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राज्य सरकार ने 1000 एकड़ भूमि रक्षा मंत्रालय को थल सेना छावनी की स्थापना के लिए की हुई है आबंटित
बिलासाबाई केवटींन हवाई अड्डा अब सिविल एविएशन एवं थल सेना की विमानन संबंधित आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये उपलब्ध
राज्य में आर्मी छावनी की स्थापना से इलाके के समुचित विकास के साथ राज्य के युवाओं को सेना में सहजता से उपलब्ध होंगे अवसर
थल सेना छावनी की नक्सलवादी उग्रवाद के उन्मूलन की दिशा में होगी सहायक
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर बिलासपुर में थल सेना की लंबित छावनी की शीघ अतिशीघ्र स्थापना करने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय रक्षा मंत्री का ध्यान राज्य के विकास की दिशा में राज्य में सैन्य संस्थानों के विकास के प्रयास की ओर आकर्षित करते हुए लिखा है कि- राज्य ने लगभग 1000 एकड़ भूमि रक्षा मंत्रालय को बिलासपुर में थल सेना छावनी की स्थापना के लिए आबंटित की हुई है। इस थल सेना छावनी की स्थापना की प्रक्रिया लंबित है।
आरंभ में थल सेना छावनी की स्थापना के लिए इसके साथ हवाई पट्टी की आवश्यकताओं को बताया गया था। राज्य सरकार ने इस इलाके की विमानन आवश्यकताओं के दृष्टिगत. इस हवाई पट्टी का विस्तार कराकर आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर ली है। बिलासाबाई केवटींन हवाईअड्डा. बिलासपुर अब डीजीसीए द्वारा 3सी वीएफआर कैटगरी में मान्यता प्राप्त । अब ये हवाई पट्टी सिविल एविएशन एवं थल सेना की विमानन संबंधित आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये उपलब्ध है।
मुख्यमंत्री ने लिखा है कि आगामी एक मार्च से बिलासपुर से व्यवसायिक यात्री सेवाएँ आरंभ हो रही है। राज्य सरकार चक्रभाठा, बिलासपुर में थल सेना छावनी की स्थापना के लिए उत्सुक है। राज्य में आर्मी छावनी की स्थापना से न केवल इस इलाके के समुचित विकास में गति आएगी बल्कि थल सेना सेवा के अवसर राज्य के युवाओं को सहजता से उपलब्ध भी होंगे। थल सेना छावनी की राज्य में उपस्थिति मूलतः नक्सलवादी उग्रवाद के उन्मूलन की दिशा में सहायक होने की भी आशा है।
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा है कि थल सेना छावनी की स्थापना से राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार को होने वाले लाभों के दृष्टिगत, राज्य सरकार रक्षा मंत्रालय से इसकी स्थापना शीघ्रातिशीघ्र करने के लिए आग्रह करना चाहती है। इस दिशा में राज्य सरकार रक्षा मंत्रालय एवं थल सेना की अन्य संबंधित आवश्यकताओं पर भी विचार करने के लिए तैयार है। इस संदर्भ में रक्षा मंत्रालय के साथ कार्य करने के लिए राज्य सरकार तत्पर हैं एवं मैं आपसे सहयोग की आशा करता हूँ।
मुख्यमंत्री बघेल ने केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुण्डा को लिखा पत्र
वर्ष 2020-21 में न्यूनतम समर्थन मूल्य योजनांतर्गत लघु वनोपज संग्रहण में छत्तीसगढ़ राज्य देश में कुल संग्रहित मात्रा का 72.5 प्रतिशत संग्रहण कर प्रथम स्थान पर है
प्रधानमंत्री वन धन योजनांतर्गत 139 वन धन विकास केंद्र स्थापित कर 120 से अधिक हर्बल्स उत्पाद तैयार कर छत्तीसगढ़ हर्बल्स ब्रांड नाम से किया जा रहा है विक्रय
प्रस्तावों की स्वीकृति से आदिवासी-वनवासी परिवारों को मिलेगा और बेहतर लाभ
