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नगरी / शौर्यपथ / नगरी विकासखंड में रेत तस्करी का अवैध कारोबार बेखौफ जारी है कार्रवाई ना होने से तस्करों के हौसले बुलंद है । प्रतिदिन बडी संख्या में ट्रैक्टरों व हाईवा से रेत परिवहन का अवैध कारोबार किया जा रहा है।
अफसरों से सांठगांठ कर रेत माफिया खुलेआम कारोबार कर रहे हैं ...
तस्करी में लगे वाहनों को कई बार पकड़ा जाता है पर कार्रवाई क्या होती है इसकी जानकारी अब तक नहीं मिल पाई। नियमानुसार शासन की खनिज संपदा के तस्करी में लगे वाहनों को राजसात किया जाना चाहिये पर ऐसा होता नही है । ग्राम पंचायत छिपलीपारा, सिहावा, भीतररास, रतावा,भुरसीडोंगरी, भोथली, जबर्रा, मुनईकेरा अभ्यारण्य क्षेत्रों में शासन की नाक के नीचे प्रतिदिन सैकड़ों ट्रिप रेत का अवैध परिवहन किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि रेत तसकरी का अवैध कारोबार काफी दिनों से चल रहा है। अल सुबहा बडी तादाद में ट्रैक्टरों व हाईवा के माध्यम से रेत सप्लाई किया जा रहा है। इस ऐवज रेत माफिया मनमाना दाम भी वसूल रहे हैं। एक जानकरी के अनुसार धमतरी जिले में शासन की ओर से 34 रेत खदानें स्वीकृत है। जिनमें से नगरी के भुरसीडोंगरी, डोमपदर, भीतररास, खदानों को पर्यावरण मंडल से एन ओ सी नही दी गई है। इनके बावजूद भी रेत तस्करी का कारोबार बेखौफ चल रहा है ।इससे रेत माफिया और विभागीय अधिकारियों के बीच सांठगांठ से इनकार नहीं किया जा सकता।
4 से 5 हजार. रुपए प्रति ट्रॉली बेची जा रही है..
रेत माफिया प्रति ट्रॉली 4 से 5 हजार ₹ में रेत बेच रहे हैं ।अधिकांश ट्रैक्टर व ट्रॉली में नंबर भी नहीं होते । पुलिस , यातायत विभाग ऐसे ट्रैक्टर और ट्रॉली पर कार्रवाई भी नहीं करती, वे बेखैफ ,तेज रफ्तार से सड़कों में दौड़ रहे हैं, जिसकी वजह से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही है।
आखिर पर्यावरण मंडल क्यों नही दे रहा एन ओ सी
क्षेत्र के लोग शासन के रवैया से नाराज हैं । लोगों का कहना है कि नगरी विकासखंड में एक भी रेत खदान का खदान की स्वीकृति आखिर अब तक क्यों नहीं दी गई। लोगों ने क्षेत्र के कांग्रेस विधायक, सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी पर क्षेत्रवासियों की रेत की जरूरतों को अनदेखी करने का आरोप लगाया।
आशीष तिवारी शौर्यपथ रायपुर
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी एवं महापौर एजाज़ ढेबर जी के मनसा अनुसार आज 'तुंहर सरकार तुंहर द्वार' कार्यक्रम का आयोजन डॉ. विपिन बिहारी सुर वार्ड क्रमांक 64 के तहत वीरभद्र नगर सामुदायिक भवन में संपन्न हुआ, जहाँ समाधान शिविर में प्राप्त आवेदनों का यथासंभव त्वरित निराकरण किया गया।
समाधान शिविर में जरूरतमंदों को युवा काँग्रेस नेता एवं काँग्रेस पार्षद प्रत्याशी नोहर साहू द्वारा विपिन बिहारी सुर वार्ड के रहवासियों को आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, मजदूर कार्ड प्रदान किया गया। शिविर में सभापति प्रमोद दुबे,प्रदेश महामंत्री कन्हैया अग्रवाल जी,निगम आयुक्त सौरभ कुमार,एमआईसी सर्वश्री ज्ञानेष शर्मा, श्रीकुमार मेनन, सुरेश चन्नावार, जितेंद्र अग्रवाल दाऊ जी, सुंदर जोगी जी, सहदेव व्यवहार जी, रितेश त्रिपाठी जी, आकाश तिवारी जी, अमितेश भारद्वाज,नोहर साहू जी, दयासागर सोना,सैयद उमेर,सदर बाजार ब्लॉक अध्यक्ष नवीन चंद्राकर, पुरानी बस्ती ब्लॉक अध्यक्ष सचिन शर्मा, श्रीमती अंजनी वीभार जी , श्रीमती शीतल कुलदीप बोगा जी, श्रीमती द्रोपती हेमंत पटेल जी, नीलम नीलकंठ जगत जी, ज़ोन अध्यक्ष मन्नू विजेता यादव जी, मनीराम साहू जी, बंटी होरा जी , बीरेंद्र देवांगन जी, अनवर हुसैन जी,युवा कार्यकर्ता मोहम्मद चाँद, मतलूब कुरेशी,संजय देवांगन सहित सभी एमआईसी सदस्यगण, पार्षदगण एवं अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।
० स्कूल में कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करने के दिए निर्देश
० कोविड-19 के दिशा-निर्देश के संबंध में कार्यशाला संपन्न
