
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
Google Analytics —— Meta Pixel
बालोद (डौंडीलोहारा )गजईडीह, - बस्तर पुलिस के वीर सपूत शहीद आरक्षक स्व. खिलावन सिंह कोकिला की 19वीं पुण्यतिथि आज गुरुवार को उनके गृह ग्राम गजईडीह में पूरे राजकीय सम्मान के साथ मनाई जाएगी।
12 अप्रैल 1976 को जन्मे खिलावन सिंह कोकिला ने 28 मई 2007 को कर्तव्य पथ पर अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। शहीद की स्मृति में * सुबह 11 बजे ग्राम गजईडीह* में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया है।
चौंकी प्रभारी अरविंद साहू हुए शामिल
कार्यक्रम में चौंकी प्रभारी अरविंद साहू पुलिस बल के साथ शहीद को श्रद्धासुमन अर्पित किए,उन्होंने कहा कि "शहीद खिलावन सिंह कोकिला का बलिदान बस्तर पुलिस के लिए गर्व का विषय है। उनका शौर्य नई पीढ़ी के पुलिस जवानों को हमेशा कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देता रहेगा। हम सब उनके परिवार के साथ खड़े हैं।"
परिवार का आग्रह
शहीद की माता ढेलु बाई कोकिला, पत्नी शशिकला कोकिला और पुत्र विनय कोकिला ने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों और युवाओं ने कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है।
बस्तर पुलिस के इस वीर सपूत का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। "शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मिटने वालों का यही बाकी निशां होगा"
*मुख्यमंत्री श्री साय ने दी बधाई और शुभकामनायें*
रायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से भारतीय वन सेवा (IFS) के लिए चयनित रायगढ़ जिले के संबलपुरी गांव निवासी श्री अजय गुप्ता ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री श्री साय ने अजय को भारतीय वन सेवा में चयनित होने पर बधाई देते हुए इसे पूरे छत्तीसगढ़, विशेषकर वनांचल क्षेत्र के लिए गौरव और प्रेरणा का क्षण बताया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि अजय गुप्ता ने केवल अपने माता-पिता का ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत प्रेरणादायी है कि एक ऐसा युवा, जिसने बचपन में जंगलों में तेंदूपत्ता और महुआ संग्रह कर परिवार का हाथ बंटाया, आज उन्हीं जंगलों के संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी निभाने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि बताती है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती, बल्कि अवसर और संकल्प मिल जाए तो दूरस्थ अंचलों के युवा भी देश की सर्वोच्च सेवाओं में अपनी जगह बना सकते हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की ‘लघु वनोपज संघ छात्रवृत्ति’ तथा ‘पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति’ जैसी योजनाओं ने अजय जैसे प्रतिभाशाली युवाओं की राह आसान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि अजय की सफलता वनांचल समाज के सपनों, संघर्ष और आत्मविश्वास की जीत है तथा यह हजारों युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस देगी।
उल्लेखनीय है कि रायगढ़ जिले के संबलपुरी गांव में साधारण परिवेश में पले-बढ़े अजय गुप्ता का बचपन जंगलों, वनोपज संग्रहण और खेती-किसानी के बीच बीता। छुट्टियों के दौरान वे अपने माता-पिता के साथ जंगलों में जाकर तेंदूपत्ता और महुआ एकत्रित करते थे। आर्थिक अभावों के बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपनी प्राथमिकता बनाया और 10वीं में 92.66 प्रतिशत तथा 12वीं में 91.40 प्रतिशत अंक प्राप्त कर अपनी मेधा का परिचय दिया।
उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के आधार पर अजय को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) रायपुर में प्रवेश मिला, जहां अध्ययन के दौरान उन्हें तीन वर्षों तक छात्रवृत्ति का लाभ मिला। अजय ने कठिन परिस्थितियों के बीच अध्ययन जारी रखते हुए भारतीय वन सेवा परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 91वीं रैंक प्राप्त की और अपने सपनों को साकार किया।