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुण्डा को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ राज्य के आदिवासियों के हित में लघु वनोपज आधारित विकास हेतु 234 करोड़ 18 लाख रूपए के पूर्व में प्रेषित प्रस्तावों को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में लिखा है कि - छत्तीसगढ़ राज्य में 44 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र वनाच्छादित है तथा 31.80 प्रतिशत जनसंख्या आदिवासी समुदाय के हैं। भारत शासन द्वारा संचालित न्यूनतम समर्थन मूल्य योजनांतर्गत 38 प्रकार के लघु वनोपज के साथ अन्य 14 प्रकार के लघु वनोपज का राज्य सरकार द्वारा निर्धारित दर पर क्रय किया जा रहा है। वर्ष 2020-21 में आज दिनांक तक लगभग 115 करोड़ रू. मूल्य के लघु वनोपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर क्रय किया गया है।
कोविड 19 के संकटकाल में सुदूर वनांचल के आदिवासी तथा अन्य संग्राहकों को रोजगार प्रदाय करने में इस योजना की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्ष 2020-21 में न्यूनतम समर्थन मूल्य योजनांतर्गत लघु वनोपज संग्रहण में छत्तीसगढ़ राज्य देश में कुल संग्रहित मात्रा का 72.5 प्रतिशत संग्रहण कर प्रथम स्थान पर है। इसी प्रकार राज्य में प्रधानमंत्री वन धन योजनांतर्गत 139 वन धन विकास केंद्र स्थापित कर 120 से अधिक हर्बल्स उत्पाद तैयार कर छत्तीसगढ़ हर्बल्स ब्रांड नाम से विक्रय किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को लिखा है कि - आपके नेतृत्व में संचालित उपरोक्त दोनों योजनाओं का राज्य द्वारा पूर्ण दक्षता से क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस प्रयास को आगे बढ़ाते हुए क्षेत्रवासियों को लघु वनोपज आधारित विकास का लाभ प्रदाय करने हेतु प्रस्ताव प्रेषित किए गए है, जिनमें न्यूनतम समर्थन मूल्य पर लघु वनोपज संग्रहण हेतु कार्यपूंजी के लिए 100 करोड़ रूपए का प्रस्ताव, न्यूनतम समर्थन मूल्य योजनांतर्गत वर्ष 2014-15 व 2015-16 में व्यापार में हुई हानि की प्रतिपूर्ति के लिए 21.91 करोड़ रूपए, लघु वनोपज आधारित कार्य हेतु अधोसंरचना विकास के लिए 46.50 करोड़ रूपए तथा कोविड-19 पेनडेमिक रिपोंस प्लान के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में अजीविका विकास के लिए 65.77 करोड़ रूपए के प्रस्ताव शामिल है। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री से इन प्रस्तावों को स्वीकृत कर शीघ्र राशि प्रदान करने का अनुरोध किया है।
वर्मी कंपोस्ट को भी रासायनिक खादों की तरह मिले सबसिडी, आकांक्षी जिलों की अवधारणा में सांस्कृतिक उत्थान भी शामिल हो
नीति आयोग गवर्निंग काउंसिल की बैठक में मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने दिए सुझाव
नगरनार इस्पात संयंत्र का विनिवेश न करने का अनुरोध
कार्गाें हब और निर्यात के लिए पोर्ट की सुविधा के लिए मिले मंजूरी
अतिशेष धान से एथेनॉल उत्पादन की मांगी अनुमति
केन्द्रीय पूल में छत्तीसगढ़ से 60 लाख मीट्रिक टन चावल लेने का किया आग्रह
बोधघाट बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना के लिए मांगा केन्द्र से सहयोग
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की छठवीं बैठक में प्रदेश में उद्योगों, कृषि क्षेत्र के विकास, अधोसंरचना विकास, बस्तर अंचल में सिंचाई सुविधा बढ़ाने, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास जैसे राज्य हित के अनेक विषयों पर राज्य सरकार की योजनाओं एवं नीतियों की जानकारी देते हुए छत्तीसगढ़ को अतिरिक्त आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराने का आग्रह प्रधानमंत्री से किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ के आकांक्षी जिलों द्वारा विकास के सभी मापदण्डों पर किए गए उत्कृष्ट प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए सुझाव दिया कि आकांक्षी जिलों की अवधारणा में सांस्कृतिक उत्थान के बिन्दु को भी यथोचित महत्व एवं स्थान दिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने वर्मी कम्पोस्ट खाद में भी रासायनिक उर्वरकों की भांति सबसिडी दिए जाने का सुझाव