीचे कैसे पहुंची और ट्रैक्टर से कैसे ढोई जा रही है?

1. वन विभाग की नाकामी: अरजपूरी-कंमकापार रेंज में बिना वन विभाग की TP यानी ट्रांजिट परमिट के लकड़ी का एक लट्ठा भी नहीं हिल सकता। फिर ट्रैक्टरों में भरकर अर्जुन वृक्ष एवं अन्य दूसरे प्रजाति की लकड़ी भंवरमरा से भरानाभाट तक कैसे दौड़ रही है? क्या डौंडीलोहारा रेंज के बीट गार्ड से लेकर रेंजर तक सबकी मिलीभगत है?
2. राजस्व विभाग की लापरवाही: रीवागहन, भरानाभाट की राजस्व जमीन पर खड़े पेड़ काटने के लिए तहसीलदार की अनुमति जरूरी है। क्या पटवारी-RI ने आंखें बंद कर लीं? या फिर 'नजराना' लेकर देवरी-रेंगाडबरी मार्ग से ट्रैक्टरों को हरी झंडी दे दी गई?

स्थानीय ग्रामीणों का फूटा गुस्सा - "ये कोई पहली घटना नहीं है। डौंडीलोहारा के इन गांवों में महीनों से अवैध कटाई और ट्रैक्टर से ढुलाई का खेल चल रहा है। मुख्य सड़क से ट्रैक्टर गुजरते हैं, सब देखते हैं, पर विभाग को नहीं दिखता। शिकायत करो तो फाइल दबा दी जाती है। विभागों की ये उदासीनता नहीं, खुली सांठगांठ है।"

औषधीय खजाने की लूट
अर्जुन सिर्फ पेड़ नहीं, आयुर्वेद का खजाना है। हार्ट के मरीजों के लिए संजीवनी माने जाने वाले इस पेड़ को तस्कर चंद रुपयों के लिए भंवरमरा-कंमकापार के जंगलों से काट रहे हैं और ट्रैक्टर से बेच रहे हैं। पर्यावरण को हो रहे नुकसान की भरपाई कौन करेगा?

जनता की मांग - अब सिर्फ कार्रवाई नहीं, जवाबदेही तय हो
ग्रामीणों ने दो टूक कहा है:
1. वन विभाग तत्काल FIR दर्ज कर डौंडीलोहारा के तस्कर गिरोह और ट्रैक्टर मालिकों को बेनकाब करे।
2. राजस्व विभाग बताए कि भरानाभाट, रीवागहन की जमीन पर ये 'लकड़ी का पहाड़' कैसे खड़ा हुआ और ट्रैक्टर कैसे चल रहे हैं?
3. भंवरमरा, अरजपूरी, देवरी बीट के लापरवाह अधिकारियों पर निलंबन की कार्रवाई हो। जिन रास्तों से ट्रैक्टर निकले, वहाँ के बीट गार्ड और कोटवार से जवाब तलब हो।

डौंडीलोहारा क्षेत्र में ट्रैक्टर जब्त कर ठोस कार्रवाई करें। अब देखना है कि खबर छपने के बाद भी विभागों की नींद टूटती है या फिर 'सब चलता है' की तर्ज पर ट्रैक्टर से हरियाली का कत्लेआम चलता रहेगा।

 

डौंडीलोहारा से लोकेश कुमार साहू की खास रिपोर्ट

बालोद (डौंडीलोहारा )गजईडीह, - बस्तर पुलिस के वीर सपूत शहीद आरक्षक स्व. खिलावन सिंह कोकिला की 19वीं पुण्यतिथि आज गुरुवार को उनके गृह ग्राम गजईडीह में पूरे राजकीय सम्मान के साथ मनाई जाएगी।

12 अप्रैल 1976 को जन्मे खिलावन सिंह कोकिला ने 28 मई 2007 को कर्तव्य पथ पर अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। शहीद की स्मृति में * सुबह 11 बजे ग्राम गजईडीह* में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया है।

