July 23, 2026
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    भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के यूनिवर्सल रेल मिल (यूआरएम) में रविवार को एक दर्दनाक हादसे में कर्मचारी विनोद कुमार यादव (38) की करंट लगने से मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ जब वे ओवरहेड क्रेन पर कार्य कर रहे थे। घटना के बाद संयंत्र में शोक का माहौल है।
    O 30-40 फीट ऊंचाई पर लगा हाई वोल्टेज करंट
    जानकारी के अनुसार वैशाली सेक्टर निवासी विनोद कुमार यादव यूनिवर्सल रेल मिल में जूनियर इंजीनियर एसोसिएट के पद पर कार्यरत थे। वे द्वितीय पाली में ड्यूटी पर पहुंचे थे। शाम करीब 4:30 बजे 30 से 40 फीट ऊंचे ओवरहेड क्रेन पर कार्य के लिए चढ़े। इसी दौरान उन्हें हाई वोल्टेज डीसी करंट लग गया और वे मौके पर ही बेहोश हो गए।
    O 20 मिनट तक ऊंचाई पर फंसे रहे कर्मचारी
    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कर्मचारी को नीचे उतारने में करीब 15 से 20 मिनट लग गए। इसके बाद उन्हें मेडिकल पोस्ट ले जाया गया, जहां से सेक्टर-9 अस्पताल रेफर किया गया। अस्पताल में चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
    O बंद होनी थी बिजली, फिर कैसे दौड़ा करंट?
    घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जब भी कोई कर्मचारी ओवरहेड क्रेन पर कार्य करने जाता है, तो पहले विद्युत सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी जाती है। इसके बावजूद कर्मचारी के ऊपर चढ़ने के बाद करंट लगना गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करता है।
    सुरक्षा नियमों की अनदेखी का आरोप
    कर्मचारियों का आरोप है कि ऐसे कार्य के दौरान कम से कम तीन प्रशिक्षित कर्मचारियों की मौजूदगी अनिवार्य होती है। लेकिन घटना के समय प्रबंधन ने केवल एक अप्रशिक्षित (अनस्किल्ड) ठेका श्रमिक को तैनात किया था। उसके पास आपात स्थिति से निपटने का अनुभव नहीं था, जिससे समय पर बचाव नहीं हो सका।
    जांच और जवाबदेही की मांग
    हादसे के बाद कर्मचारियों में आक्रोश है। वे पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, सुरक्षा मानकों की समीक्षा और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यदि सुरक्षा प्रोटोकॉल का सही तरीके से पालन किया गया होता तो यह हादसा टाला जा सकता था।

      राजनांदगांव / शौर्यपथ / आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को संविधान के तहत मिले 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रभावी लाभ छत्तीसगढ़ में सुनिश्चित करने की मांग तेज हो गई है। श्री राजपूत करणी सेना (कालवी विचारधारा) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संजय बहादुर सिंह के नेतृत्व में संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। इसमें राज्य में ईडब्ल्यूएस आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की मांग की गई।
    प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि संविधान के 103वें संशोधन के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण का अधिकार मिला है, लेकिन छत्तीसगढ़ में इसका लाभ सभी पात्र लोगों तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पा रहा है। राजस्थान सहित कई राज्यों में इस दिशा में बेहतर व्यवस्था लागू की गई है, इसलिए छत्तीसगढ़ में भी इसे पूरी गंभीरता से लागू किया जाना चाहिए।
    राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संजय बहादुर सिंह ने कहा कि यह किसी वर्ग विशेष की नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त अधिकारों को हर पात्र नागरिक तक पहुंचाने की मांग है। ज्ञापन में राज्य सरकार से जल्द आवश्यक निर्णय लेने का आग्रह किया गया है।
    समाज ने रखी चार प्रमुख मांगें
    राज्य में ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) के 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रभावी और पूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। ईडब्ल्यूएस आरक्षण के पालन की निगरानी के लिए राज्यस्तरीय मॉनिटरिंग बोर्ड का गठन किया जाए। ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए एक स्पष्ट, पारदर्शी और प्रभावी कार्यप्रणाली (एसओपी/दिशा-निर्देश) तैयार कर सभी विभागों में लागू की जाए। राजस्थान मॉडल के अनुरूप राज्य में लागू हो ईडब्ल्यूएस के सभी प्रावधान ,समयबद्ध तरीके से ईडब्ल्यूएस की कार्ययोजना और बजटीय प्रावधान हो
    ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रदेश सह सचिव गोल्डी भदोरिया, जिलाध्यक्ष अमन बहादुर सिंह, संजय सिंह राजपूत,अजय कुशवाहा,कपिल चौहान, अभिनव सिंह, चंदन सिंह, संतोष ठाकुर सहित महिला विंग की महिलाएं उपस्थित रहीं.

