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वनोपज के लिए एनपीओपी प्रमाणन पाने वाली प्रदेश की पहली महिला किसान उत्पादक कंपनी बनी माँ दंतेश्वरी एफपीसी
1,080 महिला शेयरधारकों और 2,100 वनोपज संग्राहक महिलाओं से जुड़ी कंपनी ने दो वर्षों में किया एक करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार
रायपुर । बस्तर की महिला किसानों और वनोपज संग्राहकों के उत्पादों को अब राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। वनोपज के लिए राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) के अंतर्गत जैविक प्रमाणीकरण प्राप्त करने वाली प्रदेश की पहली महिला किसान उत्पादक कंपनी बनी माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड की इस उपलब्धि पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने महिलाओं को बधाई दी। उन्होंने उत्पादों की गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग, बेहतर ब्रांडिंग और निर्यात की तैयारियों पर विशेष जोर दिया।
उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री शर्मा ने दंतेवाड़ा सर्किट हाउस में कंपनी की पदाधिकारियों और महिला सदस्यों से मुलाकात की। इस दौरान महिलाओं ने उन्हें अपने ‘दण्डक ब्रांड’ का चावल भेंट किया। चर्चा में दण्डक ब्रांड को छत्तीसगढ़ के ‘छत्तीसकला’ ब्रांड से जोड़कर व्यापक बाजार उपलब्ध कराने और स्थानीय उत्पादों को नई पहचान दिलाने की संभावनाओं पर विचार किया गया।
जैविक प्रमाणन से खुलेंगे बाजार के नए रास्ते
उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि एनपीओपी प्रमाणन मिलने के बाद दण्डक ब्रांड के उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करना होगा। उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ उनकी पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने महिलाओं को निर्यात के लिए आवश्यक तैयारियां करने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
उन्होंने कहा कि बस्तर के प्राकृतिक वनोपज की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अच्छी संभावनाएं हैं। इन संभावनाओं का लाभ स्थानीय महिलाओं और वनोपज संग्राहकों तक पहुंचना चाहिए, ताकि उनकी आय में वृद्धि हो और आजीविका के नए अवसर विकसित हों।
श्री शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार स्थानीय संसाधनों पर आधारित आजीविका को बढ़ावा दे रही है। बस्तर के ऐसे गांवों के कृषि उत्पादों और वनोपज को भी निर्धारित मानकों के अनुरूप जैविक प्रमाणीकरण से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा, जहां परंपरागत रूप से रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं हुआ है। इससे स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य दिलाने के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
1,080 महिला शेयरधारक, 2,100 संग्राहकों को लाभ
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत वर्ष 2023 में दंतेवाड़ा जिले में माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड का गठन किया गया था। कंपनी को हाल ही में वनोपज के लिए एनपीओपी प्रमाणन प्राप्त हुआ है। यह राज्य में बिहान के अंतर्गत गठित पहली किसान उत्पादक कंपनी है, जिसे वनोपज के लिए यह प्रमाणन मिला है।
कंपनी से वर्तमान में 1,080 महिला शेयरधारक प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हैं। इसके अतिरिक्त जिले के 60 उत्पादक समूहों से संबंधित 2,100 वनोपज संग्राहक महिलाएं भी इसकी गतिविधियों से लाभान्वित हो रही हैं। कंपनी के माध्यम से महिलाओं को वनोपज के संग्रहण, खरीदी-बिक्री, मूल्य संवर्धन और विपणन के अवसर मिल रहे हैं। कंपनी ने पिछले दो वर्षों में एक करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया है।
दण्डक ब्रांड से स्थानीय उत्पादों को पहचान
