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May 26, 2026
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नरेन्द्र भवानी की रिपोर्ट -
जगदलपुर / शौर्यपथ / पुलिस थाना कोतवाली में प्रार्थिया उपस्थित आकर रिपोर्ट दर्ज करापी कि घटना दिनांक 24.04.2020 को हेमराज सिंह राठौर के नाम के व्यक्ति द्वारा सोशल मीडिया पर महिलाओं के बारे में अश्लील टिप्पणी एवं फोटो सोशल मीडिया फेसबुक पर पोस्ट करने की रिपोर्ट पर अपराध कर्मा-194/2020 भारा 292,509-ख, भावयि0, 67 आई0टी0 एक्ट कायम कर विवेचना में लिया
जिस पर पुलिस अधीक्षक दीपक झा व अति0 पुलिस अधीक्षक ओमप्रकाश शर्मा के मार्गदर्शन एवं नगर पुलिस अधीक्षक हेमसागर सिदार के पर्यवेक्षण में धाना प्रभारी कोतवाली निरीक्षक एमन साहू के नेतृत्व में उपनिरीक्षक अमित सिदार, संजय वटूटी, आरक्ष्क प्रकाश नायक, डोमेन्द्र कुमार ठाकुर, नकुल नुरेटी व कृष्णा कुमार गावडे सायचर सेल के द्वारा चटना दिनांक से फरार आरोपी का लगातार पता तलाश किया जा था। जिस दौरान आरोपी के मोबाईल लोकेशन के आधार पर आरोपी का लोकेशन जिला-गोरेल मिला .

नरेंद्र भवानी की रिपोर्ट जगदलपुर से - 

जगदलपुर / शौर्यपथ / अपने किये वादे के अनुसार अमित जोगी महिला दिवस के दिन सेमली गाँव पहुंचे व पीड़ित परिवार से मुलाकात की . अमित जोगी ने का ग्राउंड ज़ीरो में जा कर अधिकारिक्क रूप से कहा कि  “आज अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन जिस प्रकार से सरकार ने बस्तर के कोने-कोने से चलकर आ रही बहनों और बेटियों को बलपूर्वक रोका, उस से यही लगता है कि भूपेश सरकार द्वारा चलाया जा रहा लोन वरटू (घर वापसी) अभियान दूसरा सलवा जुडुम सिद्ध होगा। जिस सरकार ने जेल में झूठे नक्सली प्रकरणों में बंद बस्तरियों को रिहा करने का वादा किया था, आज वही सरकार बस्तर की निर्दोष बेटियों को एंकाउंटर की धमकी देके खुद को नक्सली बताके आत्मसमर्पण करने को प्रताड़ित करती है। जहाँ सलवा जुडुम ने अप्रशिक्षित बच्चों के हाथ में बंदूक़ पकड़ा के SPO पैदा किए और पूरे बस्तर को रणभूमि में बदल डाला, वहाँ अब लोन वरटू के ख़तरनाक खेल के चलते आत्मसमर्पण की जगह पुलिस हिरासत में आत्महत्याएँ होने लगी है। आत्मसमर्पण होना चाहिए लेकिन आत्महत्या की क़ीमत पर नहीं। इस पूरे मामले की न्यायिक जाँच होनी चाहिए।”

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2021 के अवसर पर 08 मार्च को धमतरी पुलिस द्वारा *'अभिव्यक्ति'* जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर महिलाओं को कानून में प्रदत्त अधिकारों व योजनाओं के संबंध में जानकारी दी जावेगी।

              पुलिस अधीक्षक श्री बी.पी. राजभानू के निर्देश पर दिनांक 08 मार्च 2021 से 14 मार्च 2021 तक 07 दिवसीय महिला जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किए जाने हेतु कार्य योजना तैयार की गई है, जिसके आधार पर प्रत्येक दिवस में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उक्त कार्यक्रम का शुभारंभ आज रक्षित केंद्र धमतरी में संध्या 4:30 बजे किया गया जिसमें प्रसिद्धि प्राप्त जिले की महिलाओं को सम्मानित करते हुए प्रतिदिन विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