    मृणेन्द्र चौबे
    राजनांदगांव/शौर्यपथ / कोरकोट्टी नक्सली हमले की 17वीं बरसी पर रविवार को राजनांदगांव पुलिस ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक स्व. विनोद कुमार चौबे सहित 29 वीर पुलिस जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। रक्षित केंद्र स्थित शहीद स्मारक एवं मंगल भवन में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में शहीदों के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर दो मिनट का मौन रखा गया।
    पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने शहीद परिवारों का शाल एवं श्रीफल भेंटकर सम्मान किया और उनसे आत्मीय संवाद करते हुए उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने परिवारों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित निराकरण किया जाएगा। एसपी ने कहा कि शहीदों का सर्वोच्च बलिदान सदैव पुलिस परिवार और समाज के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।
    शहीदों की स्मृति में आयोजित निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण एवं स्वैच्छिक रक्तदान शिविर में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस दौरान 21 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारियों ने रक्तदान कर वीर शहीदों को अनूठी श्रद्धांजलि दी।
    समारोह में सांसद संतोष पांडे, पूर्व सांसद अभिषेक सिंह, महापौर मधुसूदन यादव, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। जनप्रतिनिधियों ने शहीद परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
    कार्यक्रम में कलेक्टर जितेन्द्र यादव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर, डीएसपी किरण चौधरी, रक्षित निरीक्षक लोकेश कुमार कसेर, जिले के पुलिस अधिकारी-कर्मचारी, शहीद परिवारों के सदस्य, जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं पत्रकार उपस्थित रहे। अंत में सभी ने वीर शहीदों के साहस, राष्ट्रभक्ति और सर्वोच्च बलिदान को सदैव स्मरण रखते हुए राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित रहने का संकल्प लिया।

    सूत्रों का दावा- बेलर, उमरगांव और सिहावा के कुछ खाद कारोबारियों का नेटवर्क सक्रिय, POC नियमों पर उठे सवाल; कृषि विभाग से जांच की मांग

    थरुण कुमार की खास रिपोर्ट
    धमतरी/नगरी। धमतरी जिले के बेलर क्षेत्र में किसानों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली रासायनिक खाद की कथित अवैध तस्करी का मामला सामने आया है। सूत्रों के अनुसार बेलर, उमरगांव और सिहावा क्षेत्र के कुछ खाद कारोबारियों का सिंडिकेट सक्रिय है, जो बड़ी मात्रा में खाद को गोदामों में डंप कर जैतपुरी मार्ग या नवागांव रास्ते ओडिशा भेज रहा है। यदि यह आरोप सही हैं तो इससे स्थानीय किसानों के लिए खाद की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
    सूत्रों का दावा है कि प्रतिदिन ट्रैक्टर पिकअप वाहनों के माध्यम से खाद की खेप सीमा पार भेजी जा रही है। बताया जा रहा है कि बेलर क्षेत्र इस कथित नेटवर्क का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जहां से खाद का संग्रहण और परिवहन किया जा रहा है।
    नियमों के अनुसार खाद की बिक्री पीओएस (POS/POC) मशीन के माध्यम से की जाती है, जिसमें खरीदार का आधार कार्ड और भूमि संबंधी दस्तावेज दर्ज किए जाते हैं। कृषि विभाग का भी कहना है कि बिना आधार और भूमि रिकॉर्ड के खाद की बिक्री नहीं की जा सकती। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि खाद वास्तव में दूसरे राज्य भेजी जा रही है तो उसकी बिक्री का रिकॉर्ड किसके नाम पर दर्ज किया जा रहा है।
    सूत्रों का यह भी दावा है कि कुछ कारोबारी खुलेआम यह कहते हैं कि उन्हें किसी कार्रवाई का डर नहीं है क्योंकि संबंधित अधिकारियों तक पैसा पहुंचता है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
    यह केवल सरकारी नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि किसानों के अधिकारों पर भी सीधा असर डालने वाला मामला होगा। स्थानीय किसानों का कहना है कि कई बार खाद की कमी का सामना करना पड़ता है, जबकि दूसरी ओर बड़े पैमाने पर खाद बाहर भेजे जाने की चर्चा लगातार होती रहती है।
    अब जरूरत इस बात की है कि कृषि विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस संयुक्त रूप से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करें। खाद विक्रेताओं के गोदामों का भौतिक सत्यापन, पीओएस मशीनों के रिकॉर्ड का मिलान तथा सीमा क्षेत्रों में वाहनों की निगरानी से ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी .

    उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने किया लोकार्पण, जब्त संपत्तियों की ऑनलाइन ट्रैकिंग से बढ़ेगी पारदर्शिता और जवाबदेही; नई बस सहित चार वाहनों को भी दिखाई हरी झंडी

    रायपुर/कांकेर ।

    छत्तीसगढ़ में पुलिस व्यवस्था के आधुनिकीकरण और डिजिटल सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है। उप मुख्यमंत्री एवं कांकेर जिले के प्रभारी मंत्री श्री अरुण साव ने शनिवार को कांकेर सिटी कोतवाली में प्रदेश के पहले क्यूआर कोड आधारित डिजिटल ई-मालखाना का शुभारंभ किया। इसके साथ ही उन्होंने जिला पुलिस को मिली नई बस सहित चार वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

    इस अभिनव व्यवस्था के माध्यम से अब अपराध प्रकरणों में जब्त किए गए सामानों का रिकॉर्ड पूरी तरह डिजिटल होगा। क्यूआर कोड स्कैन करते ही संबंधित प्रकरण, जब्त सामग्री, संख्या और तिथि सहित संपूर्ण जानकारी तत्काल उपलब्ध हो जाएगी। इससे मालखाना प्रबंधन अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और व्यवस्थित बनेगा।

    एक स्कैन में पूरी जानकारी

    कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने ई-मालखाना का निरीक्षण कर जब्तशुदा सामानों की ऑनलाइन ट्रैकिंग प्रक्रिया की जानकारी ली। उन्होंने कांकेर पुलिस की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल तकनीक के उपयोग से पुलिस व्यवस्था अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनविश्वास के अनुरूप बनेगी।

    पुलिस अधीक्षक श्री निखिल राखेचा ने बताया कि ई-मालखाना प्रणाली के अंतर्गत अपराधों में जब्त किए गए वाहन, मोबाइल फोन, नकदी, हथियार, आभूषण, मादक पदार्थ, प्रॉपर्टी दस्तावेज़ तथा अन्य केस प्रॉपर्टी का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इससे न्यायालयीन प्रक्रिया और विवेचना के दौरान आवश्यक सामग्री को शीघ्रता से उपलब्ध कराना आसान होगा।

    बारकोड से आगे, अब क्यूआर कोड तकनीक

    अब तक प्रदेश के थानों में बारकोड आधारित व्यवस्था का उपयोग किया जाता था, लेकिन क्यूआर कोड आधारित डिजिटल मालखाना प्रबंधन प्रणाली पहली बार कांकेर पुलिस ने लागू की है। प्रत्येक बॉक्स पर अलग क्यूआर कोड लगाया गया है, जिसे स्कैन करते ही संबंधित केस की पूरी जानकारी स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाती है। इससे रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा, पेपरलेस कार्यप्रणाली को बढ़ावा मिलेगा और जब्त संपत्तियों के रखरखाव में जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।

    उत्कृष्ट पुलिस कर्मियों का हुआ सम्मान

    कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने उत्कृष्ट सेवा देने वाले पुलिस अधिकारियों एवं जवानों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

    इस अवसर पर सांसद श्री भोजराज नाग, विधायक श्री आशाराम नेताम, छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती शालिनी राजपूत, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण नरेटी, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरुण कौशिक, उपाध्यक्ष श्री उत्तम यादव, श्री सतीश लाटिया, श्री महेश जैन, श्री आलोक ठाकुर, पूर्व विधायक श्रीमती सुमित्रा मारकोले, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री आकाश श्रीश्रीमाल, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हरेश मंडावी, गृह विभाग के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं नागरिक उपस्थित रहे।

