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घास भूमि पर कब्जे के बावजूद जारी निर्माण की शिकायत, शासकीय नाले का रास्ता बदलने से फसलों को नुकसान का आरोप
दुर्ग / शौर्यपथ / कलेक्टर अभिजीत सिंह ने जिला कार्यालय में आयोजित जनदर्शन में नागरिकों की समस्याएं सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। जनदर्शन में अवैध कब्जा, आवासीय पट्टा, प्रधानमंत्री आवास, भूमि सीमांकन, सड़क निर्माण, ऋण पुस्तिका सुधार और आर्थिक सहायता सहित विभिन्न विषयों पर 84 आवेदन प्राप्त हुए।
हटाने के आदेश के बाद भी निर्माण जारी
पाटन तहसील के ग्राम बोदल में शासकीय घास भूमि पर अतिक्रमण कर मकान निर्माण किए जाने की शिकायत सामने आई। शिकायतकर्ता के अनुसार, अतिक्रमण के कारण आम रास्ते की चौड़ाई पहले के लगभग 20 फीट से घटकर करीब 3.4 मीटर रह गई है। दोनों पक्षों के दस्तावेजों और पटवारी प्रतिवेदन के आधार पर अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी होने के बावजूद कब्जा नहीं हटाया गया और निर्माण दोबारा शुरू कर दिया गया। कलेक्टर ने तहसीलदार पाटन को त्वरित कार्रवाई कर प्रकरण का निराकरण करने के निर्देश दिए।
मोबाइल टावर लगाने पर मोहल्लेवासियों की आपत्ति
भिलाई के वार्ड क्रमांक 25 स्थित हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र के निवासियों ने छत पर पहले से मोबाइल टावर लगे होने के बावजूद दोबारा टावर लगाने के कार्य पर आपत्ति जताई। उन्होंने बिना अनुमति निर्माण किए जाने और विद्युतचुंबकीय विकिरण के संभावित स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त की। कलेक्टर ने ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
नाले का रास्ता बदलने से खेतों में जलभराव
ग्राम पंचायत मेड़ेसरा, तहसील अहिवारा के ग्रामीण ने शासकीय नाले का प्राकृतिक मार्ग बदलकर संकरा करने और शेष भूमि पर खेती किए जाने की शिकायत की। उनका कहना है कि इससे बारिश और बाढ़ का पानी खेतों में भर रहा है, जिससे फसलों को नुकसान और खेतों की मेड़ों का कटाव हो रहा है। कलेक्टर ने तहसीलदार अहिवारा को मौके पर जांच एवं नाप कराकर अतिक्रमण पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
जनदर्शन में कलेक्टर ने अधिकारियों को प्राप्त शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई करते हुए नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने को कहा।
माँ दुर्गा की आराधना के साथ नागरिकों को साइबर फ्रॉड से बचाव और बच्चों की शिक्षा के अधिकारों के प्रति किया जागरूक
दुर्ग / शौर्यपथ / नवरात्र केवल आस्था, उपासना और शक्ति की आराधना का पर्व नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक चेतना, सुरक्षा और जागरूकता का संदेश प्रसारित करने का भी अवसर है। इसी भावना को जनसेवा से जोड़ते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग द्वारा नवरात्र के अवसर पर आयोजित दुर्गा पूजा पंडालों में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित किए गए। इस अनूठी पहल के माध्यम से धार्मिक उत्सव में शामिल नागरिकों तक कानून, डिजिटल सुरक्षा और शिक्षा के अधिकार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ पहुँचाई गई।
यह पहल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव उमेश कुमार भागवतकर के निर्देशन में संचालित की गई। इसका उद्देश्य आमजन को उनके कानूनी अधिकारों और उपलब्ध विधिक सहायता के प्रति जागरूक करना तथा ऐसे सार्वजनिक आयोजनों को जनहितकारी संदेशों के प्रसार का माध्यम बनाना रहा।
आस्था के साथ जागरूकता का संगम
नवरात्र के दौरान दुर्गा पूजा पंडालों में बड़ी संख्या में नागरिक, महिलाएँ, युवा और परिवार एकत्रित होते हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग ने इस जनसहभागिता को विधिक जागरूकता से जोड़ते हुए लोगों के बीच पहुँचकर सरल भाषा में उपयोगी कानूनी जानकारियाँ साझा की। इन शिविरों की विशेषता यह रही कि विधिक साक्षरता को न्यायालय परिसर तक सीमित रखने के बजाय आम नागरिकों के दैनिक जीवन और सामाजिक सहभागिता के बीच पहुँचाने का प्रयास किया गया। भक्ति के वातावरण में आयोजित इन जागरूकता गतिविधियों ने धार्मिक आयोजन को सामाजिक उत्तरदायित्व और नागरिक चेतना से जोड़ने का संदेश दिया।
साइबर फ्रॉड से बचावः डिजिटल युग में सतर्कता ही सुरक्षा
शिविरों में नागरिकों को साइबर धोखाधड़ी के विभिन्न तरीकों के प्रति सचेत किया गया। ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, ओटीपी साझा करने, संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने तथा डिजिटल माध्यमों से होने वाली अन्य धोखाधड़ी से बचने के लिए आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी गई। लोगों को समझाया गया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें, संदिग्ध संदेशों और लिंक से सावधान रहें तथा साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल संबंधित बैंक और साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 के माध्यम से सहायता लेने की दिशा में कदम उठाएँ। इस जागरूकता का उद्देश्य नागरिकों को केवल साइबर अपराध के प्रति सचेत करना ही नहीं, बल्कि उन्हें डिजिटल दुनिया में अधिक सुरक्षित और जिम्मेदार व्यवहार के लिए प्रेरित करना भी था।
शिक्षा का अधिकार और नाल्सा की नवीन शिक्षा योजना, 2026
