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नोटिस का पालन या दिखावा? कई पोलों पर अब भी साफ पढ़ा जा रहा ‘WILD WADI’
By – नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। आड़ावाल से कुरंदी मुख्य मार्ग पर शासकीय विद्युत लाइट खंभों पर पेंट के माध्यम से निजी प्रचार लिखे जाने संबंधी खबर “शौर्यपथ” में प्रकाशित हुए लगभग दो सप्ताह बीत चुके हैं, लेकिन स्थिति पूरी तरह सामान्य होती दिखाई नहीं दे रही है। खबर के प्रकाशन के बाद संबंधित विभाग ने संज्ञान लेने, नोटिस जारी करने और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया था।
मौके पर अवलोकन करने पर यह सामने आया कि खंभों पर लिखे गए प्रचार पर सफेद रंग पोतकर उसे ढकने का प्रयास किया गया है। हालांकि, कई स्थानों पर “WILD WADI” नाम अब भी स्पष्ट रूप से पढ़ा जा सकता है। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि मूल पेंट को तकनीकी तरीके से हटाने के बजाय उस पर रंग चढ़ाया गया है।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार विभाग ने मामले की आंतरिक गणना कराई है, जिसमें लगभग 130 शासकीय खंभों पर उक्त नाम पेंट से लिखे जाने की जानकारी सामने आई है। यदि यह तथ्यात्मक रूप से सही है, तो यह उल्लंघन सीमित नहीं बल्कि व्यापक स्तर का माना जाएगा। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि क्या नोटिस जारी कर आंशिक सफेदी कर देना पर्याप्त अनुपालन की श्रेणी में माना जा सकता है?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शासकीय संपत्ति पर बिना विधिवत अनुमति किसी भी प्रकार का लेखन या विज्ञापन नियमानुसार प्रतिबंधित है। इसलिए कार्रवाई भी ऐसी होनी चाहिए जो स्पष्ट, पारदर्शी और उदाहरणात्मक हो। कई खंभों पर उभरते अक्षर संकेत देते हैं कि कार्य पूर्णतः संतोषजनक नहीं हुआ है।
दूसरे मार्ग पर नए फ्लेक्स, उठे नए सवाल
इसी बीच हाटगुड़ा से माड़पाल मार्ग पर मुख्य विद्युत खंभों पर “SIDDHARTH COMPUTER ACADEMY” के फ्लेक्स लगाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह हालिया स्थापना है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि एक मामले में सख्त और उदाहरणात्मक कार्रवाई होती, तो संभवतः अन्य स्थानों पर इस प्रकार की पुनरावृत्ति नहीं होती।
यदि संबंधित संस्थान या व्यक्ति के पास विधिवत अनुमति है, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। यदि अनुमति नहीं है, तो नियमानुसार समान रूप से कार्रवाई अपेक्षित है। नागरिकों का मत है कि नियमों का अनुपालन सभी पर समान रूप से होना चाहिए, अन्यथा कार्रवाई की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठते हैं।
पारदर्शिता और जवाबदेही की अपेक्षा
प्रशासनिक कार्रवाई का उद्देश्य केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन होना चाहिए। यदि लगभग 130 खंभों पर उल्लंघन दर्ज हुआ है, तो सुधारात्मक और संभावित दंडात्मक कदमों की स्थिति भी स्पष्ट की जानी चाहिए। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति पर भी रोक लगेगी।
यह खबर किसी व्यक्ति या संस्था विशेष के विरुद्ध आरोप स्थापित करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि शासकीय संपत्ति के संरक्षण और नियमों के समान अनुपालन की अपेक्षा को रेखांकित करने के लिए प्रकाशित की जा रही है।
अब सबकी निगाहें संबंधित विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या पेंट प्रचार को पूर्णतः तकनीकी तरीके से हटाकर एक स्पष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया जाएगा, या वर्तमान स्थिति को ही पर्याप्त मान लिया जाएगा?
सवाल सीधा है: क्या नियम व्यवहार में भी उतनी ही गंभीरता से लागू होंगे, जितनी कागज़ों में दिखाई देते हैं?