महिलाओं द्वारा तैयार और संग्रहित स्थानीय उत्पादों को बाजार में विशिष्ट पहचान दिलाने के उद्देश्य से दण्डक ब्रांड की शुरुआत की गई है। इसके अंतर्गत एचएमटी, लाल चूड़ी और बासमती चावल के साथ नीम फूल, अमचूर, इमली, महुआ, कोदो, कुटकी और रागी जैसे उत्पादों का मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और पैकेजिंग कर विपणन किया जा रहा है। कंपनी ने दंतेवाड़ा में विशेष बिक्री केंद्र भी शुरू किया है, जहां विभिन्न स्थानीय उत्पाद एक ही स्थान पर उपलब्ध हैं।
कंपनी की अध्यक्ष विमला ठाकुर ने बताया कि पहले महिलाओं द्वारा संग्रहित वनोपज की बिक्री मुख्य रूप से स्थानीय बाजारों तक सीमित थी। बिहान मिशन के सहयोग से दण्डक ब्रांड की शुरुआत और अब एनपीओपी प्रमाणन मिलने से महिलाओं में उत्साह है। इससे उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने और बेहतर कीमत प्राप्त करने की उम्मीद बढ़ी है।
कार्यक्रम में विधायक चैतराम अटामी, जिला पंचायत अध्यक्ष नंदलाल मुड़ामी, कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एम. भार्गव सहित कंपनी की कोषाध्यक्ष सरिता ठाकुर, सचिव मीना ठाकुर और अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
कोलता समाज के नुआखाई भेंटघाट एवं प्रतिभा सम्मान समारोह में हुए शामिल, पुसौर में समाज भवन के लिए 50 लाख और कोतरलिया चंडी डोंगरी में सामुदायिक भवन हेतु 30 लाख रुपये देने की घोषणा
रायगढ़ । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने धर्म के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं दिए जाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इसका दूरगामी प्रभाव पड़ेगा और अवैध धर्मांतरण पर रोक लगाने में भी मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को रायगढ़ में पत्रकारों से चर्चा के दौरान यह बात कही।
मुख्यमंत्री श्री साय रायगढ़ में आयोजित कोलता समाज के नुआखाई भेंटघाट एवं प्रतिभा सम्मान समारोह में शामिल हुए। उन्होंने समाजजनों को नुआखाई और शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए आयोजन के आमंत्रण के लिए आभार व्यक्त किया।
कोलता समाज के भवनों के लिए 80 लाख रुपये की घोषणा
मुख्यमंत्री ने कोलता समाज को शिक्षित, संगठित और प्रगतिशील बताते हुए कहा कि समाज के लोग शिक्षा, कृषि और व्यापार सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में भी समाज की महत्वपूर्ण भूमिका है।
समाज की गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और सामुदायिक सुविधाओं के विस्तार के लिए मुख्यमंत्री ने नगर पंचायत पुसौर में कोलता समाज के भवन निर्माण हेतु 50 लाख रुपये तथा ग्राम कोतरलिया चंडी डोंगरी में सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 30 लाख रुपये देने की घोषणा की। इन घोषणाओं से सामाजिक आयोजनों और सामुदायिक गतिविधियों के लिए सुविधाएं विकसित करने में मदद मिलेगी।
छत्तीसगढ़ में अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मैचों को लेकर उत्साह
मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ में पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मैचों के आयोजन पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश के स्टेडियम में भारत और जिम्बाब्वे की महिला क्रिकेट टीमों के बीच होने वाले मुकाबलों से महिला क्रिकेट को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, प्रदेश की बेटियों को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से मैचों में पहुंचकर महिला खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन छत्तीसगढ़ में खेल संस्कृति को मजबूत करने और महिला खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
सारसमाल में कर्मा पूजा महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री, जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास और वीर महापुरुषों के योगदान को किया याद
युवाओं को शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान; जनजातीय अंचलों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई
