August 26, 2026
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    राजनीति

    राजनीति (1230)

    पूर्व के रमन सरकार 2018 में बेरोजगारी दर 22 प्रतिशत से ऊपर था आज बेरोजगारी दर 0.6 प्रतिशत है, मोदी सरकार ने वादानुसार 8 साल में 16 करोड़ रोजगार नही दिया उल्टा 23 करोड़ हाथों से रोजगार छीन लिया ,
    केंद्र के पास एक करोड़ सरकारी पद खाली उस में भर्ती क्यो नही कराती भाजयुमो

        रायपुर/ शौर्यपथ / भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रेस वार्ता पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने भाजपा युवा मोर्चा पर तंज कसते हुये पूछा इस बार पक्का बेरोजगारी का टेंट लगाएंगे ना? क्योंकि इसके पहले भाजयुमो दो बार बेरोजगारी का टेंट लगाने की घोषणा करके मैदान छोड़कर भाग गए थे। 2014 के पहले भाजयुमो ने गली-गली गांव-गांव शहर शहर घूम कर युवाओं को केंद्र में सरकार बनने के बाद प्रति वर्ष दो करोड़ रोजगार देने का वादा और दावा किया था उसका क्या हुआ? अग्निपथ स्कीम में 4 साल की टेम्परेरी नियुक्ति दे रहे हैं? मोदी सरकार ने 8 साल में 16 करोड़ रोजगार को कहा फ्रिज करके रखा दिया है? और 23 करोड़ हाथों से जो रोजगार छीना गया है उसके लिए कौन जिम्मेदार है? केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद बेरोजगारी के मामले में देश 45 साल पुराने हालात में खड़ी हुई है। 1 करोड़ 25 लाख महिलाओं के हाथ से काम छीना गया है 15,000 से अधिक उद्योगपति कारोबार समेट कर देश छोड़कर चले गए। मोदी सरकार के पास अभी भी एक करोड़ से अधिक सरकारी पद रिक्त है उसमें भर्ती कब होगी? सरकारी नौकरी में भर्ती के नाम से निरंतर मोदी सरकार देश के युवाओं को ठग रही है और लूट रही है सरकारी पदों में भर्ती का विज्ञापन निकालकर देश के बेरोजगार युवाओं से 1300 करोड़ों सलाना मोदी सरकार कमाती है। केंद्र सरकार के पास देश के युवाओं को रोजगार देने का कोई रोडमैप नहीं है देश के 45 करोड़ युवा रोजगार की तलाश करते करते इतना हताश और परेशान हो गए हैं की अब वो रोजगार ढूंढना ही बंद कर दिए हैं।
      प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नये विश्वसनीय छत्तीसगढ़ मॉडल से 5 लाख से अधिक युवाओं के लिये रोजगार, स्वरोजगार और सरकारी नौकरी के द्वार खुले। सत्ता परिवर्तन के पहले 2018 में जहां राज्य का बेरोजगारी दर 22 प्रतिशत से ऊपर था। आज छत्तीसगढ़ की बेरोजगारी दर 0.6 प्रतिशत है। जबकि देश की बेरोजगारी दर 7.6 प्रतिशत है।

    रायपुर/ शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भाजपा अपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछे कि नौ सांसद देने वाले छत्तीसगढ़ से किस बात का बदला ले रहे हैं। मोदी सरकार लगातार छत्तीसगढ़ के विकास में बाधा उत्पन्न कर रही है। छत्तीसगढ़ सरकार किसानों, मजदूरों, युवाओं के हित में निर्णय लेती है, तब मोदी सरकार उसमें अडंगेबाजी लगाती है। जानबूझकर केंद्रीय योजनाओं में छत्तीसगढ़ के साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है। केंद्र, छत्तीसगढ़ के मामले में अपने दायित्व से हमेशा मुंह मोड़ती है। यह दुर्भाग्यजनतक है कि छत्तीसगढ़ के हितों की आवाज दिल्ली में उठाने की जिनकी संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है, भाजपा के 9 सांसद राज्य के हितों की बात आने पर राज्य की जनता के नहीं भारतीय जनता पार्टी के सांसद बन जाते है। केंद्र, छत्तीसगढ़ के हक का पैसा रोककर छत्तीसगढ़ का विकास रोकने षड़यंत्र कर रही हैं। छत्तीसगढ़ को कर्ज लेने के लिए मजबूर किया जाता है। किसानों को खाद नहीं दे रहे हैं। धान खरीदी के लिए हर साल बारदाना संकट क्यों खड़ा किया जाता हैं? छत्तीसगढ़ के गरीबों के आवास का कोटा रद्द कर गरीबों का सपना तोड़ा जाता है? संघीय योजनाओं के लाभ से राज्य को वंचित रखा जाता है। राज्य का 51000 करोड़ रू. केंद्र ने रोके रखा है जिसमें राज्य का विकास प्रभावित हो रहा, भाजपा सांसद इसमें भी चुप रहते हैं।

    प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल  ने कांग्रेस द्वारा किये गए 90 फीसदी वादों को पूरा कर दिया है। भाजपा बताये कि रमन सरकार ने 15 साल में कितने वादे पूरे किए और मोदी सरकार ने 8 साल में कारोबारी मित्रों को फायदा पहुंचाने और विपक्ष का दमन करने, विपक्षी दलों की सरकार गिराने केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के सिवाय किया क्या है,?

