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विश्व रेडियो दिवस पर रायपुर में राष्ट्रीय स्तर का विशेष आयोजन; आकाशवाणी और यूनेस्को ने 'रेडियो और एआईÓ थीम पर साझा किया भविष्य का रोडमैप
रायपुर / शौर्यपथ / विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर आज छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आकाशवाणी और यूनेस्को द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित राष्ट्रीय स्तर के एक विशेष कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ हुआ। राज्य के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस गरिमामय समारोह का उद्घाटन किया। इस वर्ष विश्व रेडियो दिवस की थीम 'रेडियो और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसÓ (्रढ्ढ) रखी गई है, जो सूचना क्रांति के इस दौर में रेडियो की प्रासंगिकता और आधुनिक तकनीक के समन्वय पर केंद्रित है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर रेडियो की विश्वसनीयता और एआई की गति के संगम को जनसेवा के लिए एक नई क्रांति बताया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आकाशवाणी सूचना, शिक्षा और स्वस्थ मनोरंजन देने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अंचलों और किसानों के जीवन में रेडियो की भूमिका आज भी अद्वितीय है। श्री साय ने जोर देकर कहा कि तेज गति से समाचार देने की प्रतिस्पर्धा के बीच आकाशवाणी ने विश्वसनीय, संतुलित और जनहितकारी सूचना देने की अपनी परंपरा को कायम रखते हुए एक विशेष पहचान बनाई है। उन्होंने एआई के उपयोग पर चिंतन की आवश्यकता बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में एफ.एम. ट्रांसमीटरों के विस्तार से जल्द ही राज्य की करीब 95 प्रतिशत आबादी तक आकाशवाणी की पहुंच सुनिश्चित हो जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'मन की बातÓ जैसे लोकप्रिय कार्यक्रम के लिए रेडियो का चयन इसकी व्यापक पहुंच और प्रभाव को दर्शाता है।
आकाशवाणी के महानिदेशक श्री राजीव जैन ने स्वागत भाषण देते हुए रेडियो को समाज के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि रेडियो ने न सिर्फ देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संजोया है, बल्कि देश की प्रगति में समाज के सभी वर्गों को जोड़ा है। श्री जैन ने जानकारी दी कि 23 भाषाओं और 182 बोलियों के माध्यम से आकाशवाणी देश के दूरदराज के हिस्सों को मुख्यधारा से जोडऩे का प्रयास कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बदलती तकनीक के साथ आकाशवाणी भी खुद को ढाल रहा है और अब एआई का उपयोग इस तरह किया जाएगा कि इसकी विश्वसनीयता और श्रोताओं के साथ आत्मीय रिश्ता निरंतर बना रहे।
समारोह के दौरान यूनेस्को की क्षेत्रीय संचार और सूचना सलाहकार सुश्री हज्जाज माले ने भी रेडियो की व्यापक पहुंच और विश्वसनीयता की सराहना की। कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण राष्ट्रगीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विशेष स्मारक श्रृंखला 'स्वाधीनता का जयघोषÓ के अंतर्गत छह संगीत प्रस्तुतियों का डिजिटल विमोचन रहा। इस अवसर पर रेडियो की विकास यात्रा पर आधारित एक प्रदर्शनी भी लगाई गई और विशेषज्ञों द्वारा एआई के प्रभावी उपयोग पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ विशेषज्ञों ने भविष्य की संचार चुनौतियों और रेडियो की भूमिका पर मंथन किया।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने राज्य की बिजली कंपनियों द्वारा दायर याचिकाओं पर जन-सुनवाई का कार्यक्रम जारी किया है। आयोग से प्राप्त जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत पारेषण कंपनी लिमिटेड, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड तथा छत्तीसगढ़ राज्य भार पोषण केंद्र द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 के ट्रूअप, वर्ष 2026-27 से 2029-30 तक वार्षिक राजस्व आवश्यकता (्रक्रक्र), टैरिफ निर्धारण तथा पूंजीगत निवेश योजना के अनुमोदन से संबंधित याचिकाओं पर क्षेत्रीय स्तर पर ऑनलाइन जन-सुनवाई आयोजित की जाएगी।