अजय गुप्ता ने बताया कि प्रारंभिक जीवन में उनके सपने सीमित थे और लगता था कि दुनिया गांव तक ही सीमित है, लेकिन उच्च शिक्षा और नए अनुभवों ने उनके सोचने का दायरा विस्तृत किया। उन्होंने कहा कि जंगल उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है और बचपन से प्रकृति के साथ बने इसी जुड़ाव ने उन्हें वन सेवा में जाने की प्रेरणा दी। उनका मानना है कि जंगल ने उन्हें केवल आजीविका ही नहीं, बल्कि जीवन की दिशा भी दी है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि अजय की सफलता प्रदेश के उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं। उन्होंने कहा कि सही अवसर, मार्गदर्शन, मेहनत और शासन के सहयोग से गांवों और वनांचल क्षेत्रों के युवा भी देश के सर्वोच्च पदों तक पहुंच सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि अजय गुप्ता जैसे युवा आने वाली पीढ़ियों को संघर्ष, आत्मविश्वास और संकल्प की शक्ति का संदेश देंगे तथा छत्तीसगढ़ के युवाओं को नई दिशा और नई प्रेरणा प्रदान करेंगे।
रायपुर, / राज्य शासन ने सूरजपुर जिले के विकासखंड ओड़गी स्थित सूपाझरिया जलाशय योजना के मरम्मत एवं जीर्णाेद्धार कार्य के लिए 3 करोड़ 15 लाख 95 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। मरम्मत कार्य पूर्ण होने पर जलाशय की रूपांकित सिंचाई क्षमता 82 हेक्टेयर पूरी तरह बहाल हो जाएगी। इस नहर जीर्णाेद्धार कार्य से ओड़गी क्षेत्र के किसानों को सिंचाई की स्थायी सुविधा मिलेगी और कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
82 हेक्टेयर में सिंचाई का लक्ष्य
सूपाझरिया जलाशय के जीर्णाेद्धार कार्य पूर्ण होने पर जलाशय की रूपांकित सिंचाई क्षमता 82 हेक्टेयर पूरी तरह बहाल हो जाएगी। इससे क्षेत्र के किसानों को खरीफ और रबी दोनों फसलों के लिए पर्याप्त सिंचाई सुविधा मिलेगी।
शर्तों के साथ कार्य के निर्देश
शासन ने कार्य को स्वीकृत राशि और निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए हैं। कार्य शुरू करने से पहले सक्षम अधिकारी से ड्रॉइंग-डिजाइन का अनुमोदन और तकनीकी स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा। साथ ही कम से कम 75 प्रतिशत बाधा रहित भूमि उपलब्ध होने पर ही निविदा जारी की जाएगी। निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि भू-अर्जन स्वीकृत राशि की सीमा में ही किया जाए और किसी अन्य मद की बचत राशि का उपयोग बिना पूर्व स्वीकृति के न हो। यदि भू-अर्जन प्रस्तावित नहीं है, तो निर्माण शासकीय भूमि पर ही कराया जाए। निविदा प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
रायपुर, ।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित और अब तेजी से विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे जिलों में बच्चों एवं माताओं के लिए आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। राज्य सरकार ने भवनविहीन आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बस्तर संभाग के शेष 506 भवनविहीन आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए भवन स्वीकृति प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि नक्सल मुक्त घोषित जिलों में कोई भी आंगनबाड़ी भवनविहीन न रहे और प्रत्येक बच्चे तथा माता को बेहतर, सुरक्षित एवं सुविधायुक्त वातावरण उपलब्ध हो।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल पोषण वितरण का माध्यम नहीं, बल्कि बच्चों के समग्र विकास, मातृ स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण की मजबूत नींव हैं।
उन्होंने कहा कि दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण आंगनबाड़ी व्यवस्था बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण, पूर्व-प्राथमिक शिक्षा तथा गर्भवती एवं धात्री माताओं की देखभाल को नई मजबूती प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, समयबद्धता और स्थानीय आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर, नारायणपुर और सुकमा जिलों में भवनविहीन आंगनबाड़ी केंद्रों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर निर्माण सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य सचिव स्तर पर 16 मई 2026 को आयोजित समीक्षा बैठक में बस्तर संभाग की प्रत्येक ग्राम पंचायत में आंगनबाड़ी भवन निर्माण को शासन की प्राथमिकता बताया गया था। इसी क्रम में संबंधित जिलों के कलेक्टरों को संयुक्त निर्देश जारी किए गए हैं।