रायपुर / शौर्यपथ / प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के लाभार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना सामने आई है। भारत सरकार ने इस योजना के अंतर्गत सहायता राशि की प्रथम किस्त मार्च महीने के अंत तक जारी करने की तैयारी में है। हालांकि, इस लाभ को प्राप्त करने के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन और संबंधित विभागों ने सदस्यों एवं प्रतिष्ठानों के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं, जिनका पालन न करने पर लाभार्थी राशि से वंचित रह सकते हैं।
योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक नए जुडऩे वाले और प्रथम बार सदस्य बनने वाले व्यक्तियों के लिए सार्वभौमिक खाता संख्या (्रहृ) का चेहरा प्रमाणीकरण तकनीक (स्नड्डष्द्ग ्रह्वह्लद्धद्गठ्ठह्लद्बष्ड्डह्लद्बशठ्ठ ञ्जद्गष्द्धठ्ठशद्यशद्द4) के माध्यम से सत्यापन कराना अब अनिवार्य कर दिया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना इस डिजिटल सत्यापन के योजना का लाभ प्रदान नहीं किया जाएगा। यदि किसी सदस्य को इस तकनीकी प्रक्रिया में कोई कठिनाई आती है, तो उन्हें तुरंत अपने संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय में उपस्थित होकर सहायता प्राप्त करने की सलाह दी गई है।
योजना की राशि का प्रेषण सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (ष्ठक्चञ्ज) के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए सदस्यों का बैंक खाता इस सुविधा हेतु सक्षम होना अनिवार्य है। जिन कर्मचारियों के खाते वर्तमान में इस प्रणाली से नहीं जुड़े हैं, उन्हें तत्काल अपनी बैंक शाखा में जाकर यह सुविधा सक्रिय कराने के निर्देश दिए गए हैं ताकि भुगतान प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।
व्यक्तियों के साथ-साथ नियोक्ताओं और संस्थानों पर भी नियमों के पालन की जिम्मेदारी डाली गई है। आधिकारिक सूचना के अनुसार, जो प्रतिष्ठान नियमित रूप से इलेक्ट्रॉनिक चालान-सह-विवरणिका (श्वष्टक्र) प्रस्तुत नहीं कर रहे हैं या अंशदान जमा करने में विलंब कर रहे हैं, उनके कर्मचारियों को योजना के लाभ से रोका जा सकता है। प्रशासन ने सभी संस्थानों से समय पर विवरणिका भरने और अंशदान सुनिश्चित करने का आग्रह किया है ताकि सुचारू रूप से किस्त जारी की जा सके।
दुर्ग / शौर्यपथ / जिला कार्यालय सभाकक्ष में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने आमजनों की समस्याएं गंभीरता से सुनीं और संबंधित विभागों को शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए। इस अवसर पर डिप्टी कलेक्टर श्री हितेश पिस्दा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। जनदर्शन में अवैध कब्जा, आवासीय पट्टा, भूमि सीमांकन, सीसी रोड निर्माण, ऋण पुस्तिका सुधार, आर्थिक सहायता और प्रधानमंत्री आवास योजना सहित कुल 137 आवेदन प्राप्त हुए।
जन्मतिथि सुधार का मामला
नयापारा वार्ड क्रमांक 1 निवासी ने अपनी पुत्री की शालेय जन्मतिथि में त्रुटि सुधार की मांग की। अभिलेख में जन्मतिथि 15 मार्च 2008 दर्ज है, जबकि जन्म प्रमाण पत्र में 15 मार्च 2009 अंकित है। विद्यालय प्रबंधन द्वारा सुधार नहीं किए जाने की शिकायत पर कलेक्टर ने प्राचार्य से सीधे चर्चा कर दस्तावेजों के आधार पर उचित कार्रवाई के निर्देश दिए।
महतारी वंदन योजना की किस्त लंबित
भिलाई निवासी महिला ने तीन माह से महतारी वंदन योजना की राशि नहीं मिलने की शिकायत की। फिंगरप्रिंट मैच नहीं होने के कारण किस्त अटकी होने पर कलेक्टर ने महिला एवं बाल विकास विभाग को त्वरित समाधान के निर्देश दिए।
प्रधानमंत्री आवास योजना की किस्त नहीं मिली