कार्यक्रम में बच्चों की शिक्षा और उनके अधिकारों से संबंधित विषयों को भी प्रमुखता दी गई। नागरिकों को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की शिक्षा योजना, 2026 के संबंध में जानकारी देते हुए शिक्षा के अधिकार, बच्चों के हितों की सुरक्षा तथा जरूरतमंद पात्र व्यक्तियों तक विधिक सहायता पहुँचाने के महत्व पर प्रकाश डाला गया। इस पहल के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि शिक्षा केवल व्यक्तिगत विकास का साधन नहीं, बल्कि एक जागरूक, सशक्त और न्यायपूर्ण समाज की आधारशिला भी है। बच्चों की शिक्षा से जुड़े अधिकारों और उपलब्ध सहायता के प्रति जागरूकता बढ़ाना सामाजिक उत्तरदायित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
न्याय को नागरिकों के करीब लाने की पहल
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग की यह पहल इस विचार को रेखांकित करती है कि विधिक जागरूकता के लिए नागरिकों को केवल संस्थागत केंद्रों तक आने की प्रतीक्षा करना आवश्यक नहीं है; जनसामान्य जहाँ एकत्रित होता है, वहाँ तक भी कानून और अधिकारों की जानकारी पहुँचाई जा सकती है। नवरात्र के पावन अवसर पर आयोजित इन शिविरों ने भक्ति, सामाजिक उत्तरदायित्व और विधिक जागरूकता को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास किया। माँ दुर्गा की आराधना के बीच नागरिकों को साइबर सुरक्षा और बच्चों की शिक्षा के अधिकारों के प्रति जागरूक करने की यह पहल जनहित में कानून को सरल, सुलभ और जीवनोपयोगी बनाने की दिशा में एक सार्थक कदम है।
‘Certificate of Excellence’ से सम्मानित हुआ जिला, कृषि विकास, फसल विविधीकरण और किसानों की आजीविका बढ़ाने के प्रयासों को मिली पहचान
रायपुर । प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले को कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से जिले को ‘Certificate of Excellence’ प्रदान किया गया। इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए दंतेवाड़ा जिले के प्रशासन, कृषि विभाग और किसानों को बधाई दी है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दंतेवाड़ा को मिला यह राष्ट्रीय सम्मान पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के मार्गदर्शन में प्रशासनिक टीम, कृषि विभाग और मेहनतकश किसानों ने कृषि विकास, फसल विविधीकरण और आजीविका संवर्धन के लिए समर्पित प्रयास किए हैं। यह सम्मान उन्हीं प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों को सशक्त बनाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के नेतृत्व में कृषि विकास को गति
कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के मार्गदर्शन में जिले में कृषि विकास और किसान कल्याण से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन पर जोर दिया जा रहा है। राष्ट्रीय सम्मान को कृषि क्षेत्र में सुधार, किसानों की प्रगति और योजनाओं को प्रभावी ढंग से जमीन पर उतारने के लिए किए गए सामूहिक प्रयासों की उपलब्धि माना जा रहा है।
पिछड़े कृषि जिलों की स्थिति सुधारना है योजना का लक्ष्य
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाना, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना और किसानों को बेहतर कृषि संसाधन उपलब्ध कराना है। योजना के तहत देश के 100 ऐसे कृषि जिलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां कृषि उत्पादकता, फसल सघनता और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से ऋण उपलब्धता में सुधार की आवश्यकता है।
इसके अंतर्गत खेतों तक सिंचाई सुविधाएं पहुंचाने, पंचायत एवं ब्लॉक स्तर पर भंडारण क्षमता बढ़ाने, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने तथा किसानों को आसान और किफायती कृषि ऋण उपलब्ध कराने जैसे प्रयास शामिल हैं।
जनजातीय अंचल में किसानों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि
जनजातीय बहुल दंतेवाड़ा जिले के लिए यह सम्मान विशेष महत्व रखता है। कृषि क्षेत्र में बेहतर अवसरों के सृजन और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण आजीविका मजबूत करने तथा किसानों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
यह राष्ट्रीय सम्मान कृषि विभाग के अधिकारियों, मैदानी अमले, किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारकों के सामूहिक प्रयासों की सराहना है। साथ ही, जिले में कृषि को अधिक उत्पादक और लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा भी है।
हाईकोर्ट के आदेश पर विज्ञापन में संशोधन, कई विषयों में दिव्यांगता की पात्र श्रेणियों का हुआ विस्तार; आवेदन की तारीख अलग से होगी घोषित
रायपुर, 12 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ शिक्षक भर्ती 2026 में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए राहत की खबर है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में लोक शिक्षण संचालनालय ने शिक्षक भर्ती के विस्तृत विज्ञापन में संशोधन करते हुए शुद्धि पत्र जारी किया है। इसके तहत विभिन्न विषयों के शिक्षक पदों के लिए पात्र दिव्यांगता की श्रेणियों का विस्तार किया गया है। इससे संशोधन के दायरे में आने वाले पात्र अभ्यर्थियों को ऑनलाइन आवेदन का नया अवसर मिलेगा।
हाईकोर्ट के आदेश पर बदले भर्ती के प्रावधान