राजनांदगांव / शौर्यपथ / कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा की अध्यक्षता में पद्मश्री गोविंदराम निर्मलकर ऑडिटोरियम में भारत शासन एवं राज्य शासन के कोविड-19 के दिशा-निर्देश के परिपालन में आज प्राचार्य एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारियों की कार्यशाला आयोजित की गई। कलेक्टर श्री वर्मा ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि मार्च 2020 से हम सभी कोविड-19 के कारण विषम परिस्थितियों से गुजर रहे हैं। लंबे समय तक लॉकडाउन रहा और अब भारत शासन के निर्देशानुसार धीरे-धीरे संस्थाएं खुल रहे हैं। परिस्थितियां सामान्य नहीं हैं, इसके बावजूद बहुत सी संस्थाएं कार्य कर रही है। छत्तीसगढ़ में सुरक्षा के उपाय पर्याप्त हैं और छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कोविड-19 के दिशा-निर्देश का पालन करते हुए स्कूल आरंभ करने का निर्णय लिया गया है। जिसके लिए शिक्षा विभाग को सजग रहना है और कड़ाई से प्रोटोकॉल का पालन करना है। नियमों को अपनाकर ही सब सुरक्षित रह सकते हैं। उन्होंने कहा कि सर्दी, खांसी एवं बुखार के लक्षण होने पर तत्काल अपने वरिष्ठ अधिकारियों एवं बीएमओ को सूचित करें। तीनों प्रकार के लक्षण होने पर आरटीपीसीआर की निःशुल्क जांच कराएं। कक्षा के दौरान जो बच्चे जिस टेबल पर बैठते हैं वह उसी टेबल पर बैठे। ऐसे में कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग करने में सुविधा होगी।
उन्होंने कहा कि शिक्षक स्वयं को, बच्चों तथा स्टॉफ को कोविड-19 संक्रमण से सुरक्षित रखें। इस अवसर पर सीएमएचओ डॉ. मिथलेश चौधरी, जिला शिक्षा अधिकारी एचआर सोम तथा 330 हायर सेकेण्डरी एवं हाई स्कूल के प्राचार्य एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी एवं विकासखंड स्त्रोत समन्वयक उपस्थित थे।
कलेक्टर वर्मा ने कहा कि प्राचार्य अपने स्कूल के बच्चों को परीक्षा के पहले अच्छे से प्रोत्साहित करें और उनका आत्मविश्वास बढ़ाए ताकि बच्चे परीक्षा के लिए मानसिक रूप से स्वयं को तैयार कर सके। उन्होंने कहा कि कमजोर एवं औसत बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दें। सभी ने ऑनलाईन पढ़ाई की है। ऐसे में 10वीं एवं 12वीं के बच्चे बहुत सी प्रतियोगी परीक्षाएं देते हैं, उनकी पढ़ाई पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने सभी संस्था के प्राचार्य एवं स्टॉफ को पढ़ाई आरंभ करने के लिए अग्रिम शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को स्कूल में समय पर आना चाहिए और लापरवाही एवं अनुशासनहीनता नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षक का पद सम्मानीय है। ऐसी स्थिति में विगत दिनों एक शिक्षक द्वारा की गई घटना सामने आई है जो नैतिक एवं चारित्रिक पतन को दर्शाती है। गुरू-शिष्य का संबंध मर्यादा एवं सम्मान का है और इसे कायम रखना चाहिए। हमारे धर्म ग्रंथों में गुरू को भगवान से ऊंचा दर्जा दिया गया है। ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने सभी प्राचार्यों से कहा कि स्कूल में ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रति 5 विधानसभा में मोहला, छुरिया, गंडई, डोंगरगांव एवं डोंगरगढ़ में 5 इंग्लिश मीडियम स्कूल खोले जा रहे हैं। जिसकी राशि शीघ्र ही स्वीकृत हो जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य शासन के निर्देशानुसार जिले में फीस विनियामक समिति का गठन किया गया है। इसके नोडल अधिकारी बैठक लें और निर्धारित फीस की जानकारी सूचना पटल में चस्पा करें।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी ने कहा कि लंबे समय के बाद स्कूल खुले हैं। सभी बच्चे एवं शिक्षक तथा स्टॉफ मास्क से अपने नाक और मुख को ढककर रखेंगे। सभी स्कूल स्टॉफ एवं शिक्षक को कोरोना टेस्ट कराने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी बच्चे या शिक्षक का कोरोना पॉजिटिव आने पर उसके पूरे परिवार का कोविड-19 टेस्ट कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति के संक्रमित होने पर पूरा परिवार संक्रमित होता है। सभी मास्क लगाकर आएंगे। समूह में नहीं रहेंगे, सोशल डिस्टेसिंग का पालन करेंगे, हाथ नहीं मिलाना है, हाथ जोड़कर नमस्ते करेंगे। साबुन से हाथ धोना है और सेनेटाईजर का उपयोग करते रहेंगे। सभी बच्चे पानी की बोटल साथ लाएंगे और अपना टिफिन अलग लेकर आएंगे तथा एक दूसरे के साथ बांटकर नहीं खाएंगे। टेबल की सतह सेनेटाईज करेंगे। शौचालय में भी साफ-सफाई होनी चाहिए।