गयानगर वार्ड क्रमांक 4 निवासी ने छह माह बीतने के बाद भी पीएम आवास योजना की एक भी किस्त नहीं मिलने की शिकायत की। कलेक्टर ने नगर निगम दुर्ग आयुक्त को नियमानुसार शीघ्र किस्त जारी करने के निर्देश दिए।
तेज डीजे पर सख्ती
कुरूद के सुंदर विहार व प्रगति नगर क्षेत्र के रहवासियों ने प्रीत पैलेस में देर रात तक तेज डीजे बजने से हो रही परेशानी की शिकायत की। कलेक्टर ने एसडीएम भिलाई को निर्धारित समय सीमा के उल्लंघन पर साउंड सिस्टम जब्त करने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि जनदर्शन आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी मंच है और प्रत्येक आवेदन पर संवेदनशीलता व प्राथमिकता से कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
रायपुर / शौर्यपथ / होली के पहले निकाय कर्मियों को वेतन भुगतान के लिए मानवीय सरोकार के साथ पहल करते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा प्रदेश के नगरीय निकायों को चुंगी क्षतिपूर्ति मद से कुल 62.85 करोड़ रुपए का आबंटन आज जारी किया गया है। इसमें वेतन भुगतान के लिए कुल 51 करोड़ 71 लाख 21 हजार रुपये आबंटित किए गए हैं। इसके साथ ही सभी नगरीय निकायों को प्रतिमाह नियमित रूप से दी जा रही चुंगी क्षतिपूर्ति के अंतर्गत कुल 11 करोड़ 14 लाख 38 हजार 492 रुपये का भी आबंटन किया गया है।
फरवरी-2026 की स्थिति में नगरीय निकायों में वेतन के लिए लंबित राशि के आधार पर नगरीय निकायों को चुंगी क्षतिपूर्ति मद से आबंटन किया गया है, ताकि नगरीय निकायों में वित्तीय संतुलन बनाए रखा जा सके और लंबित देयकों एवं वेतन का निराकरण हो सके।
11 नगर निगमों को वेतन के लिए 25.05 करोड़
प्रदेश के 11 नगर निगमों को कुल 25 करोड़ 5 लाख 34 हजार रुपये की राशि वेतन एवं चुंगी क्षतिपूर्ति मद में प्रदान की गई है। नगर पालिक निगम भिलाई को 4 करोड़, बिलासपुर को 5 करोड़, दुर्ग को 1 करोड़ 65 लाख 92 हजार, राजनांदगाँव को 3 करोड़, जगदलपुर को 1 करोड़ 50 लाख, अंबिकापुर को 3 करोड़, चिरमिरी को 2 करोड़, रिसाली को 2 करोड़, बीरगांव को 54 लाख 55 हजार, धमतरी को 1 करोड़ 7 लाख एवं भिलाई-चरोदा को 1 करोड़ 27 लाख 87 हजार रुपये जारी किए गए हैं। नगर निगमों में यह राशि मुख्य रूप से नियमित कर्मचारियों, स्वच्छता कर्मियों एवं संविदा कर्मचारियों के वेतन भुगतान तथा चुंगी समाप्त होने से उत्पन्न राजस्व अंतर की भरपाई हेतु उपयोग की जाएगी। इसके अलावा प्रदेश के सभी 14 नगर निगमों को चुंगी क्षतिपूर्ति के अंतर्गत 7 करोड़ 51 लाख 55 हज़ार 420 रुपये भी आबंटित किए गए हैं।
वेतन के लिए नगर पालिकाओं को 16.48 करोड़ व नगर पंचायतों को 10.17 करोड़
नगरीय प्रशासन विभाग ने प्रदेश के 38 नगर पालिका परिषदों में 16 करोड़ 48 लाख की राशि तथा 85 नगर पंचायतों को कुल 10 करोड़ 17 लाख रुपये से अधिक की राशि होली के पूर्व निकाय कर्मियों को वेतन भुगतान के लिए आबंटित की है। छोटे एवं मध्यम नगरीय निकायों के लिए यह वित्तीय सहायता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रदेश के सभी 54 नगर पालिकाओं को भी चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि दी गई है। इसके लिए 2 करोड़ 8 लाख 52 हजार 17 रुपए का आबंटन जारी किया गया है। इसके अलावा सभी 124 नगर पंचायतों को एक करोड़ 54 लाख 31 हजार 55 रुपए की मासिक चुंगी क्षतिपूर्ति राशि दी गई है।
ज्ञातव्य हो कि राज्य में चुंगी समाप्त होने के बाद नगरीय निकायों को राजस्व में कमी का सामना करना पड़ा था। इस स्थिति में राज्य सरकार द्वारा चुंगी क्षतिपूर्ति मद के माध्यम से निकायों को नियमित अंतराल पर राशि प्रदान की जाती है, ताकि वे अपने प्रशासनिक एवं सेवा संबंधी दायित्वों का निर्वहन सुचारू रूप से कर सकें। यह मद विशेष रूप से वेतन भुगतान, स्वच्छता व्यवस्था, जलप्रदाय सेवाओं एवं दैनिक संचालन व्यय को संतुलित करने में सहायक होती है।