आयोग ने बताया कि याचिकाओं का सारांश पूर्व में समाचार पत्रों और आयोग की वेबसाइट www.cserc.gov. in पर प्रकाशित किया जा चुका है तथा इच्छुक उपभोक्ता और हितधारक निर्धारित तिथियों पर संबंधित क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से सुनवाई में भाग ले सकते हैं। निर्धारित कार्यक्रम के तहत 17 फरवरी 2026 को दुर्ग (प्रात: 10:30 से 12:00 बजे तक), बिलासपुर (दोपहर 12:00 से 01:30 बजे तक) और राजनांदगांव (दोपहर 03:00 से 04:30 बजे तक) में जन-सुनवाई होगी।
जबकि 18 फरवरी 2026 को अंबिकापुर (प्रात: 10:30 से 12:00 बजे तक), जगदलपुर (दोपहर 12:00 से 01:30 बजे तक) और रायगढ़ (दोपहर 03:00 से 04:30 बजे तक) में जन-सुनवाई आयोजित की जाएगी। आयोग ने उपभोक्ताओं, जन-प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों से जन-सुनवाई में सक्रिय भागीदारी की अपील की है, ताकि टैरिफ निर्धारण प्रक्रिया में पारदर्शिता और सहभागिता सुनिश्चित की जा सके।
राजनांदगांव/शौर्यपथ / जिले में शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस चौकी चिखली एवं सायबर सेल की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध हथियारों के साथ 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 02 पिस्टल, 02 देशी कट्टा एवं 01 जिंदा कारतूस बरामद किया गया है।
12 फरवरी 2026 को शंकरपुर क्षेत्र के नागरिकों द्वारा सूचना दी गई कि कुछ युवक डब्बा मैदान कब्रिस्तान के पास पिस्टल एवं कट्टा लहराकर लोगों को डरा-धमका रहे हैं। सूचना मिलते ही चौकी चिखली प्रभारी द्वारा टीम गठित कर मौके पर दबिश दी गई। पुलिस को देखकर चार युवक भागने लगे, जिन्हें घेराबंदी कर पकड़ लिया गया। पूछताछ में आरोपियों ने अपने नाम शिवम सिन्हा उर्फ चार्ली (26 वर्ष, निवासी शंकरपुर), डिगम्बर साहू उर्फ छोटू (27 वर्ष, निवासी पेण्ड्री), सेवक कश्यप उर्फ डाला (22 वर्ष, निवासी शंकरपुर) एवं गुंजेश वर्मा उर्फ शिवा (26 वर्ष, निवासी शंकरपुर) बताए। गवाहों की उपस्थिति में तलाशी लेने पर शिवम के कब्जे से एक पिस्टल एवं जिंदा कारतूस तथा डिगम्बर के पास से एक देशी कट्टा बरामद हुआ।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि अवैध हथियार मध्यप्रदेश के धार-बड़वानी क्षेत्र से खरीदकर लाए गए थे, जिनका उपयोग क्षेत्र में रौब जमाने एवं अवैध बिक्री के लिए किया जाना था। आरोपियों की निशानदेही पर दुर्ग में दबिश देकर विक्की देशमुख उर्फ मोनू (25 वर्ष, निवासी चन्द्रखुरी, दुर्ग) के कब्जे से एक देशी कट्टा जब्त किया गया। वहीं सूचना के आधार पर मोहारा पुल के पास घेराबंदी कर उमेश साहू उर्फ बठालू (26 वर्ष, निवासी गोकुलपुर, धमतरी) एवं जतीनदास मानिकपुरी (27 वर्ष, निवासी धमतरी) को गिरफ्तार किया गया, जिनके कब्जे से एक पिस्टल बरामद हुआ। प्रकरण में कुल सात आरोपियों द्वारा संगठित होकर अवैध रूप से पिस्टल एवं कट्टा रखने पाए जाने पर धारा 111 बीएनएस तथा 25, 27 आर्म्स एक्ट के तहत विधिवत कार्रवाई की गई है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों के विरुद्ध पूर्व में भी कई गंभीर आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं।
यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक सुश्री अंकिता शर्मा के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर के मार्गदर्शन एवं नगर पुलिस अधीक्षक श्रीमती वैशाली जैन (भापुसे) के पर्यवेक्षण में की गई। चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक कैलाश चन्द्र मरई सहित चिखली पुलिस व सायबर सेल टीम की भूमिका सराहनीय रही। जिले में अवैध हथियार रखने एवं असामाजिक गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा।
रसूख के दम पर कब्जे का आरोप: पुलगांव नाले से पचरी घाट तक भूमि विवाद, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
दुर्ग। शौर्यपथ की विशेष रिपोर्ट
शहर के प्रतिष्ठित व्यापारी के रूप में पहचाने जाने वाले ताराचंद रमेश कुमार जैन एक बार फिर भूमि विवाद के केंद्र में हैं। आरोप है कि उन्होंने सरकारी नाले से सटी भूमि, समाज की जमीन, मंदिर परिसर और अब एक गरीब किसान की निजी भूमि तक पर कब्जा करने की कोशिश की है। मामले ने तूल पकड़ लिया है और स्थानीय लोगों में आक्रोश व्याप्त है।
किसान की जमीन पर फिर खड़ा हुआ विवाद
किसान डोमन सिन्हा ने आरोप लगाया है कि उनकी कृषि भूमि के सीमांकन से पूर्व ही ताराचंद रमेश कुमार जैन द्वारा खेत की मेड़ से लगभग 6 फीट बाहर बाउंड्री वॉल खड़ी कर दी गई।
बताया जा रहा है कि पूर्व में समाचार प्रकाशित होने के बाद जैन ने बाउंड्री तोड़कर मेड़ के अनुरूप दीवार उठाने का आश्वासन दिया था। किसान के अनुसार, कुछ दिनों तक काम रुका रहा, लेकिन जब वह खेत की ओर नहीं गया तो दोबारा निर्माण शुरू कर दिया गया।
डोमन सिन्हा का कहना है कि सीमांकन की मांग के बावजूद सुबह 6 बजे से देर रात तक मजदूर लगाकर विवादित हिस्से में दीवार निर्माण जारी है।
नाले की सरकारी भूमि और मंदिर परिसर पर भी आरोप
स्थानीय सूत्रों के अनुसार पुलगांव नाले से सटी सरकारी भूमि पर भी पहले विवाद खड़ा हुआ था। जांच प्रक्रिया लंबित रहने के दौरान कथित रूप से बाउंड्री निर्माण कर लिया गया।
इसी तरह समाज की जमीन पर बने मंदिर को "नए स्वरूप" देने के नाम पर बड़े भूभाग पर निर्माण का आरोप लगाया गया है।
पचरी घाट का मुद्दा फिर गरमाया
पूर्व मंत्री स्वर्गीय हेमचंद यादव द्वारा निर्मित पचरी घाट का हिस्सा भी कथित रूप से अतिक्रमण की जद में बताया जा रहा है। घाट के पास लगी शिलालेख आज भी मौजूद है, लेकिन स्थानीय नागरिकों का कहना है कि घाट का एक बड़ा हिस्सा आम जनता की पहुंच से बाहर हो चुका है।
प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल
मामले की शिकायत थाना स्तर पर की जा चुकी है। किसान सीमांकन की मांग कर रहे हैं, वहीं आरोप है कि प्रशासनिक प्रक्रिया की धीमी रफ्तार का लाभ उठाकर निर्माण कार्य पूरा किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष राजस्व सीमांकन और स्थलीय जांच नहीं हुई तो विवाद और गहरा सकता है।
जनहित का सवाल
भूमि विवाद केवल दो पक्षों का मामला नहीं रह जाता, जब उसमें सरकारी जमीन, सार्वजनिक घाट और समाज की संपत्ति शामिल हो। ऐसे मामलों में पारदर्शिता, त्वरित सीमांकन और स्पष्ट प्रशासनिक निर्णय आवश्यक है, ताकि न तो किसी गरीब किसान के अधिकारों का हनन हो और न ही सार्वजनिक संपत्ति पर अतिक्रमण हो।
"शौर्यपथ" की ओर से यह स्पष्ट है कि कानून सबके लिए समान है—चाहे वह रसूखदार व्यापारी हो या साधारण किसान। यदि आरोपों में सच्चाई है तो संबंधित विभागों—राजस्व, नगर निगम और जिला प्रशासन—को तत्काल संयुक्त जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
अब निगाहें जिला प्रशासन पर हैं—क्या सीमांकन कराकर विवादित भूमि की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाएगी?