जिला शिक्षा अधिकारी एचआर सोम ने कहा कि कोविड-19 का पालन करते हुए बच्चों को सुरक्षित रखें एवं सोशल डिस्टेसिंग के मापदंण्डों का पालन करें। सुरक्षा के सभी उपायों का जतन करें। सर्दी, खांसी और बुखार के किसी शिक्षक या बच्चे को स्कूल में प्रवेश न करने दें और ऐसे मरीजों को परीक्षण के लिए निर्देशित करें। बच्चों की परीक्षा की तैयारी करना है और कम समय में बेहतर तैयारी के लिए यह जरूरी है कि भौतिकी, गणित, रसायन जैसे कठिन विषयों पर पहले ध्यान दें। पालकों की सहमति से अवकाश के दिन में बच्चों को कोचिंग भी दे सकते हैं। बच्चों के मन से पढ़ाई का डर हटाने के लिए यह जरूरी है कि बच्चों को अच्छी तरह पढ़ाई कराएं। इस अवसर पर सहायक परियोजना अधिकारी साक्षरता श्रीमती रश्मि सिंह, सहायक संचालक राज्य शिक्षा मिशन एसके पाण्डेय, राजीव गांधी शिक्षा मिशन के जिला समन्वयक भूपेश साहू, सहायक संचालक शिक्षा विभाग आदित्य खरे, सहायक संचालक शिक्षा विभाग श्रीमती संगीता राव सहित प्राचार्य, विकासखंड शिक्षा अधिकार एवं शिक्षकगण उपस्थित थे।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / छग कान्ट्रेक्टर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष बीरेश शुक्ला ने पत्रकारवार्ता में बताया कि गौण खनिज की छग शासन द्वारा राजपत्र में प्रकाशित दरें एवं बाजार दर के द्वारा निर्माण ठेकेदारों की जो कटौती की जा रही है, जो कि व्यवहारिक नहीं है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार की रॉयल्टी की दरों की कटौती ठेकेदारों के द्वारा स्वीकार्य है, परंतु बाजार दर अनुचित है। वर्तमान में समय में अगर बाजार दर से कटौती की जायेगी, तो ठेकेदारों के द्वारा निर्माणाधीन कार्यों का घर बेचकर भुगतान करना पड़ेगा। चूंकि भवन निर्माण में आरसीसी का रेट 4231 रूपये घन मीटर एसओआर में दर है, अगर वह भवन 20 प्रतिशत बिलो में निर्माण हेतु निवदा ली गयी है तो उस समय आरसीसी का रेट 3385 रूपये होगा और गिट्टी की रॉयल्टी 520 घनमीटर होगी, शेष 2865 रूपये में जीएसटी, आईटी, लेबर, सीमेंट और विभागीय सिस्टम में शिष्टाचार इन तमाम कटौती के बाद ठैकेदार को 5 वर्ष की रखरखाव करना है, कुल मिलाकर इस प्रकार की कटौती शासन द्वारा की गयी है। इस परिस्थिति में निर्माण करना संभव नहीं है।
शुक्ला ने बताया कि रोड निर्माण में जीएसबी का एक घनमीटर का मूल्य 1372 रूपये है। 20 प्रतिशत बिलो में ठेकेदारों द्वारा अनुबंध किया गया है, तो इसका 274 रूपये घटाने के बाद 1098 रूपये जिसमें 520 रूपये रॉयल्टी की कटौती, शेष 578 रूपये जीएसटी आईटी और विभागीय शिष्टाचार के बाद निर्माण एजेंसी के पास कुछ नहीं बचता, घर से पैसा लगाकर 5 वर्ष रखरखाव करना है, इसी तरह से मुरूम और रेत में इसी प्रकार की कटौती होती है। इससे स्पष्ट होता है कि ठेकेदारों के द्वारा निर्माण करना, भवन, रेाड, ब्रिज, एनीकट, कैनाल का निर्माण करना संभव नहीं है।
शुक्ला ने बताया कि लोक निर्माण विभाग में निर्माण कार्यों के रखरखाव हेतु पांच वर्ष की समय सीमा निर्धारित की गयी है एवं जल संसाधन विभाग में दस वर्षों की रखरखाव निर्धारित एवं एनीकट बांध डेम दस वर्ष रखी गयी है, जो पूर्णता व्यवहारिक नहीं है। जिसे संसोधित किया जाये, अथवा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और एडीबी द्वारा जो निर्माण कार्य कराये जा रहे है, उनमें रखरखाव हेतु विभाग द्वारा भुगतान किया जाता है, इस नियम को लागू किया जाये।
शुक्ला ने बताया कि निर्माण विभागों में तृतीय पार्टी चेकिंग की शर्ते निर्माण कार्यों में लागू की गयी है। प्रदेश के निर्माण ठेकेदारों को चेकिंग की शर्ते मंजूर है, परंतु चेकिंग की समय सीमा निर्धारण कर एवं निर्माण विभागों को जो ठेकेदारों के भुगतान 5 प्रतिशत एसडी राशि एवं पीजी की राशि की कटौती की जाती है। श्री शुक्ला ने शासन से अनुरोध किया है कि अतिरिक्त सुरक्षा निधि की राशि को थर्ड पार्टी चेकिंग में लाना अनिवार्य न किया जाये। निर्माण कार्य समाप्त होते ही अतिरिक्त सुरक्षा की राशि रिलीज किया जाये।