    प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मोदी सरकार और भाजपा के अतीत से लेकर आज तक जारी लोकतंत्र विरोधी कृत्यों के विरुद्ध संघर्ष किया है और कर रहे हैं इसलिए भाजपा के दबाव में केंद्रीय एजेंसियों का अलोकतांत्रिक उपयोग किया जा रहा है।
    रायपुर/ शौर्यपथ /  प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने  भाजपा द्वारा मोदी सरकार के तथा कथित सुपोषण अभियान पर  तंज कसते हुई कहा कि जनता ने भाजपा को 15 साल दिये थे तब पूर्व के रमन सरकार के मंत्री और भाजपा के नेता  कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार करने में जुटे हुए थे और छत्तीसगढ़ में 37 प्रतिशत से अधिक बच्चे कुपोषित और 41 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हो गई थी। कुपोषित बच्चों को गुणवत्ताहीन आहार बच्चों को दिया जाता रहा है। पौष्टिक आहार और अन्य प्रकार के विटामिंस प्रोटींस सप्लाई भी रमन सरकार के कमीशनखोरी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। उस दौरान बच्चे तो कुपोषित रह गए लेकिन भाजपा के नेता और उनके मंत्री अकूत कालाधन कमाए आर्थिक रूप से तंदुरुस्त हो गए। मोदी सरकार ने भी कुपोषण खत्म करने चलाए जा रहे योजनाओ के फंड में कटौती कर दिया है। ऐसे में भाजपा का सुपोषण अभियान सिर्फ राजनीतिक जुमलाबाजी के अलावा कुछ भी नहीं है।


    प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार ने  कुपोषण को खत्म करने को एक चैलेंज के रूप में स्वीकार किया है छत्तीसगढ़ में कुपोषण को भी नक्सल समस्या की तरह ही गंभीर माना है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के जयंती के दिन से शुरू की गई मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान, मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लीनिक के माध्यम से कुपोषण एनिमिया को खत्म करने के लिए सुपोषित गरम भोजन पौष्टिक आहार विटामिंस की टेबलेट घर-घर पहुंचाया गया। आज कुपोषण के मामले में राष्ट्रीय औसत 32.1 है वही छत्तीसगढ़ में 31.3 प्रतिशत है जो राष्ट्रीय स्तर से नीचे है। 2019 में 4 लाख 33 हजार बच्चे कुपोषित थे इनमें से 1 लाख 72 हजार बच्चे कुपोषण के कुचक्र से बाहर आ चुके है। देश के अधिकांश राज्यों में कुपोषण की दरें बढ़ी है। छत्तीसगढ़ में कुपोषण की दरों में कमी आई है। छत्तीसगढ़ के वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों के हाट बाजार में मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक योजना के अंतर्गत अब तक कुल 80 हजार से अधिक हाट बाजार क्लीनिक आयोजित किए गए थे जिसके माध्यम से लगभग 32लाख लोगों का इलाज किया गया।

    विधायक वोरा के फैसले का आने वाले विधान सभा चुनाव मेक्या होगा असर , संदीप और आयुष की की जीत या हार के बाद कितनी बदलेगी दुर्ग की राजनीती ...

          दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग सहित छत्तीसगढ़ में युवा कांग्रेस के संगठन  का चुनाव इन दिनों चरम सीमा पर है पुरे प्रदेश के युवा कांग्रेसी प्रत्याशी अपने अपने चुनाव एवं अपने प्रिय प्रत्याशियों को जिताने में लगे हुए है और सभी ऐसे साधनों का उपयोग कर रहे है जिनसे प्रचार में मदद मिले किन्तु वही दुर्ग युवा कांग्रेस संगठन प्रत्याशी की बात करे तो दुर्ग से दो प्रत्याशी संदीप वोरा और आयुष शर्मा के मैदान में उतरने एवं चुनाव लड़ने से दुर्ग की राजनीती फिजा में इन दिनों अजीब से कशमकश और उथल पुथल मची हुई है . एक ओर जहाँ संदीप वोरा प्रदेश महामंत्री पद के लिए युवा कांग्रेस से प्रत्याशी है वही दुर्ग जिला अध्यक्ष के लिए आयुष शर्मा भाग्य आजमा रहे है . कांग्रेस के सत्ता में आने के पहले दुर्ग विधायक अरुण वोरा की छवि एक मिलनसार सभी को साथ लेकर चलने वाले नेता के रूप में होती थ किन्तु वर्तमान में जब प्रदेश में 15 सालो बाद और निगम में 20 सालो बाद कांग्रेस के कब्ज़े के बाद स्थिति में बहुत परिवर्तन हो गया .
      कांग्रेस के ऐसे कार्यकर्ता जो सालो से विधायक वोरा का समर्थन करते आ रहे है उन्हें दरकिनार कर विधायक द्वारा ऐसे नए नए चेहरों को प्राथमिकता दी जा रही है जिनका राजनितिक क्षेत्र में अस्तित्व शून्य के बराबर है जिनकी चर्चा दुर्ग कांग्रेसियों के बीच एक प्रमुख मुद्दा बन चुका है . ऐसे में पुराने जमीनी कार्यकर्ताओ को उपेक्षा का शिकार होना पड़ रहा है . कई कांग्रेसी पार्षद दबी जुबान में तो कई खुल कर विधायक की नीतियों का विरोध कर रहे है . पिछले दिनों राज्यसभा सांसद ने भी खुले रूप से एक पर एक फ्री महापौर की बात कहकर विधायक वोरा के निगम के कार्यो में जबरदस्त हस्तक्षेप की बात कह दी .
      बात हो रही कांग्रेस संगठन के चुनाव की तो इस बार वोटिंग द्वारा पदाधिकारियों के चयन के लिए ऑनलाइन की प्रक्रिया को कांग्रेस द्वारा अपनाया गया है किन्तु इस प्रक्रिया का अगर दूसरा रूप देखे तो दुर्ग कांग्रेस में संगठन और सत्ता पर अपनी मर्ज़ी चलाने का तमगा विधायक वोरा के ऊपर शुरू से ही लगता आ रहा है . दुर्ग कांग्रेस के जिला अध्यक्ष और युवा युवा सनागाथान के जिलाध्यक्ष की निष्क्रियता की बात भी लगातार उठती रही है कार्यकर्ताओ की नाराजगी भी संगठन की निष्क्रियता पर हमेशा भारी पड़ी है किन्तु शायद दुर्ग विधायक को इन सब बातो से कोई मतलब नहीं नजर आता . प्रोटोकाल और विधायक होने के नाते भीड़ से घिरे रहने के कारण विधायक वोरा को अब भी ऐसा प्रतीत होता है कि वही दुर्ग के सर्वमान्य कांग्रेस नेता है किन्तु जमीनी हकीकत इसके विपरीत नजर आ रही है . कांग्रेस के कई पार्षदों का खुले रूप से विरोध और कई पार्षदों का दोहरा चेहरा जो आने वाले समय में विधायक वोरा की राजनीती के लिए बड़े संकट की ओर इशारा कर रहा है .
      दुर्ग में जिस तरह युवा कांग्रेस के प्रत्याशी आयुष शर्मा और संदीप वोरा के लिए मतदान करवाने की जिम्मेदारी या यह कह सकते है टारगेट पार्षदों , एल्डरमैन , मंडल अध्यक्षी ,युवा कांग्रेसियों एवं वरिष्ठ कांग्रेसियों को दिया गया है वह कही ना कही आने वाले विधान सभा में विधायक प्रत्याशी के रूप में विधायक वोरा के लिए ही परेशानियों का सबब बनेगा . आज भले ही युवा संगठन के चुनाव में आयुष शर्मा और संदीप वोरा की जीत हो जाए क्योकि इस चुनावे में परिणाम कुछ भी हो विधायक वोरा की खुर्सी पर कोई असर नहीं पड़ेगा किन्तु आने वाले विधान सभा में कांग्रेस को विपक्ष पार्टी से ज्यादा कांग्रेसियों को ही साधने में बीत जाएगा . अब दुर्ग में वोरा बंगले के पास ऐसा कोई बड़ा नाम नहीं जिनके कारन मतदान की दिशा को बदलने वाले लोगो का समर्थन प्राप्त हो . वोरा बंगले की मजबूत दीवार के रूप में निर्विवाद राजनीती करने वाले और सहज सरल स्वभाव के एवं अपनी कही बातो को समय पर अमल करने के लिए पहचाने जाने वाले स्व. मोतीलाल वोरा जी के बिना दुर्ग कांग्रेस दिशाहीन हो चुकी है . जब तक स्व. मोतीलाल जी वोरा थे वोरा बंगले का हर फैसला पत्थर की लकीर माना जाता था किन्तु अब स्थिति वैसी नहीं रही कई कांग्रेसी मुखर विरोधी है तो कई कांग्रेसी परदे के पीछे विधान सभा चुनाव का इंतज़ार कर रहे है . ऐसे में स्थिति यह है कि आम जनता पर पकड़ बनाने की कला जन्नाने वाले अब वोरा बंगले से दुरी बना चुके है और जो करीबी है वो वार्ड में भी पक्ष में मतदान करा सके ऐसी स्थिति में नहीं है वर्तमान में तो पद है इसलिए सभी आस पास नजर आ रहे है किन्तु सभी को सही समय का इंतज़ार है और ऐसे कांग्रेसी लोगो ओ फेहरिस्त काफी लम्बी है जो चुनावी समर में आम जनता को काफी प्रभावित कर सकते है .
      वर्तमान में जिस तरह युवा संगठन चुनाव के लिए कांग्रेसियों पर प्रेशर डाल कर पक्ष में मतदान कराने का खेल चल रहा है यह प्रेशर आने वाले विधान सभा चुनाव में वोरा गुट के लिए बड़ा संकट पैदा कर सकता है . युवा संगठन के चुनाव में अभी भी ऐसे कई युवा कांग्रेसी है जो खुले रूप से विधायक की पहली और एकमात्र पसंद युवा कांग्रेस अध्यक्ष पद के उम्मीदवार आयुष शर्मा के होने के बावजूद भी कई युवा कांग्रेसियों का मैदान में उतरना ही यह इशारा करता है कि ऐसे भी कई लोग है जो विधायक के फैसले के खिलाफ है .
      परिणाम तो १२ जून के बाद आ ही जायेंगे किन्तु परिणाम आने के बाद संगठन अब विधान सभा चुनाव की तैयारियों में व्यस्त हो जाएगा वही अगर राज्य सभा  सांसद सरोज पाण्डेय अपनी पूरी शक्ति के साथ आने वाले चुनाव की तैयारी में मैदान में उतारी तो संगठन की अपनी मजबूत पकड़ और कट्टर समर्थको के समर्थन से दुर्ग की राजनितिक फिजा बदल सकती है . काफी सालो तक केंद्र की राजनीती करने के बाद एक बार फिर प्रदेश की राजनीती में केन्द्रीय भूमिका निभाने का मादा रखने वाली राज्यसभा संसद सरोज पाण्डेय की राजनितिक नीतियों का मुकाबला कर सके ऐसा कोई कांग्रेसी विधायक गुट से नजर नहीं आता किन्तु राजनीति है इसमें कब कौन आगे निकल जाए कोई भरोसा नहीं प्रतिभाये बहुत है किन्तु मौका हर किसी को नहीं मिलता वाली अहवात राजनीती में चरितार्थ है दुर्ग कांग्रेस में भी ऐसे कई चेहरे हो सकते है जो कुशल राजनीतिज्ञ  हो किन्तु सभी को तलाश है मौके का . युवा संगठन के चुनाव का परिणाम जो भी हो आने वाले विधान सभा चुनाव में विधायक प्रत्याशी के रूप में अरुण वोरा को कई मैदानों पर एक साथ जंग लड़ना होगा और सफलता प्राप्त कर ये साबित करना होगा कि स्व. मोतीलाल वोरा की तरह उनमे भी सक्षम राजनीतिज्ञ बनाने के सभी गुण मौजूद है . युवा संगठन का चुनाव तो आने वाले विधान सभा चुनाव का एक आगाज बस है .  