*आप मन के सुरक्षा, आपके हाथ, धमतरी पुलिस आप मन के साथ।*

       *'अभिव्यक्ति'* जागरूकता कार्यक्रम के दौरान महिलाओं, बच्चियों को उनकी सुरक्षा,  कानून में प्रदत्त अधिकारों के प्रति सजगता, शिक्षा का महत्व, कुरीतियों एवं अंधविश्वासों के प्रति सजगता, सुरक्षा हेतु प्रदत्त संसाधानों के बारे में जानकारी दी जाएगी।

*मैं सशक्त हूँ....मेरी शक्ति तुमसे है।।*
        यह महज एक शब्द नहीं है, इसमें छुपी हुई है भावनाएं। भावनाएं उन मातृ शक्तियों के लिए जिन्होंने अपनी बच्चियों को ऐसी परवरिश, संस्कार, योग्यता दिखाने का अवसर सहयोग एवं ऐसी शक्ति दी, जिससे वह आगे बढ़कर अग्रणी पंक्ति में खड़ी हैं और समाज सेवा के साथ-साथ विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर अपनी दृढ़ इच्छा-शक्ति से सुशोभित हैं।इन्हीं भावनाओं का सम्मान करते हुए धमतरी पुलिस ऐसी शक्ति को नमन करता है, जो प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से उन महिला पुलिस कर्मियों के साथ जुड़ी हुई है जो उन्हें कर्तव्यों के निर्वहन में सहयोग करती है। इन्हीं मातृ शक्तियों को नमन करते हुए धमतरी पुलिस की ओर से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित है।

जगदलपुर । शौर्यपथ । कल अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन मैं दंतेवाड़ा ज़िला के समेली गाँव स्वर्गीय सुश्री पांडे कवासी के परिजनों से मिलने जाऊँगा।सुश्री पांडे ने 20.2.21 को दंतेवाड़ा के कारली पुलिस मेस में आत्महत्या की।उसने अपने परिजनों को बताया कि उसपर पुलिस खुद को नक्सली बताके आत्मसमर्पण करने के लिए दबाव बना रही थी।अगर वो और उसकी सहेली ऐसा नहीं करते तो उनका एंकाउंटर करने की धमकी भी दी गई।स्वाभाविक रूप से पुलिस नहीं चाहती कि मैं वहाँ जाऊँ।इसलिए उन्होंने मुझे ‘सुरक्षा न देने’ का पत्र अभी भेजा है।उनको मालूम होना चाहिए कि मैंने उनसे न तो सुरक्षा माँगी है और न ही वहाँ जाने की अनुमति।सुरक्षा देना या न देना उनके ऊपर है लेकिन मैं समेली जाऊँगा और सुश्री पांडे के परिवार से मिलूँगा।अगर मैं ऐसा नहीं करता तो मेरी अंतरात्मा कभी मुझे माफ़ नहीं करेगी। अमित जोगी अध्यक्ष- जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) https://www.facebook.com/533560906781120/posts/2120411434762718/