रायगढ़ । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि आदिवासी समाज का इतिहास शौर्य, स्वाभिमान, संघर्ष और प्रकृति के प्रति अगाध श्रद्धा का प्रतीक है। जल, जंगल और जमीन के संरक्षण की परंपरा ने पूरी दुनिया को सह-अस्तित्व और पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा दी है। कर्मा पर्व इसी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकजुटता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का जीवंत प्रतीक है।
मुख्यमंत्री गुरुवार को रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड अंतर्गत ग्राम सारसमाल में उरांव समाज विकास समिति, छत्तीसगढ़-ओडिशा हिमगिर क्षेत्र द्वारा आयोजित कर्मा पूजा महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने भगवान करम देव तथा भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री स्वयं मांदर लेकर समाजजनों के बीच पहुंचे और महिला-पुरुषों के साथ पारंपरिक कर्मा नृत्य किया। उनकी सहभागिता से आयोजन में उत्साह और उल्लास का माहौल बन गया।
जनजातीय महापुरुषों का बलिदान हमारी अमूल्य विरासत
मुख्यमंत्री श्री साय ने कर्मा तिहार की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जनजातीय समाज ने देश की संस्कृति और स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह और गुंडाधुर जैसे महानायकों ने मातृभूमि, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए अदम्य साहस के साथ संघर्ष किया। नई पीढ़ी को उनके त्याग और बलिदान से परिचित कराना हम सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने जनजातीय समाज के कल्याण के लिए अलग जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन किया था। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, सड़क, पेयजल और आजीविका जैसी सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का आसीन होना और छत्तीसगढ़ में जनजातीय समाज के प्रतिनिधि को मुख्यमंत्री के रूप में सेवा का अवसर मिलना समाज के बढ़ते सम्मान और भागीदारी का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने नया रायपुर स्थित जनजातीय संग्रहालय को जनजातीय इतिहास, संस्कृति, जीवनशैली और परंपराओं से नई पीढ़ी को जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए जनजातीय समाज को विकास के आधुनिक अवसरों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
संस्कृति हमारी पहचान, शिक्षा उज्ज्वल भविष्य का आधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्मा पर्व नई फसल की खुशी, प्रकृति के प्रति आभार और सामूहिक जीवन की भावना को अभिव्यक्त करता है। ऐसे आयोजन समाज की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के साथ युवाओं को अपनी भाषा, परंपराओं और जड़ों से जोड़े रखते हैं। उन्होंने समाजजनों से अपनी सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने और शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ने का आह्वान किया।
युवाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा जीवन में प्रगति का सबसे सशक्त माध्यम है। युवाओं को बड़े लक्ष्य निर्धारित कर परिश्रम करना चाहिए और उपलब्ध अवसरों का पूरा लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने बताया कि आदिवासी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रयास आवासीय विद्यालयों तथा नालंदा परिसर जैसी अध्ययन सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए बताया कि दिल्ली में जनजातीय विद्यार्थियों के छात्रावास की क्षमता बढ़ाकर 200 सीट की गई है। इससे उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के माध्यम से युवा प्रशासन, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, तकनीक, उद्योग और उद्यमिता सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी भागीदारी बढ़ा सकते हैं।