    रायपुर/ शौर्यपथ / मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल के तीन वर्ष पूरे कर लिये है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि देश में कुल 8 साल से मोदी सरकार है। इन आठ सालों में देश बदहाल हो चुका है। यह दुर्भाग्यजनक स्थिति है कि देश की अर्थव्यवस्था, जीडीपी, सीमा सुरक्षा, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सभी मामलों में मोदी सरकार बुरी तरह विफल साबित हुई है। देश के किसान से लेकर छोटे और मंझोले उद्योगपति, मजदूर, व्यापारी, छात्र सभी के हितों के खिलाफ मोदी सरकार खड़ी नजर आती है। न 2 करोड़ युवाओं को प्रतिवर्ष रोजगार मिला और न ही 2022 तक किसानों की आय दुगुनी हुई। मोदी सरकार के 8 साल हर वर्ष वस्तुओं के दाम दुगुने से अधिक हुये है। पेट्रोल और डीजल के दाम लगभग दुगुने हो गये। रसोई गैस के दाम दोगुने हो गये। दवाइयों के दाम दोगुने हो गये। खाद्य तेलों के दाम दोगुने हो गये। खाद्य पदार्थों के दाम दुगुने हो गये। सड़क परिवहन, रेल यात्रा के दाम दुगुने हो गये। सब्जियों के दाम दुगुने हुये। खेती के उर्वरकों के दाम बढ़े।

    प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि एक तरफ खाद्य पदार्थो के दाम बढ़े, दूसरी ओर किसानों की आमदनी घटी, खाद्य पदार्थो के दाम बढ़ने का फायदा बिचौलियों को मिला किसानों को नहीं। खाद्य तेलों के दाम पिछले दो वर्ष में लगभग दुगुने हुये है। देश में खाद्य तेल का सबसे बड़ा निर्माता मोदी के प्रिय गौतम अडानी है। खाद्य तेल के दामों को बढ़ने का सबसे ज्यादा फायदा अडानी को हो रहा। एक तरफ तो महंगाई बढ़ी, दूसरी तरफ मोदी सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन के कारण लोगों की कमाई घटी, रोजगार के संसाधन घटे, नौकरियां गयी, नोटबंदी जीएसटी से व्यापार-व्यवसाय तबाह हुये। कोरोना जैसी महामारी में मोदी सरकार की अकर्मण्यता के कारण इलाज और दवाइयों में लोगों की जमा पूंजी, जमीन जायदाद खत्म हो गया।  

    प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि मोदी सरकार के 8 साल भाजपा के झूठे वायदों और जनता को मुंह चिढ़ाने वाले साबित हुये। जनता से हर के खाते में 15 लाख देने के वायदों को जुमला बता दिया, हर साल 2 करोड़ युवाओं को नौकरी देने के वायदे पर मोदी सहित पूरी भाजपा की बोलती बंद है। अच्छे दिन लाने का वायदा जनता से किया था लेकिन अच्छे दिन आये देश के तीन नाम चीन उद्योपतियों के तीनों धन्ना सेठ हर दिन 1000 करोड़ कमाने लगे 35 रू. लीटर पेट्रोल देने का वायदा करने वाले मोदी पेट्रोल-डीजल पर 35 रू. एक्साइज वसूलने लगे थे। किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करने का वायदा करने वाले मोदी किसानों से खेती किसानी छीनने के लिये कानून बना दिये थे। देश में थोक महंगाई 30 सालों में सबसे ज्यादा 15.08 प्रतिशत हो गयी। खुदरा महंगाई मोदी के शासन काल में सबसे ज्यादा 7.8 प्रतिशत हो गयी। बेशर्म भाजपाई मोदी सरकार की इसी नाकामी का जश्न मनाने जा रहे।

    * शहर से पानी मांगने आए प्रधानमंत्री आवास मांगने आए और सड़क मांगने आए जनता को भाड़े का बताकर एमआईसी ने किया दुर्ग शहर के जनता का अपमान - भाजपा पार्षद दल