बलौदाबाजार / शौर्यपथ / सामाजिक, प्रशासनिक और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्यरत रहते हुए कई ऐसी महिलाएं हैं जो अपने कार्यक्षेत्र के कर्तव्यों के साथ-साथ सामाजिक दायित्वों और महिलाओं के संपूर्ण विकास के लिए भी अथक प्रयास कर रही हैं। बलौदाबाजार जिले की इन संघर्षशील महिलाओं की वजह से जिले के विभिन्न क्षेत्रों की महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और सामाजिक स्तर में बदलाव आया है। मगर महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्यगत विकास के लिए प्रयासरत महिलाओं का कहना है “महिलाओं के स्तर में पहले की अपेक्षा उन्नति हुई है परंतु आज भी उनकी उन्नति और विकास के लिए महिलाओं के प्रति सहानुभूति, विश्वास और सामाजिक चेतना जगाने की जरूरत है।“
अपने हक और अधिकार के लिए जागने की जरूरत- वर्ष 2018 से अब तक जिला सलाहकार मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के रूप में डॉ. सुजाता पांडेय अपनी सेवाएं दे रही हैं। उनके अथक प्रयास और सराहनीय कार्य की वजह से जिले में जहां महिला एवं किशोरी स्वास्थ्य और माहवारी स्वच्छता के प्रति लोगों की मानसिकता बदली है परंतु जो नहीं बदला वह है मानसिक रोगियों के प्रति धारणाएँ और उपेक्षा। सुजाता कहती हैं “जिला स्तर पर शासन की पहल पर मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम से जुड़ने के बाद मानसिक स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ मानसिक रोगियों को चिकित्सकीय परामर्श और काउंसिलिंग देने का कार्य कर रही हूं परंतु मानसिक रोगियों की पहचान, देखभाल और ऐसे लोगों के प्रति सामाजिक चेतना जगाने की और जरूरत हैI“
सुजाता का कहना है मानसिक रोगियों की पहचान करना, उन्हें इलाज के लिए प्रेरित करना और उनकी काउंसिलिंग कर उनके मन में आने वाले विचारों को लोगों के समक्ष खुलकर रखने के लिए प्रेरित करना सबसे मुश्किल कार्य है। जिला अधिकारियों के सहयोग से काफी हद तक मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता का कार्य हो या तंबाकू सेवन के दुष्प्रभाव को जन-जन तक पहुंचाने का, दोनों ही कार्य बेहतर तरीके से कार्यान्वित हो रहा है परंतु वर्तमान में महिलाओं को खुद की इच्छा और खुद की पहचान बनाने और अपने हक एवं अधिकार के लिए खुद जागरूक होने की जरूरत हैI
समाज के हर व्यक्ति की भलाई और तरक्की हो - समाज के हर व्यक्ति की भलाई और तरक्की की चाहत रखते हुए सविता दास (अंबुजा सिमेंट प्रोजेक्ट एज्युकेटिव छत्तीसगढ़ ) के रूप में कार्य कर रही हैं। इन्होंने महिला स्वयं सहायता समूह, महिला उत्थान और रोजगार कार्यक्रम के माध्यम से समुदाय में कई बदलाव करने की कोशिश की है। सबसे बड़ा बदलाव तो उन्होंने महिलाओं में आत्मविश्वास जगाकर बेहतर और आत्मनिर्भर जीवन जीने के प्रति ललक जगाकर किया है।
सविता कहती हैं “छत्तीसगढ़ की महिलाएं बहुत मेहनती हैं, मगर यहां महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी उनके परिवार के सदस्यों ( पति एवं अन्य लोगों ) का शराब सेवन करने से आती है I” उन्होंने बताया समुदाय में नशा करने वालों की संख्या ज्यादा है इससे कई बार व्यक्ति तनावग्रस्त या फिर मानसिक रूप से अस्वस्थ्य हो जाता है। इन वजहों से घरेलू हिंसा, मारपीट और परिवार विखंडन जैसे मामले भी देखने को मिलते हैं। “ऐसे स्थिति में महिलाओं को समझाकर उन्हें आत्म निर्भर बनाना और परिवार में अपनी आर्थिक भागीदारी को सुनिश्चित कराना उनका मुख्य उद्देश्य है. उन्होंने बताया आज जिले में 330 महिला स्वंय सहायता समूह है और 40 वोलेंटियर्स हैं जो महिलाओं को सशक्त और आर्थिक विकास कराने में सहायक हैं. सविता की इच्छा महिलाओं को अपनी योग्यता की पहचान कराकर उन्हें आर्थिक सबलता प्रदान करने की हैं और वह इस कार्य में अग्रसर हैंI
महिलाएं प्रेम और सम्मान देंगी तभी महिलाओं को सम्मान मिलेगा - डॉ. निशा झा ( रिटायर्स शिक्षिका एवं सामाजिक कार्यकर्ता) कहती हैं समुदाय में पहले और आज में काफी फर्क आया है। डॉ. निशा वर्तमान में महिलाओं , किशोर-किशोरियों को मोटीवेशन, ध्यान और योगाभ्यास के जरिए उनकी समस्याओं के निदान एवं सामाजिक स्तर पर उनके विकास के लिए मदद करने में अग्रसर हैं। डॉ. निशा कहती हैं “हमारे क्षेत्र में शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव हो रहे हैं। इतना ही नहीं महिला हिंसा निदान, मदिरा निषेध, बालिका शिक्षा, बालिका स्वास्थ्य एवं मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता आई है। कोरोनावायरस संक्रमण के दौरान लॉक़डाउन में मैं बिलकुल अकेली थी, मेरे पति भी दूर थे। उस दौरान मैं अवसाद में जरूर आई मगर मानसिक स्वास्थ्य सलाहकार की मदद और लगातार ध्यान एवं योगाभ्यास से मुझे काफी मदद मिली। साथ ही आसपास के लोगों में भी काफी डर और तनाव था। मैंने सकारात्मकता रखा और औरों को भी सकारात्मक रहने, की सलाह दी। साथ ही सावधानियां रखते हुए स्वास्थ्य का ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। मुझे याद है जब एक महिला ने हमारी सलाह मानकर अपने पति (नशे की लत से बीमार और मानसिक रोगी ) को स्थानीय स्वास्थ्य केन्द्र लाकर इलाज कराया था। इसे मैं ताउम्र नहीं भूल सकती हूं। महिलाएं प्रेम और सम्मान देंगी तभी महिलाओं को सम्मान मिलेगा I परंतु महिलाओं के लिए समुदाय की सोच में और बदलाव लाने की जरूरत है। “