    डिजिटल पुलिसिंग की नई मिसाल

    कांकेर में शुरू हुई यह क्यूआर कोड आधारित ई-मालखाना व्यवस्था न केवल छत्तीसगढ़ पुलिस के आधुनिकीकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम है, बल्कि पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक-सक्षम पुलिसिंग की नई मिसाल भी स्थापित करेगी। यह मॉडल भविष्य में प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

    तुपकी चलाकर भगवान श्री जगन्नाथ को दी प्रतीकात्मक सलामी, जगदलपुर में अंडरग्राउंड बिजली व्यवस्था के निर्णय पर आयोजन समिति ने जताया आभार

    रायपुर ।

    बस्तर की 619 वर्ष पुरानी सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपरा गोंचा महापर्व-2026 का निमंत्रण लेकर महापर्व आयोजन समिति के प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से उनके निवास कार्यालय में सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को महापर्व में शामिल होने का आमंत्रण दिया, जिसे स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री ने आयोजन की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने बस्तर की ऐतिहासिक परंपरा का सम्मान करते हुए तुपकी चलाकर भगवान श्री जगन्नाथ को प्रतीकात्मक सलामी दी। यह गोंचा महापर्व की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान मानी जाती है।

    मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने जगदलपुर शहर में विद्युत तारों को अंडरग्राउंड किए जाने के निर्णय के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। समिति ने कहा कि इस पहल से शहर में विद्युत संबंधी समस्याओं में कमी आई है और भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा के दौरान आने वाली तकनीकी बाधाएँ भी समाप्त हो गई हैं।

    360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष श्री वेदप्रकाश पाण्डे ने बताया कि समाज अपनी 619 वर्ष पुरानी गौरवशाली परंपरा का निर्वहन करते हुए इस वर्ष 29 जून से 25 जुलाई 2026 तक ऐतिहासिक बस्तर गोंचा महापर्व का आयोजन कर रहा है। महाप्रभु श्री 1008 जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा 16 जुलाई को श्री जगन्नाथ मंदिर से प्रारंभ होकर सिरहासार भवन (जनकपुरी) पहुँचेगी, जहाँ महाप्रभु विराजमान होंगे।

    इस अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप, विधायक श्री किरण सिंह देव, महापर्व आयोजन समिति के अध्यक्ष श्री मुक्तेश पाण्डे सहित आयोजन समिति के अन्य प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

    3 किलोवाट सोलर रूफटॉप प्लांट से मिली ऊर्जा आत्मनिर्भरता • ₹1.08 लाख की सरकारी सब्सिडी • अतिरिक्त बिजली ग्रिड में, परिवार को आर्थिक राहत

    रायपुर ।
    प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना बस्तर सहित छत्तीसगढ़ के हजारों परिवारों के लिए आर्थिक राहत और ऊर्जा आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बनती जा रही है। इसका प्रेरक उदाहरण बस्तर जिले के ग्राम तेलीमारेंगा निवासी रघुचंद कर्रे हैं, जिन्होंने योजना के तहत अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर रूफटॉप प्लांट स्थापित कराया। इसके बाद उनका मासिक बिजली बिल लगभग शून्य हो गया है और परिवार को हर महीने करीब ₹1,500 की सीधी बचत हो रही है।
    रघुचंद कर्रे ने बताया कि पहले हर महीने बिजली बिल के रूप में लगभग डेढ़ हजार रुपये खर्च करने पड़ते थे, जिससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ता था। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने आवेदन किया और सरकारी सहायता से अपने घर पर सोलर संयंत्र स्थापित कराया।

    ₹1.08 लाख की सब्सिडी से आसान हुआ सोलर प्लांट लगाना

    योजना के अंतर्गत रघुचंद कर्रे को 3 किलोवाट सोलर रूफटॉप प्लांट की स्थापना के लिए केंद्र सरकार से ₹1.08 लाख की सब्सिडी प्राप्त हुई। इस आर्थिक सहायता से सोलर संयंत्र लगाना उनके लिए किफायती और सरल हो गया।