       दुर्ग। शौर्यपथ । दुर्ग कि दुर्दशा व जनसमस्याओं को लेकर राज्यसभा सांसद सरोज पाण्डेय कि नेतृत्व में नगर निगम के खिलाफ भाजपा द्वारा किए गए जबर्दस्त जनआंदोलन से घबराए कांग्रेसी महापौर व उनके परिषद के सदस्य अब अपनी खीझ निकालने सांसद सरोज पाण्डेय के विरुद्ध लगाए जा रहे अनर्गल आरोप पर नेता प्रतिपक्ष अजय वर्मा व भाजपा पार्षदों ने पलटवार करते हुए 30 माह से सत्ता में बैठकर जनभावनाओं व जन समस्याओं की अनदेखी करने वाले नेताओं से पूछा है कि वे हमारे नेता पर झुठा आरोप लगाने से पहले जनता को यह बताए कि आपने ढाई साल में ऐसा कौन सा नया कार्य किया है जिसे जनता को बता सके बल्कि आपने तो तात्कालीन महापौर सरोज पाण्डेय के कार्यकाल में निर्मित बड़ी बड़ी परियोजनाओं को तोड़कर अपना लेबल लगा रहे है, इसलिए कांग्रेसी धरातल में काम करे नही तो भाजपा फिर सड़क पर उतरकर सबक सिखाएगी।

             इस सम्बंध में नेता प्रतिपक्ष अजय वर्मा भाजपा पार्षद गायत्री साहू,चंद्रशेखर चन्द्राकर,देव नारायण चन्द्राकर, कांशीराम कोसरे,नरेंद्र बंजारे,नरेश तेजवानी,ओमप्रकाश सेन,मनीष साहू,अजित वैद्य,चमेली साहू, लीना दिनेश देवांगन, पुष्पा गुलाब वर्मा,शशि द्वारिका साहू,हेमा शर्मा,कुमारी राकेश भारती ने सयुक्त रूप से कहा कि साफ सफाई पानी व धूल गुब्बार जैसे कई बुनियादी समस्याओ से जूझ रहे हजारो नागरिको ने राज्यसभा सांसद सरोज पाण्डेय के नेतृत्व में निगम के लचर व्यवस्था व दुर्दशा के खिलाफ सड़क पर उतरकर अपनी गुस्सा का इजहार किया है तब से कांग्रेस विधायक अरुण वोरा ,महापौर धीरज बाकलीवाल सहित परिषद के अनेक कांग्रेसी नेताओ की निंद उड़ गई है, और घबराहट में अब उल जलूल व झुठा बयान देकर उन जनता को बाहरी व ढोकर लाने वाला बता रहे है जो नागरिक निगम व उनके नेताओ के दरवाजे मे अपनी छोटी छोटी समस्या के निराकरण के लिए चक्कर काटते थे भाजपा पार्षदो ने आगे कहा कि प्रदेश की भुपेश सरकार के गलत नीतियों के कारण जबसे निगम मे जनता द्वारा महापौर चुनने का अधिकार छीना गया तबसे दुर्ग शहर की दुर्गति प्रारम्भ हो गई थी उसमे भी विधायक अरुण वोरा द्वारा निगम के सारे अधिकार पर अवैध रूप से कब्जा जमाने व पिछलग्गू कमिश्नर के चलते सारे व्यवस्थाए चौपट हो गई है लोग 30 माह में सैकड़ो बार पानी के लिए तरसते रहे भीषण गर्मी आज भी जलसंकट व लो प्रेशर की समस्या बरकरार है औऱ बरसात से पहले होने वाली नाला नालियों की विशेष सफाई कार्य का अता पता नही चारो तरफ अव्यवस्था का आलम है लोगो को उनकी समस्या हल करने बार बार शिविर लगाकर गुमराह किया जा रहा अब तक एक भी नई योजनाओं नही लाया गया बल्कि दुर्ग को विकास के नाम पर प्रदेश से लेकर देशभर में पहचान दिलाने वाले तात्कालीन महापौर सरोज पाण्डेय के कार्यकाल में निर्मित गौरव पथ दादा दादी नाना नानी पार्क फ्लावर स्ट्रीट जैसे कई बड़े निर्मित उद्यानों व सड़को को तोड़कर उनमे अपना लेबल लगा दिया गया है लोग इस बात को अच्छी तरह से समझ रहे थे और जब उनका सब्र जवाब दे गया तो वे सभी 10 साल तक महापौर के रुप मे सशक्त नेतृत्व कर शहर का विकास करने वाले वाली राज्यसभा सांसद सरोज पाण्डेय के नेतृत्व में उठ खड़ी हुईं और इससे तिलमिलाए कांग्रेसी अब उसी जनता को बाहरी व ढोकर लाना बताकर उनका अपमान कर रही है जिसे कतई बर्दाश्त नही किया जाएगा भाजपा पार्षदो ने निगम महापौर व आयुक्त को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि राज्यसभा सांसद सरोज पाण्डेय के नेतृत्व में हजारों लोगों की ओर से दिए गए समस्या सूची में कार्यवाही नही किया गया तो फिर उग्र प्रदर्शन होगा।