यह संशोधन छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में याचिका क्रमांक WPS No. 6783 of 2026 (मीनाक्षी मंगलेकर एवं अन्य बनाम छत्तीसगढ़ शासन एवं अन्य) में 9 अक्टूबर 2026 को पारित आदेश के अनुपालन में किया गया है। इससे पहले स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत शासकीय शालाओं में ई-संवर्ग और टी-संवर्ग के शिक्षक पदों के लिए 7 अगस्त 2026 को विस्तृत विज्ञापन जारी किया गया था।
इन विषयों में बढ़ी दिव्यांगता की पात्र श्रेणियां
संशोधित प्रावधानों के अनुसार, समाज कल्याण विभाग की 11 सितंबर 2026 की संशोधित अधिसूचना के आधार पर हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत और सामाजिक विज्ञान विषयों के शिक्षक पदों के लिए पूर्ण दृष्टिबाधिता (Blind) और सेरेब्रल पाल्सी को उपयुक्त दिव्यांगता श्रेणियों में शामिल किया गया है।
इसी तरह गणित विषय के लिए सेरेब्रल पाल्सी और कुष्ठ रोग से उपचारित दिव्यांगता तथा कृषि विषय के लिए सेरेब्रल पाल्सी को पात्र श्रेणियों में शामिल किया गया है।
दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित पदों का वितरण दृष्टिबाधिता (VI), श्रवण बाधिता (HI), अस्थिबाधिता (OI) और बहुदिव्यांगता (MD) की चार प्रमुख श्रेणियों के अनुसार किया गया है।
ई और टी संवर्ग में कुल 1654 पद
संशोधित विज्ञापन के अनुसार दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए ई-संवर्ग में 868 और टी-संवर्ग में 786, कुल 1654 पदों का विषयवार विवरण इस प्रकार है:
विषय ई-संवर्ग टी-संवर्ग
हिंदी 109 141
संस्कृत 150 150
अंग्रेजी 319 185
गणित 135 115
सामाजिक विज्ञान 150 100
कृषि 5 95
कुल 868 786
आवेदन की तारीख का इंतजार
लोक शिक्षण संचालनालय के अनुसार, संशोधन के दायरे में आने वाले नए दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए ऑनलाइन आवेदन की तिथि छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) द्वारा अलग से घोषित की जाएगी। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखें। 7 अगस्त 2026 को जारी मूल विज्ञापन की अन्य सभी शर्तें यथावत रहेंगी।
संशोधित विज्ञापन से संबंधित विस्तृत जानकारी संबंधित विभाग और व्यापमं की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध सूचनाओं से प्राप्त की जा सकती है।
रायपुर । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि स्वस्थ और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण राज्य सरकार का संकल्प है। प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार से छत्तीसगढ़ मध्य भारत के प्रमुख मेडिकल हब के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय रविवार को राजधानी रायपुर के देवपुरी में लगभग एक एकड़ क्षेत्र में निर्मित 125 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक सुपर स्पेशलिटी प्रथमेश हॉस्पिटल का शुभारंभ करने के बाद समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अस्पताल का उद्घाटन कर उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी ली तथा अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकीय टीम को शुभकामनाएं दीं।
गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता होगी कम
मुख्यमंत्री ने कहा कि गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए दूसरे राज्यों में जाना मरीजों और उनके परिजनों के लिए आर्थिक बोझ के साथ कई व्यावहारिक कठिनाइयां भी पैदा करता है। सरकार का प्रयास है कि विशेषज्ञ और सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा सेवाएं प्रदेश में ही उपलब्ध हों, जिससे दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम हो और छत्तीसगढ़ के साथ आसपास के राज्यों के मरीजों को भी लाभ मिले।
उन्होंने कहा कि आधुनिक अस्पतालों के विस्तार से गुणवत्तापूर्ण उपचार के साथ चिकित्सकों, नर्सों, तकनीशियनों और पैरामेडिकल कर्मचारियों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
नवा रायपुर में 200 एकड़ की मेडिसिटी
मुख्यमंत्री ने बताया कि नवा रायपुर में 200 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक मेडिसिटी विकसित की जा रही है। इससे सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा सेवाओं, मेडिकल टूरिज्म और स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। सरकार का लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ के लोगों को गंभीर और जटिल बीमारियों के उपचार के लिए प्रदेश से बाहर न जाना पड़े, बल्कि दूसरे राज्यों के मरीज भी यहां उपचार के लिए आएं।
आयुष्मान भारत से गरीब परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से गरीब और जरूरतमंद परिवारों को गंभीर बीमारियों के उपचार में आर्थिक सुरक्षा मिल रही है। राज्य में जिला अस्पतालों से लेकर प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। दूरस्थ वनांचलों और जनजातीय क्षेत्रों में भी चिकित्सा सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। आर्थिक अभाव किसी व्यक्ति के उपचार में बाधा नहीं बनना चाहिए।
केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों से स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि अच्छा स्वास्थ्य सुखी और समृद्ध जीवन का आधार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार कर रही हैं। प्रथमेश हॉस्पिटल जैसी आधुनिक संस्थाओं से प्रदेशवासियों को बेहतर उपचार की सुविधा मिलेगी।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को मजबूत करने के साथ निजी क्षेत्र में भी आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से सेवा, संवेदनशीलता और गुणवत्ता को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, विधायक मोतीलाल साहू, प्रथमेश हॉस्पिटल ग्रुप के डॉ. राजीव साहू, डॉ. सारिका साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि, चिकित्सक और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