रोजगार और कौशल विकास पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को शिक्षा के साथ कौशल विकास और रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दे रही है। शासकीय भर्तियों, रोजगार मेलों और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार से युवाओं के लिए नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने युवाओं से प्रतियोगी परीक्षाओं, कौशल विकास कार्यक्रमों, रोजगार मेलों और स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी लेकर उनका अधिकतम लाभ उठाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार जनजातीय बहुल क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार काम कर रही हैं। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों तथा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों तक आवास, सड़क, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। सरकार का लक्ष्य है कि दूरस्थ अंचलों में रहने वाला कोई भी परिवार विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे।
शिक्षा और सामाजिक एकता से मजबूत होगा समाज
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि आदिवासी समाज ने अपनी संस्कृति, परंपराओं और लोककलाओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित रखा है। जनजातीय महापुरुषों के योगदान को व्यापक पहचान दिलाना और युवाओं को शिक्षा के लिए प्रेरित करना आवश्यक है। उन्होंने सामाजिक एकता को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया।
उरांव समाज विकास समिति के अध्यक्ष पनत राम भगत ने स्वागत उद्बोधन में कर्मा पर्व की प्राचीन परंपराओं, उरांव समाज की भाषा, संस्कृति, लोककला और प्रकृति से जुड़े गोत्रों की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने समाज की सांस्कृतिक पहचान और एकजुटता बनाए रखने का आह्वान किया।
मांदर और ढोल की थाप पर झलकी जनजातीय संस्कृति
कर्मा पूजा महोत्सव में पारंपरिक वेशभूषा में सजे महिला-पुरुषों ने मांदर, मृदंग और ढोल की थाप पर सामूहिक कर्मा नृत्य प्रस्तुत किया। लोकधुनों और लयबद्ध नृत्य ने पूरे आयोजन को सांस्कृतिक उल्लास से भर दिया। समाज के पदाधिकारियों ने गजमाला पहनाकर मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
कर्मा पर्व ने एक बार फिर जनजातीय समाज की प्रकृति के प्रति आस्था, सामाजिक एकजुटता और समृद्ध लोकपरंपराओं की झलक प्रस्तुत की। आयोजन के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के साथ शिक्षा, युवा सशक्तिकरण और समाज की प्रगति का संदेश भी दिया गया।
दुर्ग / शौर्यपथ / नगर पालिक निगम दुर्ग के वार्ड क्रमांक 39 में उद्यानों के संधारण एवं सौंदर्यीकरण का कार्य अब जमीनी रूप लेने जा रहा है। वार्ड पार्षद गुलाब वर्मा के प्रयासों से 41.37 लाख रुपये की लागत से होने वाले इन विकास कार्यों का भूमिपूजन महापौर अलका बाघमार ने किया। इस पहल से वार्ड के उद्यानों की स्थिति बेहतर होने के साथ नागरिकों को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा है।
भूमिपूजन कार्यक्रम में नगर निगम सभापति श्याम शर्मा, लोक कर्म प्रभारी देव नारायण चन्द्राकर, पर्यावरण विभाग प्रभारी काशीराम कोसरे, एमआईसी सदस्य ज्ञानेश्वर ताम्रकर, पार्षद मनीष कोठारी, उपअभियंता पंकज साहू सहित वार्ड के नागरिक उपस्थित रहे।
उद्यानों के संधारण एवं सौंदर्यीकरण से बच्चों, बुजुर्गों और परिवारों को सुबह-शाम घूमने, बैठने तथा समय बिताने के लिए बेहतर स्थान मिल सकेगा। साथ ही हरित क्षेत्रों का रखरखाव बेहतर होने से वार्ड की सुंदरता बढ़ेगी और नागरिकों को स्वास्थ्य एवं मनोरंजन के लिए अनुकूल वातावरण मिलेगा।
इस अवसर पर महापौर अलका बाघमार ने कहा कि शहर के विकास के साथ नागरिकों को बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना नगर निगम की प्राथमिकता है। उद्यान नागरिकों के स्वास्थ्य, मनोरंजन और शहर की सुंदरता के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप तय समय-सीमा में पूरे किए जाएं, ताकि नागरिकों को इनका लाभ मिल सके।
वार्ड क्रमांक 39 में उद्यानों के विकास की दिशा में इस पहल को पार्षद गुलाब वर्मा के प्रयासों से जोड़कर देखा जा रहा है। विकास कार्यों के पूर्ण होने के बाद वार्डवासियों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
दुर्ग / शौर्यपथ / ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत आयोजित सेवा सेतु शिविर नागरिकों के लिए उपयोगी साबित हुई। विकासखंड एवं विधानसभावार आयोजित इन शिविरों के माध्यम से विभिन्न विभागों की शासकीय सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई गई, ताकि नागरिकों को अपने आवश्यक कार्यों के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