या फिर जांच और कागजी प्रक्रिया के बीच निर्माण की दीवारें और ऊंची होती जाएंगी?
आम जनता उम्मीद कर रही है कि सुशासन का दावा जमीनी स्तर पर भी दिखाई दे और सार्वजनिक व निजी भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
?? कॉलम बॉक्स: मामले की प्रमुख बातें
?? किसान की जमीन पर विवाद – डोमन सिन्हा ने आरोप लगाया कि खेत की मेड़ से लगभग 6 फीट बाहर बाउंड्री वॉल खड़ी की गई।
?? पूर्व में दिया गया आश्वासन – समाचार प्रकाशन के बाद दीवार तोड़कर मेड़ पर निर्माण का वादा, लेकिन दोबारा निर्माण शुरू होने का आरोप।
?? सीमांकन की मांग लंबित – किसान द्वारा राजस्व सीमांकन की मांग, निर्माण कार्य जारी रहने से विवाद गहराया।
?? सरकारी नाले की भूमि पर सवाल – पुलगांव नाले से सटी जमीन पर भी पहले कब्जे के आरोप और जांच प्रक्रिया जारी।
?? समाज की जमीन व मंदिर परिसर – "नए स्वरूप" के नाम पर बड़े हिस्से में निर्माण का आरोप।
?? स्व. हेमचंद यादव का पचरी घाट – पूर्व मंत्री द्वारा निर्मित घाट के हिस्से पर कथित अतिक्रमण, शिलालेख आज भी मौजूद।
?? प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल – शिकायत के बावजूद त्वरित कार्रवाई न होने से स्थानीय नागरिकों में असंतोष।
दुर्ग / शौर्यपथ।
दुर्ग जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) श्री बजरंग कुमार दुबे द्वारा 12 फरवरी 2026 को जिला पंचायत सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक अब प्रशासनिक निर्णय की संवेदनशीलता और व्यावहारिकता को लेकर चर्चा के केंद्र में है। बैठक का उद्देश्य मनरेगा निर्माण कार्य, समर्थ पोर्टल, संपदा पोर्टल, प्रधानमंत्री आवास योजना एवं स्वच्छ भारत मिशन सहित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा था, किंतु इसके आयोजन की पद्धति ने कर्मचारियों के बीच असंतोष को जन्म दिया है।
बैठक में धमधा जनपद से सचिव, रोजगार सहायक, तकनीकी सहायक सहित लगभग 160 से अधिक फील्ड स्तरीय कर्मचारियों को जिला मुख्यालय उपस्थित होने के निर्देश दिए गए। समीक्षा का एजेंडा महत्वपूर्ण अवश्य था, परंतु प्रश्न यह उठ रहा है कि क्या इस प्रकार की समीक्षा जनपद स्तर पर आयोजित नहीं की जा सकती थी?
बैठक के उपरांत नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कुछ कर्मचारियों ने बताया कि औसतन प्रत्येक कर्मचारी को लगभग ?300 या उससे अधिक का पेट्रोल/डीजल व्यय कर जिला मुख्यालय पहुंचना पड़ा। सामूहिक रूप से देखा जाए तो यह राशि ?50,000 से अधिक बैठती है। कर्मचारियों का मत है कि यदि जिला स्तरीय अधिकारी अपनी सीमित टीम के साथ जनपद स्तर पर बैठक आयोजित करते, तो ईंधन व्यय नगण्य रहता—अनुमानत: ?1,000 से भी कम में कार्य संपन्न हो सकता था।
विकेंद्रीकरण बनाम केंद्रीकृत समीक्षा
पंचायती राज अधिनियम एवं मनरेगा दिशा-निर्देशों में प्रशासनिक विकेंद्रीकरण और स्थानीय स्तर पर निगरानी पर विशेष बल दिया गया है। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि जब समीक्षा जनपद या वर्चुअल माध्यम से भी संभव थी, तब इतने बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को जिला मुख्यालय बुलाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
कर्मचारियों का कहना है कि वे पहले से वेतन संबंधी अनिश्चितताओं और आर्थिक दबाव से जूझ रहे हैं। ऐसे में व्यक्तिगत व्यय पर जिला स्तर पर बुलाया जाना उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ के समान है। इसे कुछ कर्मचारियों ने "नीतिगत संवेदनशीलता की कमी" और "मैदानी अमले की परिस्थितियों की अनदेखी" बताया।
प्रशासनिक प्राथमिकताएं या प्रोटोकॉल का प्रदर्शन?