शुक्ला ने बताया कि प्रदेश में छग शासन द्वारा ई श्रेणी पंजीयन शुरू की गयी है, जिसमें बेरोजगार नवयुवकों को इस श्रेणी में पंजीयन कराके एक वर्ष में ब्लॉक स्तर पर 50 लाख रूपये तक की निर्माण करने की पात्रता होगी, हम सभी ठेकेदार शासन के निर्णय का स्वागत करते है, परंतु इस प्रकार से बस्तर परिक्षेत्र में 50 लाख तक का निर्माण कर्य में मेनुवल टेंडर नियम लागू किया गया है। उस नियम को आगे बढ़ाते हुए शासन से अनुरोध है दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर परिक्षेत्र एवं अंबिकापुर परिक्षेत्र में इस नियम को लागू किया जाये, चूंकि छग प्रदेश में 16 हजार रजिस्टर्ड ठेकेदार है, जिनममें 80 प्रतिशत ठेकेदार 20-30 लाख का निर्माण कार्य करते है, चूंकि ठेकेदारों की आर्थिक स्थिति सही नहीं है। श्री शुक्ला ने मांग की है कि नगर पालिक निगम में रॉयल्टी विभाग द्वारा काटी जाये और नगर पालिका का लंबित भुगतान रिलीज किया जाये।
इस अवसर पर छग कान्ट्रेक्टर्स एसोसिएशन जिला अध्यक्ष संजय सिंगी, जिला महासचिव आलोक बिंदल, जिला उपाध्यक्ष सुरेन्द्र पांडे सहित बड़ी संख्या में छग कान्ट्रेक्टर्स एसोसिएशन के सदस्य उपस्थित थे।
राज्य सरकार ने 1000 एकड़ भूमि रक्षा मंत्रालय को थल सेना छावनी की स्थापना के लिए की हुई है आबंटित
बिलासाबाई केवटींन हवाई अड्डा अब सिविल एविएशन एवं थल सेना की विमानन संबंधित आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये उपलब्ध
राज्य में आर्मी छावनी की स्थापना से इलाके के समुचित विकास के साथ राज्य के युवाओं को सेना में सहजता से उपलब्ध होंगे अवसर
थल सेना छावनी की नक्सलवादी उग्रवाद के उन्मूलन की दिशा में होगी सहायक
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर बिलासपुर में थल सेना की लंबित छावनी की शीघ अतिशीघ्र स्थापना करने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय रक्षा मंत्री का ध्यान राज्य के विकास की दिशा में राज्य में सैन्य संस्थानों के विकास के प्रयास की ओर आकर्षित करते हुए लिखा है कि- राज्य ने लगभग 1000 एकड़ भूमि रक्षा मंत्रालय को बिलासपुर में थल सेना छावनी की स्थापना के लिए आबंटित की हुई है। इस थल सेना छावनी की स्थापना की प्रक्रिया लंबित है।
आरंभ में थल सेना छावनी की स्थापना के लिए इसके साथ हवाई पट्टी की आवश्यकताओं को बताया गया था। राज्य सरकार ने इस इलाके की विमानन आवश्यकताओं के दृष्टिगत. इस हवाई पट्टी का विस्तार कराकर आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर ली है। बिलासाबाई केवटींन हवाईअड्डा. बिलासपुर अब डीजीसीए द्वारा 3सी वीएफआर कैटगरी में मान्यता प्राप्त । अब ये हवाई पट्टी सिविल एविएशन एवं थल सेना की विमानन संबंधित आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये उपलब्ध है।
मुख्यमंत्री ने लिखा है कि आगामी एक मार्च से बिलासपुर से व्यवसायिक यात्री सेवाएँ आरंभ हो रही है। राज्य सरकार चक्रभाठा, बिलासपुर में थल सेना छावनी की स्थापना के लिए उत्सुक है। राज्य में आर्मी छावनी की स्थापना से न केवल इस इलाके के समुचित विकास में गति आएगी बल्कि थल सेना सेवा के अवसर राज्य के युवाओं को सहजता से उपलब्ध भी होंगे। थल सेना छावनी की राज्य में उपस्थिति मूलतः नक्सलवादी उग्रवाद के उन्मूलन की दिशा में सहायक होने की भी आशा है।
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा है कि थल सेना छावनी की स्थापना से राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार को होने वाले लाभों के दृष्टिगत, राज्य सरकार रक्षा मंत्रालय से इसकी स्थापना शीघ्रातिशीघ्र करने के लिए आग्रह करना चाहती है। इस दिशा में राज्य सरकार रक्षा मंत्रालय एवं थल सेना की अन्य संबंधित आवश्यकताओं पर भी विचार करने के लिए तैयार है। इस संदर्भ में रक्षा मंत्रालय के साथ कार्य करने के लिए राज्य सरकार तत्पर हैं एवं मैं आपसे सहयोग की आशा करता हूँ।
मुख्यमंत्री बघेल ने केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुण्डा को लिखा पत्र
वर्ष 2020-21 में न्यूनतम समर्थन मूल्य योजनांतर्गत लघु वनोपज संग्रहण में छत्तीसगढ़ राज्य देश में कुल संग्रहित मात्रा का 72.5 प्रतिशत संग्रहण कर प्रथम स्थान पर है
प्रधानमंत्री वन धन योजनांतर्गत 139 वन धन विकास केंद्र स्थापित कर 120 से अधिक हर्बल्स उत्पाद तैयार कर छत्तीसगढ़ हर्बल्स ब्रांड नाम से किया जा रहा है विक्रय