चौंकी प्रभारी अरविंद साहू हुए शामिल
कार्यक्रम में चौंकी प्रभारी अरविंद साहू पुलिस बल के साथ शहीद को श्रद्धासुमन अर्पित किए,उन्होंने कहा कि "शहीद खिलावन सिंह कोकिला का बलिदान बस्तर पुलिस के लिए गर्व का विषय है। उनका शौर्य नई पीढ़ी के पुलिस जवानों को हमेशा कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देता रहेगा। हम सब उनके परिवार के साथ खड़े हैं।"

परिवार का आग्रह
शहीद की माता ढेलु बाई कोकिला, पत्नी शशिकला कोकिला और पुत्र विनय कोकिला ने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों और युवाओं ने कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है।

बस्तर पुलिस के इस वीर सपूत का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। "शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मिटने वालों का यही बाकी निशां होगा"

*मुख्यमंत्री श्री साय ने दी बधाई और शुभकामनायें*

रायपुर ।  मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से भारतीय वन सेवा (IFS) के लिए चयनित रायगढ़ जिले के संबलपुरी गांव निवासी श्री अजय गुप्ता ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री श्री साय ने अजय को भारतीय वन सेवा में चयनित होने पर बधाई देते हुए इसे पूरे छत्तीसगढ़, विशेषकर वनांचल क्षेत्र के लिए गौरव और प्रेरणा का क्षण बताया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि अजय गुप्ता ने केवल अपने माता-पिता का ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत प्रेरणादायी है कि एक ऐसा युवा, जिसने बचपन में जंगलों में तेंदूपत्ता और महुआ संग्रह कर परिवार का हाथ बंटाया, आज उन्हीं जंगलों के संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी निभाने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि बताती है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती, बल्कि अवसर और संकल्प मिल जाए तो दूरस्थ अंचलों के युवा भी देश की सर्वोच्च सेवाओं में अपनी जगह बना सकते हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की ‘लघु वनोपज संघ छात्रवृत्ति’ तथा ‘पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति’ जैसी योजनाओं ने अजय जैसे प्रतिभाशाली युवाओं की राह आसान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि अजय की सफलता वनांचल समाज के सपनों, संघर्ष और आत्मविश्वास की जीत है तथा यह हजारों युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस देगी।

उल्लेखनीय है कि रायगढ़ जिले के संबलपुरी गांव में साधारण परिवेश में पले-बढ़े अजय गुप्ता का बचपन जंगलों, वनोपज संग्रहण और खेती-किसानी के बीच बीता। छुट्टियों के दौरान वे अपने माता-पिता के साथ जंगलों में जाकर तेंदूपत्ता और महुआ एकत्रित करते थे। आर्थिक अभावों के बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपनी प्राथमिकता बनाया और 10वीं में 92.66 प्रतिशत तथा 12वीं में 91.40 प्रतिशत अंक प्राप्त कर अपनी मेधा का परिचय दिया।

उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के आधार पर अजय को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) रायपुर में प्रवेश मिला, जहां अध्ययन के दौरान उन्हें तीन वर्षों तक छात्रवृत्ति का लाभ मिला। अजय ने कठिन परिस्थितियों के बीच अध्ययन जारी रखते हुए भारतीय वन सेवा परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 91वीं रैंक प्राप्त की और अपने सपनों को साकार किया।

अजय गुप्ता ने बताया कि प्रारंभिक जीवन में उनके सपने सीमित थे और लगता था कि दुनिया गांव तक ही सीमित है, लेकिन उच्च शिक्षा और नए अनुभवों ने उनके सोचने का दायरा विस्तृत किया। उन्होंने कहा कि जंगल उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है और बचपन से प्रकृति के साथ बने इसी जुड़ाव ने उन्हें वन सेवा में जाने की प्रेरणा दी। उनका मानना है कि जंगल ने उन्हें केवल आजीविका ही नहीं, बल्कि जीवन की दिशा भी दी है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि अजय की सफलता प्रदेश के उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं। उन्होंने कहा कि सही अवसर, मार्गदर्शन, मेहनत और शासन के सहयोग से गांवों और वनांचल क्षेत्रों के युवा भी देश के सर्वोच्च पदों तक पहुंच सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि अजय गुप्ता जैसे युवा आने वाली पीढ़ियों को संघर्ष, आत्मविश्वास और संकल्प की शक्ति का संदेश देंगे तथा छत्तीसगढ़ के युवाओं को नई दिशा और नई प्रेरणा प्रदान करेंगे।