प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा भी है कि जिला स्तर की बैठकें आवश्यक अवश्य होती हैं, किंतु संसाधनों की मितव्ययिता, समय की बचत और मैदानी अमले की कार्यक्षमता को ध्यान में रखते हुए आयोजन की पद्धति पर विचार अपेक्षित है। डिजिटल माध्यमों की उपलब्धता और स्थानीय समीक्षा तंत्र के रहते केंद्रीकृत बुलावे को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
यह भी उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी कुछ प्रशासनिक निर्णय—जैसे अल्प पारदर्शिता वाले व्यय, टेंडर प्रक्रियाओं को लेकर उठी चर्चाएं—समीक्षा के दायरे में रहे हैं। हालांकि इन विषयों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है, किंतु कर्मचारियों के बीच असंतोष की पृष्ठभूमि में यह बैठक एक और उदाहरण के रूप में देखी जा रही है।
विकास समीक्षा या मनोबल पर प्रभाव?
विकास योजनाओं की समीक्षा प्रशासनिक दायित्व है, इसमें कोई दो राय नहीं। किंतु जब समीक्षा की प्रक्रिया ही कर्मचारियों के मनोबल और संसाधनों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने लगे, तब प्रशासनिक दृष्टिकोण पर पुनर्विचार अपेक्षित हो जाता है।
जिला पंचायत के इस निर्णय ने एक बड़ा प्रश्न खड़ा किया है—
क्या प्रशासनिक सख्ती और संवेदनशीलता के बीच संतुलन बन पाना अब भी चुनौती बना हुआ है?
दुर्ग जिला पंचायत की यह बैठक विकास योजनाओं की प्रगति के लिए आयोजित की गई थी, किंतु अब यह स्वयं प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर समीक्षा का विषय बन चुकी है।
व्यक्तिगत दुर्घटना पर 1.25 करोड़ रूपए का बीमा कवर
हवाई दुर्घटना बीमा एक करोड़ रूपए
बिटिया की शादी और बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए भी लाभ
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ सरकार के नियमित कर्मचारियों को आकर्षक एवं व्यापक बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बैंक ऑफ महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ़ शासन के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत बैंक में वेतन खाता संचालित करने वाले राज्य सरकार के सभी नियमित कर्मचारियों को ‘गवर्नमेंट प्राइड सैलरी सेविंग स्कीम’ के अंतर्गत उन्नत निःशुल्क सुविधाएं एवं बीमा कवर प्रदान किए जाएंगे।
समझौते के अनुसार बैंक ऑफ महाराष्ट्र द्वारा खाताधारक कर्मचारियों को व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा एक करोड़ 25 लाख रूपए तक, हवाई दुर्घटना बीमा एक करोड़ रूपए तक, स्थायी पूर्ण विकलांगता कवर एक करोड़ 25 लाख रूपए तक तथा टर्म इंश्योरेंस 10 लाख रूपए प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही गोल्डन आवर के अंतर्गत 1 लाख रूपए तक कैशलेस उपचार सुविधा उपलब्ध होगी। कर्मचारियों को बालिका विवाह लाभ 10 लाख रूपए तक एवं बच्चों की उच्च शिक्षा हेतु 10 लाख रूपए तक का लाभ भी प्रदान किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त खाताधारकों को अन्य आकर्षक बैंकिंग लाभ उपलब्ध कराए जाएंगे तथा स्वास्थ्य बीमा पर टॉप-अप जैसी वैकल्पिक सुविधाएं रियायती दरों पर प्रदान की जाएंगी। यह समझौता ज्ञापन 10 फरवरी 2026 को श्रीमती शीतल शाश्वत वर्मा, विशेष सचिव, वित्त विभाग, छत्तीसगढ़ शासन तथा श्री वी. वेंकटेश, अंचल प्रबंधक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, रायपुर अंचल की उपस्थिति में संपन्न हुआ। यह पहल राज्य सरकार के नियमित कर्मचारियों को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक एवं लाभप्रद बैंकिंग सुविधा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
दुर्ग / शौर्यपथ / शहर में सामने आए कथित सामूहिक दुष्कर्म प्रकरण ने अब गंभीर राजनीतिक मोड़ ले लिया है। घटना को लेकर आमजन में आक्रोश है तो वहीं पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। छह आरोपियों के विरुद्ध दर्ज मामले में अब तक चार की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन दो आरोपी—भीम नारायण पाण्डेय और संजय पंडित—अब भी फरार हैं। लगातार हो रही देरी से पुलिस की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठ रही हैं।
