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धमतरी । Shouryapath । स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर महेश फाउंडेशन छत्तीसगढ़ ने ग्राम उमरगांव में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और शहीदों के परिवारों के सम्मान में विशेष कार्यक्रम आयोजित कर उनके त्याग और बलिदान को नमन किया। कार्यक्रम प्राथमिक शाला भवन हर्रापारा उमरगांव स्थित शहीद स्मारक के समीप आयोजित हुआ।
नगरी-सिहावा अंचल के गौरवशाली स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को याद करते हुए जंगल सत्याग्रह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सेनानियों सहित असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन में योगदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धापूर्वक याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि इन वीरों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करते हुए देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। उनके संघर्ष और बलिदान की बदौलत ही आज देश स्वतंत्रता की खुली हवा में सांस ले रहा है।
सम्मान से परिवारों के चेहरे पर दिखी गौरव की झलक
महेश फाउंडेशन के सदस्यों ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों एवं उत्तराधिकारियों को साल, श्रीफल और स्मृति-चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। शहीद स्मारक के समीप सेनानियों की स्मृतियों को नमन करते हुए उनके संघर्ष, त्याग और राष्ट्रभक्ति को याद किया गया। सम्मान समारोह के दौरान सेनानियों के परिवारों में गौरव और भावुकता का माहौल दिखाई दिया।
कार्यक्रम में गांव के बुजुर्ग नागरिकों के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे तथा प्राथमिक शाला के शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने महेश फाउंडेशन की पहल की सराहना करते हुए कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों और शहीद परिवारों का सम्मान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को अपने इतिहास और राष्ट्रनायकों के संघर्ष से जोड़ने का सार्थक प्रयास है।
उमरगांव के स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास को स्मरण करते हुए उपस्थित लोगों ने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके आदर्शों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
शिक्षा को प्रोत्साहन से मिलती है नई उड़ान, 12 वर्षों से प्रतिभाओं को सम्मानित कर रहे रामाराव बघेल
धमतरी। शौर्यपथ । धमतरी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिहावा में 80वां स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास और देशभक्ति के वातावरण में मनाया गया। शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हलधर शार्दुल ने ध्वजारोहण किया। इसके बाद छात्राओं ने प्रभात फेरी निकाली तथा देशभक्ति गीत, भाषण, कविता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शानदार प्रस्तुति दी।
समारोह का सबसे प्रेरणादायक पहलू मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान रहा। शिक्षण सत्र 2025-26 में कक्षा 10वीं में 94 प्रतिशत अंक हासिल कर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली छात्रा प्राची कश्यप को ₹41 हजार तथा 93.8 प्रतिशत अंक के साथ द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाली रागिनी निषाद को ₹11 हजार की नगद प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। यह राशि न्यू पूजा राइस मिल के संचालक रामाराव बघेल ने विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रदान की।
रामाराव बघेल द्वारा मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहन राशि देने की यह पहल पिछले 12 वर्षों से लगातार जारी है। उनके इस प्रयास से न केवल प्रतिभावान विद्यार्थियों का सम्मान होता है, बल्कि अन्य छात्र-छात्राओं को भी बेहतर प्रदर्शन करने और अपने सपनों को साकार करने की प्रेरणा मिलती है।