 

 रायपुर, / राज्य शासन ने सूरजपुर जिले के विकासखंड ओड़गी स्थित सूपाझरिया जलाशय योजना के मरम्मत एवं जीर्णाेद्धार कार्य के लिए 3 करोड़ 15 लाख 95 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। मरम्मत कार्य पूर्ण होने पर जलाशय की रूपांकित सिंचाई क्षमता 82 हेक्टेयर पूरी तरह बहाल हो जाएगी। इस नहर जीर्णाेद्धार कार्य से ओड़गी क्षेत्र के किसानों को सिंचाई की स्थायी सुविधा मिलेगी और कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।

82 हेक्टेयर में सिंचाई का लक्ष्य

सूपाझरिया जलाशय के जीर्णाेद्धार कार्य पूर्ण होने पर जलाशय की रूपांकित सिंचाई क्षमता 82 हेक्टेयर पूरी तरह बहाल हो जाएगी। इससे क्षेत्र के किसानों को खरीफ और रबी दोनों फसलों के लिए पर्याप्त सिंचाई सुविधा मिलेगी।

शर्तों के साथ कार्य के निर्देश

शासन ने कार्य को स्वीकृत राशि और निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए हैं। कार्य शुरू करने से पहले सक्षम अधिकारी से ड्रॉइंग-डिजाइन का अनुमोदन और तकनीकी स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा। साथ ही कम से कम 75 प्रतिशत बाधा रहित भूमि उपलब्ध होने पर ही निविदा जारी की जाएगी। निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि भू-अर्जन स्वीकृत राशि की सीमा में ही किया जाए और किसी अन्य मद की बचत राशि का उपयोग बिना पूर्व स्वीकृति के न हो। यदि भू-अर्जन प्रस्तावित नहीं है, तो निर्माण शासकीय भूमि पर ही कराया जाए। निविदा प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का बड़ा फैसला, बच्चों और माताओं के लिए मजबूत होगा बुनियादी ढांचा

रायपुर, ।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित और अब तेजी से विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे जिलों में बच्चों एवं माताओं के लिए आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। राज्य सरकार ने भवनविहीन आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बस्तर संभाग के शेष 506 भवनविहीन आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए भवन स्वीकृति प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि नक्सल मुक्त घोषित जिलों में कोई भी आंगनबाड़ी भवनविहीन न रहे और प्रत्येक बच्चे तथा माता को बेहतर, सुरक्षित एवं सुविधायुक्त वातावरण उपलब्ध हो।


“आंगनबाड़ी केवल भवन नहीं, भविष्य निर्माण का केंद्र”

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल पोषण वितरण का माध्यम नहीं, बल्कि बच्चों के समग्र विकास, मातृ स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण की मजबूत नींव हैं।

उन्होंने कहा कि दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण आंगनबाड़ी व्यवस्था बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण, पूर्व-प्राथमिक शिक्षा तथा गर्भवती एवं धात्री माताओं की देखभाल को नई मजबूती प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, समयबद्धता और स्थानीय आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए हैं।


बस्तर संभाग के छह जिलों में प्राथमिकता

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर, नारायणपुर और सुकमा जिलों में भवनविहीन आंगनबाड़ी केंद्रों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर निर्माण सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

मुख्य सचिव स्तर पर 16 मई 2026 को आयोजित समीक्षा बैठक में बस्तर संभाग की प्रत्येक ग्राम पंचायत में आंगनबाड़ी भवन निर्माण को शासन की प्राथमिकता बताया गया था। इसी क्रम में संबंधित जिलों के कलेक्टरों को संयुक्त निर्देश जारी किए गए हैं।


“BaLA कॉन्सेप्ट” से सीखने वाला भवन बनेगा आंगनबाड़ी

सरकार ने आंगनबाड़ी भवन निर्माण में “BaLA (Building as Learning Aid)” कॉन्सेप्ट को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।