रखा। उन्होंने कहा कि नीति आयोग ने डेल्टा रैंकिंग के माध्यम से छत्तीसगढ़ के आकांक्षी जिलों में हुए नवाचारों की सराहना की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ वनाच्छादित, आदिवासी बहुल और खनिज धारित प्रदेश है यहां औद्योगिक विकास के लिए विशेष पैकेज की अपेक्षा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खनिज कोयले के वृहद भण्डार होने के बावजूद छत्तीसगढ़ कोल ब्लॉक से वंचित है। अतः छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक उपक्रम इकाई के लिए कोल ब्लॉक आबंटित किया जाए। वर्ष 2014 के बाद खनिजों की रॉयल्टी दरों में वृद्धि नहीं होने के कारण राज्य शासन को अपूरणीय क्षति हो रही है। अतः शीघ्र रॉयल्टी दरों में संशोधन किया जाए। मुख्यमंत्री ने बैठक में बस्तर के नगरनार इस्पात संयंत्र का विनिवेश नहीं करने का भी आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में इस संबंध में शासकीय संकल्प भी पारित किया गया है।
कार्गाें हब और निर्यात के लिए पोर्ट की सुविधा की मंजूरी का आग्रह
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में उद्योगों के विकास और निर्यात का बढ़ावा देने के लिए रायपुर में कार्गाें हब स्थापित करने की मंजूरी देने और निर्यात के लिए पोर्ट की सुविधा उपलब्ध कराने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ लैण्डलॉक्ड राज्यों में शामिल है, इसलिए छत्तीसगढ़ को परिवहन लागत की सुगमता हेतु औद्योगिक गतिविधियों के लिए अंतरदेशीय परिवहन अनुदान दिया जाए, ताकि छत्तीसगढ़ से निर्यातक एवं कृषि आधारित उद्योगों के विकास को गति मिल सके। मुख्यमंत्री बघेल ने बैठक में बताया कि राज्य सरकार द्वारा कोदो-कुटकी को समर्थन मूल्य पर खरीदने का निर्णय लिया गया है। कोदो-कुटकी की विदेशों में भी बड़ी मांग है। इनके निर्यात की सुविधा उपलब्ध होने से इसका फायदा प्रदेश के आदिवासी किसानों को होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ इज आफ डूईंग बिजनेस के मापदण्डों में देश के अग्रणी छह राज्यों में शामिल है।
राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति में खनिज संसाधनों एवं कृषि तथा वनोपजों में वेल्यूएडिशन को बढ़ावा दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में लाख उत्पादन और मछली पालन को खेती का दर्जा दिया गया है। इस्पात उद्योग को कोरोना काल में रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराई गई। जिससे छत्तीसगढ़ इस्पात उत्पादन में अग्रणी रहा। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षाें में 56 हजार करोड़ रूपए के पूंजी निवेश के लिए 154 एमओयू किए गए।
अतिशेष धान से एथेनॉल उत्पादन की अनुमति देने की मांग
मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि राज्य को अतिशेष धान से एथेनॉल उत्पादन की अनुमति दी जाए। इससे देश की विदेशी मुद्रा में बचत होगी, किसानों को उनकी उपज का अच्छा दाम मिलेगा और रोजगार के अवसर बढेंगे। उन्होंने कहा कि चावल के स्थान पर धान से एथेनॉल की अनुमति मिलने पर परिवहन और मिलिंग पर होने वाला खर्च बचेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पहली बार केन्द्र सरकार द्वारा एथेनॉल की दर 54.89 रूपए प्रति लीटर तय की गई है जिसे और अधिक बढ़ाया जाना चाहिए। प्रदेश में गन्ने से एथेनॉल उत्पादन के लिए एमओयू हो चुका है।
मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय पूल में छत्तीसगढ़ से 60 लाख मीट्रिक टन चावल लेने का किया आग्रह