विभाग द्वारा आज आबंटित राशि से नगरीय निकायों में कार्यरत हजारों कर्मचारियों को होली के पूर्व वेतन प्राप्त होगा। इससे निकायों में स्वच्छता, पेयजल आपूर्ति, प्रकाश व्यवस्था एवं अन्य शहरी सेवाओं में निरंतरता बनी रहेगी। नगरीय प्रशासन विभाग ने स्पष्ट किया है कि आबंटित राशि का उपयोग निर्धारित मदों में ही किया जाएगा। सभी निकायों को वित्तीय नियमों का पालन करते हुए व्यय विवरण प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। चुंगी क्षतिपूर्ति मद से वेतन के लिए 51.71 करोड़ एवं नियमित चुंगी क्षतिपूर्ति के रूप में 11.14 करोड़, इस प्रकार कुल 62.85 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का होली के पहले आबंटन नगरीय निकायों के लिए बड़ी राहत है।
दुर्ग | शौर्यपथ।
छत्तीसगढ़ में किसानों के हित को सर्वोपरि रखते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार ने एक और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। राज्य शासन द्वारा “कृषक उन्नति योजना” के अंतर्गत पंजीकृत धान एवं धान बीज उत्पादक किसानों को धान के अंतर की राशि सीधे उनके खातों में हस्तांतरित की जा रही है। इस संबंध में कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग, मंत्रालय महानदी भवन द्वारा सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
जारी पत्र के अनुसार, 25 लाख 28 हजार से अधिक पंजीकृत किसानों को ₹10,324 करोड़ से अधिक की आदान सहायता राशि का वितरण दिनांक 28 फरवरी 2026 को किया जाएगा। यह राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से अंतरित की जाएगी, जिससे पारदर्शिता और त्वरित लाभ सुनिश्चित होगा।
राज्य शासन ने इस अवसर को किसानों के सम्मान और सहभागिता का पर्व बनाने के उद्देश्य से राज्य स्तरीय तथा विकासखंड स्तरीय कार्यक्रमों के आयोजन का निर्णय लिया है। राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मुख्य आतिथ्य में विकासखंड बिल्हा, जिला-बिलासपुर में दोपहर 12.30 बजे आयोजित किया जाएगा। इसी समय सभी विकासखंडों में भी कार्यक्रम आयोजित होंगे।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि—
राज्य स्तरीय कार्यक्रम में न्यूनतम 20 हजार किसानों तथा
विकासखंड स्तरीय कार्यक्रमों में न्यूनतम 2 हजार किसानों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।
इसके लिए स्थान चयन, पेयजल, धूप से बचाव, बैठक व्यवस्था एवं आवागमन की सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।
कार्यक्रमों में विधायकगण, जिला पंचायत अध्यक्ष, जनपद पंचायत अध्यक्ष एवं अन्य जनप्रतिनिधियों को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री श्री साय राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चयनित जिलों के किसानों से सीधा संवाद भी करेंगे, जिसके लिए आवश्यक तकनीकी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि कार्यक्रम स्थल का चयन इस प्रकार किया जाए जिससे किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और आम जनता के दैनिक आवागमन व यातायात पर कोई प्रभाव न पड़े।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में यह निर्णय एक बार फिर यह साबित करता है कि छत्तीसगढ़ में सरकार किसानों के साथ खड़ी है, न कि केवल घोषणाओं तक सीमित है। धान उत्पादक किसानों को समय पर अंतर राशि देकर सरकार ने यह संदेश दिया है कि यह वास्तव में “किसानों की सरकार” है, जो खेत से लेकर खाते तक किसान के हितों की रक्षा कर रही है।