प्रस्तावों की स्वीकृति से आदिवासी-वनवासी परिवारों को मिलेगा और बेहतर लाभ
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुण्डा को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ राज्य के आदिवासियों के हित में लघु वनोपज आधारित विकास हेतु 234 करोड़ 18 लाख रूपए के पूर्व में प्रेषित प्रस्तावों को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में लिखा है कि - छत्तीसगढ़ राज्य में 44 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र वनाच्छादित है तथा 31.80 प्रतिशत जनसंख्या आदिवासी समुदाय के हैं। भारत शासन द्वारा संचालित न्यूनतम समर्थन मूल्य योजनांतर्गत 38 प्रकार के लघु वनोपज के साथ अन्य 14 प्रकार के लघु वनोपज का राज्य सरकार द्वारा निर्धारित दर पर क्रय किया जा रहा है। वर्ष 2020-21 में आज दिनांक तक लगभग 115 करोड़ रू. मूल्य के लघु वनोपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर क्रय किया गया है।
कोविड 19 के संकटकाल में सुदूर वनांचल के आदिवासी तथा अन्य संग्राहकों को रोजगार प्रदाय करने में इस योजना की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्ष 2020-21 में न्यूनतम समर्थन मूल्य योजनांतर्गत लघु वनोपज संग्रहण में छत्तीसगढ़ राज्य देश में कुल संग्रहित मात्रा का 72.5 प्रतिशत संग्रहण कर प्रथम स्थान पर है। इसी प्रकार राज्य में प्रधानमंत्री वन धन योजनांतर्गत 139 वन धन विकास केंद्र स्थापित कर 120 से अधिक हर्बल्स उत्पाद तैयार कर छत्तीसगढ़ हर्बल्स ब्रांड नाम से विक्रय किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को लिखा है कि - आपके नेतृत्व में संचालित उपरोक्त दोनों योजनाओं का राज्य द्वारा पूर्ण दक्षता से क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस प्रयास को आगे बढ़ाते हुए क्षेत्रवासियों को लघु वनोपज आधारित विकास का लाभ प्रदाय करने हेतु प्रस्ताव प्रेषित किए गए है, जिनमें न्यूनतम समर्थन मूल्य पर लघु वनोपज संग्रहण हेतु कार्यपूंजी के लिए 100 करोड़ रूपए का प्रस्ताव, न्यूनतम समर्थन मूल्य योजनांतर्गत वर्ष 2014-15 व 2015-16 में व्यापार में हुई हानि की प्रतिपूर्ति के लिए 21.91 करोड़ रूपए, लघु वनोपज आधारित कार्य हेतु अधोसंरचना विकास के लिए 46.50 करोड़ रूपए तथा कोविड-19 पेनडेमिक रिपोंस प्लान के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में अजीविका विकास के लिए 65.77 करोड़ रूपए के प्रस्ताव शामिल है। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री से इन प्रस्तावों को स्वीकृत कर शीघ्र राशि प्रदान करने का अनुरोध किया है।
वर्मी कंपोस्ट को भी रासायनिक खादों की तरह मिले सबसिडी, आकांक्षी जिलों की अवधारणा में सांस्कृतिक उत्थान भी शामिल हो
नीति आयोग गवर्निंग काउंसिल की बैठक में मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने दिए सुझाव
नगरनार इस्पात संयंत्र का विनिवेश न करने का अनुरोध
कार्गाें हब और निर्यात के लिए पोर्ट की सुविधा के लिए मिले मंजूरी
अतिशेष धान से एथेनॉल उत्पादन की मांगी अनुमति
केन्द्रीय पूल में छत्तीसगढ़ से 60 लाख मीट्रिक टन चावल लेने का किया आग्रह
बोधघाट बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना के लिए मांगा केन्द्र से सहयोग
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की छठवीं बैठक में प्रदेश में उद्योगों, कृषि क्षेत्र के विकास, अधोसंरचना विकास, बस्तर अंचल में सिंचाई सुविधा बढ़ाने, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास जैसे राज्य हित के अनेक विषयों पर राज्य सरकार की योजनाओं एवं नीतियों की जानकारी देते हुए छत्तीसगढ़ को अतिरिक्त आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराने का आग्रह प्रधानमंत्री से किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ के आकांक्षी जिलों द्वारा विकास के सभी मापदण्डों पर किए गए उत्कृष्ट प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए सुझाव दिया कि आकांक्षी जिलों की अवधारणा में सांस्कृतिक उत्थान के बिन्दु को भी यथोचित महत्व एवं स्थान दिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने वर्मी कम्पोस्ट खाद में भी रासायनिक उर्वरकों की भांति सबसिडी