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि इस वर्ष छत्तीसगढ़ में 20 लाख 58 हजार किसानों से 92 लाख मीट्रिक टन धान की समर्थन मूल्य पर खरीदी की गई है। किसानों को इसके लिए 17 हजार 322 करोड़ रूपए की राशि का भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केन्द्र द्वारा पूर्व में केन्द्रीय पूल में छत्तीसगढ़ से 60 लाख मीट्रिक टन चावल लेने की घोषणा की गई थी। लेकिन इसमें 16 लाख टन की कटौती कर दी गई। एफसीआई ने चावल देने की अनुमति अक्टूबर, नवम्बर में ही मिल जाती थी। इस सीजन में जनवरी माह में 24 लाख मीट्रिक टन की अनुमति ही मिल पाई। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय पूल में शेष 16 लाख मीट्रिक टन चावल लेने का अनुरोध किया है।
बोधघाट बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना के लिए मांगा केन्द्र से सहयोग
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि इंद्रावती बस्तर अंचल की जीवनदायनी नदी है, लेकिन उस पर एक भी बांध नहीं होने से बस्तर अंचल के अनेक जिलों में सिंचाई का प्रतिशत शून्य से सात प्रतिशत तक है। राज्य सरकार द्वारा इंद्रावती पर बोधघाट बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना प्रस्तावित की गई है, इससे बस्तर अंचल में सिंचाई सुविधा का विस्तार होगा। मुख्यमंत्री ने इसके लिए भी प्रधानमंत्री से सहायता देने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि नरवा योजना के अंतर्गत पिछले दो सालों में 5 हजार नालों की रिचार्जिंग का काम प्रारंभ किया गया है। अब तक 2500 नालों में 80 लाख इस्ट्रक्चर बनाए गए हैं।
वर्मी कम्पोस्ट उत्पादों को भी रासायनिक उर्वरकों की भांति मिले सबसिडी का लाभ
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश के वर्मी कम्पोस्ट उत्पादक किसानों को रासायनिक उर्वरकों की भांति मिलने वाली सबसिडी देने का आग्रह प्रधानमंत्री से किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में गोधन न्याय योजना के अंतर्गत गोबर से वर्मी कम्पोस्ट महिला स्व सहायता समूहों द्वारा तैयार की जा रही है। प्रदेश में दस हजार गौठान स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 60 हजार वर्मी टांके बनाए गए हैं। इनसे निकट भविष्य में 9 लाख क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन संभावित है। छत्तीसगढ़ वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग को बढ़ावा देकर जैविक खेती की ओर बढ़ रहा है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास के कार्याें हेतु शर्ताें को शिथिल किया जाए
मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आरपीएलडब्ल्यूई योजना के फेस तीन में सडक और पुलिया के निर्माण हेतु 392 करोड़ रूपए के कार्याें की सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई है। परंतु ग्रामीण विकास मंत्रालय ने यह शर्त लगाई है कि पूर्व के 50 प्रतिशत स्वीकृत कार्याें के पूर्ण होने पर ही इनकी स्वीकृति दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने इस शर्ताें का शिथिल करने का आग्रह करते हुए कहा कि नक्सली क्षेत्रों में सुरक्षागत कारणों से कार्य करना काफी कठिन होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 44 प्रतिशत वन है। इस वजह से वनांचलों के कुछ गांवों में बिजली पहुंचाने में दिक्क्त आती है। वन अधिनियम में छूट देकर इन क्षेत्रों में सिंचाई के लिए सोलर पैनल स्थापित करने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा बढ़ने से लोग बन्दूक छोड़कर हल पकडं़ेगे और खेती की ओर बढ़ेंगे। इससे नक्सल गतिविधियां कम होंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्रांसफार्मेशन ऑफ एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम के मॉनीटरिंग इंडीकेटर में स्थानीय बोली में शिक्षा, मलेरिया व एनीमिया में कमी, वनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी, लोक-कला, लोक-नृत्य तथा पुरातत्व का