October 23, 2026
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    बच्चों के डांस कॉम्पिटिशन, गायन और खेलकूद जैसे कार्यक्रमों से उत्सव का माहौल

    कोंडागांव। जिला मुख्यालय कोंडागांव में बंगाली समाज द्वारा अपने प्रमुख त्योहार दुर्गा पूजा को इस वर्ष भी हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। शहर में दुर्गा पूजा को लेकर श्रद्धा और उत्साह का माहौल है। बंगाली समाज की ओर से विभिन्न स्थानों पर मां दुर्गा के साथ उनके पूरे परिवार की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, जहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर रहे हैं।

    कोंडागांव में दुर्गा पूजा का आयोजन तीन प्रमुख स्थानों पर किया जा रहा है। इनमें कालीबाड़ी, डीएनके राउंड तथा श्री श्री दुर्गा बाड़ी आरकाछापड़ा शामिल हैं। तीनों स्थानों पर मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जा रही है।

    दुर्गा पूजा के अवसर पर अलग-अलग समितियों द्वारा धार्मिक आयोजनों के साथ सांस्कृतिक एवं मनोरंजक कार्यक्रम भी रखे गए हैं। कहीं बच्चों के लिए डांस कॉम्पिटिशन और गायन प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है, तो कहीं खेलकूद जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल रहा है।

    इस आयोजन के जरिए बंगाली समाज के लोग अपनी धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को उत्साहपूर्वक आगे बढ़ा रहे हैं। दुर्गा पूजा के दौरान पूजा-पाठ के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी विशेष महत्व रहता है, जिससे समाज के लोगों को एक-दूसरे से जुड़ने और त्योहार की खुशियां साझा करने का अवसर मिलता है।

    कोंडागांव में तीनों पूजा स्थलों पर उत्सव का माहौल बना हुआ है। मां दुर्गा की आराधना के साथ समाज के लोग श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ इस पर्व को मना रहे हैं।

    चिखलपुटी के सार्वजनिक दुर्गा समिति के गरबा उत्सव में पेड़ों की रक्षा के प्रति जागरूकता लाने की अनूठी पहल, बच्चे की वेशभूषा ने खींचा लोगों का ध्यान

    कोंडागांव। जिला मुख्यालय के चिखलपुटी में आयोजित नवरात्रि गरबा उत्सव के दौरान इस बार एक अनोखी पहल देखने को मिली। सार्वजनिक दुर्गा समिति द्वारा आयोजित गरबा कार्यक्रम में दीपक पटेल के परिवार ने अपने नन्हे बेटे को पेड़ की पत्तियों से सजी फैंसी ड्रेस पहनाकर ‘पेड़ बचाओ’ का संदेश दिया। बच्चे की इस अनूठी वेशभूषा ने गरबा में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।

    नवरात्रि के उल्लास और गरबा की रंगीन शाम के बीच बच्चे की इस खास प्रस्तुति ने लोगों के दिलों को छू लिया। परिवार की इस पहल के माध्यम से प्रकृति की रक्षा और पेड़ों के महत्व को सहज व आकर्षक तरीके से सामने लाने का प्रयास किया गया।

    वर्षों से हो रहा है गरबा का आयोजन

    चिखलपुटी स्थित दुर्गा मंदिर का निर्माण स्वर्गीय श्री किशोर कुमार दुग्गड़ द्वारा कराया गया था। इसके बाद वर्ष 2025 से राजेश दुग्गड़ के नेतृत्व में प्रतिवर्ष नवरात्रि के अवसर पर गरबा का आयोजन किया जा रहा है। वर्षों से आयोजित हो रहा यह कार्यक्रम क्षेत्र के लोगों के लिए आस्था और उत्सव का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

    श्रद्धालुओं के लिए भोजन की विशेष व्यवस्था

    गरबा आयोजन में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग से फलाहार की व्यवस्था की जाती है, वहीं अन्य लोगों के लिए खीर, पूड़ी सहित भोजन उपलब्ध कराया जाता है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग गरबा खेलने और कार्यक्रम देखने पहुंचते हैं।