रायपुर / शौर्यपथ / विस् अध्यक्ष डॉ महंत ने कहा कि, विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के प्रति सम्मान, प्रशंसा और प्यार प्रकट करते हुए इस दिन को महिलाओं के आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियों के उपलक्ष्य में उत्सव के तौर पर मनाया जाता है।
विस् अध्यक्ष डॉ महंत ने कहा कि, भारतीय संस्कृति में नारी के सम्मान को महत्व दिया गया है, हमारे संस्कृत में एक श्लोक है - "यस्य पूज्यते नार्यस्तु तत्र रमन्ते देवताः" अर्थात जहाँ नारी की पूजा होती है, वहाँ देवता निवास करते हैं । विस् अध्यक्ष डॉ महंत ने कहा कि, हमें प्रत्येक महिला का सम्मान करना चाहिए, अवहेलना, भ्रूण हत्या और नारी की अहमियत न समझने के परिणाम स्वरूप महिलाओं की संख्या, पुरुषों के मुकाबले आधी भी नहीं बची है। इंसान को यह नहीं भूलना चाहिए, कि नारी द्वारा जन्म दिए जाने पर ही वह दुनिया में अस्तित्व बना पाया है और यहां तक पहुंचा है। उसे ठुकराना या अपमान करना सही नहीं है। भारतीय संस्कृति में महिलाओं को देवी, दुर्गा व लक्ष्मी आदि का यथोचित सम्मान दिया गया है अत: उसे उचित सम्मान दिया ही जाना चाहिए।
विस् अध्यक्ष डॉ महंत ने कहा कि, भारत में नारियों को मौलिक अधिकार, मतदान का अधिकार और शिक्षा का अधिकार तो प्राप्त है लेकिन अभी भी स्त्रियां अभावों में जिंदगी बीता रही हैं। हमारे समाज में धीरे-धीरे हालात बदल रहे हैं। आज कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं है जो नारियों से अछूता हो। आज चाहे फिल्म हो, इंजीनियरिंग हो या मेडिकल, उच्च शिक्षा हो या प्रबंधन हर क्षेत्र में स्त्रियां पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। अब बेटे और बेटी के बीच फर्क घटा है लेकिन अभी भी यह कुछ वर्ग तक ही सीमित है। नारियों के समक्ष खुला आसमान और विशाल धरती है जिस पर वह अनंतकाल तक अपना परचम लहरा सकती है।