रामाराव बघेल ने कहा, “प्रतिभा किसी सुविधा की मोहताज नहीं होती, उसे केवल सही समय पर प्रोत्साहन और सहयोग की जरूरत होती है। सिहावा क्षेत्र के बच्चे शिक्षा के क्षेत्र में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। मेरा प्रयास है कि आर्थिक कारणों से किसी प्रतिभाशाली विद्यार्थी का उत्साह कम न हो। पिछले 12 वर्षों से मेधावी बच्चों को प्रोत्साहित करने का जो सिलसिला चल रहा है, उसे आगे भी जारी रखने का प्रयास रहेगा। आज सम्मानित होने वाले बच्चे अपने साथियों के लिए प्रेरणा बनें और भविष्य में अपने परिवार, क्षेत्र तथा देश का नाम रोशन करें—यही मेरी शुभकामना है।”
कार्यक्रम में विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। संस्था के प्राचार्य एस.आर. साहू ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
दैनिक शौर्यपथ महासमुंद जिला ब्यूरो संतराम कुर्रे
बेटियों की शिक्षा और सुविधा के लिए सरकार प्रतिबद्ध : जनपद सदस्य जयंती सिंदार
बुंदेली। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शासकीय विद्यालय बुंदेली में सरस्वती साइकिल वितरण कार्यक्रम का आयोजन उत्साहपूर्ण वातावरण में किया गया। कार्यक्रम में पात्र छात्राओं को निःशुल्क सरस्वती साइकिलों का वितरण किया गया। साइकिल प्राप्त कर छात्राओं के चेहरे खुशी से खिल उठे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जनपद सदस्य जयंती सिदार रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता किशोर सोनवानी ने की। वहीं पालक समिति अध्यक्ष सुभाष बंजारे सहित विशेष अतिथि के रूप में रविकांत निषाद सरपंच, उप सरपंच घनश्याम साहू उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं पूजन-अर्चन के साथ किया गया। इसके पश्चात अतिथियों ने पात्र छात्राओं को साइकिल प्रदान की। इस दौरान छात्राओं में खासा उत्साह देखने को मिला।
मुख्य अतिथि जयंती सिदार ने कहा कि बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देना हम सभी की जिम्मेदारी है। सरस्वती साइकिल योजना छात्राओं के लिए केवल आवागमन की सुविधा नहीं, बल्कि उनके शिक्षा के सफर को आसान बनाने वाली महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने छात्राओं से इस सुविधा का सदुपयोग करते हुए मन लगाकर पढ़ाई करने और अपने परिवार एवं क्षेत्र का नाम रोशन करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे किशोर सोनवानी ने छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बेटियों की शिक्षा समाज की प्रगति का आधार है। शासन की योजनाओं का लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचने से शिक्षा के प्रति उनका उत्साह बढ़ता है।
इस अवसर पर पालक समिति अध्यक्ष सुभाष बंजारे उपाध्यक्ष रामकुमार बघेल सुकांति सहित शाला प्रबंधक, प्राचार्य S B बरिहा शिक्षक-शिक्षिकाएं, विद्यार्थी, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
दैनिक शौर्यपथ महासमुंद जिला ब्यूरो संतराम कुर्रे
महासमुंद जिले के ग्राम पंचायत बुंदेली गंगा इंग्लिश स्कूल में डायरेक्टर प्रेम नायक स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का अनूठा माहौल देखने को मिला। ग्राम पंचायत बुंदेली स्थित गंगा इंग्लिश स्कूल के नन्हे स्कूली बच्चों, गंगा इंग्लिश स्कूल के डायरेक्टर प्रेम नायक अध्यक्षता कर रहे विमल दास महंत शिक्षकों और ग्रामीणों ने मिलकर हर घर तिरंगा यात्रा निकाली। हाथों में तिरंगा लेकर निकले नन्हे बच्चों के उत्साह ने पूरे क्षेत्र में देशभक्ति की भावना जगा दी।
हर घर तिरंगा अभियान के तहत निकाली गई इस यात्रा में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों के साथ शिक्षक और ग्रामीण शामिल हुए। यात्रा के दौरान बच्चों ने एक साथ देशभक्ति गीत “हर घर तिरंगा” का सामूहिक गायन किया। बच्चों की सुरीली और मासूम आवाज में गूंजता देशभक्ति गीत पूरे बुंदेली पंचायत सहित क्षेत्र में सुनाई देने लगा। बच्चों के उत्साह और जोश को देखकर ग्रामीण भी उनके साथ कदम से कदम मिलाते नजर आए।
*नन्हे कदमों ने दिया एकता और देशप्रेम का संदेश*