सरकार ने आंगनबाड़ी भवन निर्माण में “BaLA (Building as Learning Aid)” कॉन्सेप्ट को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।
इस मॉडल के तहत भवन स्वयं बच्चों के लिए सीखने और समझने का माध्यम बनेगा। आंगनबाड़ी केंद्रों को आकर्षक, बाल-अनुकूल और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा के अनुकूल वातावरण के रूप में विकसित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार केवल भवन निर्माण नहीं, बल्कि ऐसा वातावरण तैयार करना चाहती है जहां बच्चे सीखें, खेलें और मानसिक रूप से विकसित हों।
आंगनबाड़ी भवन निर्माण हेतु प्रति भवन 11 लाख 69 हजार रुपए की राशि निर्धारित की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न योजनाओं और स्थानीय संसाधनों के प्रभावी अभिसरण के माध्यम से विकास कार्यों को गति देना राज्य सरकार की कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मांग आधारित प्रक्रिया के अंतर्गत भवनविहीन आंगनबाड़ी केंद्रों को प्राथमिकता के साथ स्वीकृति दी जाए और मार्च 2027 तक निर्माण कार्य पूर्ण कराया जाए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा नियमित मॉनिटरिंग के माध्यम से प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर संभाग में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
प्रदेश सरकार सड़क, स्वास्थ्य, बिजली, पेयजल और जनसुविधाओं के विस्तार के साथ अब बच्चों और महिलाओं के भविष्य को सुरक्षित करने वाले सामाजिक ढांचे को भी मजबूत कर रही है।
उन्होंने कहा कि मजबूत आंगनबाड़ी अवसंरचना गांवों में सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का आधार बनेगी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास, विश्वास और सुशासन के नए अध्याय को मजबूती देगी।
प्रधान सेवक के रूप में प्रधानमंत्री मोदी ने अंत्योदय को धरातल पर उतारने का ऐतिहासिक कार्य किया - मुख्यमंत्री श्री साय
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के समग्र विकास को मिली नई गति – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
रायपुर 26 मई 2026/मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘प्रधान सेवक’ के रूप में राष्ट्रसेवा, सुशासन और जनकल्याण को समर्पित सफल 12 वर्ष पूर्ण होने पर हार्दिक बधाई एवं अभिनंदन व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी, निर्णायक और जनकेंद्रित नेतृत्व में भारत ने सेवा, सुरक्षा, आत्मविश्वास और विकास के नए युग में प्रवेश किया है।
raipur / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि बीते 12 वर्षों में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने शासन की सोच और कार्यशैली को बदलते हुए सेवा, सुशासन और अंत्योदय की भावना को केंद्र में रखा तथा यह सुनिश्चित किया कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि गरीब, किसान, महिला, युवा, वंचित और जनजातीय समाज के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का जो संकल्प प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने लिया, वह आज देश के कोने-कोने में दिखाई देता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में आज भारत आत्मविश्वास, सुरक्षा और वैश्विक प्रतिष्ठा के नए आयाम स्थापित कर रहा है। मजबूत अर्थव्यवस्था, आधुनिक अधोसंरचना, डिजिटल क्रांति, आत्मनिर्भरता, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक समावेशन की दिशा में देश ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। विकसित भारत @2047 का संकल्प आज जनभागीदारी और विश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के संदर्भ में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व विशेष रूप से प्रेरणादायी रहा है। दशकों तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे बस्तर और वनांचल क्षेत्रों में आज विकास, विश्वास और जनकल्याण की नई धारा दिखाई दे रही है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, मोबाइल कनेक्टिविटी, बैंकिंग सुविधाओं और शासकीय योजनाओं की