महात्मा गांधी नरेगा से खोदी गई निजी डबरी से मिल रहा भरपूर पानी, खेती बाड़ी के साथ कर रही हैं मछलीपालन का कार्य

जांजगीर-चांपा / शौर्यपथ / उम्र के जिस पड़ाव में बसंती बाई हैं उस पड़ाव पर कई महिलाएं अपने घरों में आराम से रहती है, लेकिन वे उन महिलाओं में से हैं, जो कुछ अलग करने का जज्बा रखती हैं। 68 वर्षीय बसंती बाई को यही जज्बा उन्हें अन्य महिलाओं से अलग करता है। वे जानती हैं कि महिलाएं समाज की आधार होती हैं- हम महिला दिवस के मौके पर उनकी मेहनत, उनकी लगन और उनके आत्मविश्वास को सलाम करते हैं।
हम बात कर रहे हैं पामगढ़ विकासखण्ड की ग्राम पंचायत हिर्री की रहने वाली श्रीमती बसंती बाई की। वे बताती हैं कि 6 साल पहले उनके पति स्व. श्री नारायण प्रसाद खन्ना की मृत्यु होने पर उनके परिवार का भार उनके ऊपर आ गया था। 3 बेटों की जिम्मेदारी के साथ ही उन्हें अपनी खेती-किसानी भी देखनी थी। उन्होंने हौंसला बनाए रखा और अपने परिवार के साथ आत्मविश्वास के साथ खड़ी रही। यही शक्ति थी कि उन्होंने अपने खेतों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के माध्यम से निजी डबरी निर्माण कराने की ठानी। उनके इस आत्मबल का भरपूर साथ दिया मनरेगा ने। निजी डबरी निर्माण में उनके परिवार ने भी कार्य किया। यहीं कार्य को लेकर उनके परिवार की एकता थी कि जल्द ही उनके खेत में निजी डबरी का निर्माण हो गया। जिसके एक ओर उन्हें मनरेगा से मजदूरी प्राप्त हुई तो दूसरी ओर बारिश का पानी संरक्षित करने के लिए निजी डबरी। श्रीमती बसंती बाई कहती हैं कि खेत बिना पानी के ही खाली पड़े रहते थे तो उनके मन में एक अजीब सी ठीस बनी रहती थी, पर कहते है कि जहां चाह होती है वहीं पर राह बन जाती है। उन्होंने भी अपनी राह को बनाया और महात्मा गांधी नरेगा के माध्यम से हितग्राहीमूलक कार्य निजी डबरी को अपने खेत में वर्ष 2018 में पूर्ण कराया। पहली ही बारिश में डबरी में पानी भर गया, जिससे उन्होंने साल भर अपने खेतों में धान की फसल को पानी दिया। इसके साथ ही उन्होंने डबरी के किनारे पर सब्जी-बाड़ी एवं डबरी में मछली पालन का काम शुरू किया। उनकी कड़ी मेहनत का नतीजा उन्हें आर्थिक मजबूती के रूप से मिला। आज सालाना वे 50 से 60 हजार रूपए की अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं, जिससे उनके परिवार का पालन-पोषण बेहतर हो रहा है।