संरक्षण-संवर्धन, जैविक खेती, वनाधिकार पट्टे आदि को शामिल किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने डिजिटल अधोसंरचना के विकास के संबंध में बताया कि भारतनेट परियोजना के द्वितीय चरण में 85 विकासखण्डों में से 75 विकासखण्डों में कार्य प्रगति पर है। इन पंचायतों में सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा गया है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बैठक में प्रधानमंत्री से जीएसटी क्षतिपूर्ति, कोयले पर एडिशनल लेवी की राशि, पीडीएस के अंतर्गत प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में चावल की शेष राशि समेत राज्य के हक की कुल 13 हजार 440 करोड़ रूपए की राशि जल्द से जल्द उपलब्ध कराने और राज्य को मिलने वाली एक्साइज ड्यूटी की राशि पूर्ववत रखे जाने की मांग की। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2020-21 में राज्य को जीएसटी क्षतिपूर्ति मद में केन्द्र सरकार से 3700 करोड़ रूपए की राशि प्राप्त होना शेष है। इसी तरह वर्ष 2014 के पूर्व प्रदेश मे संचालित निजी कोयला खदानों से कोयले पर ली गई 4140 करोड़ रूपए की एडिशनल लेवी राशि प्राप्त होनी है। इसके अलावा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में चावल की 5600 करोड़ रूपए की राशि अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2020-21 के केन्द्रीय बजट में कृषि अधोसंरचना विकास सेस अरोपित करने से राज्य को आगामी वित्तीय वर्ष में 900 से एक हजार करोड़ रूपए तक की अतिरिक्त क्षति होना संभावित है। उन्होंने कहा कि कृषि अधोसंरचना विकास कोष की स्थापना का निर्णय तो स्वागत योग्य है, लेकिन राज्य को एक्साइज ड्यूटी के रूप में मिलने वाली राशि में कमी से राज्य को अभूतपूर्व वित्तीय क्षति का सामना करना पड़ेगा। अतः एक्साइज ड्यूटी के रूप में मिलने वाली राशि पूर्ववत रखे जाने का अनुरोध है।
बैठक में मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, वाणिज्यिक कर विभाग के प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी और मुख्यमंत्री के सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, उप सचिव सुश्री सौम्या चौरसिया उपस्थित थीं।
सत्ता के संरक्षण में, धमतरी व नगरी विकासखंड में रेत तस्करी का अवैध कारोबार बेखौफ जारी है ।
रेत माफियाओं ने प्रतिबंध के बाजू खुल कर रेत का नागपुर ,अकोला, गोदिंया, भंडारा आदि शहरों में किलो के दर से रेत का परिवहन कर करोडो कमा लिया।
नगरी में प्रतिदिन बडी संख्या में ट्रैक्टरों व हाईवा से रेत परिवहन का अवैध कारोबार किया जा रहा है।
अफसरों से सांठगांठ कर रेत माफिया खुलेआम कारोबार कर रहे हैं।
तस्करी में लगे वाहनों को कई बार पकड़ा जाता है पर कार्रवाई क्या होती है इसकी जानकारी अब तक नहीं मिल पाई।
नियमानुसार शासन की खनिज संपदा के तस्करी में लगे वाहनों को राजसात किया जाना चाहिये पर ऐसा होता नही है ।
ग्राम पंचायत छिपलीपारा, सिहावा, भीतररास, रतावा,भुरसीडोंगरी, भोथली, जबर्रा, मुनईकेरा अभ्यारण्य क्षेत्रों में शासन की नाक के नीचे प्रतिदिन सैकड़ों ट्रिप रेत का अवैध परिवहन किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि रेत तसकरी का अवैध कारोबार काफी दिनों से चल रहा है।
अल सुबहा बडी तादाद में ट्रैक्टरों व हाईवा के माध्यम से रेत सप्लाई किया जा रहा है। इस ऐवज रेत माफिया मनमाना दाम भी वसूल रहे हैं।
एक जानकरी के अनुसार धमतरी जिले में शासन की ओर से 34 रेत खदानें स्वीकृत है।
जिनमें से नगरी के भुरसीडोंगरी, डोमपदर, भीतररास, खदानों को पर्यावरण मंडल से एन ओ सी नही दी गई है।
इनके बावजूद भी रेत तस्करी का कारोबार बेखौफ चल रहा है ।इससे रेत माफिया और विभागीय अधिकारियों के बीच सांठगांठ से इनकार नहीं किया जा सकता।