बच्चों ने तिरंगा हाथों में लेकर लोगों को हर घर तिरंगा अभियान का संदेश दिया। छोटे-छोटे बच्चों में देश के राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और देशभक्ति का जज्बा देखते ही बन रहा था। बच्चों के चेहरे पर उत्साह और हाथों में लहराता तिरंगा पूरे आयोजन को खास बना रहा था।
इस कार्यक्रम में अध्यक्षता कर रहे विमल दास महंत शिक्षकों ने बच्चों को राष्ट्रीय ध्वज के महत्व और स्वतंत्रता दिवस के गौरव के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि तिरंगा केवल देश की पहचान ही नहीं, बल्कि देश की एकता, अखंडता और गौरव का प्रतीक है। बच्चों में बचपन से ही देशप्रेम और राष्ट्रीय भावना विकसित करने के उद्देश्य से इस तरह के आयोजन महत्वपूर्ण हैं।
*ग्रामीणों ने बढ़ाया बच्चों का उत्साह*
हर घर तिरंगा यात्रा में ग्रामीणों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई। जैसे-जैसे यात्रा आगे बढ़ी, लोगों में भी देशभक्ति का उत्साह देखने को मिला। बच्चों के सामूहिक गीत और हाथों में लहराते तिरंगे ने पूरे वातावरण को देशभक्ति के रंग में रंग दिया।
ग्रामीणों ने कहा कि गांव के नन्हे बच्चों द्वारा जिस उत्साह के साथ हर घर तिरंगा यात्रा में भाग लिया गया, वह सराहनीय है। बच्चों की भागीदारी से अभियान को नई ऊर्जा मिली और लोगों को भी अपने घरों में तिरंगा फहराने के लिए प्रेरणा मिली
शासन द्वारा चलाए जा रहे हर घर तिरंगा अभियान को सफल बनाने के लिए बुंदेली के नन्हे बच्चों ने भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिक्षकों के मार्गदर्शन और ग्रामीणों के सहयोग से निकली इस यात्रा ने ग्रामीण क्षेत्र में राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और देशभक्ति का संदेश पहुंचाया।
गंगा इंग्लिश स्कूल बुंदेली प्राथमिक शाला के बच्चों की इस पहल की ग्रामीणों ने सराहना की। नन्हे बच्चों की आवाज में गूंजता “हर घर तिरंगा” गीत और हाथों में लहराता राष्ट्रीय ध्वज लंबे समय तक लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। भांसी पंचायत और बंगली कैम्प में निकली यह यात्रा बच्चों की देशभक्ति और सामूहिक सहभागिता की एक खूबसूरत मिसाल बन गई।
कोंडागांव, छत्तीसगढ़ |
छत्तीसगढ़ की पहचान केवल उसकी प्राकृतिक संपदा और हरियाली से नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध लोक-संस्कृति, पारम्परिक कला, लोकगीत, लोकनृत्य, स्थानीय बोलियों, साहित्य और कृषि परम्पराओं से भी है। विशेष रूप से बस्तर अंचल की सांस्कृतिक विरासत अपने आप में एक जीवंत इतिहास है, जिसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी हमारे लोक कलाकारों, साहित्यकारों, शिल्पकारों और समाज ने अपने जीवन और सृजन के माध्यम से संजोकर रखा है।
इसी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित, संवर्धित और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने के उद्देश्य से कोंडागांव जिले में “बस्तर सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं कला परिषद” का गठन किया गया। स्थानीय कलाकारों एवं संस्कृति प्रेमियों की सर्वसम्मत सहमति से श्री गोकुल वैद्य को परिषद का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। परिषद का यह प्रयास बस्तर की लोक परम्पराओं, स्थानीय भाषाओं-बोलियों, साहित्य, कला और कलाकारों को एक सशक्त मंच प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
इसी सांस्कृतिक संकल्प को आगे बढ़ाते हुए बस्तर सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं कला परिषद, कोंडागांव द्वारा दिनांक 16 अगस्त 2026 को छत्तीसगढ़-बस्तर की माटी, संस्कृति, लोककला एवं कृषि परम्परा से जुड़े हमारे गौरवशाली हरेली (अमुस) तिहार के पावन अवसर पर “हरेली महोत्सव 2026” का भव्य आयोजन किया गया।
हरेली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि किसान, खेत, प्रकृति, पशुधन, कृषि औजार और धरती माता के प्रति हमारी कृतज्ञता का लोकपर्व है। इस अवसर पर आयोजित महोत्सव ने बस्तर की माटी में रची-बसी परम्पराओं को मंच पर जीवंत कर दिया।
? अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