     शौर्यपथ विशेष  
    राजनीती

    दुर्ग / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में युवा कांग्रेस के पदाधिकारियों के लिए मतों द्वारा चुनाव शुरू हो गए है . ऐसे में सालो बाद हो रहे चुनाव में एक बार फिर सक्रीय युवा कांग्रेसियों के मन में उत्साह है कि इस बार मेहनत और सक्रियता को महत्तव दिया गया है . जो जितना ज्यादा सक्रीय रहेगा वह ही विजय होगा . सक्रियता की बात करे तो दुर्ग शहर युवा कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए २३ उम्मीदवारों ने नामांकन भर दिया है जिनकी स्क्रूटनी होनी अभी बांकी है ४-5 मई तक स्थिति साफ़ हो जायेगी कि कौन कौन मैदान में जमे रहेगा . किन्तु वही दुर्ग में युवा कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए एक नाम ऐसा भी है जिसका विरोध तो बहुत ही ज्यादा  है किन्तु इतने विरोध के बाद भी वोरा गुट के युवा कांग्रेसियों का समर्थन ख़ास रूप से विधायक वोरा के पुत्र और राजनीती विरासत संभाले हुए संदीप वोरा का युवा कांग्रेस के दुर्ग अध्यक्ष पद के लिए आयुष शर्मा का समर्थन कई युवा कांग्रेसियों को रास नहीं आ रहा . चूँकि दुर्ग में संगठन में निष्क्रिय कार्यकर्ताओ की भरमार में भी पहली पसंद विधायक को समर्थन करने वालो की नजर आती है किन्तु संगठन की निष्क्रियता पिछले दिनों मुख्यमंत्री की सभा की खाली खुर्सियो ने खोल कर रख दी है . निष्क्रिय संगठन के बाद अब निष्क्रिय पूर्व अध्यक्ष को एक बार फिर युवा कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की होड़ में युवा कांग्रेसियों के बहुत बड़े समूह को वोरा गुट ने पहले ही नाराज कर दिया है जिसका परिणाम नामांकन के दो दर्ज़न के करीब फ़ार्म ही बता रहे है .
      कहते है अगर सचीन तेंदुलकर को गाना गाने कह दिया जाए तो उनके बेसुरे राग को लोग देखेंगे और सुनेंगे जरुर किन्तु सिर्फ मनोरंजन की दृष्टी से सचीन अच्छा क्रिकेट खेल सकते है सोनु निगम अच्छा गाना गा सकते है . इंसान सब अच्छे लेकिन सभी में अलग अलग गुण होते है उन्हें उनके सामर्थ्य के हिसाब से कार्य क्षेत्र में ही सफलता मिलती है अन्य क्षेत्र में सिर्फ हंसी का पात्र ही बन सकते है .
      ऐसे ही हाल दुर्ग युवा कांग्रेस का है . अगर व्यक्तित्व की बात करे तो आयुष शर्मा जैसा व्यक्तिव व्यापारिक दृष्टी कोण  से अति उत्तम है किन्तु राजनीती में शून्य के बराबर बावजूद इसके एक गुनी व्यक्ति को उनके क्षेत्र के बाहर के कार्य की जिम्मेदारी देकर सिर्फ मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा सकता है .
      वही सक्रियता के मामले में अन्य उम्मीदवारों में अहमद  चौहान की बात करे  तो सालो से राजनीती से जुड़े होने के कारण एवं पारिवारिक पृष्ठ भूमि में राजनीती होने के साथ साथ संगठन के बेहतरीन रणनीतिकार राजेंद्र साहू के साथ सालो से राजनीति करने के कारण उनका युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओ में एक अलग पहचान है .वही सक्रियता की बात करे तो अहमद चौहान द्वारा पाटन क्षेत्र , अहिवारा क्षेत्र सहित स्थानीय चुनावों में भी संगठन की जिम्मेदारियों को निभाने का लम्बा अनुभव है . ऐसे में युवा कांग्रेस संगठन में वर्तमान समय में तुलनात्मक दृष्टी से और राजनितिक क्षेत्र में चर्चा है कि मुकाबला भले ही सामने कुछ अलग दिख रहा हो किन्तु परदे के पीछे एक नया ही राजनितिक पहलु सामने आ रहा है जिसके अनुसार दुर्ग शहर के युवा कांग्रेसी अब निष्क्रियता को दरकिनार करने का मन बना चुके है .
       ऐसे में देखना होगा कि अंतिम समय में क्या निर्णय होता है . वैसे तो अन्य दावेदारों की भी लम्बी फौज है जिसमे सोनू साहू जैसे उम्मीदवार भी है जो देवेन्द्र यादव के ख़ास समर्थक होने के साथ विगत सालो से सक्रियता के मामले में पूर्व प्रदेश महासचिव संदीप वोरा से भी कई गुना आगे है एवं दुर्ग के छात्रों  के लिए कई आन्दोलन कर चुके है वही एक समय संदीप वोरा के ख़ास समर्थक मोहित वाल्दे भी मैदान पर उतर चुके है . इन सबमे अहमद चौहान को अगर राजेंद्र साहू का साथ मिलता है तो दूसरी तरफ दुर्ग में युवाओं में ख़ास पकड़ रखने वाले जयंत देशमुख जो अहमद चौहान के करीबी है साथ मिलने से जंग एक तरफ़ा हो जायेगी . किन्तु कहते है ना कि राजनीती में रोज स्थिति बदलती रहती है . अब सभी को इंतज़ार है अंतिम लिस्ट का ....