4 से 5 हजार. रुपए प्रति ट्रॉली बेची जा रही है
रेत माफिया प्रति ट्रॉली 4 से 5 हजार ₹ में रेत बेच रहे हैं ।
अधिकांश ट्रैक्टर व ट्रॉली में नंबर भी नहीं होते ।
पुलिस , यातायत विभाग ऐसे ट्रैक्टर और ट्रॉली पर कार्रवाई भी नहीं करती, वे बेखैफ ,तेज रफ्तार से सड़कों में दौड़ रहे हैं, जिसकी वजह से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही है।
आखिर पर्यावरण मंडल क्यों नही दे रहा एन ओ सी
क्षेत्र के लोग शासन के रवैया से नाराज हैं ।
लोगों का कहना है कि नगरी विकासखंड में एक भी रेत खदान का खदान की स्वीकृति आखिर अब तक क्यों नहीं दी गई।
लोगों ने क्षेत्र के कांग्रेस विधायक, सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी पर क्षेत्रवासियों की रेत की जरूरतों को अनदेखी करने का आरोप लगाया
यह है नियम गौण खनिज नियम के अंतर्गत प्रतिबंध क्षेत्र में रेत का परिवहन करने पर वाहन को
राजसात करने समेत रॉयल्टी के 30 से 70 फीसदी तक जुर्माना वसूल ने का प्रावधान है।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के अयोध्या के जीर्णोद्धार के लिए सांकरा के ग्रामिणों द्वारा यथा संभव अंशदान किया जा रहा है।
ग्राम के पूर्व उप सरपंच हरीश साहु के नेतृत्व में ने भाजपा कार्यकर्ता अशंदान इकट्ठा कर रहे हैं।
दुर्ग । शौर्यपथ । दुर्ग एनएसयूआई के तत्वाधान में आज भिलाई विधायक देवेंद्र यादव जी के जन्मदिन के अवसर पर भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के द्वारा 19 यूनिट रक्तदान कर फल और कम्बल वितरण करने का आयोजन एस आर हॉस्पिटल चिखली दुर्ग मे किया गया जिला कार्यकारिणी अध्यक्ष सोनू साहू ने बताया आज हमारे लोकप्रिय विधायक देवेंद्र यादव का जन्मदिन है साथ ही वह छत्तीसगढ़ शासन के सबसे कम उम्र के विधायक भी हैं और इससे पूर्व देश के सबसे युवा महापौर भी रहे है और उनका जन्मदिन 19 फरवरी को आता है जिसके वजह से आज एनएसयूआई के साथियों द्वारा 19 यूनिट रक्तदान किया गया। देवेंद्र यादव जो एनएसयूआई के छात्र राजनीति से दुर्ग जिला अध्यक्ष प्रदेश अध्यक्ष राष्ट्रीय सचिव जैसे विभिन्न पदों में रहकर वर्तमान समय में विधायक भी हैं और हमारे प्रेरणाश्रोत है आज हम सब उनके जन्मदिन पर रक्तदान और फल एवं कम्बल वितरण कर उनकी उज्जवल भविष्य की कामना करते है और वादा करते है कि प्रेम और निष्ठा को जाहिर कर हम अंतिम सांस तक संगठन को मजबूत कर समाज के अच्छे कार्य करने के लिए तत्पर आगे रहेंगे एस आर हॉस्पिटल के डायरेक्टर संजय तिवारी जी ने रक्तदान शिविर लगाने पर एनएसयूआई के सदस्यों को बधाई दी साथ ही बताया कि अभी इस कोरोना के संकटकाल में ब्लड बैंको में रक्त की अत्यधिक आवश्यकता है जिसके कारण आपूर्ति नहीं हो पा रही है एसे समय मे रक्तदान शिविर लगाने का यह एक अच्छी पहल और प्रशंसनीय है इस पहल से रक्त के अभाव होने पर किसी व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है हम भी इस मुहिम मे साथ है जिस जरूरतमंदो को रक्त की आवयश्कता होने आशीर्वाद ब्लड बैंक भिलाई से प्राप्त कर सकते है इस कार्यक्रम मे प्रमुख रूप से जिला कार्यकारिणी अध्यक्ष सोनू साहू, विधानसभा अध्यक्ष हितेश सिन्हा,अमन दुबे, हरीश देवांगन, शिवम साहू, रमेश दास, देवेश राजपूत, भूपेंद्र कुमार, संजय पाली विकास साहू पल्लव, दीपक कुर्रे, राहुल यादव, प्रवीन चंद्रवंशी, चंद्रशेखर आकाश सोनी सहित पहुंचे। छात्र नेता इस कार्यक्रम पर उपस्थित थे।
नवागढ़ / शौर्यपथ / बीते तीन दिनों से मौसम के बदले तेवर और मध्य रात्रि बारिश के बाद बुधवार को दिनभर से बदली के बीच अचानक बारिश शुरू हो गई। नवागढ़ शाखा अंतर्गत मंडी परिसरो में खुले आसमान के नीचे खरीदी किये हुए धान के ढेर लगे हुए थे। बारिश से वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मंडी में कार्यरत कर्मचारी व रेजा ने धान के ढेर को पॉलीथिन एवं बोरों से ढंककर सुरक्षित किया लेकिन आंधी तूफान में धान के ढेर में नमी आ गई, डेनेज से भी बचाव नही हो पाया। समिति प्रबंधकों की सिर में चिंता की लकीरें स्पष्ठ नज़र आ रही है।