    अतिरिक्त बिजली ग्रिड में, बिजली बिल हुआ 'जीरो'

    सोलर प्लांट चालू होने के बाद अब उनके घर की अधिकांश बिजली जरूरतें सौर ऊर्जा से पूरी हो रही हैं। संयंत्र से बनने वाली अतिरिक्त बिजली बिजली कंपनी के ग्रिड में भेजी जा रही है। परिणामस्वरूप उनका मासिक बिजली बिल लगभग शून्य हो गया है।

    रघुचंद कर्रे का कहना है कि अब बिजली बिल की चिंता खत्म हो गई है और हर महीने होने वाली बचत से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। उनके अनुसार यह योजना मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

    स्वच्छ ऊर्जा के साथ आर्थिक सशक्तिकरण

    रघुचंद कर्रे ने ऊर्जा के क्षेत्र में आम नागरिकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने बस्तर के अन्य नागरिकों से भी प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील करते हुए कहा कि यह योजना केवल बिजली बिल कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    मुख्य तथ्य एक नजर में
    हितग्राही: रघुचंद कर्रे, ग्राम तेलीमारेंगा, जिला बस्तर
    योजना: प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना
    सोलर प्लांट क्षमता: 3 किलोवाट
    सरकारी सब्सिडी: ₹1.08 लाख
    पहले का बिजली बिल: लगभग ₹1,500 प्रति माह
    वर्तमान बिजली बिल: लगभग शून्य
    लाभ: मासिक बचत, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग।

    उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने वन महोत्सव में किया शुभारंभ, 146 करोड़ की पर्यटन परियोजनाओं से बदलेगी भोरमदेव की तस्वीर

    रायपुर/कबीरधाम,।

    कबीरधाम जिले का भोरमदेव अब छत्तीसगढ़ के प्रमुख इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने शनिवार को भोरमदेव अभ्यारण्य में आयोजित वन महोत्सव के अवसर पर 6 किलोमीटर लंबे भोरमदेव इको ट्रेल का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने जनप्रतिनिधियों, वन अधिकारियों और ग्रामीणों के साथ ट्रेल का भ्रमण कर प्राकृतिक सौंदर्य, जैव विविधता और वन्य जीवन का अनुभव लिया।

    उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भोरमदेव प्रकृति की अनमोल धरोहर है और यहां इको-टूरिज्म के विस्तार से स्थानीय युवाओं को रोजगार, छोटे व्यवसायों को बढ़ावा तथा क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि पर्यटन केवल विकास का माध्यम नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण और स्थानीय संस्कृति को आगे बढ़ाने का भी सशक्त जरिया है।

    पर्यटन से रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार

    श्री शर्मा ने कहा कि जंगल सफारी के बाद अब इको ट्रेल पर्यटकों को घने जंगलों, वन्यजीवों, औषधीय वनस्पतियों और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच रोमांचक अनुभव प्रदान करेगी। होटल, परिवहन, स्थानीय भोजन, हस्तशिल्प और अन्य व्यवसायों को इससे प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा, जबकि स्थानीय युवा नेचर गाइड के रूप में रोजगार के नए अवसर प्राप्त करेंगे।

    146 करोड़ की स्वदेश दर्शन योजना से होगा व्यापक विकास

    उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना के तहत भोरमदेव क्षेत्र के समग्र पर्यटन विकास के लिए 146 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस राशि से प्रवेश द्वार, संग्रहालय, आधुनिक पार्क, पार्किंग, मेला स्थल, छेरकी महल, मड़वा महल, रामचूंआ और सरोदा बांध सहित अनेक पर्यटन स्थलों का विकास किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद भोरमदेव राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान प्राप्त करेगा।

    3 से 4 घंटे का रोमांचक वन भ्रमण

    वन विभाग द्वारा विकसित लगभग 6 किलोमीटर लंबी इको ट्रेल को पूरा करने में 3 से 4 घंटे का समय लगेगा। प्रशिक्षित नेचर गाइड के साथ पर्यटक पक्षियों, तितलियों, औषधीय वनस्पतियों, वन्यजीवों और भोरमदेव मंदिर परिसर की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