    नवरात्रि के दौरान यहां उमड़ने वाली भीड़ और उत्सव के माहौल से चिखलपुटी का यह गरबा आयोजन जिला मुख्यालय के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है। इस बार दीपक पटेल के परिवार की ‘पेड़ बचाओ’ पहल ने धार्मिक उत्सव के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी जोड़ दिया।

    भिलाई भिलाई / इस्पात संयंत्र में 16 अक्टूबर 2026 को सेल के मानव संसाधन परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में ‘सेल दर्पण पोर्टल’ का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर निदेशक (कार्मिक) श्री के. के. सिंह एवं निदेशक प्रभारी, भिलाई इस्पात संयंत्र श्री चित्त रंजन महापात्र मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। लगभग 18 माह के सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप ‘सेल दर्पण पोर्टल’ का गो-लाइव संभव हुआ। पोर्टल के औपचारिक शुभारंभ के साथ ही सेल के अधिकारियों के 6,100 स्कोरकार्ड लाइव हो गए। कार्यक्रम में सेल के वरिष्ठ अधिकारियों, संबंधित टीमों तथा अन्य हितधारकों ने प्रत्यक्ष एवं ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता की।

    कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात बॉस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) की टीम ने ‘सेल दर्पण’ की परिवर्तन यात्रा, इसकी परिकल्पना, प्रमुख विशेषताओं तथा संगठनात्मक उद्देश्यों पर प्रस्तुति दी। इस दौरान पोर्टल के विकास एवं क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न पहलुओं और सेल की परफॉर्मेंस मैनेजमेंट प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला गया।

    तत्पश्चात निदेशक (कार्मिक) श्री के. के. सिंह एवं निदेशक प्रभारी, भिलाई इस्पात संयंत्र श्री चित्त रंजन महापात्र द्वारा ‘सेल दर्पण पोर्टल’ का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर निदेशक (वाणिज्य) टी. एन. नटराजन, निदेशक प्रभारी, बोकारो स्टील प्लांट श्री प्रिय रंजन, निदेशक प्रभारी, इस्को एवं दुर्गापुर स्टील प्लांट सुरजीत मिश्रा, निदेशक प्रभारी, राउरकेला स्टील प्लांट आलोक वर्मा तथा निदेशक (माइनिंग) श्री मनीष राज गुप्ता ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए।

    इसके बाद बीसीजी एवं संबंधित तकनीकी टीम ने पोर्टल की प्रमुख विशेषताओं का प्रदर्शन किया। इसमें विशेष रूप से स्कोरकार्ड टूल तथा उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी गई। साथ ही, पोर्टल के प्रभावी उपयोग, आगामी कार्ययोजना, क्रियान्वयन की प्राथमिकताओं तथा आवश्यक सहयोग व्यवस्था पर भी चर्चा की गई।

    निदेशक (कार्मिक) के. के. सिंह ने अपने संबोधन में सेल की परफॉर्मेंस मैनेजमेंट प्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं परिणामोन्मुख बनाने में ‘सेल दर्पण पोर्टल’ की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह पोर्टल अधिकारियों के परफॉर्मेंस गोल्स, उपलब्धियों एवं मूल्यांकन की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने व्यक्तिगत परफॉर्मेंस को संगठनात्मक उद्देश्यों के साथ जोड़ने तथा निष्पक्ष एवं उद्देश्यपरक मूल्यांकन सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों से पोर्टल को अपनाने तथा इसके प्रभावी उपयोग के माध्यम से सेल की परफॉर्मेंस मैनेजमेंट प्रणाली को सुदृढ़ बनाने का आह्वान किया।