पहुँच दूरस्थ जनजातीय अंचलों तक सुनिश्चित हुई है, जिससे लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना, हर घर जल, जन-धन योजना और डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं ने गरीबों, किसानों, मातृशक्ति, युवाओं तथा जनजातीय समाज के जीवन में आशा, सम्मान और आत्मविश्वास का नया संचार किया है। उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सोच ने शासन को अधिक संवेदनशील और जवाबदेह बनाया है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र को केवल नारा नहीं रहने दिया, बल्कि उसे व्यवहार और नीति का आधार बनाया। इसी का परिणाम है कि आज देश विकास और सामाजिक समावेशन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी का नेतृत्व देश को केवल आर्थिक रूप से सशक्त नहीं बना रहा, बल्कि सांस्कृतिक आत्मगौरव, राष्ट्रीय एकता और जनभागीदारी की भावना को भी नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है। प्रधानमंत्री ने भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हुए देशवासियों में नए आत्मविश्वास का संचार किया है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में जनकल्याण, सुशासन और अंत्योदय के संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचे और विकास का लाभ समाज के हर वर्ग को मिले।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने समस्त छत्तीसगढ़वासियों की ओर से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को पुनः बधाई देते हुए उनके स्वस्थ, यशस्वी और दीर्घायु जीवन की कामना की तथा विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में भारत विकसित राष्ट्र बनने के संकल्प को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।
काम में बेवजह देरी करने वाली एजेंसियों पर होगी सख्त कार्रवाई
बिलासपुर में वर्किंग वुमेन हॉस्टल और मोबाइल कनेक्टिविटी परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश
रायपुर, / छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज मंत्रालय (महानदी भवन) में ई-प्रगति पोर्टल में दर्ज राज्य की अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजनाओं की प्रगति की व्यापक समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि सभी परियोजनाओं के कार्यों में तेजी लाई जाए और आ रही बाधाओं को तत्काल दूर कर नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में बेवजह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और लापरवाही बरतने वाली निर्माण एजेंसियों पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ई-प्रगति पोर्टल की 5 प्रमुख परियोजनाएं
समीक्षा बैठक में विशेष रूप से पोर्टल पर दर्ज राज्य की 5 अति-महत्वपूर्ण परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की गई। वर्किंग वुमेन हॉस्टल, उसलापुर (बिलासपुर), वर्किंग वुमेन हॉस्टल, कोनी (बिलासपुर), 4G स्टेशन DVN मोबाइल टॉवर स्थापना (बिलासपुर), मोबाइल टॉवर हेतु विद्युत अधोसंरचना परियोजना (बिलासपुर) और सिकारसर कोडार रिसीवर लिंक कैनाल (गरियाबंद जिला)
साप्ताहिक मॉनिटरिंग और कड़े प्रशासनिक निर्देश
मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया है कि वे प्रत्येक परियोजना की साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट ई-पोर्टल पर फोटो जियोटैग (Photo Geo-tag) के साथ अनिवार्य रूप से अपलोड करें, ताकि कार्यों की वास्तविक स्थिति की पारदर्शी मॉनिटरिंग हो सके। उन्होंने जिलों में मोबाइल टॉवर स्थापना के मार्ग में आ रही भूमि आवंटन या अन्य तकनीकी दिक्कतों को संबंधित कलेक्टरों से समन्वय कर शीघ्र दूर करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने संबंधित जिलों के कलेक्टरों को व्यक्तिगत रूप से रुचि लेकर ई-प्रगति पोर्टल की परियोजनाओं की दैनिक समीक्षा करने और उनमें तेजी लाने को कहा है।
इस समीक्षा बैठक में मंत्रालय से सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, जल संसाधन विभाग तथा उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से राज्य के 21 जिलों के कलेक्टर शामिल हुए, जिनमें बीजापुर, कांकेर, कोरबा, मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, नारायणपुर, रायगढ़, सुकमा, बलौदाबाजार-भाटापारा, बलरामपुर, धमतरी, गरियाबंद, जशपुर, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, मुंगेली, सरगुजा, सूरजपुर, दंतेवाड़ा एवं कोण्डागांव शामिल हैं।