मृणेन्द्र चौबे राजनांदगांव /शौर्यपथ /छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 1.72 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया। उन्होंने कहा कि यह बजट समावेशी विकास, आधारभूत संरचना की मजबूती और निवेश को बढ़ावा देने पर केंद्रित है, जिससे प्रदेश के विकास को नई गति मिलेगी।
इस बजट को हर वर्ग के लिए उपयोगी बताते हुए जिला भाजपा महामंत्री अनुसूचित जाति मोर्चा दीपेश शेंडे ने कहा कि सरकार ने समाज के सभी तबकों के हितों का ध्यान रखा है। बजट में बालिकाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से रानी दुर्गावती योजना की घोषणा की गई है, जिसके तहत 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर पात्र लड़कियों को 1.5 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। किसानों के लिए भी सरकार ने खजाना खोलते हुए कृषक उन्नति योजना हेतु 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। बिजली पंपों की सब्सिडी के लिए 5,500 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए 820 करोड़ रुपये, दीनदयाल भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण के लिए 600 करोड़ रुपये तथा गन्ना किसानों के बोनस के लिए 60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं डेयरी समग्र विकास योजना के अंतर्गत 90 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार के लिए स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट शाला योजना की शुरुआत की गई है, जिसके लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में आवासहीन परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराने के लिए 4,000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा निर्णय लेते हुए महिलाओं के नाम पर जमीन, भवन या अचल संपत्ति की खरीद पर रजिस्ट्री शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट देने का ऐलान किया गया है। दीपेश शेंडे ने कहा कि यह बजट किसानों, महिलाओं, मजदूरों, विद्यार्थियों और गरीब परिवारों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा तथा प्रदेश को आत्मनिर्भर और विकसित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
- बैंक खाता वित्त विभाग के इनपैनल सूची में शामिल बैंक का ही हो
- कोटवाली भूमि प्रकरण पर तत्परतापूर्वक कार्यवाही करें
- भूमि आबंटन प्रकरण हेतु एनओसी देना सुनिश्चित करें विभाग
- खादानों का सीमांकन कर सूचना बोर्ड लगायी जाए
- कलेक्टर ने समय-सीमा प्रकरणों की समीक्षा की
दुर्ग / शौर्यपथ / कलेक्टर अभिजीत सिंह ने आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में अधिकारियों की बैठक में विभागवार सममय-सीमा प्रकरणों की गहन समीक्षा की। साथ ही अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। उन्?होंने पंचायतों में राजस्व प्रकरण पंजीयन, ई-ऑफिस क्रियान्वयन, ऑफिसों के बैंक खाते, कोतवाली भूमि संबंधी प्रकरण, भूमि आबंटन हेतु एनओसी, खादानों का सीमांकन और भवनों में बनाये गये वॉटर हार्वेस्टिंग का जियो टैंगिंग की जानकारी ली। कलेक्टर ने कहा कि राजस्व प्रकरणों के निराकरण में प्रगति लाने शासन की मंशा के अनुरूप पंचायतों को प्रकरण हस्तांतरित की गई है। उन्होंने सभी जनपद सीईओ को ग्राम पंचायतों में अविवादित, नामांतरण, बंटवारा प्रकरणों के पंजीयन में प्रगति लाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि सभी पंचायतों में एक सप्ताह के भीतर पंजीयन दर्ज होना चाहिए। जिन पंचायतों में पंजीयन नहीं होने पर संबंधित पंचायत सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए। कलेक्टर ने कार्यालयों में ई-ऑफिस के माध्यम से फाईल प्रस्तुति पर असंतोष व्यक्त करते हुए अधिकारियों को ई-ऑफिस क्रियान्वयन को गंभीरता से लेने के निर्देश दिये। उन्?होंने विभागों द्वारा संचालित बैंक खाते की जानकारी लेते हुए कहा कि शासन के वित्त विभाग के इनपैनल सूची में शामिल बैंकों में शासकीय कार्यालयों का खाते होना चाहिए।