    निदेशक प्रभारी, भिलाई इस्पात संयंत्र चित्त रंजन महापात्र ने अपने संबोधन में कहा कि प्रभावी परफॉर्मेंस मैनेजमेंट किसी भी संगठन की उत्पादकता, जवाबदेही एवं निरंतर विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने ‘सेल दर्पण पोर्टल’ को परफॉर्मेंस मैनेजमेंट प्रणाली को अधिक व्यवस्थित एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने स्पष्ट परफॉर्मेंस टारगेट निर्धारित करने, नियमित प्रगति की समीक्षा करने तथा व्यक्तिगत उपलब्धियों को संगठनात्मक लक्ष्यों के साथ जोड़ने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से पोर्टल का प्रभावी उपयोग करने तथा परफॉर्मेंस मैनेजमेंट को केवल मूल्यांकन की प्रक्रिया न मानकर निरंतर सुधार एवं बेहतर परिणाम प्राप्त करने के माध्यम के रूप में अपनाने का आग्रह किया।

    कार्यक्रम के दौरान सेल के निदेशक एवं विभिन्न इकाइयों के निदेशक प्रभारियों ने अपने संबोधन में ‘सेल दर्पण पोर्टल’ के उद्देश्यों, संगठन में इसकी रणनीतिक महत्ता तथा परफॉर्मेंस मैनेजमेंट प्रणाली को सुदृढ़ बनाने में इसकी भूमिका पर अपने विचार साझा किए।

    कार्यक्रम के अंत में मुख्यालय में मानव संसाधन परिवर्तन के महाप्रबंधक रिजवान ए. सिद्दीकी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया तथा पोर्टल के विकास एवं क्रियान्वयन में योगदान देने वाली टीमों, हितधारकों और संबंधित एजेंसियों के प्रति आभार व्यक्त किया। 

    ‘सेल दर्पण पोर्टल’ सेल की परफॉर्मेंस मैनेजमेंट प्रणाली को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी एवं परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पोर्टल के माध्यम से परफॉर्मेंस गोल्स, उपलब्धियों एवं मूल्यांकन की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने तथा व्यक्तिगत योगदान को संगठनात्मक लक्ष्यों के साथ जोड़ने में सहायता मिलेगी।

    दुर्ग / न्याय की राह में दूरियाँ कम हो रही हैं और तकनीक न्यायिक प्रक्रिया को नए आयाम दे रही है। अब ऑडियो-वीडियो माध्यमों से साक्ष्य दर्ज करने से लेकर डिजिटल साक्ष्यों के महत्व को समझने तक, न्याय व्यवस्था में तकनीक की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में तकनीक का उपयोग केवल सुविधाजनक ही नहीं, बल्कि विधिसम्मत, निष्पक्ष और विश्वसनीय होना भी आवश्यक है।

    इसी दृष्टिकोण को केंद्र में रखते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग में 16 अक्टूबर 2026 को “ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से न्यायिक कार्यवाही एवं न्याय श्रुति नियम, 2025 का विधिक एवं व्यावहारिक परिप्रेक्ष्य” विषय पर विधिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में न्यायिक कार्यवाही के आधुनिक स्वरूप, साक्ष्य की प्रक्रिया और तकनीकी साधनों के विधिसम्मत उपयोग पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम के साथ ई-साक्ष्य एवं डिजिटल साक्ष्यों से संबंधित प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसने आयोजन को व्यावहारिक और ज्ञानवर्धक स्वरूप प्रदान किया।

    *न्यायालय की सीमाओं से परे साक्ष्य, लेकिन विधि के दायरे में*

    प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री के. विनोद कुजूर तथा प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय, दुर्ग श्रीमती सुमन एक्का की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित संगोष्ठी में द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्री प्रशांत पराशर ने ‘न्याय श्रुति नियम, 2025’ के प्रमुख प्रावधानों और उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम का अभिभाषण प्रथम व्यवहार न्यायाधीश, कनिष्ठ श्रेणी, दुर्ग कु. दीपांशी जैन द्वारा प्रस्तुत किया गया।