उल्लेखनीय है कि जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित दुर्ग जिला बेमेतरा के शाखा नवागढ़ अंतर्गत 12 मंडियों में इस वर्ष कुल 6,07,541.20 क्विंटल धान की खरीदी की गई, जिसमें से अबतक महज 3,36,148.80 धान का ही परिवहन हो पाया है जबकि अभी भी शाखा के मंडियों में 2,71,392.40 क्विंटल धान परिवहन की धीमी रफ्तार के चले डंप पड़े हुए है। बुधवार को हुई बारिश से इन धान के खराब होने की आशंका जताई जा रही है, जिसका नुकसान सम्बंधित समिति को भुगतना होगा । चूंकि 31 जनवरी से धान खरीदी पूर्ण हो चुकी है, 18 दिन बीत जाने के बाद भी समितियों में इनता धान का डंप होना अनेक सवालों को उठता है आलम तो यह है कि धान के उठाव के लिए अभी तक टीओ एवं डीओ तक जारी नही हुआ है।
डंप धान की स्थिति को देखे तो नवागढ़ मंडी में 47,098 क्विंटल,नेवशा में 21,412 क्विंटल, मुरता में 33,061 क्विंटल, बोरतरा में 22,474 क्विंटल, झाल में 17,928 क्विंटल, रनबोड में 32,578 क्विंटल, प्रतापपुर में 12,793 क्विंटल, हाथाडाडु में 18,170 क्विंटल, अँधियारखोर में 23,451 क्विंटल, छिरहा में 9906 क्विंटल, जंगलपुर में 9706 क्विंटल एवं मजगांव में 22,811 क्विंटल धान अब तक मंडियों में पड़े हुए है। परिवहन में हो रही लापरवाही से एक बात स्पष्ठ है कि धान को नुकसान होगा।
ज्ञात हो कि नवागढ़ शाखा के किसी भी समिति के सेविंग सभा में राशि नही है, न ही विभाग द्वारा राशि रिलीज किया गया है। आलम तो यह है कि अभी तक धान खरीदी के समय के कर्मचारियों, प्लास्टिक एवं भूसी के खर्च का भुगतान नही हो पाया है। ऐसे में मौसम की मार फिर राशि नही होने से समिति धान का बचाव कैसे करेगी। उच्च अधिकारियों से समिति को केवल आश्वाशन ही दिया जा रहा है।
"परिवहन की सुस्ती का नुकसान समिति को उठाना पड़ रहा है, बारिश में दिनभर मंडियों के कर्मचारी प्लास्टिक लगाते एवं नाली बनाते रहे। यदि धान का जल्द परिवहन नही किया गया तो बड़ी मात्रा में धान को नुकसान होगा।"
नरेन्द्र सिंह ठाकुर
प्रभारी पर्यवेक्षक नवागढ़ शाखा
जंगली हाथी द्वारा मारने की जांच में पुष्टि होने पर नियमानुसार दी जाएगी मुआवजा राशि
धमतरी वनमण्डल परिक्षेत्र के विश्रामपुरी में 18 फरवरी की सुबह एक ग्रामीण की क्षत-विक्षित और कई टुकड़ों में लाश मिलने का मामला सामने आया है। वनमण्डलाधिकारी श्रीमती सतोविषा समाजदार ने अपने स्टाफ के साथ मौके पर पहुंचकर मामले का मुआयना किया। उन्होंने बताया कि जिस तरह यह लाश कई टुकड़ों में मिली है और कयास लगाए जा रहें हैं कि इसे किसी जंगली हाथी ने मारा है, तो प्रारंभिक तौर पर मौके पर देखने से स्पष्ट होता है कि यह व्यक्ति किसी हाथी के द्वारा नहीं मारा गया है, क्योंकि व्यक्ति की लाश कई टुकड़ों में इधर-उधर फैली हुई है। उन्होंने कलेक्टर श्री जय प्रकाश मौर्य को सौंपे गए अपने रिपोर्ट में बताया कि लाश के आस-पास खोजबीन किए जाने पर किसी प्रकार से जंगली हाथी का मलमूत्र नहीं मिला है और ना ही हाथी द्वारा मारे जाने का कोई साक्ष्य मिला है। इसके अलावा जिस जगह पर व्यक्ति की लाश मिली थी, उसी स्थान पर मोटर सायकल सुरक्षित मिली है। उनका कहना है कि जिले में विचरण कर रहे चंदा हाथी के दल में कोई भी दंतैल हाथी नहीं है, जो व्यक्ति को कई टुकड़ों में काटकर फैला सके।