रायपुर, ।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रशासनिक पारदर्शिता, भर्ती व्यवस्था के पुनर्गठन और सड़क निर्माण कार्यों की निरंतरता से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। कैबिनेट के इन फैसलों को राज्य प्रशासन और विकास कार्यों के लिए दूरगामी माना जा रहा है।
मंत्रिपरिषद ने राज्य के विभिन्न विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों, मंडलों और स्थानीय निकायों में जमा स्क्रैप एवं अनुपयोगी सामग्रियों के निस्तारण के लिए भारत सरकार के उपक्रम मेटल स्क्रैप ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MSTC) के साथ सेलिंग एजेंसी अनुबंध की अवधि आगामी तीन वर्षों के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया है।
यह अनुबंध नवंबर 2019 से प्रभावी था और 31 मई 2026 को समाप्त होने वाला था। अब इसके विस्तार से स्क्रैप निस्तारण की प्रक्रिया पहले की तरह ई-नीलामी प्रणाली के माध्यम से जारी रहेगी।
MSTC के आधुनिक ई-ऑक्शन प्लेटफॉर्म के जरिए देशभर के खरीदार प्रतिस्पर्धी बोली लगा सकेंगे, जिससे राज्य को बेहतर राजस्व प्राप्त होगा और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहेगी।
सरकार के अनुसार इस व्यवस्था से विभागों को अलग-अलग निविदा और विज्ञापन प्रक्रिया से मुक्ति मिलेगी, प्रशासनिक समय और संसाधनों की बचत होगी तथा कार्यालय परिसरों में स्वच्छता और स्थान प्रबंधन भी बेहतर होगा।
कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल को सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के अधीन लाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। इसके लिए “छत्तीसगढ़ शासन कार्य (आवंटन) नियम” में संशोधन किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि “छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल अधिनियम, 2026” लागू होने के बाद पूर्व के छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) का विलय नए कर्मचारी चयन मंडल में किया जा चुका है। इसके साथ ही पुरानी संस्था की सभी परिसंपत्तियां और देनदारियां भी नए मंडल में शामिल हो चुकी हैं।
सरकार का मानना है कि इस बदलाव से भर्ती प्रक्रियाओं में बेहतर समन्वय, प्रशासनिक नियंत्रण और कार्यक्षमता सुनिश्चित होगी।
राज्य मंत्रिपरिषद ने सड़क निर्माण कार्यों में प्रयुक्त बिटुमिन (डामर) की कीमतों में 1 अप्रैल 2026 के बाद आई असाधारण वृद्धि को देखते हुए ठेकेदारों को सीमित और आंशिक मूल्य राहत देने का निर्णय लिया है।
यह राहत 1 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 की अवधि के लिए लागू होगी। सरकार द्वारा निर्धारित फार्मूले के आधार पर केवल बिटुमिन मूल्य वृद्धि के प्रभाव को कम करने हेतु क्षतिपूर्ति दी जाएगी, जबकि अन्य निर्माण घटकों पर पूर्व से लागू एस्केलेशन नियम यथावत बने रहेंगे।
सरकार ने माना कि वैश्विक परिस्थितियों और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण डामरीकरण कार्य प्रभावित होने लगे थे, जिससे सड़क निर्माण और संधारण कार्यों की गति धीमी पड़ने की आशंका थी।
गौरतलब है कि भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा भी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए इसी प्रकार की राहत पहले ही दी जा चुकी है।
राज्य सरकार का उद्देश्य सड़क निर्माण कार्यों को बाधित होने से बचाना और विकास कार्यों की गति को बनाए रखना है, ताकि जनता को समय पर बेहतर सड़क सुविधाएं मिल सकें।
कैबिनेट के इन फैसलों से स्पष्ट संकेत मिला है कि राज्य सरकार प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तकनीक आधारित और पारदर्शी बनाने के साथ-साथ विकास कार्यों की रफ्तार बनाए रखने पर विशेष ध्यान दे रही है। विशेष रूप से सड़क निर्माण, भर्ती व्यवस्था और संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन से जुड़े निर्णय आने वाले समय में व्यापक प्रभाव डाल सकते हैं।