हरेली महोत्सव 2026 में मुख्य अतिथि माननीया सुश्री लता उसेंडी, विधायक कोंडागांव एवं उपाध्यक्ष, बस्तर विकास प्राधिकरण, माननीया सुश्री मोना सेन, अध्यक्ष, राज्य फिल्म विकास निगम, छत्तीसगढ़ शासन तथा माननीया श्रीमती शालिनी राजपूत, अध्यक्ष, हस्तशिल्प विकास बोर्ड, छत्तीसगढ़ शासन की गरिमामयी उपस्थिति रही।
वहीं विशिष्ट अतिथियों के रूप में छत्तीसगढ़ एवं बस्तर की कला-संस्कृति के गौरव—
पद्मश्री श्री पंडी राम मंडावी — काष्ठ शिल्पकार एवं जनजातीय वाद्य यंत्र विशेषज्ञ,
पद्मश्री श्रीमती ऊषा वारले — पंडवानी गायिका,
पद्मश्री श्री अजय कुमार मंडावी — काष्ठ शिल्पकार,
माननीय श्री राजेन्द्र बघेल — राष्ट्रपति पुरस्कृत अंतर्राष्ट्रीय बेलमेटल शिल्पकार,
श्री पंचुराम सागर — राष्ट्रपति पुरस्कृत अंतर्राष्ट्रीय बेलमेटल शिल्पकार,
श्री तीजु राम विश्वकर्मा — राष्ट्रपति पुरस्कृत अंतर्राष्ट्रीय लौह शिल्पकार,
श्री अविनाश प्रसाद — फिल्म निर्देशक,
श्री राकेश यादव — फिल्म अभिनेता,
श्री नरपती पटेल — अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद, कोंडागांव,
तथा श्री जशकेतु उसेंडी — उपाध्यक्ष, नगर पालिका परिषद, कोंडागांव
की उपस्थिति ने समारोह की गरिमा को और अधिक बढ़ाया।
? मंच पर साकार हुई बस्तर की आत्मा
हरेली महोत्सव में छत्तीसगढ़ और बस्तर की लोक-संस्कृति का ऐसा मनोहारी रंग देखने को मिला, जिसमें लोकगीतों की मिठास, लोकनृत्यों की थिरकन, पारम्परिक वाद्य यंत्रों की गूंज और जनजातीय परम्पराओं की जीवंतता एक साथ दिखाई दी।
मंच पर प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कलाकारों ने अपनी प्रतिभा के माध्यम से बस्तर की उस सांस्कृतिक आत्मा को अभिव्यक्त किया, जो सदियों से जल, जंगल, जमीन, प्रकृति और सामुदायिक जीवन के साथ जुड़ी हुई है।
पारम्परिक वेशभूषा में सजे कलाकार, लोकवाद्यों की धुन पर थिरकते कदम, जनजातीय नृत्य की ऊर्जा और लोकगीतों की स्वर-लहरियाँ पूरे वातावरण को बस्तर की माटी की सुगंध से भर रही थीं। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो बस्तर की संस्कृति स्वयं मंच पर उतरकर अपनी कहानी सुना रही हो।
? कलाकारों का सम्मान — हमारी संस्कृति का सम्मान
इस महोत्सव की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक रहा हमारे उन लोक कलाकारों, शिल्पकारों और संस्कृति साधकों का सम्मान, जिन्होंने अपना जीवन छत्तीसगढ़ की पारम्परिक कला एवं सांस्कृतिक विरासत को समर्पित किया है।
काष्ठ शिल्प, बेलमेटल शिल्प, लौह शिल्प, जनजातीय वाद्य यंत्र, पंडवानी, लोकनृत्य और लोकसंगीत जैसे क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले कलाकारों का सम्मान वास्तव में केवल व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि उनकी कला, उनकी परम्परा और बस्तर की सांस्कृतिक अस्मिता का सम्मान है।
समारोह के दौरान सम्मान एवं स्मृति-चिह्न प्रदान किए जाने के अनेक भावुक और गौरवपूर्ण क्षण कैमरे में कैद हुए। ये तस्वीरें आने वाले समय में इस बात की साक्षी रहेंगी कि कोंडागांव ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को केवल याद नहीं किया, बल्कि उसे सम्मान के साथ मंच भी दिया।
? संस्कृति तभी जीवित रहती है, जब नई पीढ़ी उससे जुड़ती है
आज आधुनिकता और तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश के बीच स्थानीय बोलियों, पारम्परिक कलाओं, लोकगीतों, लोकनृत्यों और मौखिक साहित्य के संरक्षण की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।
बस्तर सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं कला परिषद का प्रयास इसी दिशा में एक सकारात्मक कदम है। आवश्यकता इस बात की है कि हम अपनी जड़ों से जुड़े रहें, अपने लोक कलाकारों को सम्मान दें, स्थानीय भाषाओं और बोलियों को बचाएँ तथा बच्चों और युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ें।
क्योंकि संस्कृति केवल संग्रहालयों में रखी कोई वस्तु नहीं है।
संस्कृति हमारी पहचान है।
संस्कृति हमारी स्मृति है।
संस्कृति हमारी जड़ों की आवाज है।
और संस्कृति ही आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी सबसे अनमोल विरासत है।
? हरेली महोत्सव का संदेश