गौरतलब है कि धमतरी वनमण्डल के परिक्षेत्र में चंदा हाथी का दल पिछले कई दिनों से आया हुआ है। इसकी सूचना वनक्षेत्र में लगे सभी गांवों में लगातार मुनादी करके दी जा रही है। साथ ही वन विभाग का निगरानी मैदानी अमला नियमित रूप से हर रोज सुबह-शाम ग्रामीणों को सुरक्षात्मक एवं एहतियात बरतने के उपाय बता रहा है। इसके मद्देनजर कलेक्टर श्री मौर्य ने विशेषज्ञ चिकित्सकों के दल को अपनी रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं तथा क्षत-विक्षित लाश को फाॅरेंसिक लैब में भेजकर जांच कराने के बाद ही किसी तरह के निर्णय पर पहुंचने की बात कही है। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि जांच रिपोर्ट में जंगली हाथी द्वारा व्यक्ति के मृत होने की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार जल्द से जल्द मुआवजा भी जरूर दिया जाएगा।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा रिजनल कनेक्टिविटी स्कीम के तहत छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर से एयरलाईन सेवा शुरू करने के लिए की गई लगातार पहल के परिणाम स्वरूप बिलासपुर से नई दिल्ली के लिए 1 मार्च से विमान सेवा शुरू हो जाएगी।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 4 फरवरी को अपने नई दिल्ली प्रवास के दौरान केन्द्रीय विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी से मुलाकात कर बिलासपुर से दिल्ली, मुम्बई और कोलकाता जैसे महानगरों से एयर कनेक्टीविटी की अनुमति देने का आग्रह किया था, जिस पर केन्द्रीय मंत्री पुरी ने बिलासपुर से दिल्ली के लिए तत्काल एयर इंडिया की फ्लाइट शुरू करने की घोषणा की थी।
बिलासपुर से दिल्ली के लिए एटीआर 72 एयरक्राफ्ट की दो फ्लाईट सोमवार, बुधवार, शुक्रवार और रविवार को संचालित होगी। पहली फ्लाईट दिल्ली से रवाना होकर जबलपुर होते हुए अपरान्ह 3.20 बजे बिलासपुर पहुंचेगी और 3.45 बजे बिलासपुर से प्रयागराज होते हुए वापस दिल्ली लौटेगी। (दिल्ली-जबलपुर-बिलासपुर (1520-1545)-प्रयागराज-दिल्ली)। दूसरी फ्लाईट दिल्ली से प्रयागराज होते हुए शाम 4 बजे बिलासपुर पहुंचेगी और 4.30 बजे बिलासपुर से जबलपुर होते हुए दिल्ली जाएगी (दिल्ली-प्रयागराज-बिलासपुर (1600-1630)-जबलपुर-दिल्ली)। एयर इंडिया की सहायक कंपनी एलायंस एयर ने इसके लिए अपनी सहमति दे दी है। इस संबंध में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के आग्रह पर केन्द्रीय विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी के निर्देशों के अनुसार एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा जल्द ही इस पर कार्यवाही करते हुए अनुमति जारी की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री पुरी से मुलाकात के दौरान रायपुर में कार्गो हब की सुविधा विकसित करने का अनुरोध भी किया था, जिस पर केन्द्रीय मंत्री ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के चेयरमेन को स्थल निरीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने अम्बिकापुर एयरपोर्ट से विमान सेवा प्रारंभ करने एवं जगदलपुर एयरपोर्ट से महानगरों के लिए विमान सेवा शुरू करने का आग्रह भी किया था, जिस पर केन्द्रीय मंत्री ने सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया था।
मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री को बिलासपुर से दिल्ली के लिए विमान सेवा की अनुमति देने के लिए धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा है कि दिल्ली के लिए विमान सेवा शुरू होने से बिलासपुर और आसपास के अंचल की आर्थिक प्रगति, औद्योगिक विकास में सहायता मिलेगी, वहीं जनता को कम लागत वाली हवाई यात्रा की सुविधा उपलब्ध होगी। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने अब तक बिलासपुर एयरपोर्ट के विकास के लिए 45 करोड़ रूपए की स्वीकृति दी है, जिसमें से 21 करोड़ रूपए खर्च किए जा चुके हैं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