    वन महोत्सव में पर्यावरण संरक्षण का संदेश

    वन महोत्सव के दौरान उप मुख्यमंत्री ने 51 काला आम के पौधों का रोपण कर काला आम उपवन की स्थापना की। साथ ही 50 हजार सीड बॉल अभियान और एक लाख पौधों के वितरण अभियान का शुभारंभ करते हुए ई-रिक्शा को हरी झंडी दिखाई। कार्यक्रम में बैगा समुदाय के 100 हितग्राहियों को सोलर लालटेन और जैकेट भी वितरित किए गए।

    हर सप्ताहांत मिलेगा जंगल का नया अनुभव

    वन मंडलाधिकारी निखिल अग्रवाल ने बताया कि भोरमदेव इको ट्रेल का संचालन प्रत्येक शनिवार और रविवार करियाआमा गेट स्थित भोरमदेव इको कैंप से किया जाएगा। इसमें भाग लेने के लिए प्रति व्यक्ति 1,000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। प्रतिभागियों को प्रशिक्षित नेचर गाइड के साथ सुरक्षित वन भ्रमण कराया जाएगा।

    कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष विशेशर पटेल, कृषक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष सुरेश चंद्रवंशी, पुलिस जवाबदेही प्राधिकरण के सदस्य भगत पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, जिला पंचायत सदस्य राम कुमार भट्ट, डॉ. वीरेन्द्र साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

    NMC की मंजूरी से प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा को मिली नई रफ्तार, 1963 की 60 सीटों से बढ़कर अब 250 तक पहुंचा जेएनएम मेडिकल कॉलेज

    रायपुर । छत्तीसगढ़ के चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) ने पंडित जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल (जेएनएम) मेडिकल कॉलेज, रायपुर की एमबीबीएस सीटों में 20 सीटों की बढ़ोतरी को मंजूरी प्रदान कर दी है। इस निर्णय के बाद शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कॉलेज में एमबीबीएस की कुल सीटें 230 से बढ़कर 250 हो जाएंगी।

    MARB द्वारा 10 जुलाई 2026 को जारी लेटर ऑफ परमिशन के अनुसार, पं. दीनदयाल उपाध्याय मेमोरियल हेल्थ साइंसेज एंड आयुष यूनिवर्सिटी, छत्तीसगढ़ से संबद्ध जेएनएम मेडिकल कॉलेज अब पहले से अधिक विद्यार्थियों को चिकित्सा शिक्षा का अवसर उपलब्ध करा सकेगा।

    60 सीटों से शुरू हुआ सफर, अब 250 तक पहुंची क्षमता

    वर्ष 1963 में मात्र 60 एमबीबीएस सीटों के साथ स्थापित जेएनएम मेडिकल कॉलेज ने पिछले छह दशकों में लगातार विस्तार किया है। समय-समय पर सीटों में वृद्धि करते हुए यह संख्या पहले 100, फिर 2009 में 150, 2019 में 180, 2023 में 230 और अब 2026 में 250 सीटों तक पहुंच गई है। यह वृद्धि प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के मजबूत होते ढांचे और बढ़ती स्वास्थ्य सुविधाओं का संकेत मानी जा रही है।

    प्रदेश के युवाओं को मिलेगा बड़ा लाभ

    स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस उपलब्धि का स्वागत करते हुए कहा कि एमबीबीएस सीटों में वृद्धि से छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों को अपने ही राज्य में चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने के अधिक अवसर मिलेंगे। इससे न केवल मेडिकल शिक्षा का विस्तार होगा, बल्कि भविष्य में प्रदेश को अधिक प्रशिक्षित डॉक्टर भी मिल सकेंगे।

    उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और राज्य सरकार के सतत प्रयासों को देते हुए कहा कि सरकार चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

    चिकित्सा शिक्षा को मिलेगा नया आयाम

    विशेषज्ञों का मानना है कि सीटों में यह बढ़ोतरी प्रदेश के उन विद्यार्थियों के लिए राहत लेकर आई है, जो हर वर्ष सीमित सीटों के कारण अन्य राज्यों का रुख करने को मजबूर होते थे। नई सीटों के जुड़ने से प्रदेश में मेडिकल शिक्षा का दायरा और व्यापक होगा तथा भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी मजबूत होगी।

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