स्वच्छता, जल संरक्षण, गाजर घास उन्मूलन और पॉलिथीन मुक्त अभियान से जुड़े प्रयास; करीब 400 करंज पौधों को वृक्ष बनाने में निभाई अहम भूमिका
दल्ली राजहरा/बालोद। पर्यावरण संरक्षण को जीवन का उद्देश्य बनाकर पर्यावरण प्रेमी प्रदीप साहू पिछले 23-24 वर्षों से निरंतर जनजागरूकता अभियान चला रहे हैं। स्वच्छता, जल संरक्षण, गाजर घास उन्मूलन, पॉलिथीन मुक्त अभियान और वृक्षारोपण जैसे कार्यों के माध्यम से वे लोगों को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनके अभियान में सामाजिक संगठनों, युवाओं और बच्चों की भी भागीदारी रही है।
प्रदीप साहू द्वारा स्वच्छता अभियान, जल बचाओ, गाजर घास उन्मूलन, पॉलिथीन नष्ट करो, पर्यावरण संरक्षण तथा बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ जैसे सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते रहे हैं। उनका उद्देश्य लोगों को जागरूक करने के साथ पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देना है।
साइकिल यात्राओं से देशभर में पहुंचाया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
पर्यावरण जागरूकता को व्यापक स्तर पर पहुंचाने के लिए प्रदीप साहू और उनकी टीम ने कई लंबी साइकिल यात्राएं की हैं। इन यात्राओं में संपूर्ण बालोद जिला और छत्तीसगढ़ के अलावा रायपुर से दिल्ली, दुर्ग से नेपाल की राजधानी काठमांडू, काठमांडू से रायपुर तथा रायपुर से कन्याकुमारी, कन्याकुमारी से अमृतसर और बाघा बॉर्डर तक की यात्राएं शामिल हैं।
इन अभियानों के दौरान लोगों को स्वच्छता, जल संरक्षण, वृक्षारोपण, प्लास्टिक के दुष्प्रभाव और प्राकृतिक संसाधनों को बचाने के प्रति जागरूक किया गया। प्रदीप साहू का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश केवल मंचों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि गांवों, शहरों, स्कूलों, कॉलेजों और आम नागरिकों तक पहुंचना चाहिए।
400 करंज पौधों को संरक्षित कर बनाया हरित धरोहर
प्रदीप साहू और उनकी टीम ने पर्यावरण संरक्षण के तहत लगभग 400 करंज पौधों का रोपण किया और उनकी देखभाल पर भी ध्यान दिया। आज इनमें से अनेक पौधे बड़े होकर वृक्ष बन चुके हैं। यह पहल बताती है कि पौधारोपण के साथ नियमित देखभाल और संरक्षण भी जरूरी है।
प्रदीप साहू का कहना है कि केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखना भी प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में भी जागरूकता
प्रदीप साहू धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक आयोजनों में भी पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हैं। वे लोगों से पानी बचाने, स्वच्छता बनाए रखने, पौधे लगाने और प्लास्टिक-पॉलिथीन का अनावश्यक उपयोग रोकने की अपील करते हैं। उनका प्रयास है कि सामाजिक और धार्मिक आयोजन भी पर्यावरण के अनुकूल बनें।
बच्चों और युवाओं को कर रहे प्रेरित
दो दशक से अधिक समय से जारी इन अभियानों से बच्चों और युवाओं को भी प्रेरणा मिल रही है। प्रदीप साहू का मानना है कि बचपन से ही प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित की जाए, तो आने वाली पीढ़ियां पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी बेहतर ढंग से निभा सकती हैं।
जनभागीदारी से ही सुरक्षित होगा भविष्य
प्रदीप साहू ने कहा कि बढ़ता प्रदूषण, जल संकट, प्लास्टिक का बढ़ता उपयोग, पेड़ों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन गंभीर चुनौतियां हैं। इनका समाधान केवल सरकार या किसी एक संस्था के प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है।
उन्होंने लोगों से एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने, पानी बचाने, प्लास्टिक का उपयोग कम करने, आसपास स्वच्छता बनाए रखने और दूसरों को भी जागरूक करने की अपील की।
प्रदीप साहू और उनकी टीम ने पर्यावरण संरक्षण अभियान को भविष्य में भी निरंतर जारी रखने और इसका दायरा बढ़ाने का संकल्प लिया है। उनका संदेश स्पष्ट है कि प्रकृति की रक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है और आज किए गए प्रयास ही आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, साफ पानी तथा हरित वातावरण दे सकते हैं।
“प्रकृति बचेगी, तभी मानव जीवन सुरक्षित रहेगा। आइए, पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।”
करदाताओं के पैसे से हुई खरीदी का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग, परिषद के प्रस्ताव से लेकर उच्च अधिकारियों की मंजूरी तक की जांच जरूरी
कोरबा/बांकी मोंगरा। बांकी मोंगरा नगर पालिका परिषद में विभिन्न सामग्रियों की खरीदी को लेकर अब प्रक्रिया और नियमों के पालन से जुड़े सवाल उठने लगे हैं। नगर पालिका द्वारा अलग-अलग मदों में की गई खरीदी से पहले क्या निर्धारित नियमों का पालन किया गया? क्या संबंधित खरीदी के लिए प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्राप्त की गई थी? क्या नगर पालिका परिषद में विधिवत प्रस्ताव पारित किए गए थे? और जिन मामलों में उच्च अधिकारियों की अनुमति आवश्यक थी, क्या वहां नियमानुसार अनुमोदन लिया गया?