राज्य सहकारी विकास समिति की उच्च स्तरीय बैठक संपन्न, पैक्स समितियों को बहुआयामी बनाने पर जोर
हर ग्राम पंचायत में होगा सहकारी समिति का संचालन, दुग्ध, मत्स्य और लघु वनोपज से जोड़ी जाएंगी समितियां
शक्कर कारखानों में मल्टीफील्ड इथेनॉल संयंत्र के निर्माण में तेजी लाने के निर्देश
रायपुर, / छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव श्री विकासशील ने राज्य की सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों तक खाद, बीज, दवा, बैंकिंग और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाएं सुलभता से पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने राज्य के कृषकों को सशक्त बनाने के लिए सहकारी समितियों के सुदृढ़ीकरण पर विशेष बल दिया है। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत में सहकारी समिति का संचालन सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही प्राथमिक कृषि साख समितियों को बहुआयामी स्वरूप प्रदान करने के लिए उन्हें दुग्ध, मत्स्य पालन और लघु वनोपज के कार्यों से सीधे जोड़ा जाए।
अन्न भंडारण और जनकल्याणकारी सुविधाओं की समीक्षा
मंत्रालय में आयोजित राज्य सहकारी विकास समिति की इस महत्वपूर्ण बैठक में समितियों के गठन, उद्देश्यों और आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। सहकारी क्षेत्र के अंतर्गत पैक्स (PACS) गोदामों के निर्माण की प्रगति की गहन समीक्षा की गई। समितियों के माध्यम से प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र और कॉमन सर्विस सेंटर जैसी आवश्यक सुविधाएं ग्रामीण अंचलों में विस्तारित करने पर जोर दिया गया।
राष्ट्रीय समितियों से जुड़ेंगे पैक्स, डिजिटल बैंकिंग को मिलेगा बढ़ावा
राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व
बैठक में राज्य की सभी पैक्स समितियों को राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ने के लिए भारतीय बीज सहकारी समिति, राष्ट्रीय सहकारी निर्यात समिति और राष्ट्रीय जैविक सहकारी समिति की अनिवार्य सदस्यता दिलाने की रणनीति पर चर्चा की गई।
मक्का एवं दलहन का उपार्जन
समर्थन मूल्य पर मक्का और दलहन के सुचारू उपार्जन हेतु पैक्स समितियों एवं किसानों का पंजीयनNCCF और NAFED के आधिकारिक पोर्टल्स पर करने के निर्देश दिए गए हैं।
माइक्रो एटीएम और रूपे कार्ड
ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए पैक्स, दुग्ध एवं मत्स्य सहकारी समितियों में माइक्रो एटीएम (Micro ATM) स्थापित करने तथा सभी सदस्यों को रूपे (Rupay) , किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) उपलब्ध कराने के कार्यों की समीक्षा की गई।
शक्कर कारखानों में इथेनॉल प्लांट और अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
मुख्य सचिव ने राज्य के सहकारी शक्कर कारखानों में मल्टीफील्ड इथेनॉल संयंत्रों के निर्माण की प्रक्रिया को गति देने के लिए तत्काल समुचित कार्यवाही करने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त, राज्य के शहरी सहकारी बैंकों को अम्ब्रेला संगठन से जोड़ने, जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों में इंटरनेट बैंकिंग शुरू करने, पैक्स कम्प्यूटरीकरण, पीएम किसान समृद्धि केंद्रों की स्थापना, समितियों के लिए श्रैंकिंग फ्रेमवर्कश् तैयार करने तथा पैक्स के माध्यम से ग्रामीण पाइप जलापूर्ति योजनाओं के संचालन की प्रगति का भी मूल्यांकन किया गया।
इस बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनोज पिंगुआ, वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी, सहकारिता विभाग के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना और आयुक्त सहकारिता श्री महादेव कावरे प्रमुख रूप से उपस्थित थे। इनके साथ ही खाद्य, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, राज्य सहकारी बैंक (अपैक्स बैंक), भंडारण विकास एवं विनियामक प्राधिकरण, एफसीआई (FCI), राज्य भंडारगृह निगम, नाबार्ड (NABARD), राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC), राष्ट्रीय दुग्ध विकास बोर्ड और राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी भी सम्मिलित हुए।