इस मॉडल के तहत भवन स्वयं बच्चों के लिए सीखने और समझने का माध्यम बनेगा। आंगनबाड़ी केंद्रों को आकर्षक, बाल-अनुकूल और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा के अनुकूल वातावरण के रूप में विकसित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार केवल भवन निर्माण नहीं, बल्कि ऐसा वातावरण तैयार करना चाहती है जहां बच्चे सीखें, खेलें और मानसिक रूप से विकसित हों।


11.69 लाख रुपए प्रति भवन की लागत

आंगनबाड़ी भवन निर्माण हेतु प्रति भवन 11 लाख 69 हजार रुपए की राशि निर्धारित की गई है।

  • महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा – 2 लाख रुपए
  • महात्मा गांधी नरेगा योजना के अंतर्गत – 8 लाख रुपए
  • शेष 1.69 लाख रुपए – डीएमएफ, सीएसआर अथवा अन्य स्थानीय संसाधनों से

मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न योजनाओं और स्थानीय संसाधनों के प्रभावी अभिसरण के माध्यम से विकास कार्यों को गति देना राज्य सरकार की कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है।


मार्च 2027 तक निर्माण पूरा करने के निर्देश

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मांग आधारित प्रक्रिया के अंतर्गत भवनविहीन आंगनबाड़ी केंद्रों को प्राथमिकता के साथ स्वीकृति दी जाए और मार्च 2027 तक निर्माण कार्य पूर्ण कराया जाए।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा नियमित मॉनिटरिंग के माध्यम से प्रगति की समीक्षा की जाएगी।


बस्तर में विकास, विश्वास और सुशासन की नई तस्वीर

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर संभाग में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

प्रदेश सरकार सड़क, स्वास्थ्य, बिजली, पेयजल और जनसुविधाओं के विस्तार के साथ अब बच्चों और महिलाओं के भविष्य को सुरक्षित करने वाले सामाजिक ढांचे को भी मजबूत कर रही है।

उन्होंने कहा कि मजबूत आंगनबाड़ी अवसंरचना गांवों में सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का आधार बनेगी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास, विश्वास और सुशासन के नए अध्याय को मजबूती देगी।

प्रधान सेवक के रूप में प्रधानमंत्री मोदी ने अंत्योदय को धरातल पर उतारने का ऐतिहासिक कार्य किया - मुख्यमंत्री श्री साय

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के समग्र विकास को मिली नई गति – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर 26 मई 2026/मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘प्रधान सेवक’ के रूप में राष्ट्रसेवा, सुशासन और जनकल्याण को समर्पित सफल 12 वर्ष पूर्ण होने पर हार्दिक बधाई एवं अभिनंदन व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी, निर्णायक और जनकेंद्रित नेतृत्व में भारत ने सेवा, सुरक्षा, आत्मविश्वास और विकास के नए युग में प्रवेश किया है।