ये ऐसे महत्वपूर्ण सवाल हैं, जिनका जवाब संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही सामने आ सकता है। नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) की जिम्मेदारी है कि निकाय में होने वाले वित्तीय लेन-देन और खरीदी की प्रक्रिया लागू नियमों, स्वीकृत बजट तथा निर्धारित वित्तीय अधिकारों के अनुरूप संचालित हो।
खरीदी से पहले नियमों का पालन हुआ या नहीं?
नगर पालिका परिषद द्वारा कार्यालयीन उपयोग, नागरिक सुविधाओं, विकास कार्यों और अन्य आवश्यकताओं के लिए विभिन्न प्रकार की सामग्रियों की खरीदी की जाती है। लेकिन सार्वजनिक धन से होने वाली खरीदी केवल आवश्यकता के आधार पर ही नहीं, बल्कि निर्धारित वित्तीय एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं के अनुसार भी होनी चाहिए।
ऐसे में यह जांच का विषय है कि बांकी मोंगरा नगर पालिका में अब तक हुई खरीदी के दौरान संबंधित नियमों का पालन किया गया या नहीं। क्या खरीदी की आवश्यकता दर्ज की गई थी? क्या सक्षम अधिकारी से स्वीकृति प्राप्त की गई? क्या निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कोटेशन, निविदा अथवा अन्य लागू खरीद प्रक्रिया अपनाई गई? क्या सामग्री की आपूर्ति, गुणवत्ता और भुगतान से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध हैं?
इन सवालों का जवाब खरीदी से संबंधित फाइलों, स्वीकृति आदेशों, बिलों, भुगतान अभिलेखों और स्टॉक रजिस्टर की जांच से मिल सकता है।
क्या परिषद से प्रस्ताव पारित कराया गया?
नगर पालिका में होने वाले प्रत्येक खर्च के लिए परिषद का प्रस्ताव अनिवार्य है या नहीं, यह खरीदी की प्रकृति, लागू नियमों और संबंधित वित्तीय अधिकारों पर निर्भर करता है। इसलिए सभी खरीदी के मामलों में एक ही नियम लागू मानना उचित नहीं होगा।
हालांकि, जिन मामलों में परिषद की स्वीकृति या प्रस्ताव आवश्यक है, वहां यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रस्ताव विधिवत पारित हुआ था या नहीं। यदि किसी खरीदी के लिए परिषद की मंजूरी आवश्यक थी, तो संबंधित प्रस्ताव की प्रति, बैठक की कार्यवाही और स्वीकृति से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध होने चाहिए।
सवाल यह भी है कि नगर पालिका में हुई खरीदी का विवरण परिषद के समक्ष प्रस्तुत किया गया था या नहीं तथा संबंधित जनप्रतिनिधियों को खर्च की जानकारी उपलब्ध कराई गई थी या नहीं।
प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति की क्या है भूमिका?
किसी कार्य या खरीदी को आगे बढ़ाने से पहले उसकी आवश्यकता, लागत, बजट में उपलब्ध राशि और सक्षम प्राधिकारी के अधिकारों की जांच महत्वपूर्ण होती है।
प्रशासनिक स्वीकृति के माध्यम से प्रस्तावित कार्य या खरीदी की आवश्यकता को मंजूरी दी जाती है, जबकि वित्तीय स्वीकृति का संबंध निर्धारित लागत और धनराशि खर्च करने की अनुमति से होता है। हालांकि, इन स्वीकृतियों का स्वरूप और आवश्यकता संबंधित खरीदी तथा लागू नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
बांकी मोंगरा नगर पालिका में हुई खरीदी के संबंध में यह स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित मामलों में आवश्यक स्वीकृतियां किस अधिकारी ने दीं, स्वीकृति की तारीख क्या थी, राशि किस मद से खर्च की गई और भुगतान किस प्रक्रिया के तहत किया गया।
यदि किसी मामले में आवश्यक स्वीकृति के बिना खर्च किए जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित नियमों के अनुसार उसकी जांच और जवाबदेही तय करने का प्रश्न उठ सकता है।
क्या टैक्स और राजस्व की राशि से खरीदी की जा सकती है?
नगर पालिका को संपत्ति कर, अन्य करों, शुल्कों, अनुदानों और विभिन्न राजस्व स्रोतों से धन प्राप्त होता है। इस राशि का उपयोग निकाय के वैध दायित्वों, नागरिक सुविधाओं और स्वीकृत विकास कार्यों सहित अन्य अनुमत उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि राजस्व की राशि किसी भी वस्तु की खरीदी में मनमाने ढंग से खर्च की जा सकती है। खर्च का उद्देश्य, बजट प्रावधान, संबंधित मद में राशि की उपलब्धता, सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी और खरीदी के लिए लागू नियमों का पालन आवश्यक है।
इसलिए मुख्य सवाल यह है कि बांकी मोंगरा नगर पालिका परिषद ने अब तक जो भी खरीदी की है, वह किस मद से की गई? क्या उस मद में पर्याप्त बजट उपलब्ध था? क्या राशि स्वीकृत उद्देश्य के अनुरूप खर्च की गई? और क्या प्रत्येक भुगतान के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं?