    दुर्ग / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार द्वारा सार्वजनिक एवं निजी कार्यक्रमों के आयोजन के अनुमति के लिए जारी किए गए नए नियम को भाजपा ने काला कानून बताते हुए उसे मिनी एमरजेंसी की संज्ञा दी है। जिसके विरोध में भाजपा ने सड़क की लड़ाई लड़ने का ऐलान किया है। इस कथित मिनी एमरजेंसी को वापस लेने भाजपा द्वारा राज्य सरकार को 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया गया, साथ ही चेतावनी भरे लहेजे में कहा गया है कि काला कानून वापस नहीं लिया गया, तो भाजपा पूरे प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों में 16 मई को धरना-प्रदर्शन कर जेल भरो आंदोलन करेगी। राज्य सरकार द्वारा लोकतंत्र के अधिकारों के हनन के खिलाफ आंदोलन में भाजपा ने कार्यकर्ताओं के अलावा आम जनता से शामिल होने की अपील की है। यह बातें छत्तीसगढ़ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने रविवार को दुर्ग भाजपा कार्यालय में मीडिया से चर्चा में कही। इस दौरान राज्यसभा सांसद सुश्री सरोज पांडेय, सांसद विजय बघेल, जिला भाजपा प्रभारी पूरेन्दर मिश्रा, पूर्व केबिनेट मंत्री रमशीला साहू, पूर्व संसदीय भारत- लाभचंद बाफना, प्रदेश भाजपा - मंत्री उषा टावरी, पूर्व महापौर चंद्रिका चंद्राकर प्रदेश महिला मोर्चा सदस्य माया बेलचंदन, जिला भाजपा महामंत्री ललित चंद्राकर, नटवर ताम्रकार, जिला भाजपा मीडिया प्रभारी केएस चौहान एवं अन्य भाजपा नेता मौजूद थे।

    चर्चा में छत्तीसगढ़ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य के भूपेश बघेल सरकार ने अपने - कार्यकाल के सवा तीन साल पूरे कर लिए है, लेकिन अब ■ तक राज्य सरकार द्वारा अपने ■ चुनावी घोषणा पत्र के वादों को पूरा नहीं किया गया है।
     जिनमें शराबबंदी, बेरोजगारी भत्ता, नियमितिकरण एवं अन्य । घोषणाएं शामिल है। जिससे लोगों में आक्रोश है। यह ■ आक्रोश राज्य सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन के रुप में नजर आ रहा है। राज्य सरकार लोगों के साथ न्याय करने के बजाय उल्टा उनके ■ लोकतंत्र के अधिकारों के हनन पर उतर आई है। इसका बड़ा प्रमाण राज्य सरकार द्वारा - सार्वजनिक व निजी कार्यक्रमों ■ के आयोजन के अनुमति के
    लिए जारी किए गए नए नियम है। श्री साय ने नए नियमों को काला कानून बताते हुए कहा ■ कि यह मिनी एमेरेंजेसी के
    समान है। इन नए नियम के । तहत आयोजनों की अनुमति के लिए 15 बिंदु का आवेदन देना होगा। 19 कंडिका का पालन करना होगा। इन नियमों का पालन करना किसी भी राजनीतिक, धार्मिक व सामाजिक संगठनों के लिए संभव नहीं हो पाएगा। जिससे आयोजन की अनुमति नहीं मिल पाएगी लेकिन भाजपा द्वारा राज्य सरकार के इस काले कानून को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भाजपा द्वारा राज्य सरकार को काले कानून को वापस लेने के लिए 15 दिनों का समय दिया गया है। राज्यसभा सांसद सरोज पांडेय ने एक सवाल के जवाब में कहा कि खैरागढ़ उप चुनाव में भाजपा हारी नहीं है। कांग्रेस ने चुनाव में धन बल व प्रलोभन का सहारा लिया। खैरागढ़-गंडई छुईखदान को जिला बनाने मुख्यमंत्री को तीन साल ज्ञान नहीं आया। प्रत्याशी घोषित होने के बाद उन्होने जिला बनाने के ब्रम्हास्त्र का उपयोग किया। जिला बनाने के इस प्रलोभन के बल पर ही कांग्रेस चुनाव जीतने में सफल रही, लेकिन भाजपा के जनाधार को कांग्रेस कम नहीं कर पाई। मीडिया से चर्चा के दौरान जिला भाजपा उपाध्यक्ष कांतिलाल बोथरा, अजय तिवारी, मंत्री दिनेश देवांगन, मनोज मिश्रा, गजेन्द्र यादव, दीपक चोपड़ा, सांसद प्रतिनिधि मनोज शर्मा, जिला भाजयुमो अध्यक्ष नितेश साहू, महामंत्री गौरव शर्मा, राजा महोबिया के अलावा अन्य कार्यकर्त्ता मौजूद थे।

     

        दुर्ग । शौर्यपथ । इन दिनों प्रदेश में युवा कांग्रेस के चुनाव की चर्चा राजनीतिक हलकों में बड़ी तेजी से चल रही है ऐसे में दुर्ग में युवा कांग्रेस के चुनाव के लिए सभी प्रत्याशी अपना दमखम लगा रहे हैं वही एक बार फिर वोरा गुट के समर्थक पूर्व अध्यक्ष आयुष शर्मा के लिए लॉबिंग कर रहे हैं युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में यह चर्चा है कि अगर आयुष शर्मा अध्यक्ष बनने के लिए क्वालीफाई कर लेते हैं तो आने वाले विधानसभा चुनाव में इसका खामियाजा वर्तमान विधायक अरुण को उठाना ही होगा दुर्ग कांग्रेस में अगर संगठन की बात करें तो दुर्ग कांग्रेस संगठन बिल्कुल निष्क्रिय स्थिति में संचालित हो रहा है ।