    संगोष्ठी में इस बात पर बल दिया गया कि आधुनिक तकनीक न्यायिक कार्यवाही को अधिक सुगम और समयबद्ध बनाने में सहायक हो सकती है, लेकिन इसका प्रभावी उपयोग तभी संभव है, जब विधिक प्रावधानों का पालन करते हुए साक्ष्य की विश्वसनीयता और न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए।

    *ई-साक्ष्य एवं डिजिटल साक्ष्यों की प्रदर्शनी : तकनीक को समझने का व्यावहारिक माध्यम*

    संगोष्ठी का एक महत्वपूर्ण आकर्षण प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा आयोजित ई-साक्ष्य की प्रक्रिया एवं डिजिटल साक्ष्यों से संबंधित प्रदर्शनी रही। प्रदर्शनी का उद्देश्य डिजिटल साक्ष्यों की प्रक्रिया, उनके महत्व और न्यायिक कार्यवाही में उनकी प्रासंगिकता के प्रति समझ विकसित करना था।

    इस पहल ने संगोष्ठी की विषयवस्तु को व्यावहारिक आयाम प्रदान किया। जहाँ संगोष्ठी में नियमों और प्रक्रियाओं की विधिक व्याख्या की गई, वहीं प्रदर्शनी के माध्यम से ई-साक्ष्य एवं डिजिटल साक्ष्यों से संबंधित जानकारी को एक अलग और सहज स्वरूप में प्रस्तुत किया गया। इस प्रकार न्यायिक तकनीक से जुड़े विषयों को केवल सैद्धांतिक चर्चा तक सीमित न रखते हुए, उन्हें प्रत्यक्ष जानकारी और जागरूकता से जोड़ने का प्रयास किया गया।

    *विधिक जागरूकता में नवाचार: रंगोली ने भी बढ़ाई आयोजन की गरिमा*

    कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा आकर्षक रंगोली का निर्माण कराया गया। रंगोली ने आयोजन को रचनात्मक स्वरूप प्रदान करने के साथ उसकी शोभा भी बढ़ाई। विधिक संगोष्ठी, डिजिटल साक्ष्य प्रदर्शनी और कलात्मक प्रस्तुति का यह समन्वय दर्शाता है कि विधिक जागरूकता को प्रभावी बनाने के लिए पारंपरिक और आधुनिक, दोनों प्रकार के माध्यम उपयोगी हो सकते हैं।

    *न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक और संस्थागत समन्वय पर जोर*

    कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारीगण के अतिरिक्त उप संचालक अभियोजन श्री भीम सिंह राजपूत, दुर्ग बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री रमेश शर्मा, सचिव श्री रविशंकर सिंह तथा जेल अधीक्षक श्री मनीष संभाकर सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों की सहभागिता ने न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े पक्षों के बीच समन्वय और साझा समझ के महत्व को रेखांकित किया। संगोष्ठी का उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, अभियोजन पक्ष तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को ‘न्याय श्रुति नियम, 2025’ के प्रावधानों और ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से न्यायिक कार्यवाही के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराना था।  

     

    दुर्ग, / छत्तीसगढ़ शासन के प्रमुख सचिव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा दुर्ग जिला के प्रभारी सचिव श्री सोनमणि बोरा ने आज अधिकारियों की बैठक के पूर्व कलेक्ट्रेट परिसर स्थित शताब्दी गार्डन में पौधरोपण किया। उन्होंने मौलश्री का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्‍हाेंने निगम आयुक्त को शताब्दी गार्डन का संधारण कर इसे पब्लिक गार्डन के रूप में विकसित करने के निर्देश दिये ताकि आम लोगों को भी लाभ मिल सकें। इसी कड़ी में वन मंडलाधिकारी श्री सी.पी. अग्रवाल, अतिरिक्त संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास श्री पुलक भट्टाचार्य, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री विजय अग्रवाल, नगर निगम भिलाई की आयुक्त सुश्री सुरूचि सिंह, नगर निगम दुर्ग की आयुक्त सुश्री लीना कोसम, नगर निगम भिलाई चरौदा के आयुक्त श्री डी.राजपूत और एसडीएम दुर्ग श्री सोनाल डेविड ने भी मौलश्री एवं अन्य प्रजाति के फलदार पौधरोपण किये। 