इन बिंदुओं की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सार्वजनिक धन का उपयोग निर्धारित प्रावधानों के अनुसार हुआ है या नहीं।
उच्च अधिकारियों से अनुमोदन लिया गया या नहीं?
कुछ मामलों में राशि, खरीदी की प्रकृति अथवा लागू नियमों के आधार पर उच्च अधिकारी या अन्य सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी आवश्यक हो सकती है। ऐसे मामलों में यह जांच जरूरी है कि संबंधित अधिकारी से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अनुमोदन प्राप्त किया गया था या नहीं।
इसके लिए नगर पालिका की खरीदी फाइलों, स्वीकृति आदेशों, निविदा संबंधी दस्तावेजों, कार्यादेशों और भुगतान अभिलेखों का परीक्षण किया जाना चाहिए।
यदि किसी खरीदी में उच्च अधिकारी की मंजूरी आवश्यक थी, तो उसका आदेश रिकॉर्ड में उपलब्ध होना चाहिए। वहीं, यदि संबंधित अधिकारी को अपने अधिकारों के तहत मंजूरी देने का अधिकार था, तो उस स्थिति में अनावश्यक रूप से उच्च स्तरीय अनुमोदन न होने को अपने आप अनियमितता नहीं माना जा सकता।
जांच में किन दस्तावेजों को खंगालना जरूरी?
बांकी मोंगरा नगर पालिका में खरीदी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच के लिए निम्नलिखित अभिलेख महत्वपूर्ण हो सकते हैं:
1. खरीदी से संबंधित प्रस्ताव एवं आवश्यकता का विवरण।
2. लागू नियमों के अनुसार प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति।
3. परिषद की बैठक की कार्यवाही और संबंधित प्रस्तावों की प्रतियां, जहां आवश्यक हों।
4. कोटेशन, निविदा, तुलनात्मक पत्रक और चयन प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज।
5. सामग्री आपूर्ति के बिल, स्टॉक रजिस्टर और भुगतान की जानकारी।
6. बजट प्रावधान तथा जिस मद से राशि खर्च की गई, उसका विवरण।
7. संबंधित अधिकारियों के स्वीकृति आदेश और निरीक्षण रिपोर्ट।
8. उच्च अधिकारियों से प्राप्त अनुमोदन, जहां ऐसा अनुमोदन अनिवार्य हो।
इन दस्तावेजों की जांच से खरीदी की वास्तविक प्रक्रिया और वित्तीय जवाबदेही का आकलन किया जा सकता है।
पारदर्शिता के लिए सामने आना चाहिए पूरा हिसाब
नगर पालिका में खर्च होने वाली राशि अंततः सार्वजनिक धन का हिस्सा होती है। इसलिए नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि उनके क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है। हालांकि, किसी विशेष खरीदी में अनियमितता हुई है या नहीं, इसका निष्कर्ष दस्तावेजों और जांच के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि बांकी मोंगरा नगर पालिका परिषद की विभिन्न खरीदी से संबंधित अभिलेखों की जांच कौन करेगा? क्या संबंधित अधिकारी खरीदी प्रक्रिया और स्वीकृतियों की स्थिति स्पष्ट करेंगे? क्या जरूरत पड़ने पर उच्च अधिकारियों द्वारा वित्तीय एवं प्रशासनिक परीक्षण कराया जाएगा?
फिलहाल, खरीदी में अनियमितता की पुष्टि करने वाले दस्तावेज सामने आए बिना किसी अधिकारी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। लेकिन सार्वजनिक धन से हुई खरीदी के नियमों, स्वीकृतियों और भुगतान की पारदर्शी जांच की मांग जरूर महत्वपूर्ण है। संबंधित नगर पालिका प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
1. राजपत्र और अधिनियम में इसका क्या प्रावधान है?