दुर्ग / शौर्यपथ / महापौर धीरज बाकलीवाल एवं आयुक्त आयुक्त हरेश मंडावी ने स्वास्थ्य सुरक्षा और स्वच्छता पर उत्कृष्ट कार्य करने वाली स्वच्छता दीदियों का सम्मान कर उन्हें पुरस्कृत किए तथा कहा कि कोरोना काल में आप सभी ने नगर निगम दुर्ग को पूरा सहयोग दिया है अपने स्वास्थ्य की परवाह किए बिना निरंतर कार्य किए इसके लिए हम धन्यवाद देते हैं और अपेक्षा करते हैं की स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 में नगर निगम दुर्ग को अव्वल नंबर पर लाने भरपुर मेहनत करेंगे । इस दौरान वित्त प्रभारी दीपक साहू, विद्युत यांत्रिकी विभाग प्रभारी भोला महोबिया, स्वास्थ्य अधिकारी दुर्गेश गुप्ता, पीआईयू शेखर वर्मा, स्वच्छता निरीक्षक राजेंद्र सराटे, मेनसिंह मंडावी, दरोगा सुरेश भारती सफाई सुपरवाइजर एवं अन्य उपस्थित थे ।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष में स्वच्छता दीदियों का हुआ सम्मान....
नगर पालिक निगम दुर्ग द्वारा पुलगांव वार्ड, बोरसी हाट बाजार, रायपुर नाका,वायशेप ब्रिज के नीचे, रायपुर नाका बटालियन मैदान, धमधा नाका, सिकोला भाटा, और उरला वार्ड में स्थित जीरो वेस्ट सेंटरों में 20 से 25 स्वच्छता दीदियों द्वारा शहर से एकत्र कचरों का सेग्रीकेशन कर सूखा और गीला कचरा अलग किया जाता है । शहर में इस समय स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 प्रभाव शील है ऐसे समय में भी यह महिलाएं अपनी जिम्मेदारी को प्राथमिकता से निभा रहे हैं इन महिलाओं के द्वारा कोरोना काल में भी स्वास्थ्य सुरक्षा स्वच्छता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई थी । इस बात को ध्यान में रखते हुए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष में आज महापौर एवं आयुक्त द्वारा सभी स्वच्छता दीदियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उन्हें पुरस्कार भी प्रदान किए गए ।
स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत सफाई एवं व्यवस्थाओं का किया अवलोकन......
महापौर बाकलीवाल एवं आयुक्त मंडावी ने स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 के तहत छ.ग. लोक कला मार्ग की सफाई और सौंदर्यीकरण का निरीक्षण किया गया । इसके साथ ही उन्होंने सांई। व्दार के सामने बड़े नाला की सफाई और द्वार के बाजू ऊंट गार्डन का निरीक्षण कर सफाई कार्य व्यवस्थित करने का निर्देश दिए । इसके अलावा उन्होंने गंजपारा वार्ड भाजपा कार्यालय के पास स्थित सुलभ शौचालय, शिक्षक नगर वार्ड में शिक्षक नगर गार्डन, हरना बांधा मुक्तिधाम वहां स्थित सुलभ शौचालय, हरना बांधा तालाब की सफाई आदि का निरीक्षण किया गया । उन्होंने स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत उद्यानों के पास वाल राइटिंग कर पेंटिंग करने के निर्देश दिए । सुलभ और नालियों की बेहतर सफाई करने कहा । उन्होंने रायपुर नाका बटालियन जीरो वेस्ट सेंटर में बेलिंग मशीन की जानकारी ली गयी । तथा वहां एकत्र बंद पड़े रिक्शा कचरा गाड़ी को सुधरवाने के निर्देश दिए ।।

- ग्रामीण क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करने के लिए
ग्रामीण विकास मंत्री करेंगे सम्मानित
- कलेक्टर टोपश्वर वर्मा ने दी शुभकामनाएं
- समूह की महिलाओं ने अपनी मजबूत इच्छाशक्ति से महिला सशक्तिकरण की दिशा में बढ़ाए कदम, समाज में जागृति लाकर मिसाल प्रस्तुत की