     

    ःः000ःः

     

    दुर्ग/ छत्तीसगढ़ शासन के प्रमुख सचिव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा दुर्ग जिला के प्रभारी सचिव श्री सोनमणि बोरा ने आज पीएम श्री सेजेस कुम्हारी में रोबोटिक्स एवं विज्ञान प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। साथ ही रोबोटिक्स लैब का अवलोकन किया और प्रायोगिक प्रक्रिया के संबंध में जानकारी ली। इस अवसर पर नगरीय प्रशासन विभाग के अतिरिक्त संचालक श्री पुलक भट्टाचार्य, एडीएम श्री विरेन्द्र सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी श्री जगदीश सिंह धीर, विद्यालय की प्राचार्य डॉ. विजया श्रीवास्तव, आईडीबीआई बैंक के जोनल मैनेजर एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

    विद्यालय में रोबोटिक्स लैब की स्थापना विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक, विज्ञान एवं नवाचार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस लैब के माध्यम से विद्यार्थी रोबोटिक्स एवं तकनीकी अवधारणाओं को प्रायोगिक गतिविधियों के माध्यम से समझ सकेंगे। इससे उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक चिंतन, रचनात्मकता, समस्या समाधान तथा तकनीकी कौशल विकसित करने में सहायता मिलेगी।

    इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हए प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने अपने उद्बोधन में विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों एवं विकास की सराहना की। उन्होंने विद्यालय में रोबोटिक्स लैब की स्थापना को एक सराहनीय पहल बताते हुए कहा कि वर्तमान तकनीकी युग में विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक एवं तकनीकी ज्ञान प्रदान करना भी आवश्यक है। उन्होंने रोबोटिक्स लैब के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस प्रकार की प्रयोगशालाएँ विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार एवं तकनीकी दक्षता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनके माध्यम से विद्यार्थी प्रयोग करके सीखने की प्रक्रिया से जुड़ते हैं तथा भविष्य की तकनीकी चुनौतियों का सामना करने के लिए स्वयं को तैयार कर सकते हैं।

    विद्यालय की प्राचार्य डॉ. विजया श्रीवास्तव ने इस अवसर पर कहा कि विद्यालय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने तथा उन्हें आधुनिक तकनीक एवं नवाचार से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है। रोबोटिक्स लैब का शुभारंभ विद्यालय के शैक्षणिक विकास एवं विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

    कार्यक्रम पश्चात् प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा एवं अन्य अतिथियों ने विद्यालय परिसर में पौधरोपण किये। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित थे। 

     

    ःः000ःः

    कृष्णा मंडल 

    *बचेली में अतिक्रमण का खेल! श्मशान घाट के भवन पर कब्जे का आरोप, सीएमओ बोले—एसडीएम से पूछिए!*

    *ठेका नगरपालिका से, अतिक्रमण के आरोप ठेकेदार पर! बचेली में जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे अधिकारी?*

    *सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल! बचेली में कार्रवाई का इंतजार*

    बचेली। दंतेवाड़ा जिले के बचेली नगर पालिका क्षेत्र में नजूल भूमि और श्मशान घाट के भवन पर कथित अतिक्रमण का मामला सामने आया है। आरोप है कि नगरपालिका से लाखों रुपये के निर्माण कार्यों का ठेका लेने वाले एक ठेकेदार द्वारा बीटीओए के पार्किंग स्थल के निर्माण कार्य के साथ-साथ नजूल भूमि और श्मशान घाट के भवन पर भी अतिक्रमण किया जा रहा है। श्मशान घाट के भवन का इस्तेमाल स्टोर रूम के रूप में किए जाने के आरोप ने मामले को गंभीर बना दिया है।।   

    सवाल यह है कि जब नगरपालिका क्षेत्र में कथित तौर पर अतिक्रमण हो रहा है, तो जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं? क्या नगरपालिका प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर जानकारी होने के बावजूद मामले को नजरअंदाज किया जा रहा है?