  raipur /   मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि बीते 12 वर्षों में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने शासन की सोच और कार्यशैली को बदलते हुए सेवा, सुशासन और अंत्योदय की भावना को केंद्र में रखा तथा यह सुनिश्चित किया कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि गरीब, किसान, महिला, युवा, वंचित और जनजातीय समाज के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का जो संकल्प प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने लिया, वह आज देश के कोने-कोने में दिखाई देता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में आज भारत आत्मविश्वास, सुरक्षा और वैश्विक प्रतिष्ठा के नए आयाम स्थापित कर रहा है। मजबूत अर्थव्यवस्था, आधुनिक अधोसंरचना, डिजिटल क्रांति, आत्मनिर्भरता, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक समावेशन की दिशा में देश ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। विकसित भारत @2047 का संकल्प आज जनभागीदारी और विश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के संदर्भ में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व विशेष रूप से प्रेरणादायी रहा है। दशकों तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे बस्तर और वनांचल क्षेत्रों में आज विकास, विश्वास और जनकल्याण की नई धारा दिखाई दे रही है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, मोबाइल कनेक्टिविटी, बैंकिंग सुविधाओं और शासकीय योजनाओं की पहुँच दूरस्थ जनजातीय अंचलों तक सुनिश्चित हुई है, जिससे लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना, हर घर जल, जन-धन योजना और डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं ने गरीबों, किसानों, मातृशक्ति, युवाओं तथा जनजातीय समाज के जीवन में आशा, सम्मान और आत्मविश्वास का नया संचार किया है। उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सोच ने शासन को अधिक संवेदनशील और जवाबदेह बनाया है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र को केवल नारा नहीं रहने दिया, बल्कि उसे व्यवहार और नीति का आधार बनाया। इसी का परिणाम है कि आज देश विकास और सामाजिक समावेशन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी का नेतृत्व देश को केवल आर्थिक रूप से सशक्त नहीं बना रहा, बल्कि सांस्कृतिक आत्मगौरव, राष्ट्रीय एकता और जनभागीदारी की भावना को भी नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है। प्रधानमंत्री ने भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हुए देशवासियों में नए आत्मविश्वास का संचार किया है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में जनकल्याण, सुशासन और अंत्योदय के संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचे और विकास का लाभ समाज के हर वर्ग को मिले।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने समस्त छत्तीसगढ़वासियों की ओर से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को पुनः बधाई देते हुए उनके स्वस्थ, यशस्वी और दीर्घायु जीवन की कामना की तथा विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में भारत विकसित राष्ट्र बनने के संकल्प को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।

काम में बेवजह देरी करने वाली एजेंसियों पर होगी सख्त कार्रवाई

बिलासपुर में वर्किंग वुमेन हॉस्टल और मोबाइल कनेक्टिविटी परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश

रायपुर,  / छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज मंत्रालय (महानदी भवन) में ई-प्रगति पोर्टल में दर्ज राज्य की अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजनाओं की प्रगति की व्यापक समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि सभी परियोजनाओं के कार्यों में तेजी लाई जाए और आ रही बाधाओं को तत्काल दूर कर नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में बेवजह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और लापरवाही बरतने वाली निर्माण एजेंसियों पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

ई-प्रगति पोर्टल की 5 प्रमुख परियोजनाएं

समीक्षा बैठक में विशेष रूप से पोर्टल पर दर्ज राज्य की 5 अति-महत्वपूर्ण परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की गई। वर्किंग वुमेन हॉस्टल, उसलापुर (बिलासपुर), वर्किंग वुमेन हॉस्टल, कोनी (बिलासपुर), 4G स्टेशन DVN मोबाइल टॉवर स्थापना (बिलासपुर), मोबाइल टॉवर हेतु विद्युत अधोसंरचना परियोजना (बिलासपुर) और सिकारसर कोडार रिसीवर लिंक कैनाल (गरियाबंद जिला)

साप्ताहिक मॉनिटरिंग और कड़े प्रशासनिक निर्देश

मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया है कि वे प्रत्येक परियोजना की साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट ई-पोर्टल पर फोटो जियोटैग (Photo Geo-tag) के साथ अनिवार्य रूप से अपलोड करें, ताकि कार्यों की वास्तविक स्थिति की पारदर्शी मॉनिटरिंग हो सके। उन्होंने जिलों में मोबाइल टॉवर स्थापना के मार्ग में आ रही भूमि आवंटन या अन्य तकनीकी दिक्कतों को संबंधित कलेक्टरों से समन्वय कर शीघ्र दूर करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने संबंधित जिलों के कलेक्टरों को व्यक्तिगत रूप से रुचि लेकर ई-प्रगति पोर्टल की परियोजनाओं की दैनिक समीक्षा करने और उनमें तेजी लाने को कहा है।

इस समीक्षा बैठक में मंत्रालय से सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, जल संसाधन विभाग तथा उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से राज्य के 21 जिलों के कलेक्टर शामिल हुए, जिनमें बीजापुर, कांकेर, कोरबा, मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, नारायणपुर, रायगढ़, सुकमा, बलौदाबाजार-भाटापारा, बलरामपुर, धमतरी, गरियाबंद, जशपुर, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, मुंगेली, सरगुजा, सूरजपुर, दंतेवाड़ा एवं कोण्डागांव शामिल हैं।

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