नगर पालिका निधि (Municipal Fund) का उपयोगः छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 86 और 87 के तहत, नगर पालिका द्वारा वसूले गए सभी टैक्स (संपत्ति कर, जल कर, उपभोक्ता शुल्क आदि) "नगर पालिका निधि" में जमा होते हैं। अधिनियम के अनुसार, इस निधि का उपयोग शहर की सार्वजनिक स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (कचरा उठाने हेतु ट्रैक्टर-ट्रॉली) और जल प्रदाय (वॉटर टैंकर) जैसे आवश्यक नागरिक कर्तव्यों के लिए वाहन व उपकरण खरीदने में किया जा सकता है।
भण्डार क्रय नियम (Store Purchase Rules) की अनिवार्यताः टैक्स के पैसे से यह खरीदी करने के लिए परिषद को "छत्तीसगढ़ शासन भण्डार क्रय नियम, 2002 (यथा संशोधित 11 जुलाई 2024)" का कड़ाई से पालन करना होता है. इस राजपत्रित नियम के अनुसार, ट्रैक्टर-ट्रॉली या टैंकर की कीमत लाखों में होती है, इसलिए परिषद सीधे नगद या बिना निविदा के इसे नहीं खरीद सकती। इसके लिए GeM (Government e-Marketplace) पोर्टल या ई-प्रोक्योरमेंट के माध्यम से खुली निविदा (Open Tender)
2. खरीदी के लिए राजपत्र के मुख्य नियम एवं प्रक्रिया
टैक्स के पैसों से ट्रैक्टर-ट्रॉली या टैंकर खरीदने के लिए नगर पालिका परिषद को इन राजपत्रित चरणों से गुजरना होता है:
1. PIC एवं परिषद की स्वीकृतिः सबसे पहले 'प्रेसिडेंट-इन-
काउंसिल' (PIC) और नगर पालिका परिषद की सामान्य सभा में इस वाहन की आवश्यकता और टैक्स बजट से इसके भुगतान का प्रस्ताव पारित होना चाहिए।
2. प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृतिः परिषद द्वारा प्रस्ताव पारित
होने के बाद, सक्षम प्राधिकारी (जैसे नगरीय प्रशासन विभाग के संयुक्त संचालक या संचालक) से इसकी प्रशासनिक (Administrative Approval) और वित्तीय स्वीकृति ली जाती है।
3. GeM पोर्टल या ई-टेंडर: स्वीकृत भण्डार क्रय नियमों के
अनुसार, ₹2.5 लाख से अधिक की किसी भी वाहन खरीदी के लिए Government e-Marketplace (GeM) के जरिए ही पारदर्शी पारचेज ऑर्डर जारी करना होता है।
हेतु वार्ड पार्षद के द्वारा प्रस्तुत आवेदन के संबंध में विचार।
06. जेम पोर्टल के माध्यम से निकाय के कर्मचारियों तथा स्वच्छता दीदीयों हेतु 208 नग रैनकोट कय प्राप्त न्युनतम दर 236004.00 रू. फर्म निखिल ट्रेडिंग की स्वीकृति बाबत् विचार एवं निर्णय।
09. जेम पोर्टल के माध्यम से निकाय के कर्मचारियों तथा स्वच्छता दीदीयों हेतु 208 नग जूता कय प्राप्त न्युनतम दर 180000.00 रू. फर्म अंजानेया सेल्स, रायपुर की स्वीकृति बाबत् विचार एवं निर्णय।
10. जेम पोर्टल के माध्यम से 01 नग फिकल स्लज वैक्यूम एम्पीटियर मशीन कय हेतु प्राप्त न्युनतम दर 499999.00 रू. फर्म अंजानेया सेल्स, रायपुर की स्वीकृति बाबत् विचार एवं निर्णय।
11. जेम पोर्टल के माध्यम से 01 नग फोर कटिंग मशीन कय हेतु प्राप्त न्युनतम दर 149980.00 रू. फर्म अंजानेया सेल्स, रायपुर की स्वीकृति बाबत् विचार एवं निर्णय।
12. जेम पोर्टल के माध्यम से 34 नग आयरन बेंच कय हेतु प्राप्त न्युनतम दर 411600.00 रू. फर्म निखिल ट्रेडिंग की स्वीकृति बाबत् विचार एवं निर्णय।
13. जेम पोर्टल के माध्यम से 01 नग हॉपर टीप्पर वाहन कय जलशाखा हेतु प्राप्त न्युनतम दर 1295000.00 रू. फर्म एम. के. इंटरप्राईजेस की स्वीकृति बाबत् विचार एवं निर्णय।
14. जेम पोर्टल के माध्यम से 10 नग मैनुअल रिक्शा कय स्वच्छता शाखा हेतु प्राप्त न्युनतम दर 523000.00 रू. फर्म एम. के. इंटरप्राईजेस की स्वीकृति बाबत् विचार एवं निर्णय।
15. जेम पोर्टल के माध्यम से 10 नग मैनुअल रिक्शा कय स्वच्छता शाखा हेतु प्राप्त न्युनतम दर 288000.00 रु. फर्म श्री सालासार इंटरप्राईजेस की स्वीकृति बाबत् विचार एवं निर्णय।
16. विधायक निधि से वार्ड क्र 20 न.पा.प. बांकीमोंगरा में सांस्कृतिक गतिविधियों के लिये छोटे भवन एवं चौपाल (चबुतरा निर्माण) कार्य, लागत राशि 8.54 लाख हेतु प्राप्त न्युनतम दर की स्वीकृति विचार एवं निर्णय।
परीक्षा, इंटरव्यू और जॉइनिंग की समयसीमा पर लिखित आश्वासन की मांग; चेकपोस्ट के मुख्य गेट पर शांतिपूर्ण आंदोलन करेंगे बेरोजगार युवा
दंतेवाड़ा। एनएमडीसी की L1-L2 श्रेणी की भर्ती प्रक्रिया में देरी से नाराज बेरोजगार युवाओं ने अब आंदोलन का ऐलान किया है। दंतेवाड़ा युवा बेरोजगार संघ के नेतृत्व में अभ्यर्थी 12 अक्टूबर 2026 से एनएमडीसी चेकपोस्ट के मुख्य गेट के सामने अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे। युवाओं की मांग है कि प्रबंधन भर्ती की परीक्षा, इंटरव्यू और जॉइनिंग की प्रक्रिया पूरी करने की समयसीमा लिखित रूप में बताए।
दो साल से इंतजार, अब आंदोलन की तैयारी
एनएमडीसी बचेली के हॉकी ग्राउंड में आयोजित बैठक में L1-L2 भर्ती के अभ्यर्थियों, बेरोजगार युवाओं और जनप्रतिनिधियों ने भर्ती में हो रही देरी पर नाराजगी जताई। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे करीब दो वर्षों से भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक परीक्षा, इंटरव्यू और जॉइनिंग को लेकर स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं आई है। युवाओं ने आरोप लगाया कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद ठोस पहल नहीं हुई, जिसके चलते उन्हें आंदोलन का निर्णय लेना पड़ा।