      कांग्रेस के जिलाध्यक्ष गया पटेल की सक्रियता का प्रमाण सभी ने प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के गत दिवस दुर्ग दौरे पर देख लिया जहां मुख्यमंत्री की सभा में 70 से 80 प्रतिशत खुर्सिया यह दिखाने के लिए काफी थे कि कांग्रेस संगठन प्रदेश के मुखिया के सभा के लिए भीड़ भी एकत्रित नहीं कर पाया वही युवा कांग्रेस अध्यक्ष का कार्यभार संभाल चुके आयुष शर्मा के बारे में भी दुर्ग के कांग्रेसी यह चर्चा करते हुए पाए जाते हैं कि ऐसे युवक कांग्रेस अध्यक्ष का क्या औचित्य है जिस कार्य का कोई अनुभव एवं सिर्फ चाटुकारिता के दम पर बिना अनुभव के इतने बड़े पद पर आसीन हो जाए वैसे भी आयुष शर्मा का पिछला कार्यकाल संगठन के लिए निष्क्रिय रहा सोशल मीडिया एवं अन्य समाचार पत्रों में आयुष शर्मा की संगठन के प्रति रुचि की अपेक्षा ठेकेदारी में व्यस्तता की बात चर्चा का विषय है । 

     बता दें कि आयुष शर्मा दूर विधायक अरुण वोरा के एवं महापौर धीरज बाकलीवाल के बेहद करीबी हैं एवं दूर संगठन में अध्यक्ष से लेकर अन्य पदों पर विधायक की अनुशंसा ही चलती है पूर्व में भी युवा कांग्रेस अध्यक्ष पद पर निष्क्रिय अध्यक्ष को बैठाकर सक्रिय कार्यकर्ताओं से दूरी बनाकर विधायक वोरा ने सभी सक्रिय कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को नाराज कर ही दिया था ।

       अब जबकि वर्तमान में युवा कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुनाव होने हैं ऐसे में एक बार फिर राजनीति में सक्रिय अरुण वोरा के पुत्र एवं युवा कांग्रेस में प्रदेश महासचिव के पद पर बैठे संदीप वोरा फिर से आयुष शर्मा को अध्यक्ष बनाने के लिए लॉबिंग शुरू कर दी है और इसके लिए दुर्ग के अन्य कद्दावर नेता से मुलाकात का दौर हो भी चुका है वही विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार दुर्ग शहर के अन्य वरिष्ठ कांग्रेसियों ने दो टूक में यह कह दिया है कि उनके द्वारा मिस की अध्यक्ष का कार्यभार संभाले आयुष शर्मा को एक बार फिर से युवा संगठन का जिम्मेदारी नहीं दिया जा सकता बावजूद इसके वोरा के द्वारा लगातार आयुष शर्मा के लिए लाबिंग की जा रही है और एक बार फिर चुनाव के बाद विभिन्न पदों में आसीन होने का लोकलुभावन वादा किया जा रहा है पूर्व में भी इस तरह की स्थिति में ऐसे कई लोकलुभावन वादे किए जा चुके हैं जिसे पुरा ना करने के बाद काफी विरोध का सामना विधायक वोरा को करना पड़ा।

    संगठन कि अगर बात करें तो दुर्ग जिले में पदाधिकारियों की जंबो सूची जारी हुई है वही युवा कांग्रेस में भी विभिन्न पदों के लिए जंबो सूची जारी तो की गई किंतु देखने में आया है कि तात्कालिक युवा कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा दुर्ग शहर में जितने पद वितरित किए गए हैं उतने व्यक्ति भी छोटे-मोटे कार्यक्रमों में उपस्थित नहीं होते कई बार तो ऐसा देखने में भी आया है कि दुर्ग शहर में अगर प्रदेश का कोई मंत्री आता है तो ऐसे समय में भी युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता एवं युवा कांग्रेस अध्यक्ष नदारद रहते हैं युवा कांग्रेस अध्यक्ष सिर्फ विधायक के इर्द गिर्द ही नजर आए संगठन और सक्रियता के मामले में शून्य ही रहे ।  ऐसे में एक बार फिर से सक्रिय कार्यकर्ता एवं युवा कांग्रेसी के बीच में सुगबुगाहट है कि अगर इस बार भी अध्यक्ष या ने महत्वपूर्ण पदों के लिए आयुष शर्मा जैसे निष्क्रिय व्यक्तियों को जिन्हें संगठन चलाने का जरा भी अनुभव नहीं है जो विधायक और महापौर के करीबी होने का फायदा उठाकर सिर्फ ठेकेदारी में अपना ध्यान केंद्रित करते हैं ऐसे कार्यकर्ता को अगर महत्वपूर्ण पद दिलाने की कोशिश की जाती है तो आने वाले विधानसभा चुनाव में विधायक गौरव को कार्यकर्ता तो मिलेंगे किंतु ऐसे ही कार्यकर्ता मिलेंगे और ऐसा ही कार्य होगा जिस प्रकार युवा कांग्रेस अध्यक्ष आयुष शर्मा का कार्यकाल तात्पर्य साफ है कि अगर चुनाव में युवा कांग्रेस के सकरी कार्यकर्ताओं को मौका नहीं मिला तो यह सक्रिय कार्यकर्ता विधानसभा चुनाव में निष्क्रिय हो जाएंगे।

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