हरेली महोत्सव 2026 ने यह संदेश दिया कि कृषि और संस्कृति एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। खेतों में अन्न उगाने वाला किसान हो या अपनी कला से बस्तर की पहचान बनाने वाला कलाकार—दोनों हमारी धरती और हमारी परम्परा के सच्चे संवाहक हैं।
कोंडागांव की धरती पर आयोजित यह आयोजन निश्चित रूप से केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बस्तर की अस्मिता, गौरवशाली परम्पराओं और लोकजीवन को संरक्षित करने का एक सांस्कृतिक संकल्प था।
आज जब हम इन तस्वीरों को देखते हैं तो इनमें केवल मंच, कलाकार और सम्मान समारोह दिखाई नहीं देते, बल्कि इनके पीछे बस्तर की सदियों पुरानी संस्कृति, लोकजीवन की सरलता, कलाकारों का समर्पण और अपनी पहचान को बचाए रखने का संकल्प दिखाई देता है।
“हमारी संस्कृति • हमारी पहचान • हमारा अभिमान”
हरेली महोत्सव 2026 की ये स्मृतियाँ कोंडागांव और बस्तर की उस जीवंत सांस्कृतिक यात्रा की अमिट तस्वीरें हैं, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
बस्तर की माटी को नमन।
लोक कलाकारों को नमन।
हमारी संस्कृति और परम्पराओं को नमन।
हरेली तिहार की हार्दिक शुभकामनाएँ। ??
0 सेवा के प्रति समर्पण के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने किया सम्मानित
राजनांदगांव/शौर्यपथ / स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित जिला स्तरीय गरिमामय समारोह में चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान एवं उत्कृष्ट सेवाभाव के लिए मेडिकल कॉलेज राजनांदगांव के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रकाश खूंटे को विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने सम्मानित किया। चिकित्सा सेवा के प्रति उनके समर्पण, मरीजों के प्रति संवेदनशीलता और कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर सेवा देने के लिए उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया।
डॉ. प्रकाश खूंटे राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। चिकित्सा के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने मरीजों के उपचार के साथ ही उनके प्रति मानवीय संवेदनाओं को हमेशा प्राथमिकता दी है। मरीजों की समस्याओं को गंभीरता से सुनना, उनके उपचार में पूरी जिम्मेदारी के साथ जुटना और जरूरतमंद मरीजों की मदद के लिए तत्पर रहना उनके सेवाभावी व्यक्तित्व की पहचान है।
कोरोना महामारी के कठिन दौर में भी डॉ. खूंटे ने उल्लेखनीय सेवाएं दीं। जब संक्रमण के कारण आम लोगों के साथ-साथ स्वास्थ्यकर्मियों के सामने भी गंभीर चुनौतियां थीं, उस समय उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन करते हुए कोरोना मरीजों का उपचार किया। महामारी के दौरान उनकी सेवाभावना और समर्पण ने उन्हें मरीजों और उनके परिजनों के बीच एक भरोसेमंद चिकित्सक के रूप में पहचान दिलाई।
स्वतंत्रता दिवस समारोह में सम्मान प्राप्त होने पर डॉ. प्रकाश खूंटे ने इसे अपने लिए गौरव के साथ-साथ नई जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा का माध्यम है। मरीज का स्वस्थ होकर अपने परिवार के बीच लौटना ही एक चिकित्सक के लिए सबसे बड़ा संतोष और सम्मान है। उन्होंने कहा कि समारोह में मिला यह सम्मान उन्हें भविष्य में भी मरीजों की सेवा और चिकित्सा के क्षेत्र में और अधिक निष्ठा एवं समर्पण के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा।डॉ. खूंटे ने सम्मान के लिए जिला प्रशासन एवं विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह एवं जिला प्रशाशन के प्रति आभार व्यक्त किया।
डॉ. प्रकाश खूंटे को स्वतंत्रता दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर चिकित्सा सेवा के लिए सम्मानित किए जाने पर मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों एवं उनके शुभचिंतकों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय होंगे मुख्य अतिथि, प्रख्यात फिल्मकार डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी होंगे मुख्य वक्ता
विभाजन की त्रासदी, विस्थापन और संघर्ष की स्मृतियों को किया जाएगा साझा, विशेष प्रदर्शनी भी होगी आयोजित