ऐसे विभाग जिनके खाते वित्त विभाग के इनपैनल सूची में शामिल बैंक में नहीं है, वे तत्काल अपनी खाता बंद कर वित्त विभाग के इनपैनल सूची में शामिल बैंक में खाते खुलवायें। साथ ही बैंक खाते की अपडेट जानकारी जिला कोषालय को उपलब्ध करायें। उन्होंने सभी एसडीएम से संबंधित क्षेत्र में कोटवाली भूमि संबंधी प्रकरण की जानकारी ली और प्रकरणों पर तत्परतापूर्वक कार्यवाही करने के निर्देश दिये। इसी प्रकार विविध निर्माण हेतु भूमि आबंटन के संबंध में संबंधित एसडीएम द्वारा जिन विभागों से एनओसी आमंत्रित किया गया है, ऐसे विभाग शीघ्र एनओसी उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। कलेक्टर ने स्कूली और आंगनबाड़ी बच्चों के आधार अपडेशन की जानकारी ली। साथ ही जन्म प्रमाण नहीं बनने के कारण आंगनबाड़ी के बच्चे जिनका आधार अपडेशन नहीं हो रहे है, ऐसे बच्चों की परियोजनावार सूची ईडीएम को उपलब्ध कराने महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी को निर्देशित किया।
कलेक्टर ने जिले में अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के अंतर्गत स्वीकृत निर्माण कार्यों की जानकारी ली और निर्माण कार्य पूर्ण होने पर यूसी/सीसी आदिम जाति कल्याण विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। इसी प्रकार आदि कर्मयोगी/ धरती आबा योजना अंतर्गत जिले के चिन्हित चार गांव क्रमश: नवागांव (स), सिरनाभांठा, सेमरिया (बी) (धमधा विकासखण्ड) एवं ग्राम अकतई (पाटन विकासखण्ड) में समस्त विभाग शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन पर विशेष फोकस करें। कलेक्टर ने खादानों की सीमांकन की जानकारी लेते हुए सभी एसडीएम को संबंधित क्षेत्र के खादानों का सीमांकन कर विवरण सहित सूचनाफलक लगाने के निर्देश दिये। साथ ही अवैध खोदाई की घनमीटर में माप कर पैनाल्टी राशि अधिरोपित किया जाए। कलेक्टर ने भू-जल स्तर को बढ़ावा देने के लिए नये भवनों में वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने पर जोर देते हुए सभी नगरीय निकायों में बनाये गये वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का जियो टेंगिंग कराने और 31 मार्च के पहले सीईओ जिला पंचायत को रिपोर्टिंग करने निगम अधिकारियों को निर्देशित किया। इसी प्रकार सभी निर्माण कार्य एजेंसी विभागों को भी नवनिर्मित भवनों में बनाये गये वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का जियो टेंगिंग कराने के निर्देश दिये गये।
बैठक में आगामी जनगणना 2027 के लिए जिले में प्रारंभिक तैयारियों पर भी चर्चा की गई। कलेक्टर सिंह ने पीजी पोर्टल, मुख्यमंत्री अन्य पत्र, कलेक्टर जनदर्शन, पीजीएन (वेब एवं पोस्ट) पोर्टल, ई-समाधान और मुख्यमंत्री जनदर्शन के लंबित प्रकरणों का भी शीघ्र निराकृत करने अधिकारियों को निर्देशित किया। बैठक में वनमंडलाधिकारी दीपेश कपिल, अपर कलेक्टर विरेन्द्र सिंह एवं श्रीमती योगिता देवांगन, जिला पंचायत के सीईओ बी.के. दुबे, नगर निगम भिलाई के आयुक्त राजीव पाण्डेय, नगर निगम दुर्ग के आयुक्त सुमीत अग्रवाल, नगर निगम रिसाली की आयुक्त श्रीमती मोनिका वर्मा, संयुक्त कलेक्टर हरवंश सिंह मिरी एवं श्रीमती शिल्ली थामस, सभी एसडीएम, जनपद सीईओ एवं समस्त विभाग के जिला प्रमुख अधिकारी उपस्थित थे।
दुर्ग / शौर्यपथ / वनमंडलाधिकारी दुर्ग वनमंडल द्वारा 23 एवं 24 फरवरी 2026 को अवैध काष्ठ परिवहन के विरुद्ध विशेष अभियान चलाते हुए बड़ी कार्यवाही की गई। इस दौरान अवैध लकड़ी परिवहन में संलिप्त चार वाहनों को जब्त किया गया।