इसी कड़ी में श्री शांति लाल यादव को भवन निर्माण की अनुमति से संबंधित प्रक्रिया के लिए भूमि के दस्तावेजों की आवश्यकता थी। इसके लिए उन्होंने सेवा सेतु शिविर में बी-1 (खतौनी) एवं पी-2 (खसरा) की प्रतिलिपियां प्राप्त करने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया। शिविर में संबंधित अधिकारियों ने त्वरित कार्यवाही करते हुए उन्हें मौके पर ही आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करा दिए। इससे उन्हें दस्तावेजों के लिए अलग-अलग राजस्व कार्यालयों में जाने और अनावश्यक समय व्यतीत करने से राहत मिली।
इसी तरह श्री कमल नारायण एवं श्री संतराम पटेल ने भी अपने अलग-अलग कार्यों के लिए भू-अभिलेख संबंधी दस्तावेज प्राप्त करने हेतु सेवा सेतु शिविर में आवेदन प्रस्तुत किया। संबंधित अधिकारियों ने उनके आवेदनों पर कार्यवाही करते हुए आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी की। श्री कमल नारायण ने बताया कि भूमि से संबंधित बी-1 (खतौनी) और पी-2 (खसरा) की प्रतिलिपियां विभिन्न राजस्व एवं अन्य शासकीय प्रक्रियाओं में उपयोगी होती हैं। इन दस्तावेजों के माध्यम से भूमि खाते और संबंधित खसरे में दर्ज विवरण की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि सेवा सेतु शिविर में इन दस्तावेजों की उपलब्धता से नागरिकों को आवश्यक जानकारी और सेवाएं एक ही स्थान पर मिल रही हैं। सेवा सेतु शिविरों के माध्यम से मौके पर ही आवश्यक दस्तावेज मिलने से समय और श्रम बच रहा है। उन्होंने इस सुविधा के लिए शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
डिजिटल तकनीक से न्यायिक प्रक्रिया हुई सुगम, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कर रहा नागरिकों को जागरूक
दुर्ग / शौर्यपथ / न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक के उपयोग से दूरी और आवागमन की बाधाओं को कम करने की दिशा में दुर्ग न्यायालय में महत्वपूर्ण पहल की गई है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक जमानत आवेदन पर सुनवाई कर उसका निराकरण किया गया। वहीं, मुंबई और चेन्नई में मौजूद महत्वपूर्ण गवाहों के बयान एवं प्रतिपरीक्षण की कार्यवाही भी पूरी कराई गई।
एक प्रकरण में अधिवक्ताओं ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर जमानत आवेदन पर अपना पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने आवेदन का निराकरण किया। इस व्यवस्था से आवागमन में लगने वाले समय और संसाधनों की बचत में मदद मिली।
इसी तरह, एक अन्य विचाराधीन प्रकरण में मुंबई और चेन्नई में निवासरत महत्वपूर्ण गवाहों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जोड़ा गया। निर्धारित तकनीकी एवं विधिक प्रक्रियाओं के तहत उनके बयान दर्ज किए गए और प्रतिपरीक्षण पूरा कराया गया। इससे लंबी दूरी की यात्रा की आवश्यकता कम हुई और साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकी।
डिजिटल न्याय के साथ विधिक जागरूकता पर जोर
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के अध्यक्ष के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन और प्राधिकरण के सचिव उमेश कुमार भागवतकर के निर्देशन में डिजिटल न्याय एवं विधिक जागरूकता को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं।
इसके तहत नागरिकों, अधिवक्ताओं और पक्षकारों को न्यायिक एवं विधिक सेवाओं में उपलब्ध तकनीकी सुविधाओं की जानकारी दी जा रही है। साथ ही पात्र व्यक्तियों को विधिक सहायता प्राप्त करने के उपलब्ध माध्यमों से परिचित कराया जा रहा है।
इस पहल का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने के साथ तकनीक के लाभ आम नागरिकों तक पहुंचाना है।
भिलाईनगर / शौर्यपथ / सुपेला स्थित आकाशगंगा व्यावसायिक परिसर में दुकानों के सामने बने बरामदों पर अवैध कब्जों को लेकर नगर पालिक निगम भिलाई ने कार्रवाई की पहल की है। निगम आयुक्त के निर्देश पर अमले ने परिसर का निरीक्षण कर अतिक्रमण वाले स्थानों की मार्किंग की, ताकि सार्वजनिक आवागमन के लिए निर्धारित बरामदों को कब्जामुक्त कराया जा सके।