रायपुर / भारत विभाजन की विभीषिका में असंख्य परिवारों द्वारा झेली गई पीड़ा, विस्थापन और संघर्ष को स्मरण करने तथा नई पीढ़ी को इतिहास के इस महत्वपूर्ण अध्याय से परिचित कराने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के अवसर पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। राजधानी रायपुर के मुक्ताकाशी मंच, संचालनालय पुरातत्व परिसर, लोकभवन के पास, सिविल लाइन्स में दोपहर 12:30 बजे आयोजित समारोह के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय होंगे।
समारोह की अध्यक्षता संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल करेंगे। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप अति विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। प्रख्यात फिल्मकार एवं अभिनेता डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी समारोह के मुख्य वक्ता होंगे।
विभाजन की पीड़ा और मानवीय संघर्ष पर होगा विमर्श
‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के राज्य स्तरीय आयोजन में वर्ष 1947 के भारत विभाजन के दौरान लाखों लोगों द्वारा झेले गए विस्थापन, पीड़ा और संघर्ष की स्मृतियों को साझा किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य विभाजन की त्रासदी को केवल इतिहास की एक घटना के रूप में नहीं, बल्कि उससे प्रभावित परिवारों के संघर्ष, साहस और नए सिरे से जीवन खड़ा करने की अदम्य जिजीविषा के रूप में भी नई पीढ़ी के सामने प्रस्तुत करना है।
इस अवसर पर विभाजन की विभीषिका और उस दौर की परिस्थितियों पर केंद्रित विशेष प्रदर्शनी एवं स्मृति कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विभाजन से प्रभावित सिंधी, पंजाबी और बंगाली समाज के प्रतिनिधि वक्ता अपने परिवारों एवं समाज से जुड़ी स्मृतियों और अनुभवों को साझा करेंगे। कार्यक्रम में स्कूल एवं कॉलेज के विद्यार्थी भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहेंगे, जिससे वे इतिहास के इस अध्याय और विभाजन की मानवीय पीड़ा को निकटता से समझ सकें।
समारोह के मुख्य वक्ता डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी भारतीय इतिहास, संस्कृति और साहित्य को सिनेमा तथा टेलीविजन के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए विख्यात हैं। लोकप्रिय धारावाहिक ‘चाणक्य’ से देशभर में विशिष्ट पहचान बनाने वाले डॉ. द्विवेदी ने भारत विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित चर्चित फिल्म ‘पिंजर’ का निर्देशन भी किया है। वे समारोह में विभाजन की ऐतिहासिक-सामाजिक पृष्ठभूमि, उसकी मानवीय त्रासदी और उससे जुड़ी स्मृतियों पर अपने विचार रखेंगे।
कार्यक्रम में पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति श्री सच्चिदानंद शुक्ल भी अपने विचार व्यक्त करेंगे। आयोजन में प्रबुद्ध नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, साहित्यकारों, शिक्षाविदों, विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों तथा मीडिया प्रतिनिधियों की उपस्थिति रहेगी।
इन विशिष्ट अतिथियों की रहेगी गरिमामयी उपस्थिति
समारोह में पूज्य शदाणी दरबार तीर्थ के पीठाधीश्वर पूज्य डॉ. युधिष्ठिर लाल महाराज, रायपुर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक श्री राजेश मूणत, श्री सुनील सोनी, श्री मोतीलाल साहू, श्री पुरंदर मिश्रा एवं श्री अनुज शर्मा, रायपुर नगर निगम की महापौर श्रीमती मीनल चौबे, रायपुर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नवीन कुमार अग्रवाल तथा छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग के पूर्व अध्यक्ष श्री यशवंत जैन सहित संस्कृति परिषद के सदस्य, शिक्षाविद् एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहेंगे।
संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह राज्य स्तरीय समारोह विभाजन की त्रासदी में अपना सर्वस्व गंवाने वाले और विस्थापन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने वाले लाखों लोगों की स्मृतियों को नमन करने के साथ ही समाज में एकता, सद्भाव और मानवीय संवेदनाओं के मूल्यों को सुदृढ़ करने का अवसर होगा।