    *ठेका नगरपालिका से, अतिक्रमण के आरोप ठेकेदार पर!*

    स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि नगरपालिका जिस ठेकेदार को लाखों रुपये के निर्माण कार्यों का ठेका देती है, उसी ठेकेदार पर सरकारी भूमि और श्मशान घाट के भवन पर अतिक्रमण करने के आरोप हैं।

    यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और निर्माण कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करेगा।

    क्या संबंधित ठेकेदार को श्मशान घाट के भवन में स्टोर रूम बनाने या उसका उपयोग करने की अनुमति दी गई है? यदि अनुमति नहीं है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या नगरपालिका प्रशासन ने स्थल का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति जानने का प्रयास किया है?

    *सीएमओ के जवाब ने बढ़ाए सवाल, बोले—एसडीएम से पूछिए!*

    इस पूरे मामले में बचेली नगरपालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) का कथित बयान भी चर्चा का विषय है।

    बताया जा रहा है कि जब अतिक्रमण के संबंध में सीएमओ से फोन पर जानकारी लेने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने इस मामले में अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) से पूछने की बात कही।

    अब सवाल यह है कि नगरपालिका क्षेत्र में कथित अतिक्रमण की स्थिति पर नगरपालिका की जिम्मेदारी क्या है? यदि नगरपालिका क्षेत्र में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण हो रहा है, तो उसकी निगरानी और शिकायतों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी है?

    सीएमओ द्वारा एसडीएम से जानकारी लेने की बात कहे जाने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इस मामले में जिम्मेदारी किस अधिकारी की है और कार्रवाई कब होगी?

    *एक ही क्षेत्र में पांच अन्य लोगों पर भी अतिक्रमण के आरोप*

    स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि जिस क्षेत्र में ठेकेदार पर अतिक्रमण करने का आरोप लगाया जा रहा है, उसी क्षेत्र में पांच अन्य लोगों द्वारा भी अतिक्रमण किया गया है। ग्रामीणों के अनुसार, इन मामलों में भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।

    यदि एक ही क्षेत्र में कई लोगों द्वारा सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किए जाने की शिकायतें हैं, तो जिला प्रशासन को पूरे क्षेत्र का सीमांकन कराकर निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। इससे वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और नियमों के अनुसार कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।

    *आदिवासी परिवारों पर सख्ती, तो अन्य मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं*

    ग्रामीणों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि किसी आदिवासी परिवार द्वारा अतिक्रमण किया जाता है, तो प्रशासन तत्काल कार्रवाई करने में सख्ती दिखाता है, लेकिन अन्य कथित अतिक्रमण के मामलों में वैसी तत्परता क्यों नजर नहीं आती?

    यह आरोप जांच का विषय है। प्रशासन को सभी मामलों में कानून के अनुसार समान और निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए। यदि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्ति चाहे कोई भी हो, नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

    *जिला प्रशासन से सवाल—कब होगी जांच और कार्रवाई?*

    बचेली में नजूल भूमि और श्मशान घाट के भवन पर कथित अतिक्रमण का मामला अब जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है । 

    अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन मामले की जांच कराता है या नहीं, संबंधित भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करता है या नहीं और यदि अतिक्रमण की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

    *जनता के सवाल सीधे हैं*—श्मशान घाट के भवन का इस्तेमाल किसकी अनुमति से हो रहा है? सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण की जांच कौन करेगा? नगरपालिका और एसडीएम की भूमिका स्पष्ट कब होगी?