छत्तीसगढ़ में जैव विविधता संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि
वन विभाग और विज्ञान सभा के संयुक्त प्रयासों से मिली सफलता
रायपुर / विश्व ऊदबिलाव दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। गरियाबंद जिले के उदंती- सीतानदी टाइगर रिजर्व के जल स्रोतों में ऊदबिलाव (ओटर) की प्रमाणिक उपस्थिति दर्ज की गई है। यह सफलता प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) श्री अरुण कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन तथा वन विभाग एवं छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के संयुक्त शोध प्रयासों से संभव हुई है।
गरियाबंद वनमंडल के डीएफओ श्री वरुण जैन के सहयोग से लगाए गए कैमरा ट्रैप में ऊदबिलाव के स्पष्ट चित्र प्राप्त हुए हैं। इससे यह प्रमाणित हुआ है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व का जलीय पारिस्थितिकी तंत्र स्वस्थ है और यह दुर्लभ वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवास बना हुआ है।
स्वस्थ जल स्रोतों के जैव संकेतक हैं ऊदबिलाव
ऊदबिलाव स्वच्छ और सुरक्षित जल स्रोतों में निवास करने वाला संवेदनशील वन्यजीव है। यह नदियों, तालाबों और अन्य मीठे जल स्रोतों की गुणवत्ता का महत्वपूर्ण जैव संकेतक माना जाता है। इसकी उपस्थिति किसी क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता की समृद्धि को दर्शाती है।
विश्वभर में ऊदबिलाव की 13 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से भारत में तीन यूरेशियन ऊदबिलाव, स्मूद-कोटेड ऊदबिलाव और एशियाई स्मॉल-क्लॉड ऊदबिलाव प्रजातियां पाई जाती हैं। विशेष बात यह है कि छत्तीसगढ़ में इन तीनों प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की जा चुकी है, जो राज्य की समृद्ध जैव विविधता का प्रमाण है।
विश्व ऊदबिलाव दिवस का उद्देश्य
हर वर्ष 27 मई को विश्व ऊदबिलाव दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य ऊदबिलाव प्रजातियों के संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना और उनके सामने मौजूद खतरों की ओर ध्यान आकर्षित करना है।
प्राकृतिक आवास का नुकसान, जल स्रोतों का प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, अवैध शिकार एवं तस्करी और मानव-वन्यजीव संघर्ष आदि ऊदबिलाव के लिए प्रमुख खतरे हैं।
छत्तीसगढ़ में संरक्षण के लिए लगातार हो रहा शोध
छत्तीसगढ़ में ऊदबिलाव संरक्षण की दिशा में वर्ष 2021 से निरंतर कार्य किया जा रहा है। इसके बाद राज्य शासन के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा को ऊदबिलाव पर शोध और संरक्षण अध्ययन का दायित्व सौंपा गया। छत्तीसगढ़ जैव विविधता बोर्ड के नेतृत्व में कोरबा, कांकेर, गरियाबंद और बस्तर संभाग में कैमरा ट्रैप एवं मैदानी अध्ययन के माध्यम से ऊदबिलाव की उपस्थिति, व्यवहार, आवास और प्रजनन संबंधी जानकारी संकलित की जा रही है। छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा की शोधकर्ता श्रीमती निधि सिंह के नेतृत्व में तैयार अध्ययन रिपोर्ट वन विभाग को सौंपी गई है। अध्ययन से राज्य के विभिन्न जिलों में ऊदबिलाव की उपस्थिति के प्रमाण प्राप्त हुए हैं।
जनजागरूकता से बढ़ी संरक्षण की उम्मीद
वन विभाग और विज्ञान सभा द्वारा स्कूलों, कॉलेजों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसका सकारात्मक प्रभाव यह है कि अब स्थानीय मछुआरे और ग्रामीण ऊदबिलाव के संरक्षण के प्रति अधिक संवेदनशील हुए हैं तथा कई क्षेत्रों से इनके रेस्क्यू की सूचना स्वयं लोगों द्वारा दी जा रही है।
वन विभाग की अपील: जल स्रोतों को रखें स्वच्छ
वन विभाग और छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा ने आमजन से अपील की है कि जल स्रोतों को स्वच्छ रखें और प्राकृतिक स्थलों पर प्लास्टिक, कांच तथा अन्य अपशिष्ट न फैलाएं। जंगलों में आग लगने की स्थिति में तत्काल वन विभाग को सूचना दें।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊदबिलाव का संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामुदायिक सहभागिता से ही यह संभव है। स्वच्छ पर्यावरण और सुरक्षित जल स्रोतों के संरक्षण से ही इस दुर्लभ वन्यजीव का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