NSUI ने सौंपा ज्ञापन, 5 दिन का अल्टीमेटम
भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने जिला अध्यक्ष गुरलीन सिंह के नेतृत्व में पुलिस अधीक्षक दुर्ग को ज्ञापन सौंपते हुए फरार आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग की है। संगठन का आरोप है कि गिरफ्तारी में अनावश्यक विलंब हो रहा है, जिससे जनता में असंतोष बढ़ रहा है।
NSUI ने चेतावनी दी है कि यदि पांच दिनों के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो लोकतांत्रिक तरीके से उग्र आंदोलन किया जाएगा।
SIT गठन न होने पर भी सवाल
घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद विशेष जांच दल (SIT) का गठन नहीं होना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। संगठन ने आशंका जताई है कि कहीं किसी प्रभावशाली व्यक्ति या जनप्रतिनिधि का दबाव जांच को प्रभावित तो नहीं कर रहा। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सांसद विजय बघेल का नाम चर्चा में
शहर के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि फरार आरोपी भीम नारायण पाण्डेय को पूर्व में सांसद विजय बघेल का करीबी बताया जाता रहा है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। स्वयं सांसद विजय बघेल ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि पीड़िता को न्याय मिलना चाहिए और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
पुलिस का पक्ष
पुलिस प्रशासन का कहना है कि फरार आरोपियों की तलाश लगातार जारी है और विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार टीम संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
जनता की नजरें अगली कार्रवाई पर
यह मामला अब केवल एक आपराधिक प्रकरण नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक संवेदनशीलता का विषय बन चुका है। एक ओर पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग तेज है, तो दूसरी ओर पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
अब पूरे शहर की निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। जल्द गिरफ्तारी ही इस मामले में कानून के प्रति जनता का भरोसा कायम रख पाएगी।
केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की मंजूरी, जिला प्रस्तावों पर विस्तृत समीक्षा के बाद निर्णय
रायपुर / शौर्यपथ।
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संपत्ति पंजीयन से संबंधित गाइडलाइन दरों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया के तहत बिलासपुर, कोरिया एवं सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों की संशोधित गाइडलाइन दरों को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। ये नई दरें 13 फरवरी 2026 से प्रभावशील होंगी।
उल्लेखनीय है कि राज्य में 20 नवम्बर 2025 से नवीन गाइडलाइन दरें लागू की गई थीं। इसके साथ ही राज्य शासन ने सभी जिला मूल्यांकन समितियों को आवश्यकता के अनुसार दरों के पुनरीक्षण हेतु प्रस्ताव केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को प्रेषित करने के निर्देश दिए थे।
इसी क्रम में बिलासपुर, कोरिया एवं सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों से संशोधित गाइडलाइन दरों के प्रस्ताव प्राप्त हुए। इन प्रस्तावों पर विचार के लिए उप महानिरीक्षक पंजीयन की अध्यक्षता में केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्राप्त प्रस्तावों का विस्तृत परीक्षण एवं समग्र समीक्षा की गई।
गहन विचार-विमर्श के उपरांत केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड ने तीनों जिलों के प्रस्तावों को अनुमोदित कर दिया। बोर्ड द्वारा स्वीकृत संशोधित दरें 13 फरवरी 2026 से संबंधित जिलों में लागू होंगी, जिससे संपत्ति पंजीयन, क्रय-विक्रय एवं राजस्व निर्धारण की प्रक्रिया अद्यतन दरों के आधार पर संचालित की जाएगी।
राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि आम नागरिक एवं संबंधित हितधारक नवीन गाइडलाइन दरों की जानकारी संबंधित जिला पंजीयन कार्यालयों तथा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही अन्य जिलों से प्राप्त होने वाले संशोधित प्रस्तावों का परीक्षण उपरांत गाइडलाइन दरें चरणबद्ध रूप से जारी की जाएंगी।
यह निर्णय पारदर्शिता, राजस्व संतुलन एवं बाजार दरों के अनुरूप मूल्य निर्धारण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।
सिक्किम के पत्रकारों को भाया छत्तीसगढ़, कहा - छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और लोगों का आत्मीय व्यवहार अत्यंत प्रभावित करने वाला
“छत्तीसगढ़ ने भारतीय होने का गर्व कराया” – पत्रकार सुश्री अर्चना प्रधान
सिक्किम से अध्ययन भ्रमण पर आए पत्रकारों ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, किसान हितैषी योजनाओं, उद्योग नीति तथा नक्सल पुनर्वास नीति को मिली सराहना
रायपुर / छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर प्रदेश है और धन-धान्य से पुष्पित-पल्लवित इस धरा को हमारी सरकार सुंदर, समृद्ध, सुरक्षित और विकसित बनाने के लिए संकल्पित होकर काम कर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में सिक्किम राज्य से अध्ययन भ्रमण पर पहुंचे पत्रकारों के दल से मुलाकात कर आत्मीय संवाद किया और उनसे छत्तीसगढ़ को लेकर ढेर सारी बातें साझा की। उन्होंने सभी अतिथियों को राजकीय गमछा भेंट कर छत्तीसगढ़ में स्वागत और अभिवादन किया। मुख्यमंत्री की सहृदयता और आतिथ्य पाकर सभी पत्रकार अभिभूत हुए और उन्हें सिक्किम आने का निमंत्रण भी दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ 44 प्रतिशत वन क्षेत्र से आच्छादित है तथा यहां 31 प्रतिशत आदिवासी समुदाय निवासरत है। वनोपज संग्रहण और मूल्य संवर्धन के माध्यम से जनजातीय समुदाय आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं। जशपुर जिले में स्व-सहायता समूह की महिलाएं ‘जशप्योर’ ब्रांड के अंतर्गत उत्पाद तैयार कर आय अर्जित कर रही हैं। उन्होंने बताया कि तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए सरकार द्वारा 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से भुगतान किया जा रहा है तथा चरण पादुका योजना के तहत निःशुल्क चप्पल प्रदान की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह की चिंता को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2005 में इस योजना की शुरुआत की गई थी। हाल ही छह हजार से अधिक जोड़े इस योजना के अंतर्गत विवाह बंधन में बंधे, जिसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी स्थान प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि योजना के तहत नवदंपतियों को 35 हजार रुपये की आर्थिक सहायता एवं 15 हजार रुपये का सामग्री सहयोग प्रदान किया जाता है।
नक्सलवाद के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के सफल नेतृत्व और दृढ़ इच्छाशक्ति के चलते प्रदेश में नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है। राज्य सरकार की आकर्षक पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को 50 हजार रुपये की सहायता तथा तीन वर्षों तक प्रति माह 10 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। अब तक 2,500 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें रोजगार से जोड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। श्री साय ने बताया कि जगदलपुर में आत्मसमर्पित नक्सलियों द्वारा ‘बस्तर पंडुम’ कैफे का सफल संचालन इसका सशक्त उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के अंतर्गत 17 शासकीय योजनाओं को दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाया गया है, जिससे सड़क, बिजली, पानी, राशन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की पहुंच सुदृढ़ हुई है। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र अब विकास की मुख्यधारा से तेजी से जुड़ रहे हैं। पर्यटन की संभावनाओं पर मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। चित्रकोट जलप्रपात, कुटुम्बसर गुफाएं, अबूझमाड़ के वन और धुड़मारास जैसे स्थल प्रदेश की पहचान हैं। ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु होम स्टे को उद्योग का दर्जा दिया गया है, जिसके तहत ग्रामीणों को पांच कमरों तक निर्माण के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य एवं औद्योगिक विकास के संदर्भ में जानकारी देते हुए बताया कि नवा रायपुर में 100 एकड़ क्षेत्र में मेडिसिटी का निर्माण किया जा रहा है, जहां निम्न आय वर्ग के लिए सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने प्रदेश की आकर्षक नवीन औद्योगिक नीति का ज़िक्र करते हुए कहा कि इसके तहत राज्य को लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। साथ ही चित्रोत्पला फिल्म सिटी की स्थापना से प्रदेश में फिल्म उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
“छत्तीसगढ़ ने भारतीय होने का गर्व कराया” – सुश्री अर्चना प्रधान
सिक्किम की पत्रकार सुश्री अर्चना प्रधान ने कहा कि छत्तीसगढ़ में ‘मेक इन इंडिया’ का प्रभावी स्वरूप देखने को मिला। भिलाई स्टील प्लांट में रेल पटरियों सहित विभिन्न इस्पात उत्पादों का निर्माण प्रदेश के औद्योगिक सामर्थ्य को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के औद्योगिक इकाइयों को हमें करीब से देखने का मौका मिला और हम जान पाए है कि इस प्रदेश का देश के विकास में कितना महत्वपूर्ण योगदान है।
सिक्किम के पत्रकारों को भाया छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री से भ्रमण उपरांत मिलने पहुंचे पत्रकारों ने कहा कि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और लोगों का आत्मीय व्यवहार अत्यंत प्रभावित करने वाला है। उन्होंने भ्रमण के दौरान प्राप्त अनुभवों को साझा करते हुए स्थानीय खान-पान और सांस्कृतिक विरासत की सराहना की। सिक्किम से आए पत्रकारों ने अपने पांच दिवसीय भ्रमण के दौरान भिलाई स्टील प्लांट, गेवरा ओपन माइंस, नवा रायपुर तथा जनजातीय संग्रहालय का अवलोकन किया। पत्रकारों ने बताया कि छत्तीसगढ़ भ्रमण की सुंदर स्मृतियों को अपने साथ लेकर जा रहे हैं, जो उन्हें आजीवन याद रहेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, किसानों के हित में की गई घोषणाओं, स्वच्छ वातावरण तथा पुनर्वास नीति की सराहना की।
मुख्यमंत्री को भेंट किया सिक्किम का स्मृति चिन्ह ‘थांका’
पत्रकारों के दल ने मुख्यमंत्री को सिक्किम की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक ‘थांका’ पेंटिंग भेंट की। मुख्यमंत्री ने इस उपहार के लिए आभार व्यक्त करते हुए इसे स्नेह और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रतीक बताया।
पत्रकारों ने बताया कि सिक्किम का थांका पेंटिंग एक पवित्र स्मृति चिन्ह है, जो सूती या रेशमी कपड़े पर बौद्ध देवताओं, मंडलों और बुद्ध के जीवन दृश्यों को दर्शाता है। यह हस्तनिर्मित कला सिक्किम की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है, जिसे अक्सर घर की सजावट और सकारात्मक ऊर्जा के लिए लाया जाता है। इन्हें रोल करके आसानी से ले जाया जा सकता है, जो यात्रियों के लिए एक बेहतरीन सोवेनियर है। यह पारंपरिक कलाकृति सिक्किम के निवासियों के लिए धार्मिक विश्वास और आस्था का प्रतीक है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा, मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री आर. कृष्णा दास, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी श्री आलोक सिंह, पीआईबी गंगटोक के सहायक निदेशक श्री मानस प्रतिम शर्मा, पीआईबी रायपुर के सहायक निदेशक श्री सुदीप्तो कर, श्री पुरुषोत्तम झा और श्री सरद बसनेत,
पत्रकार श्री बेनु प्रकाश तिवारी, श्री विकास क्षेत्री, श्री होमनाथ दाबरी, श्री ईश्वर, सुश्री अर्चना प्रधान, सुश्री अनुशीला शर्मा, श्री प्रकाश अधिकारी, श्री ललित दहल, श्री विनोद तमंग, श्री मोहन कुमार कार्की, श्री नार बहादुर क्षेत्री उपस्थित थे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