    अब बचेली की जनता जिला प्रशासन से जवाब और निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद कर रही है।

      रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए नवा रायपुर में यश फैन्स की नई विनिर्माण इकाई का भूमिपूजन किया गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में शुरू हुई इस परियोजना पर ₹152.74 करोड़ का निवेश किया जाएगा। प्रदेश की पहली कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकाई के रूप में विकसित होने वाले इस संयंत्र से 3,500 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि युवाओं को राज्य में ही रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के तहत बड़े पैमाने पर रोजगार देने वाले उद्योगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना हजारों युवाओं और उनके परिवारों को आर्थिक संबल देने के साथ प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य को नई दिशा देगी।

    छत्तीसगढ़ में बनेंगे प्रतिष्ठित ब्रांड्स के उत्पाद

    यश फैन्स क्रॉम्पटन, हैवेल्स, उषा और मिल्टन जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड्स के लिए इलेक्ट्रिक पंखे और किचन एप्लायंसेस का निर्माण करती है। नई इकाई शुरू होने से इन उत्पादों का निर्माण छत्तीसगढ़ में भी होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे राज्य कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के क्षेत्र में अपनी पहचान स्थापित करेगा और ‘मेड इन छत्तीसगढ़’ उत्पाद देशभर के बाजारों तक पहुंच सकेंगे।

    परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग है। छत्तीसगढ़ में उपलब्ध स्टील और एल्युमिनियम का इस्तेमाल प्रदेश में ही तैयार उत्पाद बनाने में किया जाएगा। इससे कच्चे माल के स्थानीय स्तर पर वैल्यू एडिशन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही कल-पुर्जों की आपूर्ति, पैकेजिंग, परिवहन और अन्य सहायक सेवाओं की मांग बढ़ने से स्थानीय उद्यमियों तथा छोटे कारोबारियों के लिए भी नए अवसर पैदा होंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ स्टील, कोयले और बिजली के माध्यम से देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है। अब राज्य का लक्ष्य इन संसाधनों के आधार पर तैयार उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा देना है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में विनिर्माण गतिविधियों का विस्तार रोजगार और आर्थिक विकास को मजबूती देगा। उन्होंने कंपनी को राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा भी दिलाया।

    नवा रायपुर में कंपनी की पहली इकाई

    यश फैन्स के चेयरमैन श्री रितेश नरेडी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में स्टील और एल्युमिनियम की उपलब्धता, देश के मध्य में स्थित होने, मेहनती मानव संसाधन और राज्य सरकार के सहयोग से विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार की अच्छी संभावनाएं हैं। हैदराबाद स्थित कंपनी वर्तमान में हैदराबाद और हिमाचल प्रदेश में 12 विनिर्माण इकाइयां संचालित कर रही है। नवा रायपुर में स्थापित होने वाली इकाई छत्तीसगढ़ में कंपनी की पहली विनिर्माण इकाई होगी।

    कार्यक्रम में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष श्री राजीव अग्रवाल सहित कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।

    12 पुल और 6 सड़कों का होगा निर्माण एवं उन्नयन, रायपुर के फुण्डहर चौक पर बनेगा 29.80 करोड़ का ओवरपास

    रायपुर । छत्तीसगढ़ में सड़क और पुल अधोसंरचना के विस्तार के लिए लोक निर्माण विभाग ने 243 करोड़ 81 लाख 11 हजार रुपये के 18 कार्यों की निविदाओं को मंजूरी दी है। इनमें 12 उच्च स्तरीय पुल और 6 सड़क निर्माण एवं उन्नयन कार्य शामिल हैं। विभाग ने चयनित निर्माण एजेंसियों को शीघ्र कार्यादेश जारी कर काम शुरू कराने के निर्देश दिए हैं।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि मजबूत सड़कें और पुल आर्थिक विकास के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और रोजगार के अवसरों तक पहुंच आसान बनाते हैं। विशेषकर ग्रामीण, आदिवासी और दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में बेहतर कनेक्टिविटी की अहम भूमिका है। उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि स्वीकृत कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा कराने के साथ गुणवत्ता और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    लोक निर्माण विभाग की निविदा समिति ने 12 अक्टूबर को आयोजित बैठक में इन कार्यों को मंजूरी दी। बरसात के बाद निर्माण कार्यों के अनुकूल मौसम का उपयोग करते हुए विभाग सड़क और पुल परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। इससे पहले पिछले महीने 24 कार्यों के लिए 672 करोड़ रुपये से अधिक की निविदाएं स्वीकृत की गई थीं।