मौखिक नहीं, लिखित आश्वासन चाहिए
बैठक के दौरान एनएमडीसी के उप महाप्रबंधक सौरभ कुमार को हॉकी ग्राउंड बुलाकर युवाओं और जनप्रतिनिधियों ने भर्ती से जुड़े मुद्दे उठाए। अभ्यर्थियों ने मांग की कि धरना शुरू होने से पहले प्रबंधन लिखित में बताए कि L1-L2 भर्ती की परीक्षा, इंटरव्यू और जॉइनिंग कब तक पूरी होगी। युवाओं का कहना है कि अब केवल मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं है। उन्हें भर्ती प्रक्रिया की समयसीमा को लेकर स्पष्ट जवाब चाहिए।
जनप्रतिनिधियों और आदिवासी समाज से सहयोग की अपील
आंदोलन को व्यापक समर्थन दिलाने के लिए जिले के सभी जनप्रतिनिधियों, पक्ष-विपक्ष के नेताओं और सर्व आदिवासी समाज से सहयोग की अपील की जा रही है। युवाओं का कहना है कि पहले अलग-अलग संगठनों के बैनर तले एनएमडीसी के खिलाफ प्रदर्शन और घेराव किए जाते रहे हैं, लेकिन अब दंतेवाड़ा युवा बेरोजगार संघ के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों को एकजुट करने का प्रयास किया जा रहा है।
कई बैठकें और आंदोलन के बाद भी नहीं निकला समाधान
अभ्यर्थियों के अनुसार, पिछले करीब दो वर्षों में भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाने की मांग को लेकर कई बैठकें और आंदोलन हो चुके हैं। एनएमडीसी बचेली के कार्यपालक निदेशक (ईडी), जिला प्रशासन और एनएमडीसी मुख्यालय के अधिकारियों से भी चर्चा की गई। युवाओं का दावा है कि इन चर्चाओं के दौरान प्रक्रिया जल्द शुरू करने के आश्वासन मिले, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया।
अब प्रबंधन के फैसले पर टिकी निगाहें
युवाओं ने स्पष्ट किया है कि उनकी प्रमुख मांग लंबित भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और स्थानीय बेरोजगारों के लिए रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने की है। उन्होंने आंदोलन शांतिपूर्ण रखने की बात कही है। अब सवाल यह है कि क्या एनएमडीसी प्रबंधन 12 अक्टूबर से प्रस्तावित धरने से पहले भर्ती की समयसीमा पर लिखित आश्वासन देगा या युवाओं को अपनी मांगों के लिए अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करना पड़ेगा।
प्रकाशन से पहले ध्यान दें: खबर में धरना शुरू करने की तारीख 12 अक्टूबर 2026 दी गई है। यदि यह खबर उसी दिन या उसके बाद प्रकाशित हो रही है, तो पुष्टि कर लें कि धरना शुरू हो चुका है या अभी प्रस्तावित है। इसके अनुसार शीर्षक और खबर के काल में बदलाव जरूरी होगा।
मृणेन्द्र चौबे
अंबागढ़ चौकी/शौर्यपथ /नगर के वार्ड क्रमांक-4 स्थित गणेश टेकरी पहाड़ी पर एक पेड़ के नीचे नरकंकाल मिलने से इलाके में हलचल मच गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी। घटनास्थल से मिले कपड़ों, मोबाइल और चप्पलों के आधार पर मृतक की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।
पुलिस को पहाड़ी पर पेड़ के नीचे नरकंकाल मिला। पास ही सड़े-गले कपड़े, जींस, टी-शर्ट, स्पोर्ट्स चप्पलों की एक जोड़ी और एक एंड्रॉयड मोबाइल बरामद हुआ। पेड़ पर भगवा रंग का गमछा भी लटका मिला। लंबे समय तक खुले में पड़े रहने के कारण मोबाइल खराब हो चुका है। पुलिस उसमें लगे सिम की मदद से उपलब्ध जानकारी जुटाने और पहचान तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
0 आत्महत्या या अन्य वजह, जांच के बाद होगा खुलासा
घटनास्थल की परिस्थितियों को लेकर नगर में अलग-अलग तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोग पुराने समय में फांसी लगाकर आत्महत्या किए जाने की आशंका जता रहे हैं, जबकि अन्य किसी दूसरी घटना की संभावना व्यक्त कर रहे हैं। हालांकि, पुलिस ने फिलहाल किसी भी संभावना को खारिज नहीं किया है। मौत की वास्तविक वजह जांच और मेडिकल परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
थाना प्रभारी अश्वनी राठौर के अनुसार, मामले में मर्ग कायम कर विवेचना की जा रही है। नरकंकाल को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया के दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सकों ने उसे मेडिकल कॉलेज भेजने का निर्देश दिया।
0 शिक्षण संस्थानों के नजदीक है पहाड़ी क्षेत्र
गणेश टेकरी के आसपास का इलाका नगर के शैक्षणिक संस्थानों और शासकीय महाविद्यालय के नजदीक है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस क्षेत्र में युवाओं की आवाजाही बनी रहती है। घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने की मांग भी उठ रही है।
फिलहाल पुलिस का पूरा ध्यान नरकंकाल की पहचान, घटनास्थल से मिले साक्ष्यों की जांच और मौत के कारणों का पता लगाने पर है। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