इंटर्न्स एवं आयुक्त, चिकित्सा शिक्षा के मध्य मांगों को लेकर सकारात्मक चर्चा
रायपुर, /
आयुक्त चिकित्सा शिक्षा श्री रितेश अग्रवाल की अध्यक्षता में आईएमए प्रतिनिधियों और विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न्स के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य इंटर्न्स की समस्याओं पर चर्चा कर उनका समाधान निकालना था।
स्टाइपेंड बढ़ाने की माँग
बैठक के दौरान इंटर्न्स ने अपनी प्रमुख माँग रखते हुए स्टाइपेंड बढ़ाने की बात कही। इस पर विभाग की ओर से आश्वासन दिया गया कि छात्र हित में सरकार द्वारा हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं और इंटर्न्स की स्टाइपेंड संबंधी माँग पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
हॉस्टल निर्माण को मंजूरी
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि चालू वित्तीय वर्ष के बजट में प्रायः सभी मेडिकल कॉलेजों में छात्र-छात्राओं के लिए हॉस्टल स्वीकृत किए गए हैं, जो छात्रों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है।
स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित न करने की अपील
बैठक के अंत में सभी उपस्थित सदस्यों से अपील की गई कि स्वास्थ्य सेवाएँ सीधे तौर पर जनहित से जुड़ी होती हैं, इसलिए यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी परिस्थिति में सेवाएँ प्रभावित न हों।
बैठक में IMA-MSN Chhattisgarh के संयोजक श्री शाहदिल ख़ुसरू ने कहा कि आज की यह बैठक समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक पहल साबित हुई है। दोनों पक्षों ने सकारात्मक वातावरण में चर्चा को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की और बैठक का समापन भी सकारात्मक माहौल में हुआ। उन्होंने कहा कि
हमें उम्मीद है कि प्रशासन और इंटर्न्स, दोनों की ओर से इसी प्रकार संवाद और सहयोग की भावना बनी रहेगी तथा इस समस्या का जल्द ही संतोषजनक समाधान निकलेगा।
बैठक में पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर (PT. JNM Raipur), छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान, बिलासपुर (CIMS Bilaspur), शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, राजनांदगांव (GMC Rajnandgaon), शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, कांकेर (GMC Kanker) एवं शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, अंबिकापुर (GMC Ambikapur) के इंटर्न्स उपस्थित रहे।
रायपुर /
छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) की कार्य शैली और नियम आधारित टेंडर प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी मुहर लगा दी है। अदालत ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें CGMSC पर 1 लाख का जुर्माना (हर्जाना) लगाया गया था। इस फैसले से साफ हो गया है कि कंपनी की टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह साफ-सुथरी और नियमों के हिसाब से थी।
पूरा मामला यह था कि टेंडर से जुड़े एक मामले में एक ठेकेदार ने हाईकोर्ट में शिकायत की थी, जिसके बाद हाईकोर्ट ने CGMSC पर 1 लाख का जुर्माना लगा दिया था। इसके खिलाफ CGMSC सुप्रीम कोर्ट गया। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सुनवाई में पाया कि निगम की तरफ से कोई गलती नहीं हुई थी।
अदालत ने माना कि ठेकेदार ने फॉर्म में जो अपनी ऑफिशियल ईमेल आईडी दी थी, उसी पर समय रहते सारी जरूरी जानकारियां और मैसेज भेजे गए थे। ठेकेदार ने खुद तय समय में जवाब नहीं दिया, इसलिए नियमों के तहत ही उसे टेंडर से बाहर किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि पूरे मामले में CGMSC का काम बिल्कुल सही था और उस पर लगा 1 लाख का जुर्माना ग़लत है। इस फैसले से साबित हो गया है कि CGMSC अपने सभी टेंडर और खरीदारी में पूरी ईमानदारी और नियमों का पालन करता है। निगम ने कहा है कि वह आगे भी राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए ऐसे ही पूरी ईमानदारी के साथ काम करता रहेगा।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