दिए जाने का सुझाव रखा। उन्होंने कहा कि नीति आयोग ने डेल्टा रैंकिंग के माध्यम से छत्तीसगढ़ के आकांक्षी जिलों में हुए नवाचारों की सराहना की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ वनाच्छादित, आदिवासी बहुल और खनिज धारित प्रदेश है यहां औद्योगिक विकास के लिए विशेष पैकेज की अपेक्षा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खनिज कोयले के वृहद भण्डार होने के बावजूद छत्तीसगढ़ कोल ब्लॉक से वंचित है। अतः छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक उपक्रम इकाई के लिए कोल ब्लॉक आबंटित किया जाए। वर्ष 2014 के बाद खनिजों की रॉयल्टी दरों में वृद्धि नहीं होने के कारण राज्य शासन को अपूरणीय क्षति हो रही है। अतः शीघ्र रॉयल्टी दरों में संशोधन किया जाए। मुख्यमंत्री ने बैठक में बस्तर के नगरनार इस्पात संयंत्र का विनिवेश नहीं करने का भी आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में इस संबंध में शासकीय संकल्प भी पारित किया गया है।
कार्गाें हब और निर्यात के लिए पोर्ट की सुविधा की मंजूरी का आग्रह
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में उद्योगों के विकास और निर्यात का बढ़ावा देने के लिए रायपुर में कार्गाें हब स्थापित करने की मंजूरी देने और निर्यात के लिए पोर्ट की सुविधा उपलब्ध कराने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ लैण्डलॉक्ड राज्यों में शामिल है, इसलिए छत्तीसगढ़ को परिवहन लागत की सुगमता हेतु औद्योगिक गतिविधियों के लिए अंतरदेशीय परिवहन अनुदान दिया जाए, ताकि छत्तीसगढ़ से निर्यातक एवं कृषि आधारित उद्योगों के विकास को गति मिल सके। मुख्यमंत्री बघेल ने बैठक में बताया कि राज्य सरकार द्वारा कोदो-कुटकी को समर्थन मूल्य पर खरीदने का निर्णय लिया गया है। कोदो-कुटकी की विदेशों में भी बड़ी मांग है। इनके निर्यात की सुविधा उपलब्ध होने से इसका फायदा प्रदेश के आदिवासी किसानों को होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ इज आफ डूईंग बिजनेस के मापदण्डों में देश के अग्रणी छह राज्यों में शामिल है।
राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति में खनिज संसाधनों एवं कृषि तथा वनोपजों में वेल्यूएडिशन को बढ़ावा दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में लाख उत्पादन और मछली पालन को खेती का दर्जा दिया गया है। इस्पात उद्योग को कोरोना काल में रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराई गई। जिससे छत्तीसगढ़ इस्पात उत्पादन में अग्रणी रहा। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षाें में 56 हजार करोड़ रूपए के पूंजी निवेश के लिए 154 एमओयू किए गए।
अतिशेष धान से एथेनॉल उत्पादन की अनुमति देने की मांग
मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि राज्य को अतिशेष धान से एथेनॉल उत्पादन की अनुमति दी जाए। इससे देश की विदेशी मुद्रा में बचत होगी, किसानों को उनकी उपज का अच्छा दाम मिलेगा और रोजगार के अवसर बढेंगे। उन्होंने कहा कि चावल के स्थान पर धान से एथेनॉल की अनुमति मिलने पर परिवहन और मिलिंग पर होने वाला खर्च बचेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पहली बार केन्द्र सरकार द्वारा एथेनॉल की दर 54.89 रूपए प्रति लीटर तय की गई है जिसे और अधिक बढ़ाया जाना चाहिए। प्रदेश में गन्ने से एथेनॉल उत्पादन के लिए एमओयू हो चुका है।
मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय पूल में छत्तीसगढ़ से 60 लाख मीट्रिक टन चावल लेने का किया आग्रह
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि इस वर्ष छत्तीसगढ़ में 20 लाख 58 हजार किसानों से 92 लाख मीट्रिक टन धान की समर्थन मूल्य पर खरीदी की गई है। किसानों को इसके लिए 17 हजार 322 करोड़ रूपए की राशि का भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केन्द्र द्वारा पूर्व में केन्द्रीय पूल में छत्तीसगढ़ से 60 लाख मीट्रिक टन चावल लेने की घोषणा की गई थी। लेकिन इसमें 16 लाख टन की कटौती कर दी गई। एफसीआई ने चावल देने की अनुमति अक्टूबर, नवम्बर में ही मिल जाती थी। इस सीजन में जनवरी माह में 24 लाख मीट्रिक टन की अनुमति ही मिल पाई। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय पूल में शेष 16 लाख मीट्रिक टन चावल लेने का अनुरोध किया है।