    रायपुर में ओवरपास और सर्विस रोड का चौड़ीकरण

    राजधानी में यातायात सुधार के लिए वीआईपी रोड स्थित फुण्डहर चौक पर 29 करोड़ 80 लाख 12 हजार रुपये की लागत से ओवरपास बनाया जाएगा। वहीं रायपुरा चौक फ्लाईओवर के दोनों ओर रिंग रोड नंबर-1 (एनएच-30) की 3.66 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड के चौड़ीकरण के लिए 14 करोड़ 96 लाख 96 हजार रुपये की निविदा स्वीकृत की गई है।

    सड़क कार्यों में जांजगीर-चांपा जिले के देवरी-तनौद-भुईगांव-शुक्लाभाठा-ससहा मार्ग के 17.40 किलोमीटर हिस्से का चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण 31 करोड़ 7 लाख 83 हजार रुपये से किया जाएगा। सूरजपुर जिले में 16.85 किलोमीटर रिंग रोड के सुदृढ़ीकरण के लिए 16 करोड़ 8 लाख 59 हजार रुपये की निविदा मंजूर हुई है। रायपुर जिले के समोदा-बनरसी-तुलसी मार्ग के 8.20 किलोमीटर हिस्से तथा बेमेतरा जिले के बहिंगा-तिवरैया-सिमगा पहुंच मार्ग और मदराली-कटई-बेलटुकरी मार्ग के निर्माण एवं उन्नयन कार्य भी स्वीकृत किए गए हैं।

    इन्द्रावती और हान्दावाड़ा नदी पर बनेंगे पुल

    बस्तर संभाग में बारहमासी आवागमन मजबूत करने के लिए बीजापुर जिले में कुटरू-गुटमांगी मार्ग पर इन्द्रावती नदी में उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग बनाया जाएगा। इसके लिए 36 करोड़ 5 लाख 75 हजार रुपये की निविदा मंजूर हुई है। बस्तर जिले में भंवरडीह नदी और मांढेर नाला पर पुल निर्माण के लिए क्रमशः 12 करोड़ 74 लाख 95 हजार और 10 करोड़ 98 लाख 39 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। डीएमएफ मद से छिन्दनार-कौरगांव मार्ग पर हान्दावाड़ा नदी में पुल एवं पहुंच मार्ग के लिए 5 करोड़ 73 लाख 1 हजार रुपये की निविदा भी मंजूर की गई है।

    इसके अतिरिक्त राजनांदगांव जिले के सूखा नाला, कोंडागांव जिले के कलीबेड़ा नाला और परौदा नदी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के मोती नाला तथा कांकेर जिले की निब्रा (मेढकी) नदी और पासंगी नाला पर उच्च स्तरीय पुल बनाए जाएंगे। सरगुजा जिले में दाहीडांड-सोनवरसा मार्ग पर मछली नदी में पुल निर्माण भी इस सूची में शामिल है।

    विभाग ने संबंधित कार्यपालन अभियंताओं को निर्माण कार्यों की निगरानी, गुणवत्ता और समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। स्वीकृत कार्यों को अन्य एजेंसी को सबलेट करने और कार्य संपादन के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी को मान्य नहीं किया जाएगा। इन परियोजनाओं के पूरा होने से विभिन्न क्षेत्रों के बीच संपर्क बेहतर होने, बरसात में आवागमन की दिक्कतें घटने और स्थानीय लोगों को बाजार, शिक्षा तथा स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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