राजनांदगांव / शौर्यपथ / अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर दीनदयाल अन्त्योदय योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, ग्रामीण आजीविका संभाग एमओआरडी द्वारा विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सम्मान समारोह में बेहतरीन कार्य करने के लिए राजनांदगांव जिले के ग्राम खुटेरी के जय माँ दुर्गा महिला स्वसहायता समूह को कल सम्मानित किया जाएगा। वर्चुअल मोड में आयोजित इस सम्मान समारोह में ग्रामीण विकास मंत्री भारत शासन श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, जय माँ दुर्गा स्वसहायता समूह की महिलाओं को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित करेंगे।
कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने जय माँ दुर्गा स्वसहायता समूह की महिलाओं को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि जय माँ दुर्गा स्वसहायता समूह की महिलाओं ने अपनी इच्छाशक्ति से न केवल आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ाए हैं, बल्कि समाज में जागृति लाने का कार्य कर मिसाल प्रस्तुत की है।
उल्लेखनीय है कि इस अवसर पर देश के 30 महिला स्वसहायता समूह तथा 10 ग्राम संगठन को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। जिनमें से राजनांदगांव जिले के जय माँ दुर्गा महिला स्वसहायता समूह को यह गौरव प्राप्त हुआ है। समूह की अध्यक्ष श्रीमती लोकेश्वर साहू हैं और सभी ने मिलकर रेडी टू ईट उत्पाद बनाने का कार्य शुरू किया। इसके लिए बैंक से, ग्राम संगठन से और सखी कलस्टर से ऋण लिया गया। समूह की महिलाओं ने 16 कुपोषित बच्चों को गोद लिया और वहीं उन्हें खिचड़ी, फल, दूध, मुर्रा लड्डू, चना एवं रेडी टू ईट से हलवा बनाकर खिलाया करते थे। जिनमें से 14 बच्चे अभी सुपोषित हो गए हैं। राजनांदगांव परियोजना ग्रामीण-1 के 8 समूहों ने मिलकर ग्राम भर्रेगंाव में 8 जोड़ों की शादी करवाई। वहीं आंगनबाडिय़ों में गर्भवती महिलाओं की गोदभराई एवं बच्चों के वजन त्यौहार में सक्रियता पूर्वक भाग लेते हैं। समूह की महिलाओं की गांव को ओडीएफ बनाने की दिशा में सक्रिय भागीदारी रही है। वे गांव में स्वच्छता, डबरी निर्माण एवं अन्य क्षेत्रों में कार्य कर रही हंै। स्वच्छ ग्राम बनाने के लिए स्वच्छता रैली भी समूह की महिलाओं द्वारा निकाली गई। मतदाता शिक्षा एवं मतदाता सहभागिता (स्वीप) तथा ग्राम के प्रत्येक मतदाता को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए समूह की महिलाओं द्वारा कठिन परिश्रम किया गया। समूह की महिलाओं द्वारा किशोरी बालिकाओं को माहवारी के समय सैनेटरी पैड का उपयोग करने के लिए इसके लाभ बताए गए। इसके साथ ही वे बच्चों की स्वच्छता की महत्ता के लिए भी जनसामान्य में जागरूकता ला रही हंै।
समूह में शामिल होने के पहले सभी महिलाएं कृषि एवं श्रम कार्यों से जुड़ी हुई थी। समूह से जुड़कर उनके व्यक्तित्व में आए व्यापक परिवर्तन को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। समूह की महिलाओं द्वारा बचत एवं वित्तीय लेन-देन में भागीदारी से उनकी आर्थिक स्थिति सशक्त हुई है। उन्होंने अपने समाज एवं परिवार में एक विशेष स्थान बनाया है और उनके पारिवारिक सदस्य तथा ग्रामवासी उनकी संभावनाओं पर विश्वास करते हैं। 15 दिन में वे रेडी टू ईट का निर्माण करती हैं और प्रति सदस्य 2 हजार रूपए की आय उन्हें प्राप्त होती है। इसके साथ ही वे विभिन्न आजीविका संबंधी गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं।

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