बोधघाट बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना के लिए मांगा केन्द्र से सहयोग
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि इंद्रावती बस्तर अंचल की जीवनदायनी नदी है, लेकिन उस पर एक भी बांध नहीं होने से बस्तर अंचल के अनेक जिलों में सिंचाई का प्रतिशत शून्य से सात प्रतिशत तक है। राज्य सरकार द्वारा इंद्रावती पर बोधघाट बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना प्रस्तावित की गई है, इससे बस्तर अंचल में सिंचाई सुविधा का विस्तार होगा। मुख्यमंत्री ने इसके लिए भी प्रधानमंत्री से सहायता देने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि नरवा योजना के अंतर्गत पिछले दो सालों में 5 हजार नालों की रिचार्जिंग का काम प्रारंभ किया गया है। अब तक 2500 नालों में 80 लाख इस्ट्रक्चर बनाए गए हैं।
वर्मी कम्पोस्ट उत्पादों को भी रासायनिक उर्वरकों की भांति मिले सबसिडी का लाभ
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश के वर्मी कम्पोस्ट उत्पादक किसानों को रासायनिक उर्वरकों की भांति मिलने वाली सबसिडी देने का आग्रह प्रधानमंत्री से किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में गोधन न्याय योजना के अंतर्गत गोबर से वर्मी कम्पोस्ट महिला स्व सहायता समूहों द्वारा तैयार की जा रही है। प्रदेश में दस हजार गौठान स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 60 हजार वर्मी टांके बनाए गए हैं। इनसे निकट भविष्य में 9 लाख क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन संभावित है। छत्तीसगढ़ वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग को बढ़ावा देकर जैविक खेती की ओर बढ़ रहा है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास के कार्याें हेतु शर्ताें को शिथिल किया जाए
मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आरपीएलडब्ल्यूई योजना के फेस तीन में सडक और पुलिया के निर्माण हेतु 392 करोड़ रूपए के कार्याें की सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई है। परंतु ग्रामीण विकास मंत्रालय ने यह शर्त लगाई है कि पूर्व के 50 प्रतिशत स्वीकृत कार्याें के पूर्ण होने पर ही इनकी स्वीकृति दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने इस शर्ताें का शिथिल करने का आग्रह करते हुए कहा कि नक्सली क्षेत्रों में सुरक्षागत कारणों से कार्य करना काफी कठिन होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 44 प्रतिशत वन है। इस वजह से वनांचलों के कुछ गांवों में बिजली पहुंचाने में दिक्क्त आती है। वन अधिनियम में छूट देकर इन क्षेत्रों में सिंचाई के लिए सोलर पैनल स्थापित करने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा बढ़ने से लोग बन्दूक छोड़कर हल पकडं़ेगे और खेती की ओर बढ़ेंगे। इससे नक्सल गतिविधियां कम होंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्रांसफार्मेशन ऑफ एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम के मॉनीटरिंग इंडीकेटर में स्थानीय बोली में शिक्षा, मलेरिया व एनीमिया में कमी, वनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी, लोक-कला, लोक-नृत्य तथा पुरातत्व का संरक्षण-संवर्धन, जैविक खेती, वनाधिकार पट्टे आदि को शामिल किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने डिजिटल अधोसंरचना के विकास के संबंध में बताया कि भारतनेट परियोजना के द्वितीय चरण में 85 विकासखण्डों में से 75 विकासखण्डों में कार्य प्रगति पर है। इन पंचायतों में सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा गया है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बैठक में प्रधानमंत्री से जीएसटी क्षतिपूर्ति, कोयले पर एडिशनल लेवी की राशि, पीडीएस के अंतर्गत प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में चावल की शेष राशि समेत राज्य के हक की कुल 13 हजार 440 करोड़ रूपए की राशि जल्द से जल्द उपलब्ध कराने और राज्य को मिलने वाली एक्साइज ड्यूटी की राशि पूर्ववत रखे जाने की मांग की। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2020-21 में राज्य को जीएसटी क्षतिपूर्ति मद में केन्द्र सरकार से 3700 करोड़ रूपए की राशि प्राप्त होना शेष है। इसी तरह वर्ष 2014 के पूर्व प्रदेश मे संचालित निजी कोयला खदानों से कोयले पर ली गई 4140 करोड़ रूपए की एडिशनल लेवी राशि प्राप्त होनी है। इसके अलावा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में चावल की 5600 करोड़ रूपए की राशि अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2020-21 के केन्द्रीय बजट में कृषि अधोसंरचना विकास सेस अरोपित करने से राज्य को आगामी वित्तीय वर्ष में 900 से एक हजार करोड़ रूपए तक की अतिरिक्त क्षति होना संभावित है। उन्होंने कहा कि कृषि अधोसंरचना विकास कोष की स्थापना का निर्णय तो स्वागत योग्य है, लेकिन राज्य को एक्साइज ड्यूटी के रूप में मिलने वाली राशि में कमी से राज्य को अभूतपूर्व वित्तीय क्षति का सामना करना पड़ेगा। अतः एक्साइज ड्यूटी के रूप में मिलने वाली राशि पूर्ववत रखे जाने का अनुरोध है।
बैठक में मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, वाणिज्यिक कर विभाग के प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी और मुख्यमंत्री के सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, उप सचिव सुश्री सौम्या चौरसिया उपस्थित थीं।
सत्ता के संरक्षण में, धमतरी व नगरी विकासखंड में रेत तस्करी का अवैध कारोबार बेखौफ जारी है ।
रेत माफियाओं ने प्रतिबंध के बाजू खुल कर रेत का नागपुर ,अकोला, गोदिंया, भंडारा आदि शहरों में किलो के दर से रेत का परिवहन कर करोडो कमा लिया।
नगरी में प्रतिदिन बडी संख्या में ट्रैक्टरों व हाईवा से रेत परिवहन का अवैध कारोबार किया जा रहा है।
अफसरों से सांठगांठ कर रेत माफिया खुलेआम कारोबार कर रहे हैं।
तस्करी में लगे वाहनों को कई बार पकड़ा जाता है पर कार्रवाई क्या होती है इसकी जानकारी अब तक नहीं मिल पाई।
नियमानुसार शासन की खनिज संपदा के तस्करी में लगे वाहनों को राजसात किया जाना चाहिये पर ऐसा होता नही है ।
ग्राम पंचायत छिपलीपारा, सिहावा, भीतररास, रतावा,भुरसीडोंगरी, भोथली, जबर्रा, मुनईकेरा अभ्यारण्य क्षेत्रों में शासन की नाक के नीचे प्रतिदिन सैकड़ों ट्रिप रेत का अवैध परिवहन किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि रेत तसकरी का अवैध कारोबार काफी दिनों से चल रहा है।
अल सुबहा बडी तादाद में ट्रैक्टरों व हाईवा के माध्यम से रेत सप्लाई किया जा रहा है। इस ऐवज रेत माफिया मनमाना दाम भी वसूल रहे हैं।
एक जानकरी के अनुसार धमतरी जिले में शासन की ओर से 34 रेत खदानें स्वीकृत है।
जिनमें से नगरी के भुरसीडोंगरी, डोमपदर, भीतररास, खदानों को पर्यावरण मंडल से एन ओ सी नही दी गई है।
इनके बावजूद भी रेत तस्करी का कारोबार बेखौफ चल रहा है ।इससे रेत माफिया और विभागीय अधिकारियों के बीच सांठगांठ से इनकार नहीं किया जा सकता।
4 से 5 हजार. रुपए प्रति ट्रॉली बेची जा रही है
रेत माफिया प्रति ट्रॉली 4 से 5 हजार ₹ में रेत बेच रहे हैं ।
अधिकांश ट्रैक्टर व ट्रॉली में नंबर भी नहीं होते ।
पुलिस , यातायत विभाग ऐसे ट्रैक्टर और ट्रॉली पर कार्रवाई भी नहीं करती, वे बेखैफ ,तेज रफ्तार से सड़कों में दौड़ रहे हैं, जिसकी वजह से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही है।
आखिर पर्यावरण मंडल क्यों नही दे रहा एन ओ सी
क्षेत्र के लोग शासन के रवैया से नाराज हैं ।
लोगों का कहना है कि नगरी विकासखंड में एक भी रेत खदान का खदान की स्वीकृति आखिर अब तक क्यों नहीं दी गई।
लोगों ने क्षेत्र के कांग्रेस विधायक, सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी पर क्षेत्रवासियों की रेत की जरूरतों को अनदेखी करने का आरोप लगाया
यह है नियम गौण खनिज नियम के अंतर्गत प्रतिबंध क्षेत्र में रेत का परिवहन करने पर वाहन को
राजसात करने समेत रॉयल्टी के 30 से 70 फीसदी तक जुर्माना वसूल ने का प्रावधान है।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के अयोध्या के जीर्णोद्धार के लिए सांकरा के ग्रामिणों द्वारा यथा संभव अंशदान किया जा रहा है।
ग्राम के पूर्व उप सरपंच हरीश साहु के नेतृत्व में ने भाजपा कार्यकर्ता अशंदान इकट्ठा कर रहे हैं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