प्राप्त गोपनीय सूचना के आधार पर वनमंडलाधिकारी दुर्ग के निर्देशन एवं उप वनमंडलाधिकारी के नेतृत्व में उडऩदस्ता दल दुर्ग वृत्त तथा परिक्षेत्र सहायक भिलाई-03 की संयुक्त टीम ने 23 एवं 24 फरवरी को प्रात: 3 बजे से 6 बजे तक विशेष रात्रि गश्त अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान अवैध रूप से काष्ठ परिवहन करते हुए कुल चार वाहन पकड़े गए। वाहन क्रमांक सीजी-10सी 3389 में कहुआ मिश्रित जलाऊ लकड़ी, टाटा 1109, क्रमांक सीजी-08 एल 3736 में कहुआ मिश्रित जलाऊ लकड़ी, टाटा 1109, क्रमांक सीजी-04 जेसी 9290 में कहुआ मिश्रित गोला, टाटा 1109 क्रमांक सीजी-04 एमएफ 6945 में कहुआ मिश्रित जलाऊ लकड़ी, सभी वाहन अवैध काष्ठ से लदे पाए गए, जिन्हें विधिवत जब्त कर पुलगांव एवं पाटन डिपो में जमा कराया गया। उक्त प्रकरणों में संबंधित आरोपियों के विरुद्ध वन अपराध प्रकरण क्रमांक 79/11 दिनांक 23.02.2026 तथा 91/3, 91/4, 91/5 दिनांक 24.02.2026 के तहत मामला दर्ज कर विधि अनुसार वैधानिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।
वनमंडलाधिकारी दुर्ग ने बताया कि वन संपदा की सुरक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अवैध काष्ठ परिवहन एवं तस्करी के विरुद्ध सतत निगरानी, सघन गश्त एवं कठोर दंडात्मक कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। विभाग इस दिशा में पूर्णत: सजग एवं प्रतिबद्ध है।
रायपुर/ शौर्यपथ / बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि ज्ञान गति की असफलता के बाद संकल्प का नया जुमला वित्त मंत्री ने फेंका है। यह बजट भी जनता को निराश करने वाला बजट है। वित्त मंत्री हाई स्कूल के बच्चे के समान कल्पनाओं में डूबते नजऱ आये। इनका बजट राज्य की जमीनी हकीकत से कोसों दूर नजर आया। उन्होंने अपने बजट भाषण में बस्तर एवं सरगुजा के विकास के सब्जबाग जो दिखाये, लेकिन इन वादों को पूरा करने बजट प्रावधान निराश करने वाले रहे।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि पिछले बजट में 20 हजार शिक्षकों की भर्ती की घोषणा वित्त मंत्री ने किया था, इस बजट में वे यह नहीं बताये कि उनमें से कितने की भर्ती हुई? भाजपा ने विधानसभा चुनाव में मोदी की गारंटी के पांच साल में 1 लाख युवाओं को नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन इस बजट में नई नौकरियों के लिए वित्त मंत्री ने कुछ नहीं किया। न नये स्कूल खोलने की बात है, न नये महाविद्यालय खोलने की बात है और न ही कौशल उन्नयन के लिए कुछ है। यही नहीं न नये सिंचाई के बांध बनाने के लिए कुछ है और न ही महिला स्व-सहायता समूहों के रोजगार के लिए कुछ है, न उद्योगों के विकास के लिए कुछ है। रमन सरकार के 15 साल से लेकर साय सरकार के तीन बजट में भाजपा अभी तक केवल मेट्रो ट्रेन का सर्वे ही करवा रही है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि युवाओं को बेरोजगारी भत्ता, छात्राओं को मुफ्त यातायात के वादों पर भी वित्त मंत्री ने कुछ नहीं किया है। उद्योगों के लिए लैंड बैक तैयार करने की घोषणा कर वित्त मंत्री ने किसानों की जमीने जबरिया छीनने की मंशा को स्पष्ट किया है। घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए मात्र 80 करोड़ का प्रावधान बताता है कि साय सरकार 200 यूनिट मुफ्त बिजली योजना भी बंद करने जा रही है। डीएड अभ्यर्थियों की भर्ती, आंगनबाड़ी बहनों और रसोईया संघ के लिए भी बजट में कुछ नहीं है। अनियमित कर्मचारियों की नियमित करने के लिए बजट में कुछ नहीं है। 56 हजार शिक्षकों के खाली पदों को भर्ती करने के लिए बजट में कुछ नहीं है। भर्ती परीक्षा की एजेंसी को मजबूत करने की बात किया गया लेकिन 1 वर्षों में कितनी नौकरियां देंगे इसमें कुछ नहीं है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