आकाशगंगा शहर का प्रमुख व्यावसायिक केंद्र है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग खरीदारी और अन्य कार्यों के लिए पहुंचते हैं। दुकानों के सामने बने बरामदे आम नागरिकों और ग्राहकों के आवागमन के लिए निर्धारित हैं। इन स्थानों पर कब्जे के कारण लोगों को आवाजाही में परेशानी होती है और बाजार की व्यवस्था भी प्रभावित होती है।
निगम प्रशासन ने चिह्नित अतिक्रमणों पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई करने की तैयारी की है। इस पहल का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों को अतिक्रमण मुक्त कर आवागमन सुगम बनाना है।
निगम ने व्यापारियों और दुकानदारों से सार्वजनिक आवागमन के लिए निर्धारित स्थानों पर कब्जा नहीं करने तथा शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की है।
भिलाईनगर / शौर्यपथ / डेंगू-मलेरिया जैसी मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए नगर पालिक निगम भिलाई और जिला मलेरिया विभाग की संयुक्त टीम ने जोन-2 वैशाली नगर के वार्ड क्रमांक 25, जवाहर नगर में विशेष अभियान चलाया। के.एच. मेमोरियल स्कूल के आसपास घर-घर सर्वेक्षण कर मच्छरों के प्रजनन स्रोतों की जांच और नियंत्रण की कार्रवाई की गई।
अभियान के दौरान 95 घरों का सर्वेक्षण कर 158 प्रजनन स्रोतों की जांच की गई। इनमें 21 स्थानों पर जमा पानी मिला, जिसे खाली कराया गया। इन स्थानों में छह कूलर, पांच टंकियां और 10 अन्य कंटेनर शामिल थे।
मच्छरों के लार्वा नियंत्रण के लिए 45 कूलरों में एक्यूगार्ड तथा वयस्क मच्छरों के नियंत्रण के लिए 55 कूलरों में मेलाथियान का छिड़काव किया गया। इसके अलावा 85 घरों के अंदर-बाहर, सीढ़ियों के नीचे, अंधेरे व नमी वाले स्थानों तथा शौचालय-बाथरूम में भी दवा का छिड़काव किया गया। क्षेत्र की पक्की और कच्ची नालियों में जमा पानी का भी उपचार किया गया।
संयुक्त टीम ने नागरिकों को डेंगू-मलेरिया से बचाव के उपाय बताए और जागरूकता पंपलेट वितरित किए। निगम प्रशासन ने लोगों से घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देने, कूलर, टंकियों, गमलों व अन्य जलपात्रों की नियमित सफाई करने तथा स्वच्छता बनाए रखने की अपील की है।
₹4,334 करोड़ PBT वृद्धि का दिया हवाला, अधिकारियों का मनोबल बनाए रखने अग्रिम भुगतान की मांग
भिलाई / शौर्यपथ / स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के अधिकारियों को त्योहारों से पहले वित्त वर्ष 2025-26 के परफॉर्मेंस रिलेटेड पे (PRP) का अग्रिम भुगतान मिलने की उम्मीद जगी है। स्टील एग्जीक्यूटिव्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SEFI) ने SAIL के चेयरमैन (CMD) को पत्र लिखकर PRP के विरुद्ध अग्रिम राशि जारी करने की मांग की है।
SEFI चेयरमैन एनके बंछोर ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी के प्रदर्शन और प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) में 4,334 करोड़ रुपये की वृद्धि को देखते हुए अधिकारियों को PRP की कुछ राशि अग्रिम दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार की एमओयू रेटिंग की प्रक्रिया में समय लग सकता है, जबकि नियमित PRP भुगतान मार्च 2027 तक किया जाना है। ऐसे में अग्रिम भुगतान से अधिकारियों को राहत मिल सकती है।
SEFI ने पत्र में कहा है कि इस्पात उत्पादन एक सामूहिक प्रक्रिया है, जिसमें अधिकारियों की टीम का योगदान महत्वपूर्ण होता है। कंपनी के बेहतर प्रदर्शन को बनाए रखने के लिए अधिकारियों का मनोबल बढ़ाना जरूरी है। संगठन ने त्योहारों के मद्देनजर अंतरिम व्यवस्था के तहत अग्रिम भुगतान करने का अनुरोध किया है।
अब CMD के फैसले पर नजर
SEFI की मांग पर SAIL प्रबंधन के निर्णय का इंतजार है। फिलहाल अग्रिम भुगतान की राशि और तारीख तय होने की जानकारी सामने नहीं आई है। यह प्रस्ताव स्वीकार होने पर अधिकारियों को नियमित PRP भुगतान से पहले कुछ राशि मिल सकती है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
